बिहार में भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों के लिए दलितों का आंदोलन चुनौती भरा साबित हो सकता है. बिहार के कई गांवों में दलित समाज के लोगों का सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एकजुट होना पार्टी के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है. भाजपा यह कह कर पल्ला नहीं झाड़ सकती है कि मसला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है क्योंकि गांव तक यह बात फैल चुकी है कि इसके लिए मोदी सरकार ही दोषी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दलितों की नाराजगी दूर करने का मास्टर प्लान तैयार करना होगा.
हर प्रदर्शन में दिखा केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा
भाजपा के लिए चुनौती है दलितों की नाराजगी से निपटनासुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आयोजित भारत बंद में गाहे-बगाहे सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भले नारेबाजी की घटनाएं सामने आई होंगी लेकिन हर जगह से मोदी सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी की आवाज़ें आ रही थी. राजधानी पटना से लेकर सुदूर देहातों में आयोजित विरोध प्रदर्शनों में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी. दलित बिरादरी के लोगों का गुस्सा मोदी सरकार के खिलाफ ही ज्यादा था. साफ है कि गांवों तक यह संदेश पहुंचाने में विपक्षी पार्टियां सफल हो गई कि इस स्थिति के लिए सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेवार है. सुदूर देहात में भी हो रहे विरोध प्रदर्शनों में लोग केंद्र सरकार को ही कोस रहे थे. हर प्रदर्शनकारी को यह भले पता न था कि वह क्यों प्रदर्शन में शामिल हुआ है लेकिन केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में विपक्षी पार्टियां कामयाब जरूर हुई हैं.
पहले भी खड़ी हो चुकी है परेशानी
बिहार में संपन्न हुए पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त भी दलितों का मुद्दा प्राइम फैक्टर रहा था. उसी समय संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी एक बयान ने आग लगाने का काम किया था. महागठबंधन मोहन भागवत के बयान को आरक्षण खत्म किए जाने से जोड़ने में सफल रहा और वोटों का ध्रुवीकरण भी जबरदस्त रूप देखने को मिला था. उसी विधानसभा चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गोलवलकर की किताब लेकर घूमते रहे थे. उस किताब ने भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी क्योंकि लालू प्रसाद अपने आधार मतदाताओं को यह समझाने में सफल हो गए थे कि भारतीय जनता पार्टी यदि मजबूत होगी तो आरक्षण को खत्म किया जा सकता है.
एक बार फिर दलितों को भाजपा के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों की नजर में भारत बंद एससी एसटी एक्ट से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आयोजित किया गया था लेकिन जिस तरह तमाम विपक्षी पार्टियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया उसे साफ संकेत मिल रहा है कि दलित बिरादरी को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ खड़ा करने की हर संभव कोशिश विपक्षी दलों के द्वारा की जा रही है. भारतीय जनता पार्टी के पास सर्वाधिक दलित सांसद और दलित विधायक हैं लेकिन गाहे-बगाहे भाजपा को दलितों का विरोधी भी बताया जाता रहा है.
भाजपा को करना होगा डैमेज कंट्रोल
बिहार में भारतीय जनता पार्टी को दलितों में वयाप्त आक्रोश को शांत करने के लिए डैमेज कंट्रोल की नीति पर चलना ही पड़ेगा. भाजपा नेताओं को दलित बिरादरी में अपनी पैठ बरकरार रखने के लिए खासी मेहनत भी करनी पड़ेगी.

मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को भौंरी में आयोजित पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में शिरकत की और उप पुलिस अधीक्षक एवं उप निरीक्षक के संयुक्त दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह के मौके पर परेड का निरीक्षण करके उसकी सलामी ली। परेड कमांडर का दायित्व उप-पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया संभाल रही थीं। अपने संबोधन में चौहान ने कहा- पुलिस की नौकरी देशभक्ति और जनसेवा का एक संकल्प है। आज से पुलिस बल में शामिल हो रहे अधिकारी अपनी पूरी क्षमता से राज्य की कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाएं और जनता के मन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करें। 
शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री ने आगे कहा- हम सब मिलकर प्रदेश को देश और दुनिया का सबसे उत्तम राज्य बनाएंगे। अधिकारी पूरी प्रामाणिकता से जनता की सेवा करें। प्रदेश में पुलिस बल की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इस साल भी आठ हजार नए सिपाही भर्ती किए जाएंगे। चौहान ने समारोह में प्रशिक्षण के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को पुरस्कृत किया और पुलिस हित मेन्युअल-2017 का विमोचन भी किया। इस दीक्षांत समारोह में पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला सहित एडीजी, आईजी और दूसरे अफसर भी मौजूद थे। 

