Image result for manthannews.inमंथन न्यूज़ लखनऊ -प्रदेश में निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार ने निजी स्कूलों की सालाना फीस वृद्धि का फॉर्मूला तय कर दिया है। इस फॉर्मूले के तहत निजी स्कूल अद्यावधिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में पिछले सत्र के शुल्क का पांच प्रतिशत जोड़ते हुए हर साल इतनी ही फीस बढ़ा सकेंगे।
शर्त यह होगी कि इस तरह से निर्धारित किया गया शुल्क स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों की मासिक प्रति व्यक्ति आय में हुई वृद्धि के औसत से अधिक नहीं होगा। तय से अधिक फीस वसूलने पर स्कूल प्रबंधन पर पहली बार एक लाख रुपये और दूसरी मर्तबा पांच लाख रुपये आर्थिक दंड लगाया जाएगा। तीसरी बार ऐसा करने पर उनकी मान्यता रद कर दी जाएगी।
सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी-
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए सरकार अध्यादेश लाने जा रही हैै। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उप्र स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश, 2018 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी उप मुख्यमंत्री डॉॅ.दिनेश शर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही यह अध्यादेश लाएगी। प्रस्तावित अध्यादेश उन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा जिनका वार्षिक शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक है। इसके दायरे में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आइसीएसई व अन्य बोर्ड से मान्यताप्राप्त/संबद्ध सकूल सहित वे विद्यालय भी आएंगे जिन्हें अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है। यह व्यवसथा प्री-स्कूलों पर लागू नहीं होगी।
किताबें, जूते-मोजे खरीदने के लिए बाध्य नहीं अभिभावक-
डॉ.दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रस्तावित अध्यादेश में प्रावधान है कि निजी स्कूल अभिभावकों को किसी दुकान विशेष से किताब-कापियां, यूनीफॉर्म, जूते-मोजे व स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।
पांच साल से पहले नहीं बदलेगी यूनीफॉर्म-
अभिभावकों को शोषण से बचाने के लिए अध्यादेश के ड्राफ्ट में यह भी व्यवस्था की गई है कि निजी स्कूल पांच साल से पहले विद्यार्थियों की यूनीफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। यदि निजी स्कूल पांच साल से पहले ऐसा करते हैं तो उन्हें मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित मंडलीय शुल्क नियामक समिति से मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए अभिभावक संघ की सहमति भी जरूरी होगी।
इसी सत्र से लागू होगी व्यवस्था-
उप मुख्यमंत्री के साथ मौजूद अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा संजय अग्रवाल ने बताया कि फीस वृद्धि का यह फॉर्मूला शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगा। इसके लिए सत्र 2015-16 को आधार वर्ष माना गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अध्यादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल को अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से 60 दिन पहले आगामी सत्र में प्रस्तावित फीस को अपनी वेबसाइट या नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कर उसे सार्वजनिक करना होगा। पहली बार यह व्यवस्था लागू होने पर स्कूल को शैक्षिक सत्र की शुरुआत के 30 दिनों के अंदर फीस को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा।
प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय-
छात्रों से वसूली जाने वाली फीस को दो वर्गों में बांटा गया है-संभावित और वैकल्पिक शुल्क संघटक। संभावित शुल्क संघटक के तहत विवरण पुस्तिका व पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक ट्यूशन फीस शामिल होगी। स्कूल छात्रों से विवरण पुस्तिका और पंजीकरण शुल्क सिर्फ प्रवेश के समय ले सकेंगे। प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय सिर्फ एक बार लिया जाएगा। छात्रों से कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वैकल्पिक शुल्क बाध्यकारी नहीं-
वैकल्पिक शुल्क संघटक के तहत विभिन्न क्रियाकलापों और स्कूल की ओर से दी गईं सुविधाओं के लिए देय शुल्क शामिल होगा जिसे जमा करना बाध्यकारी नहीं होगा। इसमें आवागमन, बोर्डिंग व भोजन की सुविधाओं, शैक्षिक भ्रमण, स्थानीय दौरा तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए निर्धारित शुल्क शामिल होगा। जो छात्र यह सुविधा लेना चाहेंगे, उनके अभिभावकों को उसके लिए तय फीस देनी होगी। प्रत्येक फीस के लिए छात्रों को रसीद दी जाएगी।
व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय स्कूल खाते में-
प्रत्येक विद्यालय का एक कोष होगा जिसमें छात्रों को दी गईं सुविधाओं के लिए उनसे प्राप्त धनराशि और स्कूल परिसर में आयोजित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय शामिल होगी। व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त होने वाली आय स्कूल के खाते में जमा की जाएगी, प्रबंध समिति/ट्रस्ट के खाते में नहीं।
फीस वापसी के साथ आर्थिक दंड दे सकेगी मंडलीय शुल्क विनियामक समिति-
फीस को लेकर स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों तथा अभिभावक संघ की शिकायतों के निस्तारण के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क विनियामक समिति गठित की जाएगी जिसे सिविल व अपीलीय अदालत की शक्तियां प्राप्त होंगी। अधिसूचित फीस से अधिक लिये गए शुल्क को छात्र को वापस करने के निर्देश के साथ समिति को स्कूल प्रबंधन को आर्थिक दंड देने का अधिकार होगा। समिति के फैसले से असंतुष्ट स्कूल प्रबंध समिति निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर राज्य स्ववित्तपोषित विद्यालय प्राधिकरण को अपील कर सकते हैं।

