बिहार में भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों के लिए दलितों का आंदोलन चुनौती भरा साबित हो सकता है. बिहार के कई गांवों में दलित समाज के लोगों का सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एकजुट होना पार्टी के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है. भाजपा यह कह कर पल्ला नहीं झाड़ सकती है कि मसला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है क्योंकि गांव तक यह बात फैल चुकी है कि इसके लिए मोदी सरकार ही दोषी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दलितों की नाराजगी दूर करने का मास्टर प्लान तैयार करना होगा.
हर प्रदर्शन में दिखा केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आयोजित भारत बंद में गाहे-बगाहे सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भले नारेबाजी की घटनाएं सामने आई होंगी लेकिन हर जगह से मोदी सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी की आवाज़ें आ रही थी. राजधानी पटना से लेकर सुदूर देहातों में आयोजित विरोध प्रदर्शनों में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही थी. दलित बिरादरी के लोगों का गुस्सा मोदी सरकार के खिलाफ ही ज्यादा था. साफ है कि गांवों तक यह संदेश पहुंचाने में विपक्षी पार्टियां सफल हो गई कि इस स्थिति के लिए सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेवार है. सुदूर देहात में भी हो रहे विरोध प्रदर्शनों में लोग केंद्र सरकार को ही कोस रहे थे. हर प्रदर्शनकारी को यह भले पता न था कि वह क्यों प्रदर्शन में शामिल हुआ है लेकिन केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में विपक्षी पार्टियां कामयाब जरूर हुई हैं.
पहले भी खड़ी हो चुकी है परेशानी
बिहार में संपन्न हुए पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त भी दलितों का मुद्दा प्राइम फैक्टर रहा था. उसी समय संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी एक बयान ने आग लगाने का काम किया था. महागठबंधन मोहन भागवत के बयान को आरक्षण खत्म किए जाने से जोड़ने में सफल रहा और वोटों का ध्रुवीकरण भी जबरदस्त रूप देखने को मिला था. उसी विधानसभा चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गोलवलकर की किताब लेकर घूमते रहे थे. उस किताब ने भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी क्योंकि लालू प्रसाद अपने आधार मतदाताओं को यह समझाने में सफल हो गए थे कि भारतीय जनता पार्टी यदि मजबूत होगी तो आरक्षण को खत्म किया जा सकता है.
एक बार फिर दलितों को भाजपा के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों की नजर में भारत बंद एससी एसटी एक्ट से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आयोजित किया गया था लेकिन जिस तरह तमाम विपक्षी पार्टियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया उसे साफ संकेत मिल रहा है कि दलित बिरादरी को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ खड़ा करने की हर संभव कोशिश विपक्षी दलों के द्वारा की जा रही है. भारतीय जनता पार्टी के पास सर्वाधिक दलित सांसद और दलित विधायक हैं लेकिन गाहे-बगाहे भाजपा को दलितों का विरोधी भी बताया जाता रहा है.
भाजपा को करना होगा डैमेज कंट्रोल
बिहार में भारतीय जनता पार्टी को दलितों में वयाप्त आक्रोश को शांत करने के लिए डैमेज कंट्रोल की नीति पर चलना ही पड़ेगा. भाजपा नेताओं को दलित बिरादरी में अपनी पैठ बरकरार रखने के लिए खासी मेहनत भी करनी पड़ेगी.

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