दीक्षांत समारोह में मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक सुशोभन बनर्जी ने मुख्यमंत्री को पत्र दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि एक साल के अंदर अकादमी में 832 पुलिस अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण दिया गया है। परेड में 21 महिलाओं सहित 26 पुरुष उप-पुलिस अधीक्षक ने हिस्सा लिया। दीक्षांत परेड में उप-पुलिस अधीक्षक का 37वां और उप निरीक्षक वर्ग का 90वां बैच था। बनर्जी ने बताया कि पुलिस अकादमी भोपाल और डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू (इंदौर) के बीच समझौता हुआ है। जिसमें अकादमी में उप-पुलिस अधीक्षक वर्ग के प्रशिक्षण को विश्वविद्यालय मास्टर डिग्री की उपाधि देगा।

मंथन न्यूज भोपाल
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रतिबंधों को शिथिल कर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के लिए 84 पद, जिला निर्वाचन कार्यालयों के लिए 408 तथा रिटर्निंग आफिसर कार्यालयों के लिए 1150 पद कुल 1642 पदों की एक दिसंबर 2017 से 28 फरवरी 2019 तक निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर इन पदों को भरने की अनुमति दी गयी।

मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग के तहत 'बडे पशुओं की उत्प्रेरण योजना' और 'छोटे पशुओं एवं पक्षियों की उत्प्रेरण योजना ' को एक अप्रैल 2017 से आगामी 3 वर्ष तक निरंतर रखने की अनुमति दी। इसी प्रकार, मंत्रि-परिषद ने एमपीएसआईडीसी के कर्जदारों के भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 से वर्ष 2018-19 में कुल राशि 44 करोड़ 32 लाख रूपये का व्यय अनुमानित करते हुये योजना का क्रियान्वयन इस अवधि के लिए निरंतर रखने का निर्णय लिया है। मंत्रि-परिषद ने केन्द्रीय जेल भोपाल में सुरक्षा के लिए हाईसिक्युरिटी यूनिट के तहत 120 पदों के सृजन की मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने लहसुन फसल के लिए वर्ष 2018-19 में भावांतर नीति लागू करने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद द्वारा इंदौर प्रेस क्लब परिसर को लोक निर्माण विभाग की पुस्तिका में विभाग के स्वामित्व का भवन मानते हुए अंकित करने का भी निर्णय लिया गया। इसमें कुल क्षेत्रफल 2281.08 वर्ग मीटर तथा कुल बिल्टअप एरिया 1634.20 वर्ग मीटर एवं अस्थायी शेड 400 वर्ग मीटर मान्य करते हुए सम्पूर्ण बिल्टअप एरिया को शामिल किया गया है।

अब प्रेस क्लब उल्लेखित भूमि के अतिरिक्त किसी अन्य भूमि पर अतिक्रमण अथवा दावा नहीं कर सकेगा। उपरोक्त उल्लेखित भवनों के संधारण की जिम्मेदारी प्रेस क्लब की होगी। भवन का किराया एक अप्रैल 2018 के बाद बाजार दर से निर्धारित होने वाले किराये का 10 प्रतिशत होगा।

