shivraj meeting 03 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -ग्वालियर, चंबल सहित प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में अजा-अजजा अधिनियम में बदलाव के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को मंत्रियों से फीडबैक लिया।
मंत्रालय में कैबिनेट बैठक के बाद अनौपचारिक चर्चा में उन्होंने मंत्रियों से कहा कि जिसका जिस समाज में प्रभाव है, उससे संवाद बढ़ाया जाए। उन्हें समझाया जाए कि सरकार उनके साथ खड़ी है। किसी के बहकावे में न आएं। चर्चा के दौरान एक मंत्री ने कहा कि घटना के पीछे बसपा-कांग्रेस और असामाजिक तत्वों का हाथ है।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रवाना कर मंत्रियों के साथ चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक इसकी शुरुआत ग्वालियर, चंबल सहित अन्य जिलों में सोमवार को हुई हिंसक घटनाओं के असर से शुरू हुई। ज्यादातर मंत्रियों ने कहा कि उनके क्षेत्र में हालात बेकाबू नहीं है। कुछ जगह नीले झंडे लेकर युवाओं के समूह निकले थे, लेकिन शाम होते-होते तक मामला शांत हो गया। जहां प्रतिक्रिया हुई, वहां आपसी रंजिश से लेकर अन्य कारण सामने आ रहे हैं।
एक मंत्री ने कहा कि ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में हिंसक घटना होने के पीछे साजिश की बू आ रही है। पूरे प्रदेश में यह क्षेत्र ही ऐसा रहा जहां तीखी प्रतिक्रिया हुई है। इसके पीछे कांग्रेस, बसपा के साथ असामाजिक तत्वों का हाथ हो सकता है। इसकी गहराई से पड़ताल भी होनी चाहिए, ताकि आगे सतर्कता बरती जा सके।
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को ऐहतियात बरतने की हिदायत देते हुए कहा कि अपने-अपने प्रभाव वाले समाज में संवाद बढ़ाएं, ताकि कोई गुमराह हो, ऐसी नौबत ही न आए। साथ ही प्रभार के जिलों के अलावा अपने और आस-पड़ोस के विधानसभा क्षेत्रों में भी संपर्क बढ़ाएं। बताया जा रहा है कि सभी मंत्रियों को दस अप्रैल को एक बार फिर बंद के कथित सोशल मीडिया पर चल रहे संदेश पर भी नजर रखते हुए सतर्कता बरतने के लिए कहा है।
इसके अलावा बैठक में सरकारी गेहूं, चना, सरसों, मसूर की खरीदी पर नजर रखने, किसानों से संवाद करने, श्रमिकों के पंजीयन करवाने, सूखे के हालात को देखते हुए प्रभार के जिलों में समीक्षा करने, वैकल्पिक व्यवस्था बनाने सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने वन अधिकार पत्र के वितरण, तेंदूपत्ता श्रमिकों को बोनस सहित चरण पादुका, साड़ी सहित अन्य चीजों के वितरण कार्यक्रम पर भी चर्चा की। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग से मुख्यमंत्री ने सहकारिता सम्मेलन की तैयारी को लेकर जानकारी ली तो अन्य मंत्रियों से प्रभार के जिलों का लगातार दौरा करने के लिए कहा।
सुबह से लेकर शाम तक समीक्षा
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर, चंबल सहित अन्य जिलों में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर सुबह पुलिस और गुप्तवार्ता के अधिकारियों से फीडबैक लिया। सुबह दस बजे मुख्यमंत्री निवास में बैठक हुई।
इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि हालात काबू में हैं। स्थिति सामान्य हो रही है। हिंसा भड़काने और बवाल करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुलिस बल अलर्ट पर रहे। सामाजिक संगठनों के साथ वार्ता करके स्थिति का सामान्य करने की कोशिश की जाए। किसी भी सूरत में हालात नहीं बिगड़ने चाहिए।

