रांची। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आरक्षण को लेकर समाज के समक्ष सवाल उठाए हैं। रविवार को यहां खेलगांव में प्रज्ञा प्रवाह के चार दिवसीय लोकमंथन कार्यक्रम का समापन करने आईं लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आरक्षण की विरोधी नहीं हैं, लेकिन क्या केवल आरक्षण देने से देश का उद्धार संभव हो सकेगा। उनका मानना है कि सामाजिक संरचना की बात करें तो इस विषय पर आत्मचिंतन करें। जिसे आरक्षण मिला या जिसे नहीं मिला, हरेक व्यक्ति यह सोचे।

सामाजिक स्थिति पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के पूर्व में दिए गए वक्तव्य का संदर्भ देते हुए उन्होंने आरक्षण पर बात की शुरुआत की। कहा कि हमारी सामाजिक स्थिति मजबूत है। यह भी देखना होगा कि कहीं हमारा समाज पिछड़ तो नहीं रहा है। संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर आरक्षण केवल 10 साल के लिए चाहते थे। उन्होंने सामाजिक संरक्षण की आवश्यकता महसूस की थी, लेकिन सामूहिक चिंतन में हम कम पड़े। संसद में बैठने वाले भी आए। हर 10 साल पर 10 साल के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ा दी। एक बार 20 साल के लिए बढ़ा दी। क्या केवल आरक्षण से देश का उद्धार संभव हो सकेगा

उन्होंने उदाहरण देते हुए भी समझाया कि अगर सामूहिक भोज में अलग-अलग कोना बना दें और तय कर दें कि यहां ब्राह्माण बैठेगा, वहां क्षत्रिय और शूद्र बैठेंगे तो भोजन के दौरान सबके दिमाग में सिर्फ यही बात चलेगी और भोजन से ताकत नहीं मिल पाएगी। सुमित्रा महाजन ने वैचारिक प्रवाह पर बल देते हुए कहा कि प्रज्ञा का प्रवाह चलते रहना चाहिए तभी विचारों का मंथन होता रहेगा। दो साल पहले भोपाल में भी ऐसा ही आयोजन हुआ था। यह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की सोच है। वाद-संवाद से हीं कुछ बोध होगा। यह कुंभ मेले जैसा है।

केवल सरकार के भरोसे न रहें
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि केवल सरकार के भरोसे न रहें। सरकार सबकी है, यह सोचना होगा। हम आंदोलन में सबसे पहला पत्थर सरकारी बस की कांच पर मारते हैं। स्ट्रीट लाइट तोड़ते हैं। यह सोचना होगा कि हम टैक्स देते हैं तो सरकार काम करती है।

मुट्ठीभर लोग राष्ट्रवाद को कमजोर करने की साजिश में लगे हैं : रघुवर

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि आज देश में मुट्ठीभर लोग राष्ट््रवाद को कमजोर करने की साजिश में लगे हैं। वे भारत की मुख्य भावनाओं को जीवित रखने की बजाय इसे चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्र्रेस ने भी महापुरुषों के साथ भेदभाव किया। जिन लोगों ने देश के लिए कुर्बानी दी उन्हें भी इतिहास में उचित स्थान दिलाना जरूरी है। सीएम रविवार को यहां चार दिवसीय लोकमंथन कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वामपंथी इतिहासकारों ने दुनियाभर में भारत की गलत छवि पेश की है। ऐसे समय में लोकमंथन में चिंतन से निकला अमृत देश को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को नई दिशा देगा।


नई दिल्ली। देश के भीतर मौजूद संपत्तियों को जब्त करने के बाद पीएनबी घोटाले के आरोपितों की विदेशी संपत्तियों की जब्ती का भी सिलसिला शुरू हो गया है। ईडी ने मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत नीरव मोदी और दूसरे आरोपितों की 637 करोड़ रुपये की संपत्ति और बैंक अकाउंटों को जब्त किया है।

इसके तहत हांगकांग और न्यूयार्क स्थित संपत्तियों को जब्त किया गया है। बड़ी बात यह है कि इनमें विदेश स्थित बैंक खाते में जमा रकम, फ्लैट और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। आरोपितों की विदेश स्थित अन्य संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें भी जब्त किया जा सके।

