हालांकि कमलनाथ सरकार के मंत्री मध्यप्रदेश में कांग्रेस और कांग्रेस के समर्थक विधायक के एकत्रित होने की दावा ठोक रहे हैं. कांग्रेसियों का कहना है कि प्रदेश सरकार पर किसी तरह का संकट नहीं है. उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में गोवा और कर्नाटक जैसा कुछ भी नहीं होगा.
इससे पहले शुक्रवार को मंत्री तुलसीराम सिलावट के आवास पर कांग्रेस की एकजुटता प्रदर्शन को दर्शाने के लिए भोज का आयोजन किया गया. इसमें कांग्रेस और सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलियों, समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के विधायकों सहित सभी 121 विधायक भी पहुंचे.
राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के सभी नेता पार्टी के एकजुट होने का संदेश देना चाहते हैं और विधायकों को यह अहसास दिलाना की कोशिश कर रहे हैं कि बड़े नेताओं में किसी तरह का मतभेद नहीं है, उनमें समन्वय बना हुआ है.
गौरतलब है कि राज्य विधानसभा में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं है. विधानसभा के 230 विधायकों में से कांग्रेस के 114, भाजपा के 108, बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट रिक्त है। भाजपा के कई नेता सरकार गिराने की बात पूर्व में कह चुके हैं.


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