राज्यसभा में अभी 6 खाली सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 5 जुलाई तक पूरी हो जाएगी. इसके बाद राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 235 होगी. 4 राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग कारणों से फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं.


मंथन न्यूज-


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीन तलाक बिल को लेकर कितनी संजीदा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार 2.0 में लोकसभा में जो बिल सबसे पहले पेश हुआ, वह तीन तलाक का रहा. दरअसल ये बिल मोदी सरकार की प्राथमिकता के साथ-साथ प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है. सरकार के सामने इस बिल को पास कराना किसी चुनौती से कम नहीं है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये खासियत है कि वो जो फैसला कर लेते हैं, उसे किसी कीमत पर लागू कराना जानते हैं. इसीलिए सरकार ने राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास कराने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है .

5 जुलाई के बाद ये होगा राज्यसभा का गणित

राज्यसभा में अभी 6 खाली सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 5 जुलाई तक पूरी हो जाएगी. इसके बाद राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 235 होगी. 4 राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग कारणों से फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं.

इन 6 सीटों में गुजरात की 2 सीट बीजेपी के खाते में जाएंगी, जबकि बिहार की एक सीट बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में जा चुकी है. वहीं उड़ीसा की तीन सीटों में एक बीजेपी को मिल रही है. यानी 5 जुलाई के बाद बीजेपी की राज्यसभा में 79 सीटें हो जाएंगी जबकि एनडीए में उसके सहयोगी एआईडीएमके की 13, जेडीयू की 6, शिवसेना 3, लोकजनशक्ति पार्टी 1 और मनोनीत और निर्दलीय 11 सीटें होंगी.

ऐसे में कुल मिलाकर एनडीए की 113 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत से सिर्फ 5 सीटें कम रहेंगी. हालांकि 18 जुलाई को तमिलनाडु की 6 खाली सीटों पर चुनाव होने के बाद एनडीए को एक सीट का नुकसान हो सकता है.

राज्यसभा में ऐसे पास होगा तीन तलाक बिल

बात करें तीन तलाक बिल  की तो बीजेपी की सहयोगी जेडीयू इस बिल का विरोध कर रही है. ऐसे में राज्य सभा में तीन तलाक बिल आने पर जेडीयू विरोध करते हुए राज्यसभा से वॉकआउट कर सकती है. इसके बाद बहुमत से सरकार की दूरी 5 से बढ़कर 8 हो जाएगी. जिसके चलते सरकार की नजर उन दलों पर होगी, जो ना तो एनडीए के साथ हैं, न ही यूपीए के साथ.

इन दलों में 5 सदस्यों वाली बीजेडी, 6 सदस्यों वाली टीआरएस, 2 सीटों वाली वाईएसआर पर रहेगी. इसके अलावा इनकी नजरें एक सदस्यों वाले एनपीएफ और 2 निर्दलीय सदस्यों पर होगी. ये पार्टियां यदि तीन तलाक बिल के समय वॉकआउट भी कर जाती है तो सरकार ये बिल पास करा लेगी.

नई दिल्‍ली, मंथन न्यूज। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक के दौरान मध्‍यप्रदश के सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफे का प्रस्‍ताव दिया है। यह खबर सूत्रों के हवाले से आई है। हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शनिवार को कमलनाथ ने कहा था कि विधानसभा चुनावों के बाद मुख्‍यमंत्री चुने जाने के बाद मैंने दिसंबर में इस्‍तीफे की पेशकश की थी लेकिन मुझसे कहा गया कि इसे जारी रखें। 

गौरतलब है कि मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी 29 से 28 सीटें हार गई थी। केवल छिंदवाड़ा से नकुल नाथ की ही एक सीट जीत सकी थी। वहां पर ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को अध्‍यक्ष बनाने की मांग उठ रही है। 