ईडी एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, उनमें न्यूयार्क में नीरव मोदी के दो फ्लैट शामिल हैं। इन दोनों फ्लैटों की कीमत 216 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही सीबीआइ में एफआइआर दर्ज करने के बाद नीरव मोदी द्वारा हांगकांग भेज दिए गए 22.69 करोड़ रुपये के आभूषण को वहां से वापस मंगाकर जब्त कर लिया गया है।

इन आभूषणों की बुक वैल्यू 85 करोड़ रुपये दिखाई गई थी। लेकिन स्वतंत्र मूल्यांकन से इसकी कीमत 22.69 करोड़ आंकी गई है। यह पहला मामला है कि जब मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत आरोपित की विदेश में छिपाई गई संपत्ति को वापस लाकर जब्त किया गया है।

इसके साथ ही घोटाले की अन्य आरोपी और नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी के नाम पर 2017 में मुंबई में 19.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए फ्लैट को भी जब्त किया गया है। पूर्वी मोदी बेल्जियम की नागरिक है। इस फ्लैट का पावर ऑफ अटार्नी नीरव के भाई नीशाल मोदी के पास है।

नीशाल मोदी भी घोटाले में आरोपी है। इसके अलावा ईडी ने नीरव मोदी, पूर्वी मोदी और अन्य आरोपितों के विदेश स्थित बैंक खातों में जमा 278 करोड़ रुपये को भी जब्त कर लिया है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विदेश में जब्त संपत्तियों को बेचकर और बैंक खातों की राशि को वापस भारत लाने की कोशिश शुरू हो गई है। इसके लिए संबंधित देशों को एलआर भेजा जा रहा है।

टेंडर तो हो जाएंगे पर शुरू नहीं हो पाएंगे जनता के काम भोपाल मंथन न्युज प्रतिनिधि। 1 अप्रैल को नगर निगम का बजट जारी हुआ, लेकिन दो महीने तक टेंडर नहीं किए गए। अब जैसे ही आचार संहिता लगने वाली है निगम में टेंडरो की बाढ़ आ गई है। पार्षद हों या एमआईसी मेंबर, विधायक हों या मंत्री। सभी अपने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के टेंडर लगवाने में व्यस्त हो गए
मंथन न्युज -
 1.अप्रैल को नगर निगम का बजट जारी हुआ, लेकिन दो महीने तक टेंडर ही नहीं किए गए। अब जैसे ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने वाली है निगम में टेंडरों की बाढ़ आ गई है। पार्षद हो या एमआईसी मेंबर, विधायक हो या मंत्री। सभी अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के टेंडर लगवाने में व्यस्त हो गए हैं। हालात ये है कि सालभर में जितने टेंडर नहीं होते उतने दो माह में कर दिए गए।

नगर निगम के गोविंदपुरा में संचालित यांत्रिकी शाखा आमतौर पर शाम को 6-7 बजे के बाद बंद हो जाता है। लेकिन, इन दिनों देर रात तक चहल पहल बनी रहती है। अधीक्षण यंत्री, नगरयंत्री, उपनगर यंत्री सहित इंजीनियर टेंडर लगाने और खोलने में व्यस्त हैं। यांत्रिकी शाखा में सुबह 10.30 बजे से रात के 11 बजे तक यह सिलसिला चल रहा है। एक स्थानीय मंत्री ने तो नगर निगम के स्टॉफ को टेंडर लगाने के लिए अपने बंगले पर दो दिन के लिए तैनात कर दिया था। ताकि, कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण बाधा न हो।
निगम अफसरों पर नेताओं का दबाव इतना है कि उन्हें किसी भी हालात में आचार संहिता से पहले अधिक से अधिक कामों का भूमिपूजन करना है। काम की अधिकता से गड़बड़ियां भी हो रही हैं। बता दें कि सीएम इंफ्रा फेज टू के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। जिस पर निगम प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पाया।

