भोपाल। मध्यप्रदेश में रहने वाले शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आ रही है। सातवां वेतनमान मिलने के बाद अब देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि उनकी सैलरी को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से अलग हटकर बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि यह वेतनमान पर्याप्त नहीं है। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ा दिया है। इसके अलावा उन्हें घूमने-फिरने के लिए मिलने वाले भत्तों में भी बदलाव कर दिया है। केंद्रीय कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि उनका वेतन कम से कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह होना चाहिए। फिलहाल इन कर्मचारियों को 18 हजार रुपए प्रतिमाह मिल रहा है। इसके अलावा कई कर्मचारी पहले से ही 7वें वेतनमान का लाभ ले रहे हैं।


 


चुनाव से पहले जागी उम्मीद
केंद्र की मोदी सरकार की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने भी डीए में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जो 1 जुलाई 2018 से प्रभावी मानी जाएगी। इस बढ़ोतरी से केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी लाभ होगा। इसी प्रकार मध्यप्रदेश सरकार के कर्मचारियों को भी उम्मीद जागी है कि वो सातवां वेतनमान लागू करने की ही तरह मध्यप्रदेश में भी डीए में बढ़ोतरी कर देगी। कई कर्मचारियों को उम्मीद है कि मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले भी सरकार कोई बड़ी घोषणा कर सकती है।



मध्यप्रदेश में जल्द बंटेगा एरियर्स
केंद्र की मोदी सरकार की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे दिया है। यह वेतनमान 1 जनवरी 2016 से लागू हो गया है। जबकि करीब 32 माह का एरियर फिलहाल बाकी है। इसके बारे में कहा गया था कि यह चार से पांच किस्तों में दे दिया जाएगा।


यह भी है खास
-राज्य सरकार के सभी अनुदान प्राप्त कालेजों के शि7कों को बी नए वेतनमान का लाभ मिलेगा। बढ़ी हुई सैलरी उनके जीपीएफ खाते में जोड़ दी जाएगी।


 


किसे कितना मिला बड़ा हुआ वेतन
सबसे पहले अपना वर्तमान (6 cpc) मूल वेतन (वेतन बैंड + ग्रेड वेतन) को दर्ज करें और ग्रेड पे के साथ बैंड वेतन का चयन करें।


-आपका HRA और ट्रेवलिंग एलाउंस का चयन करें और 7वीं CPC की सिफारिशों के अनुसार शहर का चयन करे लें।
-शहर चयन के बाद कैलकुलेट करने वाले बटन को क्लिक करें। सामने आपका बढ़ा हुआ वेतन होगा। इसमें 7वें CPC का रिवाइज़्ड मूल वेतन, मैट्रिक्स स्तर, सूचकांक स्तर, HRA की संशोधित राशि, ट्रेवलिंग एलाउंस की संशोधित राशि और 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रति माह कुल संशोधित वेतन जान पाएंगे।




भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रदेश इकाई प्रत्याशियों के नाम फाइनल नहीं कर पा रही है। दावेदारों की जबर्दस्त संख्या और धमकियों ने भाजपा में भितरघात की संभावनाएं बढ़ा दीं हैं। हालात नियंत्रण से बाहर होते देख राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कमान अपने हाथ में लेने का फैसला किया है। वो लगातार 10 दिन तक मध्यप्रदेश में रहेंगे। हर जिले के नेताओं से मिलेंगे। माना जा रहा है कि इसी दौरान वो भाजपा के प्रत्याशियों के नाम भी फाइनल कर लेंगे। 


विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम माने जा रहे अमित शाह के दौरे 6 अक्टूबर से शुरु होंगे जो 15 अक्टूबर तक चलेंगे। इस दौरान अमित शाह चार जगहों पर 10 संभाग के कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक शाह 6 अक्टूबर को इंदौर और उज्जैन संभाग में रहेंगे। इसके बाद 9 अक्टूबर को ग्वालियर और चंबल संभाग, 14 अक्टूबर को सागर, भोपाल और होशंगाबाद संभाग में रहेंगे। इसके बाद 15 अक्टूबर को रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

अमित शाह के संभागीय दौरे पहले 3 अक्टूबर से शुरु होने थे। माना जा रहा है कि 6 अक्टूबर से शुरु होने वाले संभागीय दौरों के अमित शाह चुनाव तैयारियों को लेकर की गई प्रदेश संगठन की तैयारियों की समीक्षा करेंगे साथ ही कार्यकर्ताओं को चुनाव रणनीति के गुर भी देंगे। खास बात यह है कि शाह इस दौरान बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।

इससे पहले अमित शाह का एमपी दौरा पिछले दिनों हुआ था जब राजधानी भोपाल में उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ता महाकुंभ को संबोधित किया था। उस दौरान महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे थे।

भोपाल। अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन अब विवादित हो गया है। इधर संविलियन प्रक्रिया अंतिम चरण मैं है और हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिए हैं। विवाद संविलियन के नाम पर हो रही नियुक्तियों को लेकर है। राज्य स्कूल शिक्षा सेवा संवर्ग में नियुक्ति और सेवा शर्तों पर आपत्ति जताई गई।