हालांकि नई दिल्‍ली में पत्रकारों ने अशोक गहलोत से उनके और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा इस्तीफे की पेशकश किए जाने पर सवाल किए गए तो उन्होंने इससे इनकार नहीं किया। इस दौरान अशोक गहलोत ने साफ कहा कि इस्तीफे की पेशकश आज क्या की, जिस दिन चुनाव के परिणाम आए थे, उस दिन इस्तीफे की पेशकश होती है।

उन्होंने आगे कहा कि चुनी हुई सरकारों को स्‍थाई रखना होता है। चुनाव के बाद हाईकमान फैसला करता है कि आगे हमें कैसे काम करना है। पूरी वर्किंग कमिटी ने राहुल गांधी को अधिकृत किया है कि वह जो चाहें फैसला करें, पुनर्गठन करें, बदलाव करें, कुछ भी करें और यह फैसला 25 जून को ही हो चुका है।

*रेशम माता मंदिर मामला*

*दबंगों द्वारा मंदिर पर कब्जा  हटाने एकत्रित हुआ  बेड़िया समाज*


    *रेशम माता मंदिर हमारा है और रहेगा: उषा कलावत*

 *शिवपुरी* शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील अंतर्गत आने वाले रेशम माता मंदिर पर बीते दिनों जो विवाद हुआ जिसमें रेशम माता मंदिर समिति अध्यक्षा  रूपा  धनावत के साथ  बदसलूकी और मारपीट की घटना  करने के अलावा दबंगों के द्वारा मंदिर पर कब्जा  कर उन्हें वहां से भगा दिया गया उसके बाद आज एक बार फिर बेड़िया समाज की ओर से बैठक रखी गई इस बैठक का उद्देश्य किसी भी तरह  दबंगों द्वारा मंदिर पर किए गए कब्जे से मुक्त कराना था यह बैठक पुलिस की देखरेख में रखी गई थी बैठक में बेड़िया समाज की ओर से नेतृत्व  कर  रहे  बेड़िया समाज के प्रदेश अध्यक्ष  सत्येंद्र कलावत  ने कहा कि रेशम माता का अति प्राचीन मंदिर  बेड़िया समाज का है और रहेगा इस पर दबंगों द्वारा जो कब्जा करने की कोशिश की गई है  उसे  सफल नहीं होने दिया जाएगा हमारे द्वारा दबंगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट की गई है पुलिस द्वारा उन्हें फिर भी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है  उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो  प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों में इस मामले हेतु  आंदोलन और प्रदर्शन होंगे उनका कहना था कि बेड़िया समाज के द्वारा रेशम माता मंदिर जो अपनी दीन अवस्था में पड़ा हुआ था उस पर ईमानदारी से डेवलपमेंट करते हुए भवन निर्माण कार्य कराया गया और जब मंदिर निर्माण अपनी पूर्णता की और है ऐसे में कुछ लोगों के द्वारा उस पर कब्जा करने की जो कोशिश की जा रही है उसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा वहीं बैठक में उपस्थित अखिल भारतीय कलावत महासभा की जिला अध्यक्ष उषा कलावत ने कहा कि रेशम माता मंदिर 200 साल पुराना होकर अति प्राचीन है यहां पर शुरू से ही बेड़िया समाज द्वारा पूजा-अर्चना का कार्य किया जा रहा है रेशम माता  मंदिर हमारा है और रहेगा कई बरसों से  खराब हालत में पड़े  मंदिर में जब हमारे समाज के द्वारा भारी मात्रा में पैसा लगाकर भव्यता प्रदान की गई है तो ऐसे में कुछ गलत नीयत रखने वाले गांव वालों की नजरें मंदिर पर होने बाली चढोत्तरी  पर होने लगी है इन्हें उस समय ख्याल क्यों नहीं आया जब मंदिर  जीर्ण  शीर्ण अवस्था में पड़ा हुआ था यह विचारणीय प्रश्न है आज हमारे समाज के द्वारा मंदिर को भव्यता प्रदान की गई है तो  यह  मारपीट पर उतारू हो गए हैं वहीं बैठक के दौरान कई पुरानी बातें निकल कर सामने आई जिसका बातचीत उपरांत निष्कर्ष निकाला गया बैठक के दौरान बेड़िया समाज के प्रदेश अध्यक्ष सत्येंद्र कलावत, जिलाध्यक्ष प्रदेश सचिव जसवंत सिंह,  प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह बेड़िया, प्रदेश महामंत्री घनश्याम