bp singh rk shukla 03 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम में बदलाव के खिलाफ सोमवार को भारत बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं के मद्देनजर मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह और पुलिस महानिदेशक ऋषिकुमार शुक्ला ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर सीधी बात की।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 10 अप्रैल को सामान्य और पिछड़ा वर्ग के बंद को लेकर सोशल मीडिया पर सूचनाएं आ रही हैं। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। दोनों तारीखें काफी अहम हैं। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक हाई अलर्ट पर रहें। छुट्टी की बात न करें। संभव हो तो एक माह शादी-ब्याह की तारीखें आगे बढ़ाएं।
सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर-पुलिस अधीक्षकों से चर्चा करते हुए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी जनप्रतिनिधियों पर सामाजिक संगठनों से संवाद बनाए रखें। सोशल मीडिया खासतौर पर वॉट्सएप पर नजर रखें। सोशल मीडिया के माध्यम से कहीं भी कुछ भी फैल जाता है। इस समय छुट्टी की बात कोई न करे। यदि शादी-ब्याह एक माह में होना है और संभव हो तो उसे आगे बढ़ा दें। सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल सामाजिक समरसता बनाने में करें। पटवारी, कोटवार, शिक्षक और पंचायत सचिवों के नेटवर्क के जरिए लोगों के संपर्क में रहें, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल होता है।
इस दौरान ग्वालियर और मुरैना कलेक्टर ने कहा कि हमारे क्षेत्र संवेदनशील है। मुरैना कलेक्टर बोले कि बीच शहर से रेल की पटरी निकली है। इस वजह से संवेदनश्ाीलता काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने रेलवे पुलिस और रेल सुरक्षा बल का अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया जाए। इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी जिलों को पर्याप्त बल उपलब्ध कराया गया है। जरूरत पड़े तो सेना की भी मदद ली जा सकती है। इस दौरान प्रभारी अपर मुख्य सचिव गृह इकबाल सिंह बैंस, अपर पुलिस महानिदेशक राजीव टंडन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
तबादलों के लिए पीएचक्यू न आएं पुलिसकर्मी
उधर, अपनी इकाइयों को छोड़कर तबादला आवेदन लेकर पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) आ रहे पुलिसकर्मियों को मुख्यालय से चेतावनी दी गई है कि वे बिना इजाजत न आएं। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बनी हुई है। इसके बावजूद उनका पुलिस मुख्यालय आना यह बताया है कि जिस भी इकाई में ये पदस्थ हैं, वहां के प्रभारियों का इन पर कोई नियंत्रण नहीं है और बिना बताए अपनी मर्जी से पुलिस मुख्यालय आ रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बिना अनुमति कोई भी कर्मचारी सीधे वरिष्ठ कार्यालय संपर्क न करे वर्ना दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
इधर, मृतकों को दी श्रद्धांजलि, आईएएस रमेश थेटे ने एक दिन का वेतन देने किया आह्वान
ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए आईएएस अफसर रमेश थेटे ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद के लिए एक दिन का वेतन दान करने का आह्वान किया। थेटे ने बताया कि हम सभी लोग (सांसद, विधायक, अधिकारी व कर्मचारी) आज जिस भी मुकाम पर हैं वो डॉ. भीमराव आंबेडकर की वजह से हैं। सोमवार की घटना में जिनकी मृत्यु हुई, उन्होंने समाज के लिए कुर्बानी दी है। अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारियों-कर्मचारियों का कर्त्तव्य बनता है कि वे प्रभावितों के परिवारों को आर्थिक मदद दें।
थेटे ने मंथन न्यूज़  को बताया कि शाम साढ़े सात बजे बोर्ड ऑफिस चौराहे पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान यह आह्वान किया गया कि मृतकों के परिवार असहाय स्थिति में हैं। हम उनकी स्थिति समझ सकते हैं। परिवारों की मदद की जानी चाहिए। इसके लिए सभी अपने एक दिन के वेतन के बराबर मदद करें। इसको लेकर मुहिम भी चलाएंगे। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने इसका समर्थन भी किया।

