मेडिकल कॉलेजों में अपनों की हो रही भर्ती, बेटे-बहू तक को बांट दी नौकरी

मंथन न्युज भोपाल-प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती सवालों के घेरे में है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 76 पदों के लिए हुए साक्षात्कार में आइएएस, विभागाध्यक्षों, प्रोफेसर्स और बड़े चिकित्सकों के बेटा-बेटी तथा बहू का चयन कर लिया गया। प्रदेश के कुछ कॉलेजों में भर्ती कर ली गई है तो कुछ में इसकी तैयारी चल रही है।

एमसीआइ के नियमों के मुताबिक भर्ती में उस संस्थान में काम कर रहे योग्य अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जानी है, लेकिन ज्यादातर कॉलेजों ने खुली भर्ती कर चहेतों के चयन का रास्ता खोज लिया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राधेश्याम जुलानिया ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को भर्ती नियमों की जानकारी दी थी।

इसमें कहा था कि पहले संस्था स्तर पर ही नियुक्ति की जाएगी। न्यूनतम एक साल तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य करना अनिवार्य होगा। प्रदेश के ज्यादातर कॉलेजों ने अपने हिसाब से विज्ञापन जारी कर दिए।
गा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे समझे फर्जीवाड़े का फायदा


एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शनिवार तक चले साक्षात्कार के बाद बनी चयन सूची में कॉलेज और शहर के लगभग सभी प्रमुख चिकित्सकों के रिश्तेदारों के नाम हैं। कॉलेज डीन डॉ. शरद थोरा के बेटे अंकित का हड्डी रोग और बहू आकांक्षा का महिला रोग एवं प्रसूति विभाग में चयन किया गया है।


आईएएस अफसरों के बच्चों में मिताक्षरा शर्मा और प्रियंका कियावत का नाम है। दंपती डॉक्टर डॉ. राजकुमार माथुर और डॉ. पूनम माथुर के बेटे राहत का मानसिक रोग विभाग और बेटी पूजा माथुर का महिला रोग व प्रसूति विभाग में चयन हुआ है। डॉ. अशोक वाजपेयी, डॉ. आरके मूंदड़ा, डॉ. प्रदीप भार्गव के बेटा-बेटी और बहू का नाम भी चयन सूची में है।रा जधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापकों के 51 और डेमोंस्ट्रेटर के 16 पदों पर नियुक्ति की जानी है।


यहां मेडिकल कॉलेजों में पहले से कार्यरत प्राध्यापकों और वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदारों को नियुक्त करने की कवायद चल रही है। बाहरी लोगों के लिए भी पात्रता होने से निजी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्त करने की तैयारी है। ऐसे में सीटों की खरीदी बिक्र ी होने के भी आरोप लगने शुरू हो गए हैं। शिवपुरी और दतिया मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के दौरान जमकर गड़बडिय़ां हुई हैं।


शिवपुरी में अभी तक 54 पदों पर नियुक्ति हो चुकी है। इनमें ग्वालियर और इटावा के अलावा झारखंड और अन्य राज्यों के डॉक्टरों की भी भर्ती कर दी गई। नियुक्त हुए ज्यादातर अभ्यार्थियों में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के हैं।  इनमें 8 लोग बाहर के हैं, जो बड़े अधिकारियों के रिश्तेदार हैं।राज्यमंत्री शरद जैन ने कहा, भर्ती के लिए नियमों में बदलाव की जानकारी नहीं है। अगर किसी मेडिकल कॉलेज में ऐसा हुआ है, तो जो भी दोषी हो।