police passing out mp 201843 7410 02 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -पुलिस और होमगार्ड की नौकरी में आने के लिए जनसेवा की शपथ लेने वाले अधिकारियों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जनता से अच्छा व्यवहार करें। दिमाग को शांत रखकर लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपराधियों में अपना खौफ पैदा करें। इसके लिए थाने में बैठकर काम नहीं चलेगा, सड़क पर उतरना पड़ेगा। भौंरी स्थित मप्र पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में आयोजित दीक्षांत समारोह में 832 नवागत डीएसपी, होमगार्ड जिला सेनानी व सूबेदार-सब इंस्पेक्टर को सीएम ने अपना संदेश दिया। यहां परेड कर सीएम को सलामी दी गई।
हालांकि एक कुत्ते की वजह से दो बार परेड रोकनी भी पड़ी। यहां मुख्यमंत्री ने श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अफसरों को सम्मानित भी किया। डीएसपी में आलराउंडर नेहा पच्चिसिया रहीं, उन्होंने परेड का नेतृत्व भी किया। उनके अलावा डीएसपी पीएस परस्ते, उप निरीक्षक-सूबेदारों में रितुराज वारिया, नीलिमा गुर्जर, जागेश्वरी गौड़, चंचला सोनी, संदीप नामदेव, सत्यभान सेंगर, अमित निर्मे, तरुण कुमार सहारे व नीतीश पटेल शामिल हैं। समारोह में मप्र पुलिस अकादमी के प्रभारी एडीजी सुशोभन बनर्जी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डीएसपी का यह 37वां बैच है, जिसकी ट्रेनिंग हुई है।
सीएम ने दिया चार सूत्र का मंत्र
मुख्यमंत्री ने अफसरों को सफलता मंत्र 'पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ' भी दिया। उन्होंने कहा कि पांव में चक्कर का मतलब थाने में बैठकर काम नहीं चलेगा, सड़क पर उतरना पड़ेगा। कार्यक्षेत्र में घूमना पड़ेगा, जिससे अपराधियों में खौफ बने। मुंह में शक्कर का मतलब जनता के साथ मिल-जुलकर रहें और अच्छा व्यवहार करें। वे बोले- सीने में यह आग होना चाहिए कि गुंडे-बदमाश, अपराधियों, डकैतों, छेड़छाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाए। माथे पर बर्फ को के बारे में बताया कि हमेशा संयमित रहें।
खेतीहर मजदूर ने एम.टेक बेटे को उधारी लेकर बनाया डीएसपी
मप्र को मिल रहे नए 45 डीएसपी, दो जिला सेनानी और 785 सूबेदार-उप निरीक्षकों में से ज्यादातर गरीब परिवारों से हैं। डीएसपी में श्रेष्ठ पुरस्कार पाने वाले पुन्नू सिंह परस्ते को तो परिवार वालों ने मजदूरी करके एम. टेक की पढ़ाई कराई। यही नहीं, उन्होंने खुद गाय-भैंस तक चराकर परिवार का साथ दिया है।
पुन्नू सिंह बताते हैं कि उनके परिवार ने काफी गरीबी में उन्हें पढ़ाया। एम.टेक करने से लेकर पीएससी की तैयारी करने तक के लिए उनके परिवार ने कर्ज लिया। एक बार इंदौर में वे पढ़ाई के सिलसिले में गए। उनके पास 3 या 4 हजार की व्यवस्था थी, लेकिन कमरा-खाने-पीने का खर्च काफी ज्यादा था। परस्ते ने बताया कि वे तो निराश हो गए थे और परिवार वालों से कह दिया था कि मैं तो यहां नहीं पढ़ सकता। वापस आ रहा हूं। इस पर उनके बड़े भाई ने 11 हजार रुपए उधार लेकर भिजवाए।
परस्ते की मां हल्की बाई से जब पूछा गया कि बेटे के पुलिस की नौकरी में आने पर कैसा महसूस हो रहा है तो वे कुछ बोल ही नहीं पाईं। बेटे की वर्दी पर गौरवांवित महसूस कर रहीं हल्की बाई ने पुन्नू सिंह से कहा 'तू ही बता"। यह कहकर वे चुप हो गईं।
खुशी के आंसू छलके, कहा- बेटी पर गर्व है
राजगढ़ जिले के पचोर की 2013 बैच की डीएसपी नेहा पच्चिसिया को दीक्षांत समारोह परेड का नेतृत्व करते देख उनके शिक्षक पिता अशोक की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि मेरी चार बेटियां हैं और मुझे उन पर गर्व है। नेहा पचोर की पहली बेटी थी, जिसने कस्बे के बाहर ब्यावरा, राजगढ़, शाजापुर में जाकर पढ़ाई की।
नेहा से छोटी वैशाली शिकागो में राज्य सरकार की 80 लाख रुपए की स्कॉलरशिप लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने गई है। वहीं अंग्रेजी से एमए करने वाली नेहा ने कहा कि उनके गांव में बेटियों की जल्दी शादी कर दी जाती थी, लिहाजा पढ़ाई के लिए काफी विरोध का सामना करना पड़ा। नेहा कहती हैं कि वे डीएसपी बनने के बाद अब यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं और आईपीएस बनना उनका लक्ष्य है।