 भोपाल के साहित्य जगत में सिंधी के लोकप्रिय कवि श्री के.व्ही. बेगवानी "फ़ानी" का विशेष स्थान था। इन्होंने मध्यप्रदेश सिंधी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष का पद भी संभाला। सिंध के मशहूर कवि शेख अयाज़ "फ़ानी" साहब के शिष्य थे। इसके अलावा सिंधी की प्रख्यात गायिका भगवंती नावानी ने भी फ़ानी साहब के लिखे गीत को स्वर देकर उनकी लेखन श्रेष्ठता को प्रमाणित किया था। अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित श्री बेगवानी जीवन के अंत तक सृजनशील रहे। वे एक अच्छे मनुष्य थे और नई पीढ़ी को साहित्य, संगीत और रंगमंच से जोड़ने के लिए प्रयास करते रहते थे। सिंध के "मियां जो गोठ" में 4 अप्रैल 1914 को एक मध्यम वर्गीय परिवार में उनका जन्म हुआ। देश विभाजन के बाद के वे परिजन के साथ भोपाल आकर बसे। पेशे से शिक्षक थे। उन्हें अध्ययन और लेखन का शौक था। भोपाल में उन्हें अपनी रूचि के काफी अनुकूल वातावरण मिला। वे हिंदी, ऊर्दू, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के साहित्यकारों के सम्पर्क में रहते थे। पूरे देश में उनका अच्छा परिचय भी था।

      "फ़ानी" साहब को उनकी पुस्तक "सिक सोज ऐं साज" से काफी ख्याति मिली। एक उत्कृष्ट कवि के रूप में उन्होंने खास पहचान बनाई। वर्ष 1985 में पचमढ़ी में संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित एक लेखन कार्यशाला की बदौलत मैं उनके सम्पर्क में आया था। बाद में 1989 में भोपाल में जनसम्पर्क विभाग में पदस्थ होने के बाद भोपाल की सिंधी कालोनी में उनके निवास जाकर भी भेंट की। उस दौर में सिंधी कालोनी की नारी शाला जो एक सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र था, शाम के समय नाटक रिहर्सल का स्थान बन जाता था। इसी जगह मेरी मुलाकात उस वक्त की जानी-मानी शिक्षिका और कॉरियोग्राफर दादी गोपी से भी हुई। अशोक बुलानी के निर्देशन में भारतीय स्टेट बैंक के साथी कलाकारों के साथ मुझे भी नाटकों में छोटी भूमिकाएं निभाने का अवसर मिला। के.व्ही.बेगवानी "फ़ानी" जैसी शख्सियत से मिलने के बाद हर व्यक्ति प्रभावित हो जाता था। सामाजिक विषयों पर नाटकों के लेखन के लिए "फ़ानी" साहब की विशेषज्ञता के सभी कलाकार कायल थे। वे अंग्रेजी में भी अच्छा दखल रखते थे। स्वभाव से सहज, सरल और आत्मीय होने के कारण उन्होंने अपना एक सर्किल बना लिया था।

      भोपाल में सिंधी रंगमंच के बीच उन्होंने 60 के दशक में बोए थे। आज लगभग 200 कलाकार भाषाई नाटकों को खेलते हुए अपना स्थान बना चुके हैं। "फ़ानी" साहब का अवसान 9 अप्रैल 1995 को भोपाल में हुआ था। "फ़ानी" साहब के बेटे राजकुमार बेगवानी ने पिता की साहित्यिक धरोहर को संभाल कर रखा है। राजकुमार स्वयं एक अच्छे पाठक भी हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने स्व. फ़ानी के मित्रों और शिष्‍यों से सम्पर्क भी बनाए रखा है। स्व. के.व्ही. बेगवानी "फ़ानी" की जयंती पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए आदरांजलि पेश करता हूं।

 

·      अशोक मनवानी



पिछड़ा आरक्षण कोटे के वर्गीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के बीच होड़ देखी जा रही है. देखना है कि इस मामले में ठोस कदम पहले कौन सरकार उठा पाती है. राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार अगले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए एनडीए के लिए इसे जरूरी कदम माना जा रहा है.


राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार यह कदम एसपी-बीएसपी की संयुक्त राजनीतिक ताकत से मुकाबले में एनडीए के लिए मददगार साबित हो सकता है. वर्गीकरण का यह काम योगी सरकार को राज्य सरकार की नौकरियों के लिए करना है तो मोदी सरकार को केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए.


उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर के दबाव के बीच गत 22 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान सभा में कह दिया ‘यदि जरूरत हुई तो अतिपिछड़ा और अतिदलित के लिए अलग से आरक्षण देने पर विचार करेंगे.’


यानी पिछड़ों के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा के भीतर कोटा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ‘कमजोर वर्ग का जो हिस्सा विकास में पिछड़ गया है, उन्हें मुख्य धारा में लाने की जरूरत है.’


लोकसभा चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक लगाने की तैयारी


उधर केंद्र सरकार ने गत 21 मार्च को जस्टिस रोहिणी आयोग के कार्यकाल को 20 जून तक बढ़ा दिया है. 27 प्रतिशत के आरक्षण कोटे के वर्गीकरण के लिए गत 2 अक्तूबर, 2017 को जस्टिस जी. रोहिणी के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया गया था. उसके कार्यकाल का यह दूसरा और अंतिम विस्तार है.


20 जून को रिपोर्ट आ जाने के बाद केंद्र सरकार उस पर कोई निर्णय करेगी. यानी अब उस आयोग को और विस्तार देने के मूड में सरकार नहीं है. यानी जल्द निर्णय करना है. लोकसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं है.

याद रहे कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सन्  2011 में ही मनमोहन सरकार से यह सिफारिश की थी कि मंडल आरक्षण के 27 प्रतिशत के कोटे को तीन भागों में बांट दिया जाना चाहिए.

मनमोहन सरकार को राजनीतिक दृष्टि से वह सिफारिश अनुकूल नहीं लगी. इसलिए उसने इस सिफारिश को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. पर नरेंद्र मोदी सरकार ने उस पर काम शुरू किया.

दरअसल कोटे के वर्गीकरण का राजनीतिक नुकसान आरजेडी और एसपी जैसी पार्टियों को हो सकता है. यदि अनुसूचित जातियों के आरक्षण कोटे का भी वर्गीकरण हो जाए तो बीएसपी को उसका राजनीतिक नुकसान हो सकता है. 2005 में बिहार में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने अति पिछड़ों के लिए आरक्षण सहित कई अन्य कदम उठाए.

उससे लालू प्रसाद के दल को नुकसान उठाना पड़ा और जेडीयू को लाभ मिला. देश के कई अन्य कई राज्यों में भी अति पिछड़ी जातियों के लिए अलग से आरक्षण कोटे का प्रावधान किया गया है.

karpuri-thakur-lalu-yadav


यहां तक कि सन् 1978 में जब बिहार में कर्परी ठाकुर सरकार ने राज्य सरकार की नौकरियों में पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू किया तो उसमें अति पिछड़ों के लिए अलग कोटा निर्धारित किया गया था.


सन् 2000 में बिहार का बंटवारा हुआ. झारखंड के गठन के बाद आदिवासियों की आबादी शेष बिहार में बहुत कम रह गई. बिहार सरकार ने आरक्षण का नए सिरे से बंटवारा किया. मौजूदा प्रावधान के अनुसार बिहार में पिछड़ों के लिए 12 प्रतिशत और अति पिछड़ों के लिए 18 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है. तीन प्रतिशत आरक्षण पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए है. एक प्रतिशत आरक्षण आदिवासियों के लिए है.

उधर केंद्र सरकार की नौकरियों में जो 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का प्रावधान है,उसमें कोई वर्गीकरण नहीं है जबकि इसकी मांग होती रही है.