200 से अधिक कामों में आचार संहिता का साया


टेंडर की प्रोसेस 21 दिनों तक होती है। नगर निगम के 200 से अधिक टेंडरों की तारीख 11-12 अक्टूबर को खत्म हो रही है। यानी इसके बाद भी इन्हें खोला जा सकेगा। ऐसे में यदि इस बीच आचार संहिता लग गई तो इनके वर्कआर्डर जारी नहीं हो पाएंगे। इससे काम चालू नहीं हो पाएंगे।

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छह माह बाद विधायक निधि की आई याद

वित्तीय वर्ष अप्रैल से चालू हो जाता है, लेकिन 6 माह तक विधायक निधि खर्च नहीं की गई। अब एक विधायक ने आचार संहिता से ठीक पहले अपने क्षेत्र में विधायक निधि के कामों की सूची निगम अधिकारियों को थमा दी। मुश्किल ये है कि यदि 5 अक्टूबर तक आचार संहिता लागू हो गई और टेंडर हो भी गए तो उनके वर्कआर्डर जारी नहीं हो पाएंगे।

ऑफलाइन टेंडर की तैयारी

बताया जा रहा है कि अब नेताओं के दबाव के कारण निगम अधिकारी अल्प कालिक टेंडर भी लगा रहे हैं। ताकि आचार संहिता से पहले इन्हें खोलकर वर्कआर्डर जारी किया जा सके। इसके बाद भूमिपूजन हो सके।

नई दिल्ली। आधार की वैधता और अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का चर्चित फैसला आने के बाद चुनाव आयोग फिर से वोटर आईडी कार्ड को आधार से जोड़ने पर विचार कर रहा है। आयोग इस फैसले की रोशनी में विधि विशेषज्ञों की राय लेकर अध्ययन कर रहा है। फैसले में आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने पर कोई रोक नहीं है, इसलिए आयोग इस मुहिम को फिर से शुरू करना चाहता है
कोर्ट के फैसले के बाद वोटर आइडी कार्ड को आधार से जोड़ने की चुनाव आयोग की पुरानी मुहिम को फिर नई ऊर्जा मिल गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने इन फैसलों को लागू करने के बारे में साफ किया है कि आयोग ने अपने विधि सचिवालय को आधार पर आए फैसले का अध्ययन करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने की वजह से वोटर आइडी को आधार से जोड़ने की यह महत्वाकांक्षी परियोजना बीच में ही रोकनी पड़ी थी।
अब फैसले के अध्ययन के बाद अदालत के आदेश के अनुरूप इसे फिर से शुरू किया जा सकेगा। आयोग ने मतदाता सूची को ज्यादा विश्वस्त बनाने के लिए फरवरी 2015 में आधार से मतदाता पहचान पत्र को जोड़ने की योजना पर काम शुरू किया था। जिसके कुछ महीने बाद ही आधार की वैधता और दुरुपयोग का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया। इससे यह योजना खटाई में पड़ गई। आयोग के मुताबिक, अब तक लगभग 38 करोड़ मतदाताओं के पहचान पत्र आधार से जोड़े जा चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि भविष्य में आने वाली सेवाएं जैसे इलेक्ट्रानिक या इंटरनेट वोटिंग केवल उन्हीं मतदाताओं को मिलेगी, जिनके आधार नंबर वोटर कार्ड से जुड़ चुके होंगे। आधार को जोड़ने से न केवल मतदाता सूची में दोहराव रोका जा सकेगा, बल्कि एडवांस मैकेनिज्म जैसे प्रवासियों को भी रिमोट वोटिंग का अधिकार दिया जा सकेगा। आयोग का दावा है कि इससे लाखों ऐसे फर्जी मतदाताओं का पता चलेगा जो देश भर में न जाने कितने ही राज्यों और क्षेत्रों में कई मतदाता पहचान पत्र बनवा कर चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती एवं माध्यमिक शिक्षक भर्ती शुरू किए जाने के बाद अब जनजातीय कार्य विभाग में भी शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग ने मंजूरी दे दी है। इसकी आधिकारिक पुष्टि भी हो गई है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। जनजातीय कार्य विभाग कुल 19550 रिक्त पदों के लिए भर्ती करेगा। 

