शहडोल 
मध्य प्रदेश में विकास के आंकड़े चाहे जो कहानी कहते हों, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर में राज्य विकसित हो चुका है। शिवराज ने एक बार फिर दोहराया है कि मध्य प्रदेश में अमेरिका से बेहतर सड़के हैं। शिवराज ने पहले भी ऐसा कहा और बुधवार को शहडोल में उन्होंने यह बात दोहराई।

शिवराज को राज्य की सड़कों को लेकर दिए अपने बयान के चलते आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। इसके बावजूद शिवराज ने शहडोल में फिर अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा, 'मैं फिर कहता हूं, हमारी (मध्य प्रदेश की) सड़कें अमेरिका से कम नहीं हैं।' बता दें, बीते साल अक्टूबर महीने में अमेरिकी प्रवास पर गए चौहान ने वहां मोदी सरकार की तारीफ करते हुए सड़कों की तारीफ की थी। 
वॉशिंगटन डीसी में रसेल सीनेट हॉल में भारतीय दूतावास के सहयोग से पंडित दीनदयाल उपाध्याय फोरम के शुभारंभ के मौके पर चौहान ने कहा था, 'अगर किसी राज्य को आगे बढ़ाना है तो बुनियादी ढांचे के बिना वो आगे नहीं बढ़ सकता इसके लिए सबसे पहले हमने सड़कें बनवाई।' 

शिवराज ने कहा था, 'सड़कें भी ऐसी कि जब मैं यहां वॉशिंगटन में एयरपोर्ट में उतरा और सड़कों पर चलकर आया तो मुझे लगा कि मध्य प्रदेश की सड़कें यूएस से बेहतर हैं।' 

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में गुपचुप तरीके से नियुक्तियां का मामला प्रकाश में आया है। चौंकाने वाली यह है कि सचिवालय ने विज्ञापन जारी न कर नोटिस बोर्ड पर ही सूचना लगा दी। और आवेदन बुला लिए। विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा को पत्र लिखकर सलाह दी है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए।


 


विधानसभा में दो दर्जन से अधिक पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। इसमें सभी पद तृतीय श्रेणी हैं। नियुक्ति के मामले में नियमों को दर किनार किए जाने पर कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। सचिवालय नियुक्ति तो कर रहा है लेकिन इसके लिए विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन नहीं बुलाए गए। आमतौर पर तृतीय श्रेणी पदों की नियुक्ति के लिए प्रोफेशनल एक्जामनेशन बोर्ड (पीईबी) चयन परीक्षाएं लेता है, लेकिन यहां के लिए एेसा नहीं हो रहा है। आरक्षण नियमों का पालन नहीं होने के आरोप भी लगे हैं। यहां हो रही नियुक्तियों में दिव्यांग के लिए आरक्षण नहीं है।


 


उपाध्यक्ष ने यह लिखा पत्र में


विधानसभा सचिवालय में गोपनीय ढंग से नियुक्तियां की जा रही हैं। रिक्त पदों के संबंध में विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन एेसा नहीं किया गया। इस तरह की भर्ती प्रक्रिया से विधानसभा जैसे संवैधानिक संस्था की छवि धूमिल हो रही है। जिससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं में रोष होगा। इस भर्ती प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों की सेवाएं लेने से सचिवालय वंचित रहेगा। एेसी भर्ती प्रक्रिया से कोई बेरोजगार न्यायालय की शरण में अथवा लोकायुक्त आदि संस्थाओं में शिकायत कर सकता है। इससे विधानसभा सचिवालय की स्थिति शंका के दायरे में आ जाएगी।



नियुक्तियों में नियम प्रक्रिया का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। रोजगार कार्यालयों से नाम मंगाए गए हैं। उपाध्यक्ष को शायद गलत जानकारी मिली है। उन्हें कोई गलतफहमी है तो उसे दूर कर दिया जाएगा।