मंथन न्यूज़ दिल्ली -SC/ST एक्ट में हुए बदलावों के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर कहा, 'अदालत के बाहर क्या हो रहा है इससे कोर्ट का कोई लेना देना नहीं है.' बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाने को कहा था. इस फैसले के खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार याचिका डाली थी.फाइल फोटो
जारी रहेगा मुआवजा मिलना
पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन साथ ही यह बात भी साफ की है कि इस कानून के तहत मुआवजा मिलना पहले की तरह जारी रहेगा. FIR दर्ज होने से पहले भी मुआवजा दिया जा सकता है. कोर्ट ने इस मामले में सभी पार्टियों से अगले दो दिनों में विस्तृत जवाब देने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि, जो लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं उन लोगों ने कोर्ट के फैसले को पढ़ा तक नहीं है. उनमें से बहुत से लोग ऐसे हैं जो इसका फायदा उठाना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि समाज के निचले तबके के कमजोर लोगों के हितों की रक्षा करना कोर्ट की जिम्‍मेदारी है. इसका यह मतलब नहीं कि निर्दोष लोगों को सजा हो जाए और कोर्ट इस बारे में अपनी आंखें बंद रखें. कोर्ट ने कहा, अनुसूचित जाति/जनजाति कानून को निर्दोष लोगों को डराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट एक्‍ट के खिलाफ नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के खिलाफ नहीं है और न ही किसी भी तरह से अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के प्रावधानों को कमजोर किया है. बल्कि सिर्फ इस बात की व्यवस्था की है कि इसकी वजह से कोई निर्दोष गिरफ्तार नहीं हो.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि कोई आप के खिलाफ झूठा आरोप लगा दे और आपकी गिरफ्तारी हो जाए तब क्या होगा. तब आप अपना काम किस तरह से करेंगे. इसीलिए कोई भी कानून ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें निर्दोष लोगों को सजा हो जाए.
इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी सहित कई दूसरे लोगों ने भी अपनी तरफ से पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, लेकिन आज उन पर सुनवाई नहीं हुई. कोर्ट ने कहा कि उन लोगों की दलीलों पर कोर्ट 10 दिन बाद सुनवाई करेगा.
बता दें कि सोमवार को दलित संगठनों ने SC/ST एक्ट में हुए बदलावों के खिलाफ भारत बंद बुलाया था. इस दौरान देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि हज़ारों-करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हो गया है. इस मामले में कई राज्यों की पुलिस ने हज़ारों अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है.
आपको बता दें कि इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, थावरचंद गहलोत सहित कई सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात भी की थी. लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को ही रिव्यू पीटीशन डाली थी.