खबर आ रही है कि वित्त विभाग ने दो दिन पहले 19550 पदों के लिए 2 दिन पहले मंजूरी दी है। विभागीय आयुक्त दीपाली रस्तोगी ने पद मंजूर होने की पुष्टि की है। उन्होंने जारी आदेश में बताया कि सभी पदों की पूर्ति दो चरणों में होगी और इसके लिए शीघ्र ही आवेदन पत्र मांगने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बता दें कि अध्यापकों के संविलियन के बाद अब शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग अलग-अलग भर्ती करने जा रहे हैं। आदिवासी बहुल 89 विकासखंडों में सरकारी स्कूलों का संचालन जनजातीय कार्य विभाग करता है। 

इधर शिक्षा विभाग में उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए 17000 और माध्यमिक शिक्षकों के लिए 5670 रिक्त पदों हेतु भर्ती प्रक्रिया चल रही है। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने आवेदन आमंत्रित किए हैं। उक्त पद संविदा शिक्षक वर्ग 1 एवं वर्ग 2 के स्थान पर सृजित किए गए हैं। 


भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अधिकृत अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक अर्जित करने वाले खिलाड़ी को सीधे उप निरीक्षक तथा राष्ट्रीय स्तर की अधिकृत प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाड़ी को सीधे आरक्षक बनाये जाने का निर्णय लिया गया। अधिकृत अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ओलम्पिक, विश्वकप, विश्व चेम्पियनशिप, एशियन गेम्स, अधिकृत ऐशियन चेम्पियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, सेफ गेम्स शामिल है।

मध्यप्रदेश के 30 जिलों में 39 नगरीय तहसीलों के सृजन की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के 30 जिलों में 39 नगरीय तहसीलों के सृजन की मंजूरी दी। इसमें इन्दौर में मल्हारगंज, खुडै़ल, भिचौलीहप्सी, राउ, कनाड़िया, जबलपुर में गोरखपुर, आधारताल, रांझी, ग्वालियर में तानसेन, मुरार, सिटी सेन्टर, उज्जैन में कोठी महल, उज्जैन नगर, देवास में देवास नगर, सतना में रघुराजनगर, सागर में सागर नगर, रतलाम में रतलाम नगर, रीवा में हुजूर नगर, कटनी में कटनी नगर, सिंगरौली में सिंगरौली नगर, बुरहानपुर में बुरहानपुर नगर, खण्डवा में खण्डवा नगर, मुरैना में मुरैना नगर, भिण्ड में भिण्ड नगर, गुना में गुना नगर, शिवपुरी में शिवपुरी नगर, छिंदवाड़ा में छिंदवाड़ा नगर, विदिशा में विदिशा नगर, छतरपुर में छतरपुर नगर, मंदसौर में मंदसौर नगर, दमोह में दमयंती नगर, नीमच में नीमच नगर, होशंगाबाद में होशंगाबाद नगर, खरगोन में खरगोन नगर, सीहोर में सीहोर नगर, बैतूल में बैतूल नगर, सिवनी में सिवनी नगर, दतिया में दतिया नगर और भोपाल में कोलार नवीन नगरीय तहसीलों में शामिल किया गया है। इनका संचालन 01 जनवरी 2019 से शुरू किया जायेगा।

सिंचाई परियोजना

मंत्रि-परिषद ने सागर जिले की बीना परियोजना के लिये 3255 करोड़ 31 लाख की वित्तीय पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी। इसमें डूब क्षेत्र के ऐसे कृषक जिन्हें सोलेशियम सहित भूमि की मुआवजा राशि 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर से कम प्राप्त हो रही है, उन्हें विशेष पुर्नवास पैकेज के तहत न्यूनतम 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से एकमुश्त राशि दी जायेगी।

मंत्रि-परिषद ने सातलदेही सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 3000 हेक्टेयर के लिये 110 करोड़ 83 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी।

मंत्रि-परिषद ने सुठालिया सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 40 हजार हेक्टेयर के लिये 1375 करोड़ 24 लाख रूपये की प्रशासकीय मंजूरी दी।

मंत्रि-परिषद ने भन्नी सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 18 हजार 300 हेक्टेयर के लिये 280 करोड़ 31 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी। 

