मंथन न्युज भोपाल-
आलोट की बजाय अपनी पुरानी विधानसभा से आजमाना चाहते हैं किस्मत, समर्थकों को दिया दम और दौरे किए तेज
इंदौर. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने पुराने दिग्गज नेताओं को भी मैदान में उतारेगी। इसके चलते कई पूर्व सांसदों ने भी दम भरा है, जिसमें प्रेमचंद गुडड्डू भी हैं। आलोट की बजाय वे सांवेर में खासे सक्रिय हैं, जबकि तुलसी सिलावट इन दिनों अपने आका ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकसभा सीट को ज्यादा समय दे रहे हैं।
सांवेर में कांग्रेस की राजनीति का माहौल कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है। वैसे तो क्षेत्र को पूर्व विधायक सिलावट का गढ़ माना जाता है। वे तीन बार के यहां से विधायक रह चुके हैं। हालांकि इन दिनों वे सिंधिया की गुना सीट का काम संभाल रहे हैं। पहले ये जिम्मेदारी महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के पास थी, लेकिन पिछले दिनों वे नहीं रहे। तब से सिलावट पूरा ध्यान दे रहे हैं, जिसके चलते सांवेर से उनकी दूरी बढ़ रही है। उनकी गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए गुड्डू ने क्षेत्र में घुसपैठ बढ़ा दी है। वे एक बार सांवेर से विधायक रह चुके हैं। इधर, पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम से उनका परंपरागत सीट आलोट से मोह भंग हो गया है। उन्होंने जुगत लगाकर अपने बेटे अजीत बौरासी को लड़ाया था, जो बुरी तरह हार गए। सांवेर के अलावा उनकी निगाह उज्जैन के ही घटिया व तराना सीट पर है। उन्हें मालूम है कि दोनों जगह पर सिंधिया की राय को महत्व दिया जाता है, क्योंकि वे उनकी रियासत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में गुड्डू का गणित है कि सिंधिया के खास सिलावट की सीट सांवेर में दबाव बनाएंगे तो वे घटिया या तराना में विरोध नहीं कर पाएंगे। सांवेर से मिल जाता है तो अच्छी बात है। इसके चलते गुड्डू पूरी ताकत से काम पर जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि उनके इस खेल में उनके आका पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अहम् भूमिका है।
टिकट को लेकर निश्ंिचत सिलावट
कांग्रेस के जानकारों के हिसाब से प्रदेश में टिकट वितरण में सिंधिया की भी चलेगी। इसके चलते पूर्व विधायक तुलसी सिलावट के टिकट को लेकर कोई संशय नहीं है। इधर, चर्चा तो ये भी है कि सिंधिया उन्हें गुना से ही कोटे की सीट से लड़ा सकते हैं, जहां से गोपीलाल जाटव भाजपा के विधायक हैं। ऐसा करने से सिंधिया की सीट पर ध्यान देने वाला खास व्यक्ति भी विधायक हो जाएगा। वहीं, जाटव से हिसाब भी करना है, क्योंकि वे एक विकास कार्य का वह उद्घाटन करने वाले थे कि जाटव ने जाकर कर दिया जिसको लेकर विवाद भी हुआ था।

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