अति पिछड़ों की शिकायत रही है कि OBC आरक्षण का अधिक लाभ मजबूत पिछड़ी जातियों के उम्मीदवार ही उठा लेते हैं जबकि अति पिछड़ों की आबादी अपेक्षाकृत अधिक है. रोहिणी आयोग इस मामले में तथ्य जुटा रहा है. आयोग ने उच्चस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों से कुछ आंकड़े मांगे हैं. वे आंकड़े पिछड़ों के नामांकन केे बारे में हैं.

UP Minister Om Prakash Rajbhar

आयोग को देखना है कि नामांकन में पिछड़ी जातियों के किस हिस्से को उचित भागीदारी नहीं मिल रही है. साथ ही,आयोग सरकारी और अर्ध सरकारी निकायों में पिछड़ी जातियों के कर्मचारियों व अफसरों के आंकड़े भी मांगे हैं. कुछ अन्य तथ्य भी जुटाए जा रहे हैं. इन तथ्यों के विश्लेषण के बाद रोहिणी आयोग 20 जून तक अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप देगा. अब उस पर अंतिम निर्णय करना केंद्र सरकार के हाथों में है.

ताजा जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे में से अभी औसतन सिर्फ 11 प्रतिशत पद ही भर पा रहे हैं. वर्गीकरण कर देने के बाद यह प्रतिशत बढ़ जाने की उम्मीद जाहिर की जा रही है.

पर वर्गीकरण का यदि सचमुच कोई निर्णय हुआ तो उसका राजनीतिक नुकसान सबसे अधिक एसपी और आरजेडी को हो सकता है. उन दलों पर आरोप है कि ये खुद को पूरे पिछड़े वर्ग का नेता बनने का दावा तो करते हैं, पर अधिक लाभ सिर्फ मजबूत पिछड़ी जातियों को देते या दिलवाते हैं.



दिल्लीसुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक उम्मीदवार को दो जगहों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई हुई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर एक कानून में संशोधन का समर्थन किया है। हलफनामे में कहा गया कि दो जगह से चुनाव लड़ना फिर एक सीट छोड़ देना मतदाताओं के साथ अन्याय है, इससे आर्थिक बोझ पड़ता है। आयोग ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जो स्वतंत्र उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर रोक लगा सके

स्वतंत्र उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर लगे रोक
बता दें कि भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें उन्होंने मांग की है कि एक उम्मीदवार को दो जगहों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए और स्वतंत्र उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जाए। उनकी इस याचिका का चुनाव आयोग ने भी समर्थन किया है। आयोग की याचिका में कहा गया कि एक उम्मीदवार का दो सीटों पर लड़ने से न केवल सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता है बल्कि विजेता उम्मीदवारों के मतदाताओं के साथ भी अन्याय होता है। 

SC ने केंद्र से मांगा जवाब 
याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि फिर भी उम्मीदवार ऐसा करते हैं तो खाली हुई सीट पर होने वाले उप-चुनावों में खर्च होने वाली रकम की भरपाई उनसे करवाई जाए। वहीं केंद्र की ओर से इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। सुप्रीम कोर्ट 6 हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगा।

नई दिल्‍ली, मंथन न्युज- एससी एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इन दिनों जमकर राजनीति हो रही है। हर दल के नेता खुद को दलितों का समर्थक बता रहे है। कांग्रेस एससी एसटी ऐक्‍ट पर भारतीय जनता पार्टी को घेरने में जुट गई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों के मुद्दे पर राजनीति कर रहे दलों को आईना दिखाते हुए कहा कि किसी अन्‍य सरकार ने बाबा साहब अंबेडकर का उस तरह सम्‍मान नहीं किया, जैसा उन्‍होंने किया है।

भीमराव अंबेडकर की विरासत के राजनीतिकरण के लिए राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की तरह दलित चिंतन पर किसी सरकार ने काम नहीं किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबा साहब की याद में अनेक परियोजनाओं को पूरा करके हमारी सरकार ने उन्हें उचित स्थान दिलाया। 26, अलीपुर रोड हाउस जहां अंबेडकर का निधन हुआ, उसे 13 अप्रैल उनके जन्‍मदिन की पूर्व संध्‍या पर देश को समर्पित किया जाएगा।