मंथन न्यूज़ भोपाल -चुनावी साल में राज्य सरकार ने भारी भरकम भर्तियों की घोषणा तो कर दी, लेकिन इससे सरकार के खजाने पर भी भारी भरकम बोझ आएगा। यदि सभी 89 हजार पदों पर भर्ती होती है तो इन अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतनभत्तों से सरकार पर लगभग 1350 करोड़ रुपए का सालाना बोझ आएगा। हालांकि भर्तियां प्रक्रिया इसी साल पूरी होने की उम्मीद कम ही है।
राज्य सरकार ने अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 साल करने के बाद युवाओं का गुस्सा शांत करने के लिए 89 हजार भर्तियों का एलान किया था। इसमें पटवारी, नायब तहसीलदार, शिक्षक, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, एएनएम, होमगार्ड, पुलिस कांस्टेबल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इनमें से कई पदों पर भर्ती के लिए जुलाई-अगस्त में परीक्षाएं हो सकती हैं।
vallabh-bhawan 03 04 2018गौरतलब है कि सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और हर साल कई कामों के लिए राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लेना पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक इस साल जुलाई-अगस्त तक कई पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं तो शुरू हो जाएंगी, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल का समय लग सकता है। गौरतलब है कि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) परीक्षा करवाने के लिए करीब तीन महीने का समय लेता है और अभी किसी विभाग ने बोर्ड को परीक्षा के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा है।
सरकार पर ऐसे बढ़ेगा बोझ (खर्च सालाना रुपए में)
पद भर्ती वेतन पर खर्च
पटवारी 9,500 285 करोड़
नायब तहसीलदार 400 19 करोड़ 20 लाख
संविदा शिक्षक 60,000 550 करोड़
चिकित्सक 1,300 93 करोड़ 60 लाख
पैरामेडिकल स्टाफ 700 25 करोड़ 20 लाख
नर्स 1,053 37 करोड़ 90 लाख
एएनएम 500 21 करोड़
होमगार्ड 4,000 76 करोड़ 80 लाख
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 3,300 31 करोड़ 80 लाख
पर्यवेक्षक 700 16 करोड़ 80 लाख
कांस्टेबल 8,000 192 करोड़
कुल 89,453 1,350 करोड़

मंथन  न्यूज़ भोपाल - राज्य की नई मुकदमा नीति को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके अलावा सरकार ने सभी विभागों में लीगल एक्सपर्ट रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। वहीं इंदौर प्रेस की जमीन को पीडब्ल्यूडी के अधीन करने का भी फैसला किया गया।
shivraj cabinet 03 04 2018मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की नई मुकदमा नीति को भी हरी झंडी दी गई। राज्य सरकार जिन मामलों में पक्षकार हैं उन मामलों में और प्रकरणों की जल्द सुनवाई और छोटे-छोटे प्रकरणों के लिए शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने का फैसला किया है। ये प्रकोष्ठ कर्मचारियों से जुड़े मामलों की शिकायत का निवारण भी करेगा। सरकार ने सभी विभागों में लीगल एक्सपर्ट रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद लीगल ओपिनियन के लिए हर मामला विधि विभाग को नहीं भेजा जाएगा। वहीं लापरवाही बरतने वाले सरकारी वकील-अधिकारी अन्य को चिन्हित करने की व्यवस्था भी नई मुकदमा नीति में रखी गई है।
वापस होगी सिक्यूरिटी मनी
सरकार ने ये भी तय किया कि जो रेत खदानें लोगों को स्वीकृत हो गई थी और किसी वजह से संचालित नहीं हो पा रही हैं, ऐसे सभी 33 लोग या समूह की सिक्यूरिटी मनी भी वापस कर दी जाएगी।
नए पद मंजूर
एक अन्य फैसले में तय किया गया कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के लिए 1600 पद निर्माण किया जाएगा। सेंट्रल जेल भोपाल में सिमी के कैदियों की सुरक्षा के मद्देनजर हाई सिक्योरिटी यूनिट के लिए 120 पद मंजूर किए गए।
लहसुन भी भावांतर में
सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला करते हुए लहसुन को भी भावांतर योजना में शामिल किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि लहसुन की फसल भावंतर योजना में खरीदी जाएगी। किसान को कम से कम 800 रु. का लाभ हो ऐसी व्यवस्था है।
इंदौर प्रेस क्लब की जमीन PWD के अधीन
कैबिनेट ने इंदौर प्रेस क्लब की जमीन के विवाद को सुलझाने को लेकर भी फैसला किया। अब इंदौर प्रेस क्लब का भवन लोक निर्माण विभाग की भवन पुस्तिका में दर्ज होगा। प्रेस क्लब को अब बाजार रेट से 10 फीसदी किराया भी देना होगा। सरकार ने ये फैसला प्रेस क्लब से चर्चा के बाद कैबिनेट बैठक में किया।
कानून व्यवस्था को लेकर निर्देश
कैबिनेट मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी मंत्रियों के साथ कानून व्यवस्था के मद्देनजर अनौपचारिक तौर पर चर्चा की। इसमें भिंड, मुरैना, ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य अंचलों में दलित समाज के आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर चर्चा की गई। सीएम ने सभी मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के साथ और सभी वर्गों के बीच संवाद करने के निर्देश दिए।

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