डॉ. सीतासरन शर्मा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा


भोपाल। मध्य प्रदेश में अध्यापकों के लिए खुशखबरी है। सरकार ने मध्य प्रदेश 2.37 लाख अध्यापकों के लिए नया कैडर मप्र राज्य स्कूल शिक्षा सेवा तका निर्माण किया है। जिसके अंतर्गत गजट नोटिफिकेशन जारी कर सेवा शर्तें और भर्ती नियम भी बनाकर तैयार कर दिए गए हैं। अब सभी अध्यापकों को स्थानीय निकायों से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी। सेवा शर्तें और भर्ती नियम बदलने के बाद अब अध्यापक तीन की जगह एक ही विभाग स्कूल शिक्षा के अधीन रहेंगे। नए नियम के तहत सभी अध्यापक प्राथमिक शिक्षक, अध्यापक माध्यमिक शिक्षक और वरिष्ठ अध्यापक उच्च माध्यमिक शिक्षक की श्रेणी में आएंगे।




कंपलसरी होगी ई अटेंडेंस


ये सारी सेवा शर्ते जुलाई 2018 के कैडर के अंतर्गत आएगी। इन नियम के मुताबिक अब तीन साल तक ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल में सेवा देने का अनुभव होने के बाद ही किसी भी पद पर प्रमोशन मिल पाएगा। साथ ही नई शर्तों में ई अटेंडेंस पूरी तरह से जरूरी हो जाएगी और अध्यापकों को ड्रेस पहनना भी जरूरी हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर च्च माध्यमिक शिक्षक का हाईस्कूल प्राचार्य के पद पर प्रमोशन पाने के लिए प्रमोशन पात्रता परीक्षा को पास करना होगा, इसके बाद ही प्रमोशन मिल सकेगा।


ये भी होगा


शिक्षकों की नई भर्ती में भी अब शिक्षक पात्रता परीक्षा को पास करना अनिवार्य हो जाएगा। इस परीक्षा में एससी, एसटी, ओबीसी व दिव्यांगों को 50 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग के लोगों को परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना होगा। आपको बता दें कि अभी तक अध्यापक पंचायत, नगरीय निकाय और आदिवासी विभाग के तहत आते हैं लेकिन नई नियम और शर्तों के बाद अब वे स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत अपनी सेवाएं देंगे। बीते कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन करने की घोषणा की थी, जिसके बाद अब उसमें अमल किया जा रहा है।


भोपाल। इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का पावर हाउस भोपाल में बनाया जाने के मामले में एक बड़े बदलाव की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपना इरादा बदला दिया है। अब वे भोपाल की जगह इंदौर में डेरा डालकर, वही से तीनों राज्यों की मॉनिटरिंग करेंगें। शाह का बेस कैंप अब इंदौर होगा।


इससे पहले जो बातें सामने आईं थीं उनके अनुसार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद भोपाल में रहकर बनने वाले पावर सेंटर की कमान संभालेंगे। ऐसे में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में उन्हें सरकारी बंगला भी एलॉट कर दिया गया। भोपाल में 74 बंगला में बी-12 नंबर का यह बंगला मेघराज जैन के नाम आवंटित था।
कहा जा रहा था कि यहीं बैठकर अमित शाह और उनकी टीम चुनावी रणनीति बनाएगी और पूरे अभियान की मनिटरिंग करेगी।


इसलिए किया जा रहा है बदलाव...
वहीं अब बताया जा रहा है कि भोपाल से केवल 4 शहरों के लिए एयर कनेक्टिविटी होने की वजह से इंदौर को चुना गया। चुकिं इंदौर से रोजाना 13 शहरों के लिए नियमित फ्लाइट हैं। ऐसे में इंदौर में बेस कैंप बनाने से अमित शाह जयपुर ,रायपुर और भोपाल प्रतिदिन आ जा सकेंगे। ऐसे में अब इंदौर में लोकेशन की तलाश की जा रही है।