कलावत,  प्रदेश सचिव  मलखान सिंह कलावत, जिला कोषाध्यक्ष मुन्नालाल, ब्लॉक अध्यक्ष  मुकेश कलावत, अध्यापक भोलू राम  कलावत, नरेंद्र धनावत, रूपा धनावत,मीना धनावत, तनूजा धनावत, निर्मला धनावत,  गुड्डू  धनाबत, अन्नू  धनाबत, सुनील  धनावत, मंगल  धनावत के अलावा बेड़िया समाज के लोग भारी संख्या में मौजूद थे  वहीं आज एक बार फिर बैठक में बिना बुलाए कई गांव वाले पहुंच गए जो वहां से बेड़िया समाज के लोगों से बहस करने लगे पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर कहा कि शांति से बात करें अन्यथा की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी
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 *हमारी कुलदेवी हैं रेशम मैया*
 बेड़िया समाज की ओर से बैठक में आए अशोक सिंह  बेड़िया जिला अध्यक्ष बेड़िया समाज सुधार समिति एवं बेड़िया समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि रेशम माता हमारी कुलदेवी है और इनके बिना हमारे यहां कोई शुभ कार्य  नहीं किया जाता है पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे पूर्वजों से लेकर आज तक हमारा इस मंदिर पर आना जाना जारी है मंदिर की व्यवस्था एवं रखरखाव में हमेशा बेड़िया समाज ने सहयोग किया है और आज जब मंदिर पर समाज के द्वारा मेहनत और ईमानदारी के साथ भव्यता प्रदान की गई है तो ऐसे में हम वहां पर किसी भी तरह का अनैतिक कार्य कैसे स्वीकार कर सकते हैं
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 *मंदिर के ठीक सामने दुकानें बनाकर ढकने का प्रयास रहा लड़ाई की मुख्य वजह*
 रेशम माता मंदिर के ठीक सामने कुछ ग्रामीणों द्वारा नीव खोदकर एक साथ कई दुकानें बनाने का कार्य किया जा रहा था नींव खोदने के लिए मना करने  जब रेशम माता समिति की अध्यक्षा रूपा धनावत पहुंची  तो  ग्रामीणों द्वारा उनके साथ बदसलूकी की जिसके बाद श्रीमती रूपा धनावत वहां से भागकर शिवपुरी  आई और इस संबंध में पुलिस मैं जगदीश लोधी  धर्मेंद्र लोधी  हल्के लोधी  सरवन राव के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई श्रीमती धनावत का कहना है कि जिस समय मंदिर  जीर्ण  अवस्था में पड़ा हुआ था उस समय गांव वालों द्वारा किसी भी तरह की कोई प्रगति के प्रयास नहीं किए गए और आज जब मंदिर अपनी पूरी भव्यता की ओर है ऐसे में इन लोगों के द्वारा मंदिर के ठीक सामने दुकानें बनाकर उसकी भव्यता को खत्म करने का प्रयास  कर रहे थे और मना करने पर मुझ दलित महिला के साथ मारपीट की गई पुलिस प्रशासन ने अभी तक इन लोगों की गिरफ्तारी तक नहीं की है जबकि हम कम से कम 10 चक्कर लगा चुके हैं आज भी मंदिर पर उन्हीं लोगों का कब्जा बना हुआ है

भोपाल। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के स्थान पर नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर दिल्ली में सरगर्मी बढ़ गई है। सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ की राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। पीसीसी अध्यक्ष के लिए दो मंत्री उमंग सिंघार व कमलेश्वर पटेल के साथ वरिष्ठ विधायक बिसाहूलाल सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद को लेकर दिल्ली में बढ़ी गतिविधियों का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि रविवार दोपहर में मंत्री उमंग सिंघार भोपाल से वहां पहुंचे। उन्होंने एआईसीसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। आदिवासी वर्ग से आने वाले सिंघार मंत्री पद के साथ पीसीसी अध्यक्ष बनने की कोशिश में हैं। हालांकि सिंघार के पास झारखंड के प्रभारी सचिव की जिम्मेदारी भी है।