याचिका क्रमांक 21608/2018 एवं 22421/2018 पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर के न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला ने शासन को नोटिस जारी करते हुए कहा कि राज्य स्कूल शिक्षा सेवा में शिक्षक कैडर में नियुक्ति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। शासन को नए कैडर की सेवा शर्तों के संबंध में चार सप्ताह में अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखना होगा।

अन्य कुछ अध्यापकों द्वारा लगाईं याचिकाओं 21780/2018, 22679/2018 को भी पूर्व की याचिका 19417 से लिंक कर दिया है। शासन का पक्ष सुनने के तक निर्णय सुरक्षित रखा है। गौरतलब है कि राज्य स्कूल शिक्षा सेवा संवर्ग में नियुक्ति, सेवा शर्तों, प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता , पूर्व सेवा अवधि के स्वत्व के लाभ को लेकर प्रदेश भर के अध्यापकों ने जबलपुर हाईकोर्ट सहित इंदौर, ग्वालियर बेंच में याचिकाएं दायर की हैं।

भोपाल के 126 अध्यापकों ने लगाई है याचिका

राजधानी भोपाल से ही अध्यापक संगठन से जुड़े उपेंद्र काैशल, जितेंद्र शाक्य, शीबा खान सहित 126 अध्यापकों ने नए कैडर में नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। प्रदेश में अभी तक 2000 हजार से ज्यादा अध्यापक न्यायालय में याचिका लगा चुके है।

अध्यापकों की यह है मांग

नियुक्ति के स्थान पर संविलियन, प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता एवं स्वत्वों के लाभ तथा विकल्प पत्र की अनिवार्यता समाप्त की जाए आदि प्रमुख मांगें हैं।

मंत्रि-परिषद द्वारा दतिया शहर को नगर तहसील बनाने के निर्णय का दतियावासियों ने स्वागत किया। इस निर्णय के लिये दतिया के नागरिकों ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और जनसम्पर्क, जल-संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र का आभार व्यक्त किया। नागरिकों का कहना है कि अब वृहत्तर और विकसित दतिया देखने को मिलेगा।

दतिया में शेष पुनर्गठित तहसील दतिया (ग्रामीण) होगी। इस निर्णय के फलस्वरूप दतिया नगर का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा और यहाँ नगरीय क्षेत्र के विस्तार से नगर निगम के लिए मान्य मापदण्ड लागू होंगे। आगामी एक जनवरी 2019 से नव-सृजित तहसील अस्तित्व में आयेगी।

उल्लेखनीय है कि गत दस वर्ष में दतिया का निरंतर विकास हुआ है। नवीन मेडिकल कॉलेज, नवीन कलक्ट्रेट भवन, पत्रकारिता विश्वद्यालय परिसर, हवाई पट्टी, रेल्वे ओवरब्रिज और अन्य अनेक उपलब्धियों से दतिया का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हुआ है।

भोपाल। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने हाल ही में आरक्षण को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। इसके बाद कई दिग्गज नेता भी आरक्षण पर टिप्पणी कर रहे हैं। महाजन के बाद अब मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी दोहराया है कि आरक्षण दस वर्षों के लिए दिया गया था। इसलिए नए सिरे से इस पर विचार होना चाहिए।


इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी आरक्षण पर बयान दिया है। आरक्षण पर पहले ही बवाल चल रहा है, जबकि कई पार्टियां इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रही है। ऐसे में बीजेपी सांसदों के इन बयानों को काफी अहम माना जा रहा है।


 


आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सांसद कुलस्ते ने कहा कि पूर्व में जब आरक्षण लागू हुआ था, तब दस सालों के लिए दिया गया था। अब समय भी बदल गया है और स्थिति भी बदल गई है। ऐसे में अब पुनः आरक्षण पर विचार होना चाहिए।


 


मंत्री शुक्ल बोले सब ठीक हो जाएगा
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एस्ट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया है। शुक्ल ने कहा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।



महाजन की टिप्पणी से गर्माई राजनीति
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर की सांसद एवं लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी एक बयान जारी कर राजनीति गर्मा दी है। महाजन ने आरक्षण पर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरक्षण की जरूरत सिर्फ दस सालों के लिए थी। उन्होंने दस सालों के भीतर समतामूलक समाज की कल्पना की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। अब भी हम हर दस सालों पर इसे अगले दस सालों के लिए बढ़ा देते हैं।


भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। टिकट के दावेददार आलाकमान के सामने दावेदारी पेश कर रहे हैं। कांग्रेस में उम्मीदवारों का चयन दिल्ली में होना है। रविवार से दिल्ली में टिकट को लेकर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक भी चल रही है। लेकिन नीमच जिले में किसे टिकट के दावेदारों की एक लंबी फेहरिस्त है। जिले में तीन विधआन सभा सीटें हैं। मनासा, नीमच और जावद। 2013 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो जिले की तीनोंही सीटों में भाजपा ने कब्जा किया था। लेकिन इस बार सवर्णों का विरोध और सरकार के खिलाफ तेज होते विरोध को देखकर कई दावेदार टिकट केलिए जोर लगा रहे हैं। वहीं, दावेदारों की इमेज जिले में गुटबाजी के रूप में भी बांटी है। किी को सिंधिया गुट का माना जाता है तो किसी को कमलनाथ गुट इसके अलावा भी प्रदेश के कई बड़े नेता हैं जिन्हें गुट का नाम दिया जा रहा है।