Image result for tarun राठीमंथन न्यूज़  शिवपुरी -मड़ीखेड़ा पेयजल परियोजना पूरी कराने के लिए इन दिनों नपा, जिला प्रशासन सहित मंत्री यशोधरा एड़ी- चोटी का जोर लगा रही हैं। दोशियान ने 1 अप्रैल को शहर में पानी नहीं दिया। इसके बाद मंगलवार को कलेक्टर तरुण राठी अधिकारियों को साथ लेकर सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट जा पहुंचे। यहां उन्होंने दोशियान के प्रबंधक महेश मिश्रा से दो टूक बात करते हुए कहा कि आपने भोपाल बैठक में जो वादा किया, उसे नहीं निभाया। इस पर मिश्रा ने कहा कि साहब भुगतान भी तो 70 लाख होना था, जो नहीं हुआ। इस पर कलेक्टर बोले 40 लाख भुगतान तो कर दिया। अब यह बताओ शहर में पानी कितने बजे पहुंचा रहे हो। इस पर मिश्रा ने कहा कि दो बजे पानी शहर छोड़ा जा रहा है, जो रात को 9 बजे तक शहर पहुंच जाएगा। इस पर कलेक्टर ने तल्ख लहजे में कहा कि आपके वादे अलाउद्दीन खिलजी की तरह खोदते रहे, बंद करते रहे, यह क्या है। आखिर कब पहुंचेगा शहर तक पानी। अब साफ बात सुन लो, शहर को यदि पानी लगातार नहीं दिया तो आपको अगला भुगतान नहीं किया जाएगा। प्रोजेक्ट की हालत देखकर साफ लग रहा है कि अब पानी नहीं आया तो इस पर इन्वेस्टमेंट करना बेकार है। कलेक्टर ने प्वाइंट टू प्वाइंट दोशियान कंपनी के अधिकारी महेश मिश्रा से बातचीत की।
हवा में तो नहीं उठ जाएंगे पाइप
कलेक्टर राठी ने मिश्रा से कहा कि तुम पानी तो छोड़ रहे हो, लेकिन पानी के प्रेशर से पाइप हवा में तो नहीं उठ जाएंगे या फिर लीकेज तो नहीं होंगे। इस पर मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अब लाइन साफ्ट हो गई है और उम्मीद है कोई लीकेज सामने नहीं आएगा।
सर्च शाफ्ट न लगाने पर भड़के
कलेक्टर ने योजना की कमियों को किस हद तक याद कर लिया यह बात तब सामने आई, जब उन्होंने मिश्रा से पूछा कि यह बताओ जो दो सर्च शाफ्ट रिवर्स वाटर प्रेशर झेलने के लिए लगानी थीं, वह लगा दी क्या। इस पर मिश्रा ने बताया कि एक शाफ्ट आ गई है और बेल्डिंग हो रही है, जबकि दूसरी शाफ्ट कल तक आ जाएगी। इसके बाद एक दिन सप्लाई रोककर दोनों को एक साथ लगा दिया जाएगा।
पार्षद भानु बोले-अब ट्रिप तो नहीं मारेगी
मौके पर मौजूद पार्षद भानु दुबे ने पूछा कि अब लाइन ट्रिप तो नहीं मारेगी। इस पर कलेक्टर ने प्रभारी सीएमओ गोबिंद भार्गव से पूछा कि वन विभाग के 5 करोड़ 83 लाख खाते में आ गए क्या। इस पर सीएमओ ने कहा कि स्वीकृति आ गई है, लेकिन खाते में पैसा नहीं आया है। इस पर कलेक्टर ने अचरज जताते हुए कहा कि ऐसे कैसे हो सकता है, अभी भोपाल बात करता हूं।
भरोसे में बैठी नपा बोरवेल भी नहीं लगवा पा रही