दरअसल, मध्य प्रदेश में भाजपा को चौथी बार भी सत्ता में लाने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कमर कस ली है। भाजपा की केंद्र में सरकार बनने के बाद यह मध्यप्रदेश में यह पहला विधानसभा चुनाव है। इससे पहले वर्ष 2014 के लोकसभा में बहुमत हासिल सरकार बनाने के बाद शाह और मोदी की जोड़ी ने कई राज्यों पर जीत हासिल की।


लेकिन पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस ने भी मोदी शाह के इस संकल्प को टक्कर दी है, ऐसे में कहा जा रहा है कि इसी साल तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता अमित शाह को सता रही है।


जानकारों के अनुसार ऐसे में आगामी तीन प्रदेशों में होने वाले चुनावों को देखते हुए अमित शाह ने भाजपा का पावर सेंटर मध्यप्रदेश में शिफ्ट किया, ताकि तीनों प्रदेशों पर लगातार निगरानी रखी जा सके। वहीं यह भी माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव पर तीन राज्यों के परिणाम बड़ा असर डालेंगे। इसी के चलते शाह किसी भी प्रकार की कोई चूक नहीं चाहते।


वहीं सामने आ रही सूचनाओं के अनुसार चुनाव ठीक पहले यह फैसला लिया गया कि अब शाह मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव होने के कारण इंदौर से ही इन राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे।


भोपाल में सामने आई ये समस्या ... 
दरअसल मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ और राजस्थान इन तीन राज्यों में साल के अंत में चुनाव होना है। तीनों राज्यों की सीमा एक दूसरे लगी हुई हैं और मध्य में भोपाल होने के कारण यह फिट बैठता है, इसी के चलते पूर्व में भोपाल को चुना गया था। लेकिन एयर कनेक्टिविटी की कमी के कारण काऱण शाह ने इंदौर का फैसला लिया है। अब शाह यहीं से तीनों राज्यों को संभालेंगे यानि यहीं बैठकर इन तीनों राज्यों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी और फिर उस पर यहीं से अमल भी किया जाएगा। इसके अलावा ही सोशल मीडिया का सेंटर भी यहां लगातार काम करेगा।


वहीं जानकारों का यह भी कहना है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी लगातार 15 साल से सत्ता में है। ऐसे में बीजेपी के लिए सत्ता में खुद को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि 2018 के चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं हैं। पार्टी को कई जगहों पर कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। यही वजह है कि बीजेपी एक सेंटर प्वाइंट बनाकर काम करना चाहती है। जानकारों का मानना है कि पार्टी के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं।


पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में पुलिस अब सत्यापन के लिए आपके घर नहीं आएगी। सरकार ने पुलिसकर्मियों के आवेदक के घर जाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है।पुलिस को अपने रिकॉर्ड जांचकर आवेदक की सिर्फ आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी देनी होगी।


मुख्य पासपोर्ट अधिकारी व संयुक्त सचिव अरुण कुमार चटर्जी ने नियमों में बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा, पुलिस सत्यापन के लिए आवेदक का घर पर रहकर फॉर्म पर हस्ताक्षर करना जरूरी नहीं होगा। पुलिस को आवदेक से बात करने की भी जरूरत नहीं है। राज्यों को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है।

सिर्फ छह सवाल: सूत्रों ने कहा, पुलिस फॉर्म में 12 सवालों की जगह छह सवाल कर दिए गए हैं। वहीं, पुलिस के घर जाने की अनिवार्यता समाप्त करने से आवेदक परेशानी से बचेंगे। कम मानव संसाधन का दबाव झेल रही पुलिस को भी फायदा होगा। इससे बेवजह होने वाली देरी भी खत्म होगी। .