सिंघार ने बताया कि झारखंड की रिपोर्ट सौंपने वे दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि कमलेश्वर पटेल के लिए एआईसीसी महासचिव दीपक बाबरिया ने सिफारिश की है। बाबरिया ओबीसी के नेताओं को आगे लाने में हमेशा कोशिश करते हैं और इस्तीफा देने के पहले उन्होंने पटेल का नाम आगे बढ़ाया था।

सूत्र बताते हैं कि आदिवासी वर्ग से आने वाले एक अन्य वरिष्ठ विधायक बिसाहूलाल सिंह का नाम भी पीसीसी अध्यक्ष के लिए चल रहा है। कमलनाथ सरकार में उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था, जिससे वे फिलहाल नाराज भी हैं। हालांकि बिसाहूलाल सिंह के नाम पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की सहमति पर संशय है और पीसीसी अध्यक्ष बनाए जाने में उनकी सहमति भी ली जाएगी।

कमलनाथ लोकसभा चुनाव में हार के बाद आने वाले नगरीय निकाय-पंचायत चुनाव व सहकारिता चुनाव की चुनौती को देखते हुए ऐसे पीसीसी अध्यक्ष पर सहमत नहीं होंगे, जिससे चुनाव से सरकार विपरीत परिस्थितयों में खड़ी हो जाए। ऐसे में वे अपने सबसे नजदीकी और मंत्री बाला बच्चन को पीसीसी अध्यक्ष बनाने के लिए बिसात बिछा सकते हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ की सोमवार को राहुल गांधी से मुलाकात की संभावना है। उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी राहुल गांधी से मिलने जाएंगे।

बताया जा रहा है कि ये सभी दिग्गज नेता राहुल गांधी को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाएंगे। सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात में नाथ मध्यप्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें पीसीसी अध्यक्ष पर जल्द फैसला नहीं होने से आ रही परेशानियों से भी अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री कमलनाथ की गांधी से इस मुलाकात के बाद पीसीसी अध्यक्ष पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।



महिलाओं को हेलमेट पहनने से दी गई छूट रहेगी जारी, लेकिन नए दोपहिया वाहन के साथ उन्हें भी खरीदना होंगे दो हेलमेट


मंथन न्यूज।

भोपाल .सड़क हादसों में मौत के बढ़ते ग्राफ को कम करने के इरादे से अब सोमवार से दो पहिया वाहन चालक के साथ उसके पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट अनिवार्य हो जाएगा। यह इसलिए होगा क्योंकि सोमवार से नया दोपहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहक को अब दो हेलमेट भी खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है।

अगर उनके पास पहले से हेलमेट है, तो उन्हें हेलमेट खरीदी का बिल देना होगा। बिल नंबर की इंट्री होने के बाद ही अब गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हो पाएगा। ऐसे में यह ग्राहक की भी जिम्मेदारी हो गई कि वे वाहन खरीदते समय या तो नए हेलमेट परिवहन विभाग के तय मानकों वाला बिल के साथ खरीदे या फिर पुराने हेलमेट का बिल साथ में रखे। वाहन खरीदी के दौरान महिलाओं को भी हेलमेट खरीदना जरूरी होगा, हालांकि उन्हें मप्र अधिनियम के तहत हेलमेट लगाने में छूट मिली हुई है।