कलेक्टर राठी ने दोशियान के मिश्रा से कहा कि तुम्हारे भरोसे बैठी नपा, आज कल में पानी आने की बाट जोह रही है। पानी आ नहीं रहा और यह नलकूप खनन भी नहीं करवा पा रही। अगर किसी भी तरह की दिक्कत हो तो साफ बताओ, जिससे आने वाली गर्मी के लिए कदम उठाए जा सकें। तुम्हारे वादों पर ऐतवार करना मुश्किल हो रहा है।
पानी आएगा, तभी सोऊंगा
कलेक्टर ने अहसास कराया कि उन्हें अब उन्हें दोशियान धोखे में नहीं रख सकती, क्योंकि वे भी पानी जल्द चाहते हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि रात को 9 बजे जब बायपास पर पानी आ जाएगा, तभी सोऊंगा। उनका कहना था कि पानी ठीक समय पर पहुंच जाना चाहिए।
100 ट्रक रेत चाहिए, कलेक्टर बोले-पहले पांच टंकी तो भरो
दोशियान ने कहा कि फतेहपुर, फिजिकल, ठकुरपुरा की टंकी जोड़ने के लिए जो लाइन बिछानी है, उसमें 100 ट्रक रेत लगेगी। इस पर कलेक्टर ने कहा कि पहले आवेदन करो और बताओ कहां से रेत लोगे। यह काम तुम्हारा है, हमारी जहां मदद चाहिए बताओ। इस पर मिश्रा ने बात को आगे बढ़ाया तो कलेक्टर ने बात को रोकते हुए कहा कि चलो अभी यह बात छोड़ो, पहले जो पांच टंकी जोड़ी हैं, उनको तो भर लो।
कनेक्शन नहीं, हम तो अपनी लाइन ढू़ंढ रहे थे
दोशियान के देवेन्द्र विजयवर्गीय ने खुद खड़े होकर मंत्री यशोधरा के समक्ष पुलिस लाइन के जिन दो गड्ढों में लोगों के घरों में कनेक्शन होने की बात कही थी, आज उसी पर मिश्रा ने यू टर्न ले लिया और बोले कि हम कोई कनेक्शन नहीं दे रहे थे। हम तो जो लाइन खो गई है, उसे ढू़ंढने के लिए दो जगह गड्ढे किए हैं।
जब बड़ी टंकी भरेंगी, तब हकीकत आएगी सामने
दोशियान ने आज से शहर को पानी देने की कवायद शुरू की है, लेकिन यह पानी संपवेल भरने और हाइडेंट से टैंकर भरने के काम आएगा। असली परीक्षा तब होगी, जब सर्च शाफ्ट लगाने के बाद फिर से बड़ी टंकियां भरने की कवायद की जाएगी। अगर प्रयोग सफल रहा तो बड़ी कामयाबी होगी और असफल रहा तो 114 करोड़ के प्रोजेक्ट पर सवालिया निशान लगना तय है।
गंदे पानी को लेकर भड़के कलेक्टर
कलेक्टर ने कहा कि रो वाटर यानि गंदा पानी क्यों सप्लाई कर रहे हो, लगातार शिकायत मिल रही है। इस पर मिश्रा ने कहा कि हम साफ पानी दे रहे हैं। सीएमओ ने बात काटी और कहा कि पांच दिन पहले जब पानी दिया था, वह गंदा था। हमने इनको ब्लीचिंग और एलम भी दे दिया। इस पर कलेक्टर ने कहा कि आज से साफ पानी ही शहर पहुंचना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि आज से साफ पानी ही शहर पहुंचेगा।
कल फूटे पाइप देखने तो नहीं आना पड़ेगा
कलेक्टर ने दोशियान के मिश्रा से कहा कि यह बताओ, आज सही तरीके से पानी शहर पहुंच जाएगा या फिर हमें दोबारा से यहां पर फूटे पाइपों को देखने आना होगा। कलेक्टर ने कहा कि जितना पैसा इस प्रोजेक्टर पर खर्च हुआ, उसका एक प्रतिशत भी रिजल्ट नहीं आया है।