मध्यान्ह भोजन के रसोईये के मानदेय में वृद्धि

मंत्रि-परिषद ने मध्यान्ह भोजन योजना में संलग्न रसोईयों के वर्तमान मानदेय 1000 रूपये को बढ़ाते हुए 2000 हजार रूपये किया है। इससे 2 लाख 23 हजार रसोईये लाभांवित होंगे।

मेडिकल कॉलेज के महत्वपूर्ण निर्णय

मंत्रि-परिषद ने छतरपुर में नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये 300 करोड़ रूपये की मंजूरी दी। इसी प्रकार सिवनी में नये शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये 300 करोड़ रूपये की मंजूरी दी गई।

मंत्रि-परिषद ने शासकीय मेडिकल कॉलेज इन्दौर में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत स्थापना एवं राज्य शासन के व्यय से तीन नियमित पदों के सृजन की मंजूरी दी।

मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी में 300 बिस्तर के नये अस्पताल सहित भवन एवं परिसर निर्माण के लिये 202 करोड़ 40 लाख रूपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी।

मंत्रि-परिषद ने सतना में नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये 550 करोड़ की मंजूरी दी। परियोजना का क्रियान्वयन दो चरण में किया जायेगा।

मंत्रि-परिषद ने शासकीय मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों के मासिक स्टायपण्ड में वृद्धि करने का निर्णय लिया।

'मध्यप्रदेश वायु संपर्कता नीति-2018'' का अनुमोदन

मंत्रि-परिषद ने विमानन विभाग के अंतर्गत 'मध्यप्रदेश वायु संपर्कता नीति-2018'' का अनुमोदन किया। इसके तहत प्रदेश सरकार द्वारा विमानन सेवाओं में वृद्धि का प्रस्ताव है।  नई नीति का उद्देश्य देश के अन्य हिस्सों और दुनिया के साथ राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़कर पर्यटन की पूर्ण क्षमताओं का उपयोग करना है। इससे व्यापार और रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे। यही नहीं कृषि उत्पादों के निर्यात में भी सहयोग मिलेगा। नीति में विभिन्न श्रेणी के एयर क्राफ्ट के लिए अनुदान राशि भी निर्धारित की गई।

पर्यटन

मंत्रि-परिषद ने पर्यटन विभाग को आवंटित भूमि और भवनों को मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की अंश पूँजी में विनियोग के बदले में आवंटित किए जाने की स्वीकृति दी। इनमें होटल भरहुत, सतना और होटल पायल, खजुराहो शामिल हैं।

सर्मथन मूल्य पर खरीदी

मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार की प्राईस सपोर्ट स्कीम में खरीफ वर्ष 2018 में मूँग, उड़द, तुअर, मूँगफली, तिल और रामतिल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी संबंधी निर्णय लिया। ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत पात्र कृषकों से उत्पादन की पात्रता सीमा तक खरीदी की जायेगी। मूँग, उड़द, मूँगफली, तिल और रामतिल की खरीद 20 अक्टूबर 2018 से 19 जनवरी 2019 तक और तुअर की खरीदी 1 मार्च से 30 मई 2019 तक की जायेगी।

छिंदवाड़ा में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना

मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के तहत जिला छिंदवाड़ा में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया।  

विभिन्न नगर पालिक निगम और नगर परिषद के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने नगर पालिका परिषद दतिया को नगर पालिक निगम के रूप में गठित करने की अनुसंशा कर प्रस्ताव राज्यपाल को स्वीकृति के लिये प्रेषित करने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने ग्राम पंचायत बेरछा जिला शाजापुर, ग्राम पंचायत म्याना जिला गुना और ग्राम पंचायत दलौदा जिला मंदसौर को नगर परिषद का दर्जा देने के प्रस्ताव को राज्यपाल को प्रेषित करने का निर्णय लिया।

दिव्यांग पेंशन में गरीबी रेखा का बंधन समाप्त

मंत्रि-परिषद ने समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत दिव्यांगजनों के लिये प्रदाय पेंशन योजना में गरीबी रेखा का बंधन समाप्त कर जो आयकरदाता नहीं हो, उन्हें भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उददेश्य से प्रतिमाह पेंशन प्रदाय करने का निर्णय लिया।