आंकड़े बताते हैं... मरने वालों में 16 फीसदी से अधिक महिलाएं :जानकारी के मुताबिक इस वर्ष 1 जनवरी से मई के अंत तक करीब डेढ़ हजार सड़क हादसे हुए। इनमें 122 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। जान गंवाने वालों में करीब 60 फीसदी कारण हेलमेट नहीं पहनना रहा। अब तक 122 मौतों में 20 महिलाएं रहीं। यह कुल मौतों के 16 फीसदी से अधिक है। ऐसे में अब महिलाओं को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य करने की मांग उठने लगी है। शासन के महिलाओं को लाइसेंस फ्री करने के कारण महिलाओं के लाइसेंस बनाने की संख्या बढ़ गई है।

मांग...शासन नियम बदले, महिलाओं के लिए भी हेलमेट पहनना हो जरूरी :पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच कहतीं हैं कि एक्सीडेंट में चोट सभी को समान रूप से लगती है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा भी आवश्यक विषय है। इस कारण महिलाओं को भी हेलमेट जरूर पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन को चाहिए कि वे नियम बदले और महिलाओं को हेलमेट पहनना पुरुषों की तरह अनिवार्य करे।

इस साल अब तक 122 मौतें, इनमें 20 महिलाएं भी शामिल :पुलिस के आंकडे बताते है राजधानी में इस साल जून माह के अंत तक 1488 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 1212 लोग इनमें घायल हुए हैं। जानलेवा हादसों में 122 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 102 पुरुष और 20 महिलाएं हैं।

यह भी जानना जरूरी

मोटर व्हीकल एक्ट में दो पहिया वाहन चलाते और पीछे बैठने वाले को हेलमेट पहनना जरूरी है।


मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं है।


परिवहन विभाग के आदेश के बाद दो पहिया वाहन खरीदने पर दो हेलमेट खरीदना अनिवार्य हो गया है। ऐसे में वाहन चलाने और पीछे बैठने वाले को हेलमेट पहनना अनिवार्य है।


दो पहिया वाहन के साथ दो हेलमेट खरीदी के बिल लगाना अनिवार्य होगा। इसके बिना वाहन का पंजीयन नहीं होगा।


महिला हो या पुरुष सभी को दोपहिया वाहन के साथ लेने होंगे हेलमेट

शासन के आदेश का होगा पालन :शासन के नए आदेश का पालन किया जाएगा। कानून के अनुसार महिलाओं पर हेलमेट की कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन दो पहिया वाहन चालक और उसके पीछे बैठी सवारी पर हेलमेट नहीं पहनने पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रदीप सिंह चौहान, एएसपी ट्रैफिक

बंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठाओं को सेवा और शैक्षिणक संस्थानों में आरक्षण देने के कानून को संवैधानिक रूप से वैध तो ठहरा दिया है। लेकिन इससे आरक्षण की सीमा पर लगी 50 फीसदी की पाबंदी टूट गई है। अब प्रदेश में कुल आरक्षण 70 फीसदी हो गया है, जिसमें गरीब सवर्णों को दिया जाने वाला 10 फीसदी आरक्षण शामिल है। इसके बाद आरक्षण की उच्चतम सीमा को लेकर बहस एक बार फिर शुरू हो गई है।


यह आरक्षण तमिलनाडु से भी ज्यादा हो गया है। हालांकि तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई की सीमा से पहले का है। दूसरी तरफ, आरक्षण की अधिकतम 50 फीसदी की सीमा से आगे बढ़कर आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं इस पर संविधान विशेषज्ञ बंटे हुए हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट जरूर पहुंचेगा और राज्य सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैवियट दाखिल दी है और आग्रह किया है कि फैसले को चुनौती देने वाला कोई भी आदेश सरकार को सुने बिना न दिया जाए।

हालांकि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ, 1993 जिसे मंडल फैसला भी कहा जाता है) जिसमें यह सीमा तय की गई थी उसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 50 फीसदी की सीमा से आगे बढ़ा जा सकता है यदि उसके लिए आपात परिस्थितियां, सामाजिक और आथिर्क रूप से पिछड़ेपन का समकालीन सांख्यीकिय डाटा मौजूद हो जिसमें सेवाओं में समुदाय के पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव दिखता हो लेकिन इसके देने से प्रशासन की क्षमता / कार्यकुशलता प्रभावित न होती हो।