पीएम मोदी सांसदों को आवास उपलब्ध कराने के लिए पश्चिमी परिसर के उद्घाटन के अवसर पर एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर किसी ने राजनीतिक लाभ के लिए अंबेडकर के नाम को अपने साथ जोड़ा। लेकिन उनकी सरकार ने अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र को पूरा किया, हालांकि इस विचार की कल्पना की गई थी, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री थे। पिछली यूपीए सरकार ने इस परियोजना को सालों तक खींचा, लेकिन पूरा नहीं किया।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब एससी-एसटी अत्याचार निवारक कानून पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर भारत बंद के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

 

ज्ञात हो कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट का एससी एसटी एक्‍ट पर एक फैसला आया, जिसके बाद सोमवार को भारत बंद के दौरान काफी हिंसक प्रदर्शन हुए। इस बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच दलित मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर तेज हो गया। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के दलित प्रेम की हवा निकालते हुए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के साथ हुए दु‌र्व्यवहार की याद दिलाई। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल दलितों को वोट बैंक के रूप में देखते हैं। इसके लिए समय-समय पर आरक्षण को लेकर सामूहिक रूप से भ्रामक प्रचार शुरू देते हैं। शाह ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल होते हुए उनकी स्कि्रप्ट पुरानी पड़ गई है। उन्होंने दलितों को भरोसा दिया कि भाजपा के रहते कोई भी संविधान प्रदत्त उनके अधिकारों को नहीं छीन सकता है।

Image result for manthannews.inस्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूली बच्चों के परिवहन में उपयोग में आने वाले वाहनों के मापदण्ड के अनुरूप संचालन में पालकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये संस्था स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिये हैं। इस संबंध में जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर विस्तृत निर्देश दिये गये हैं।
शैक्षणिक संस्था में स्कूल वाहन के संचालन के लिये गठित समिति के संयोजक संस्था के प्राचार्य होंगे। समिति में जिला शिक्षाधिकारी अथवा उनके नामांकित प्रतिनिधि को सदस्य बनाया गया है। यह नामांकित व्यक्ति व्याख्याता स्तर से नीचे का नहीं होगा। समिति में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अथवा उनके द्वारा परिवहन निरीक्षक स्तर का नामांकित प्रतिनिधि सदस्य के रूप में मनोनीत किया जायेगा। इसके अलावा, समिति में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस और प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से न्यूनतम एक पालक को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
समिति की बैठक कम से कम 3 माह में एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिये गये हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल बसों के संचालन के संबंध में मान्यता नियम का पालन न करने पर शालाओं की मान्यता निरस्त करने की कार्यवाही तत्काल की जाये। इसके साथ ही सीबीएसई, आईसीएसई अथवा अन्य बोर्ड से संबंधित शालाओं की संबद्धता के लिये राज्य शासन द्वारा जारी किये गये अनापत्ति प्रमाण-पत्र को भी निरस्त करने की कार्यवाही की जायेगी।
निर्देशों में कहा गया है कि यह समिति स्कूली बसों की जानकारी भी संधारित करेगी। जो वाहन बच्चों के परिवहन के लिये लगे हैं, उनके मानकों और गुणवत्ता के बारे में भी समिति जानकारी रखेगी। इसके अलावा, वाहनों में बच्चों की अधिकतम संख्या, स्कूल वाहन के परिसर के अंदर तक आने की व्यवस्था और सीट बेल्ट सहित अन्य सुरक्षा मानकों आदि की व्यवस्था के बारे में भी समिति जानकारी देगी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देशों में कहा है कि वाहन चालकों के ड्रायविंग टेस्ट और प्रशिक्षण के संबंध में भी प्रत्येक जिले में अभियान चलाया जाये। पुलिस अधीक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे जिले में स्कूल वाहनों के निरीक्षण के संबंध में नियमित रूप से प्रभावी कार्यवाही करते रहें।

MARI themes

Powered by Blogger.