अतिथि शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि

मंत्रि-परिषद ने शासकीय शालाओं में नियोजित अतिथि शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि करने का निर्णय लिया। यह दरें 1 अगस्त, 2018 से लागू होंगी। निर्णय के अनुसार अतिथि शिक्षक वर्ग-1, अतिथि शिक्षक वर्ग-2 एवं अतिथि शिक्षक वर्ग-3 को क्रमश: प्रति कालखण्ड 90, 75 और 50 रूपए देय होंगे। इसी तरह न्यूनतम तीन कालखण्ड प्रति दिवस एवं अधिकतम मासिक मानदेय जो वर्ग-1 के लिये 4500 था, बढ़कर 9000, वर्ग-2 के लिए 3500 के स्थान पर 7000, वर्ग-3 के लिए 2500 के स्थान पर 5000 देय होगा।

अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी।  

मंत्रि-परिषद ने खादय एवं औषधि प्रशासन के तहत प्रशासनिक, प्रयोगशाला एवं अनुसचिवीय स्तर के 152 नये और 61 आउटसोर्स के पदों की विभागीय संरचना के सृजन की मंजूरी दी।

मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमाँक 1 में ग्वाल, ग्वाला जाति का समावेश करने का निर्णय लिया।

शिवपुरी के बहुचर्चित हो चुके गणवेश मामले को लेकर आज सभ्य समाज ने आशुतोष शर्मा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की।
नोनिहलो को प्रदाय की जाने वाली गणवेश वितरण शिवपुरी में काफी विवाद का विषय बन चुकी है,पहले ही दिन से इस प्रकरण में अनियमितताओं के आरोप लग रहे है जो थमने का नाम नही ले रहे है।जिला समन्वयक शिक्षा विभाग के प्रतिवेदन के बाद से ही इस मामले ने तूल पकड़ ना प्रारम्भ कर दिया है।आज सभ्य समाज शिवपुरी के द्वारा सेकड़ो महिला पुरुष की उपस्थिति में ज्ञापन सौंपा गया जिसका नेतृत्व आशुतोष शर्मा ने किया जो इस सारे मामले की लोकायुक्त में भी शिकायत कर चुके है।आज मुख्यमंत्री,मुख्य निर्वाचन आयुक्त मध्यप्रदेश व संभाग आयुक्त को सौंपे गये ज्ञापन में सभ्य समाज की और से ये मांग की गई कि इस प्रकरण में कपड़े की जांच कर गुणवत्ता पूर्ण कपड़ा ही उपयोग में लाया जाये, गुणवत्ता विहीन कपड़े की गणवेश को वह नही बांटने देंगे।ज्ञापन में आरोप भी लगाया गया कि 12 वर्ष से प्रतिनियुक्त पे जमे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रबंधक चुनाव कार्य को भी प्रभावित कर सकते है,साथ ही गणवेश सिलाई स्व सहायता समूहों के माध्यम से न होकर निजी केंद्रों पर की जा रही है,जिसकी सिलाई दर भी काफी कम है।इस तरह शासन के धन को चुना लगाया जा रहा है।जो किसी भी दशा में बर्दाश्त नही किया जाएगा,इस सारे मामले की निष्पक्ष जांच हो जो भी दोषी पाया जाए उसे कठोर दंड दिया जाए ये मांग ज्ञापन में रखी गयी।
ज्ञापन देते समय सेकड़ो युवाओ ने पहले जाकर भ्रष्टाचार बन्द करो,गणवेश घोटाला बन्द करो के नारे लगाए तत्पश्चात ज्ञापन का वाचन कर डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।इस अवसर पर अभिभाषक अजय गौतम,दीपेश फड़नीष,इकबाल खान,अजय ओझा,अमन श्रीवास्तव,रूपेश बेड़िया,अशोक बेड़िया यशवंत कुशवाह,भारत गौतम,वी पी परमार,बनवारी कुशवाह,कपिल पाराशर,अमित परमार,कालू कुशवाह सहित सेकड़ो लोग उपस्थित थे।

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