सरकार का तर्क रहा है कि मराठाओं को पिछले सात दशकों से आरक्षण से मनमाने रूप से वंचित रखा गया है जबकि वे राज्य की 33 फीसदी आबादी हैं और मुख्यत: कृषि कार्य में लिप्त हैं। आत्महत्या करने की दर उनमें सबसे ज्यादा है। यह उनके लिए एक आपात और असाधारण परिस्थिति है जिसके आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है। इससे 50 फीसदी की सीमा भी लंघ जाए तो कोई बात नहीं क्योंिक असाधारण परिस्थितियां मौजूद हैं।

पूर्व अटार्नी जरनल तथा संविधान विशेषज्ञ मुकुल रोहतगी ने कहा कि आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा नियम नही है। जस्टिस जीवन रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि इसे तोड़ा जा सकता है यदि राज्यके पास आपात स्थिति और पिछड़ेपन का आंकड़ा मौजूद हो। इस मामले में गायकवाड़ आयोग ने आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा पिछड़ेपन के मुख्य हेडों के तहत 25 मानकों पर विस्तृत सर्वे किया है जबकि मंडल आयोग ने सिर्फ 11 मानकों पर ही अध्ययन किया था। गायकवाड़ आयोग ने 1,92,522 लोगों की सुनवाई की और आंकड़ा एकत्र किया। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि डाटा मौजूद नहीं है।

वहीं, आरक्षण के विरोध में जानकारों ने कहा कि राज्य में यह एक तथ्य है कि महाराष्ट्र में 18 मुख्यमंत्रियों में 11 मुख्यमंत्री मराठा समुदाय से रहे हैं। ऐसे में इस समुदाय को 50 फीसदी की सीमा से ज्यादा आरक्षण देकर बाहर नहीं जा सकता। 

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण : 12 फीसदी नौकरियों में और 13 फीसदी शिक्षा में (कुल 70 फीसदी)
तमिलनाडु : 69 फीसदी
हरियाणा : 67
राजस्थान : 54
मध्यप्रदेश : 63
आंध्र प्रदेश : 62
तेलंगना : 55

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सयम सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ सहित विभिन्न सुरक्षा बलों में 84 हजार से ज्यादा विभिन्न पद खाली है। सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हर साल करीब 10 फीसदी पद सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ऑन ड्यूटी मृत्यु की वजह से खाली हो जाते हैं।

मंथन न्यूज

केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए खाली पड़े पदों का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा नियुक्तियों और खाली पड़े पदों से जुड़ी प्रक्रियाओं का विवरण एक जगह एकट्ठा करके आंतरिक प्रक्रिया में खासी तेजी लाई जाएगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न सुरक्षा बलों में हर साल करीब 80 हजार पद खाली होते हैं। ऐसे में खाली हुए पदों की यूनिटवार जानकारी और नई नियुक्तियों में खासा समय लग जाता है

सरकार चाहती है कि समयसीमा के भीतर खाले पड़े पद भरे जाएं। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं। भर्तियों से जुड़ी फाइलों पर ई-अप्रूवल के बाद विज्ञापन जारी करने और संबंधित एजेंसी को परीक्षा के लिए पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का चार्ट बनाकर उसका समयबद्ध अनुपालन कराने की कोशिश होगी।

क्या कहते है हैं आंकड़ें?: एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सयम सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ सहित विभिन्न सुरक्षा बलों में 80 हजार से ज्यादा विभिन्न पद खाली है। सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हर साल करीब 10 फीसदी पद सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ऑन ड्यूटी मृत्यु की वजह से खाली हो जाते हैं। ऐसे में देशभर में अलग-अलग यूनिटों में तैनात जवानों का विवरण केंद्रीय स्तर पर इकट्ठा करने में खासा समय लग जाता है। गौरतलब है कि कांस्टेबल स्तर पर खाली पड़े पदों के लिए एसएससी के जरिए विभिन्न केंद्रों पर लिखित परीक्षा होती है।



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