Image result for आरक्षणमंथन न्यूज़ भोपाल -एससी एसटी एक्ट में संशोधन संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलितों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन को लेकर सवर्ण समाज में खासा आक्रोश है। ऐसे में अब सवर्ण समाज भी आरक्षण के विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। प्रगतिशील ब्राह्मण संस्था के महासचिव पं.चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश के कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया। साथ ही सवर्णों की दुकानों को क्षति पहुंचाई। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका लगाना दुखद है। अब सवर्ण समाज भी सड़क पर उतरकर आरक्षण के विरोध में आंदोलन करेगा। सपाक्स के साथ ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, कायस्थ समेत समस्त सवर्ण समाज आरक्षण के विरोध में अपनी ताकत लगाएंगे। साथ ही उन राजनीतिक पार्टियों का सवर्ण बहिष्कार करेंगे, जो उनकी उपेक्षा करेगी।

मंथन न्यूज़ दिल्ली -सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए मंगलवार को कहा कि वह अवैध निर्माण को कानूनी जामा पहना रही है। मास्टर प्लान 2021 के संशोधन की अधिसूचना पर लगी रोक को हटाने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि सीलिंग अभियान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों को दिल्ली को बंधक बनाने दिया जा रहा है। दस लाख व्यापारियों को संरक्षण देने के लिए दिल्ली की 186 लाख जनता के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अगर यह हाल रहा तो भविष्य में कुछ नहीं बचेगा। न संस्कृति बचेगी और न हेरिटेज।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार कानून लाकर गैरकानूनी को कानूनी जामा पहना रही है। सीलिंग के विरोध में व्यापारियों द्वारा किए जा रहे धरना-प्रदर्शन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘ये लोग कह रहे हैं कि हमने कुछ गैरकानूनी काम किया है, लेकिन हमें संरक्षण दिया जाए।

व्यापारियों का धरना यह बताता है कि वे दोषी हैं। सीधे-सादे लोग धरना नहीं देते।’ अवैध निर्माण को संरक्षण देने पर पीठ ने सरकार से कहा कि ऐसा लगता है, मानो आप पूरे देश को यह संदेश देना चाहते हैं कि यहां सब कुछ संभव है, कोई कुछ भी कर सकता है।

पीठ ने केंद्र के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को सुनाई खरी-खरी

पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एएनएस नादकर्णी से कहा, ‘आपको यह समझने की जरूरत है कि दिल्ली की जनता महत्वपूर्ण है, चाहे वह सरकार हो या डीडीए या निगम या कोई अन्य एजेंसी।’ पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। अवैध कॉलोनियों में हरित क्षेत्र नहीं है, सीवेज नहीं है, नालियां नहीं हैं। पार्किंग की सुविधा नहीं है। दुकानदारों, निवासियों और आरडब्ल्यूए ने फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा है। इससे दिल्ली की आम जनता को परेशानी हो रही है।

पीठ ने कहा कि गाजीपुर में 60 फीट ऊंचा कचड़े का अंबार है। यातायात की समस्या है। प्रदूषण की समस्या है। लोगों को स्वच्छ हवा तक मयस्सर नहीं है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। क्या यह व्यापारियों को संरक्षण देने के लिए हो रहा है? पीठ ने कहा कि इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है और सरकारी एजेंसी सोयी हुई है। 

केंद्र नाहक विलेन बन गई है : नादकर्णी 
व्यापारियों का विरोध उचित नहीं है। पूरे मामले में केंद्र सरकार विलेन बन गई है। केंद्र पर इसका दोष मढ़ना सही नहीं है। यह वास्तव में तंत्र की नाकामी है। इस पर पीठ ने कहा कि सरकार को सख्त संदेश देना चाहिए कि यहां कानून का शासन है। पीठ ने सरकार से पूछा कि आखिर आप सालों से चुप क्यों बैठे हैं। पीठ ने एएसजी के इस बात पर भी कड़ा एतराज जताया कि दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की योजना है। पीठ ने कहा कि जो चीज पूरी तरह गलत है, उसे आप कैसे नियमित कर सकते हैं। पीठ ने सरकार को भविष्य की योजना से अवगत करने के लिए कहा है। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