 


सर्वे होगी प्राथमिकता: कांग्रेस में टिकटों का वितरण सर्वे के आधार पर किया जाएगा। पीसीसी ची कमलनाथ खुद कह चुके हैं कि सर्वे के आधार पर टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस ने टिकट वितरण से पहले कर्नाटक और गुजरात की दो निजी एजेंसियों से सर्वे करया है वहीं, पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अपने स्तर से भी एक सर्वे कराया है। सर्वे में जिन नेताओं का नाम है वो थोड़ी राहत की सांस ले रहे हैं लेकिन जिनका नाम सर्वे में नहीं हो वो गुटबाजी के सहारे टिकट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। नीमच जिले में ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीसीसी चीफ कमलनाथ, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मिनाक्षी नटराजन के नाम सामने आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि टिकटों का वितरण भी इन्हीं नेताओं की आपसी सहमति के साथ किया जाएगा। कमलनाथ जी से जुड़े दो प्रमुख दावेदार हैं नीमच जिले से उमराव गुर्जर और जावद सीट से राजकुमार अहीर का नाम माना जा रहा है वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे में नीमच से समीप चौधरी, जावद से समंदर पटेल और मनासा से विजु बना को दावेदार माना जा रहा है। जबकि दिग्विजय सिंह से गुट से नीमच से नंदू पटेल, मधु बंसल, अनिल चौरसिया और मनासा से इन्दरमल पामेचा का नाम प्रमुख रूप से आता है। वहीं, मीनाक्षी नटराजन और और अजय सिंह के खेमे से से भी कई दावेदा हैं।


नीमच जिले की तीन सीटों पर 10 से ज्यादा दावेदार हैं इसके अलावा खूब लोग अंदर से भी टिकट लेने के जुगाड़ में हैं। हालांकि की एक बात यह भी तय है कि जो दावेदार खुद को गुटों से जुड़ा बता रहे हैं वो सभी नेताओं के सपर्क में हैं। ऐसे कांग्रेस को यहां टिकट देने से पहले जागतिगत समीकरण पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि दावेदारों के अलावा यहां से अगड़ा, पिछड़ा, दलित, स्वर्ण, अल्पसंख्यक, महिला जैसे भी समीकरण हैं।



2013 के परिणाम
नीमच विधानसभा सीट से भाजपा के दिलीप सिंह परिहार ने जीत दर्ज की थी। 
मनासा से भाजपाके कैलाश चावला ने जीत दर्ज की थी।
जवाद से विधानसभा सीट से भाजपा के ओमप्रकाश सकलेचा ने जीत दर्ज की थी।



भोपाल. विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए कई समाजिक संगठनों की नाराज मुश्किलें खड़ी कर सकी है। चुनाव से पहले शिवराज सिंह नाराज समाज के लोगों को मनाने की कवायद में जुट गए हैं। उन्होंने सोमवार को राजधानी भोपाल में कलार समाज के महासम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, प्रदेश के विकास और उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने में कलार समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आप बच्चों को स्वरोजगार और उद्यम के लिए प्रेरित करेंं। मेरा मानना है कि कलार समाज एक समिति गठित करे जो बच्चों, विद्यार्थियों और युवाओं की शिक्षा व उद्यम के लिए बनी शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रेरित करे और जरूरतमंद को सहायता प्रदान करे। उन्होंने कहा, बड़ी सफलता की शुरुआत हमेशा छोटे से ही होती है। इसी मंत्र को हमें आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना है। मैंने भी सिर्फ एक मित्र के साथ अपनी पहली यात्रा शुरू की, लेकिन जब समापन हुआ तो 7 हजार लोग मौजूद थे और मुझे सुन रहे थे।


मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अबकी बार भाजपा ने 200 पार का नारा दिया है, लेकिन सरकार के खिलाप बढ़ता विरोध और सवर्णों की नाराजगी के कारण बीजेपी मुश्किलों के बीच खड़ी दिखाई दे रही है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से ही बीजेपी को सामान्य वर्ग के लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में सवर्ण समाज लगातार केंद्र और शिवराज सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर कर रहा है। प्रदेश में सवर्णों का सरकार के प्रति आक्रोश का सीधा प्रभाव प्रदेश की 148 सीटों पर पड़ता है, जिसके चलते अब सीएम शिवराज लगातार सवर्णों के गुस्से को कम करने की कोशिश में लगे हैं। इसी कड़ी में शिवराज सिंह चौहाननाराज समाज के लोगों के मनाने के लिे खुद समाज के प्रतिनिधियों से बात करने पर जोर दे रहे हैं।


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