मंथन न्यूज़ भोपाल -पुलिस और होमगार्ड की नौकरी में आने के लिए जनसेवा की शपथ लेने वाले अधिकारियों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जनता से अच्छा व्यवहार करें। दिमाग को शांत रखकर लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपराधियों में अपना खौफ पैदा करें। इसके लिए थाने में बैठकर काम नहीं चलेगा, सड़क पर उतरना पड़ेगा। भौंरी स्थित मप्र पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में आयोजित दीक्षांत समारोह में 832 नवागत डीएसपी, होमगार्ड जिला सेनानी व सूबेदार-सब इंस्पेक्टर को सीएम ने अपना संदेश दिया। यहां परेड कर सीएम को सलामी दी गई।
हालांकि एक कुत्ते की वजह से दो बार परेड रोकनी भी पड़ी। यहां मुख्यमंत्री ने श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अफसरों को सम्मानित भी किया। डीएसपी में आलराउंडर नेहा पच्चिसिया रहीं, उन्होंने परेड का नेतृत्व भी किया। उनके अलावा डीएसपी पीएस परस्ते, उप निरीक्षक-सूबेदारों में रितुराज वारिया, नीलिमा गुर्जर, जागेश्वरी गौड़, चंचला सोनी, संदीप नामदेव, सत्यभान सेंगर, अमित निर्मे, तरुण कुमार सहारे व नीतीश पटेल शामिल हैं। समारोह में मप्र पुलिस अकादमी के प्रभारी एडीजी सुशोभन बनर्जी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डीएसपी का यह 37वां बैच है, जिसकी ट्रेनिंग हुई है।
सीएम ने दिया चार सूत्र का मंत्र
मुख्यमंत्री ने अफसरों को सफलता मंत्र 'पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ' भी दिया। उन्होंने कहा कि पांव में चक्कर का मतलब थाने में बैठकर काम नहीं चलेगा, सड़क पर उतरना पड़ेगा। कार्यक्षेत्र में घूमना पड़ेगा, जिससे अपराधियों में खौफ बने। मुंह में शक्कर का मतलब जनता के साथ मिल-जुलकर रहें और अच्छा व्यवहार करें। वे बोले- सीने में यह आग होना चाहिए कि गुंडे-बदमाश, अपराधियों, डकैतों, छेड़छाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाए। माथे पर बर्फ को के बारे में बताया कि हमेशा संयमित रहें।
खेतीहर मजदूर ने एम.टेक बेटे को उधारी लेकर बनाया डीएसपी
मप्र को मिल रहे नए 45 डीएसपी, दो जिला सेनानी और 785 सूबेदार-उप निरीक्षकों में से ज्यादातर गरीब परिवारों से हैं। डीएसपी में श्रेष्ठ पुरस्कार पाने वाले पुन्नू सिंह परस्ते को तो परिवार वालों ने मजदूरी करके एम. टेक की पढ़ाई कराई। यही नहीं, उन्होंने खुद गाय-भैंस तक चराकर परिवार का साथ दिया है।
पुन्नू सिंह बताते हैं कि उनके परिवार ने काफी गरीबी में उन्हें पढ़ाया। एम.टेक करने से लेकर पीएससी की तैयारी करने तक के लिए उनके परिवार ने कर्ज लिया। एक बार इंदौर में वे पढ़ाई के सिलसिले में गए। उनके पास 3 या 4 हजार की व्यवस्था थी, लेकिन कमरा-खाने-पीने का खर्च काफी ज्यादा था। परस्ते ने बताया कि वे तो निराश हो गए थे और परिवार वालों से कह दिया था कि मैं तो यहां नहीं पढ़ सकता। वापस आ रहा हूं। इस पर उनके बड़े भाई ने 11 हजार रुपए उधार लेकर भिजवाए।
परस्ते की मां हल्की बाई से जब पूछा गया कि बेटे के पुलिस की नौकरी में आने पर कैसा महसूस हो रहा है तो वे कुछ बोल ही नहीं पाईं। बेटे की वर्दी पर गौरवांवित महसूस कर रहीं हल्की बाई ने पुन्नू सिंह से कहा 'तू ही बता"। यह कहकर वे चुप हो गईं।
खुशी के आंसू छलके, कहा- बेटी पर गर्व है
राजगढ़ जिले के पचोर की 2013 बैच की डीएसपी नेहा पच्चिसिया को दीक्षांत समारोह परेड का नेतृत्व करते देख उनके शिक्षक पिता अशोक की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि मेरी चार बेटियां हैं और मुझे उन पर गर्व है। नेहा पचोर की पहली बेटी थी, जिसने कस्बे के बाहर ब्यावरा, राजगढ़, शाजापुर में जाकर पढ़ाई की।
नेहा से छोटी वैशाली शिकागो में राज्य सरकार की 80 लाख रुपए की स्कॉलरशिप लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने गई है। वहीं अंग्रेजी से एमए करने वाली नेहा ने कहा कि उनके गांव में बेटियों की जल्दी शादी कर दी जाती थी, लिहाजा पढ़ाई के लिए काफी विरोध का सामना करना पड़ा। नेहा कहती हैं कि वे डीएसपी बनने के बाद अब यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं और आईपीएस बनना उनका लक्ष्य है।

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