1.62 लाख पदों के लिए प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया से इंटरव्यू खत्मः योगीमंथन न्यूज़ लखनऊ -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर सरकार जीरो टालरेंस की नीति पर कार्य कर रही है इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। सरकार सभी विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए योजना बना चुकी है। जल्द ही 1.62 लाख पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। सरकार द्वारा इंटरव्यू की प्रकिया समाप्त कर दिया गया है। योगी ने आज यहां 85 परियोजनाओं का शिलान्यास और 4 का लोकार्पण कर स्कूल चलो रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
लोक कल्याण समारोह में योगी
पूर्व की सरकारों द्वारा किसानों की मिट्टी पर रायल्टी ली जाती थी परंतु प्रदेश की सरकार ने इसे खत्म करके किसानों को राहत दिलाने का कार्य किया है। खेतों से मिट्टी निकालकर ले जाने के दौरान अनावश्यक रूप से परेशान करने वाले अधिकारियों को नौकरी से बाहर किया जाएगा। आज लोक कल्याण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा माध्यम है। इसे बेहतर करने के लिए नए सत्र से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। किसानों के गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाने के साथ ही क्रय केंद्रों पर तत्काल खरीद और भुगतान की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। जिले की बंद पड़ी कताई मिल और अन्य कारखानों को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद पीपीपी माडल से संचालित करवाने का प्रयास किया जाएगा। इंसेफ्लाइटिस से बचाव के लिए तीन स्तर से सरकार द्वारा प्रयास किए जाने की बात कही। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल, सांसद शरद त्रिपाठी समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार के लिए सारथी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और दस्तक अभियान के तहत जिले के विभिन्न गांवों से आए 84 बच्चों का टीका लगवाया। इसके बाद उन्होंने स्टेडियम में विभिन्न विभागों और संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टाल को देखा। 85 परियोजनाओं का शिलान्यास और 4 का लोकार्पण करने के बाद उन्होंने स्कूल चलो रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्टमंथन न्यूज़ दिल्ली -सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला संविधान का अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने अपने पूर्ववर्ती 2017 के फैसले के सरफेसी मामले में पहले ही यह स्थापित कर दिया है कि अनुच्छेद 370 कोई अस्थाई प्रावधान नहीं है।
जस्टिस एके गोयल और आरएफ नरिमन की खंडपीठ ने कहा कि इस संबंध में सरफेसी मामले में कोर्ट पहले ही दे चुका है। इस फैसले में कहा गया था कि अनुच्छेद 370 पर हेडनोट के बावजूद यह कोई अस्थाई प्रावधान नहीं है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडीशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले को सुने जाने की जरूरत है क्योंकि अदालत में ऐसे ही कई मामले लंबित हैं। इन्हें जल्दी ही सूचीबद्ध किया जा सकता है। वहीं, जम्मू और कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन और शोएब आलम ने भी स्पष्ट किया कि अन्य मामले जो लंबित हैं वह अनुच्छेद 35ए से संबंधित हैं और अनुच्छेद 370 नहीं हैं।
धवन ने दलील दी कि यह सभी मामले अनुच्छेद 370 के साथ इन लंबित मामलों को नहीं सुना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च अदालत याचिकाकर्ता कुमारी विजयलक्ष्मी झा ने दिल्ली हाईकोर्ट के 11 अप्रैल, 2017 के मामले में कहा था कि अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रकृति का है।


मंथन न्युज भोपाल-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अरुण यादव के उस वयान की निंदा की है जिसमें उन्होंने एस सी एस टी एक्ट के विवाद के लिये रा. स्व.संघ को भी जिम्मेदार माना है।
सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि रा. स्व.संघ एक राष्ट्रवादी सांस्कृतिक संगठन है उसे व्यर्थ के विवाद में घसीटना ठीक नहीं है अरुण यादव अपना पद बचाने और सोनिया दरवार में अपने नंबर बढ़ाने के लिये रा. स्व.संघ पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
संघ सदैव सामाजिक समरसता का पक्षधर रहा है लेकिन संघ को समझना अरुण यादव जैसे कमजोर बुद्धि के व्यक्ति के बस की बात नहीं ।शर्मा ने कहा कि अरुण यादव किस मुँह से दलित हितों की बात करते हैं उनकी पार्टी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को दो दो बार लोकसभा का चुनाव हराया अरुण यादव स्वयं आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया की कुर्सी छीनकर काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं अगर अरुण यादव में नैतिकता है और वह अनुसूचित जाति जनजाति के अधिकारों की रक्षा के प्रति समर्पित हैं तो उन्हें तुरंत काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से त्यागपत्र देकर श्री कांतिलाल भूरिया को काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाने का समर्थन करना चाहिये।
प्रकाशन हेतु सादर
सुरेन्द्र शर्मा
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
भारतीय जनता पार्टी(म. प्र.)
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