मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने नए अध्यक्ष की ताजपोशी के साथ ही चुनावी बिसात पर अपनी चाल चलना शुरू कर दिया है और ऐलान किया कि उसकी विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. लेकिन प्रदेश में कांग्रेस अभी भी चेहरे के संकट से जूझ रही है.

दरअसल, गुजरात चुनाव में BJP के लिए मुश्किलें खड़ा करने वाला राहुल गांधी का फॉर्मूला एमपी में कब लागू होगा, इसको लेकर लगी अटकलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, आलम ये है कि चुनाव से पहले पार्टी का चेहरा और जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रही है.
कांग्रेस ने छह महीने पहले संकेत दिए थे कि प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर अलग-अलग समितियों का गठन कर पार्टी के दिग्गज नेताओं की जिम्मेंदारी तय की जाएगी, लेकिन बताया जा रहा है कि लंबा समय बीतने के बाद अब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में मायूसी बढ़ने लगी है.
जिस फार्मूले को कांग्रेस प्रदेश में लागू करने का मन बन रही है, उसके तहत प्रदेश में चार से पांच कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी थी, इसके लिए कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह समेत सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया को जिम्मेदारी देना तय माना जा रहा था, लेकिन पार्टी अभी ये तय नहीं कर पा रही है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं में किसे कौन सी जिम्मेंदारी सौपी जाए.

दरअसल, गुजरात चुनाव में BJP के लिए मुश्किलें खड़ा करने वाला राहुल गांधी का फॉर्मूला एमपी में कब लागू होगा, इसको लेकर लगी अटकलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, आलम ये है कि चुनाव से पहले पार्टी का चेहरा और जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रही है.
कांग्रेस ने छह महीने पहले संकेत दिए थे कि प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर अलग-अलग समितियों का गठन कर पार्टी के दिग्गज नेताओं की जिम्मेंदारी तय की जाएगी, लेकिन बताया जा रहा है कि लंबा समय बीतने के बाद अब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में मायूसी बढ़ने लगी है.
जिस फार्मूले को कांग्रेस प्रदेश में लागू करने का मन बन रही है, उसके तहत प्रदेश में चार से पांच कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी थी, इसके लिए कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह समेत सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया को जिम्मेदारी देना तय माना जा रहा था, लेकिन पार्टी अभी ये तय नहीं कर पा रही है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं में किसे कौन सी जिम्मेंदारी सौपी जाए.
वहीं चुनावी बिसात पर कांग्रेस के मुकाबले अपनी तेज चलने वाली बीजेपी कांग्रेस में मचे घमासान पर खुश नजर आ रही है. चुनाव के सात महीने पहले बीजेपी ने नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कर कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार कर दिया है. लेकिन कांग्रेस अभी तक चुनावी मोड में नजर नहीं आ रही

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