ज्यादा पैसा : सामान्य पासपोर्ट में सत्यापन रिपोर्ट 21 दिन की समय सीमा में देने पर पुलिस विभाग को प्रति आवेदन 150 रुपये दिए जाते हैं जबकि निर्धारित समय के बाद 50 रुपये मिलते हैं।

सूत्रों ने बताया कि यदि पुलिसकर्मी को आवेदक की आपराधिक पृष्ठभूमि जांचने घर जाना जरूरी है या अन्य जांच करनी है तो वे कर सकते हैं। लेकिन घर जाकर आवेदक के निवास का सत्यापन करना या आवेदक के फॉर्म पर दस्तखत कराने की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। आवेदक को अपने पुराने पतों की जानकारी देने की बजाय केवल मौजूदा पते की जानकारी देनी है।

सूत्रों ने बताया कि यदि पुलिसकर्मी को आवेदक की आपराधिक पृष्ठभूमि जांचने घर जाना जरूरी है या अन्य जांच करनी है तो वे कर सकते हैं। लेकिन घर जाकर आवेदक के निवास का सत्यापन करना या आवेदक के फॉर्म पर दस्तखत कराने की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। आवेदक को अपने पुराने पतों की जानकारी देने की बजाय केवल मौजूदा पते की जानकारी देनी है।

राजस्थान तृतीय श्रेणी लेवल 2 शिक्षक भर्ती

राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने  तृतीय श्रेणी लेवल 2 शिक्षक भर्ती के लिए 28,000 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन भर्तियों के लिए 3 अगस्त से 23 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवार शिक्षा निभाग की वेबसाइट education.rajasthan.gov.in पर एसएसओ आईडी के जरिए आवेदन कर सकते हैं। 

पदों  संख्या:  28,000, इनमें 

आयु कम से कम 18 और अधिक से अधिक 40 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 

4051 पद अनुसूचित क्षेत्र के लिए हैं और बाकी पद नॉन टीएसपी क्षेत्र के हैं। टीएसपी क्षेत्र के लिए हिंदी अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, सामाजिक विज्ञान समेत 6 विषयों के पद निकाले गए हैं। वहीं नॉन टीएसपी क्षेत्र के लिए इन सभी विषयों के साथ सिंधि के भी पद निकाले गए हैं। 

आवेदन शुल्क: सामान्य और बाहर के उम्मीदवारों के लिए 100 रुपए
अति पिछड़ा वर्ग के लिए 70 रुपए
अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए 60 रुपए

Name of the Post: Rajasthan 3rd Grade Teacher (Non TSP) Online Form 2018
Post Date: 01-08-2018
Total Vacancy: 23949
Board of Secondary Education, Rajasthan has published notification for the recruitment of 3rd Grade Teacher (Non-TSP) Level-II vacancies. Those Candidates who are interested in the vacancy details & completed all eligibility criteria can read the Notification & Apply.
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II Vacancies 2018
Application Fee
For Gen: Rs. 100/-
For OBC: Rs. 70/-
For SC/ ST: Rs. 60/- 
Pay the fee through Online


Important Dates
Starting Date to Apply Online: 03-08-2018
Last Date to Apply Online: 23-08-2018 by 12:00 Hrs
Age Limit (as on 01-01-2019)
Minimum Age: 18 Years
Maximum Age: 40 Years
Age relaxation is applicable as per rules

Vacancy Details
Post Name Total
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 01/2018) 9446
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 03/2018) 4900
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 05/2018) 5900
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 07/2018) 2900
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 09/2018) 623
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 11/2018) 55
3rd Grade Teacher (Non TSP) Level-II (Advt No 12/2018) 125
Interested Candidates Can Read the Full Notification Before Apply


उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के जन्म-दिवस तीन अगस्त पर  विशेष*

ताहिर अली भोपाल 


कहा जाता है, व्यक्ति जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वह वैसा ही हो जाता है। सामाजिक जीवन में सक्रिय कार्यकर्ता का व्यक्तित्व कार्य और व्यवहार से बनता है। सेवा-संकल्प का समर्पित भाव, चुनौतियों की जिद और जूनून के साथ सामना करने का जज्बा व्यक्तित्व का ऐसा पहलू है, जो राजनीति को सेवानीति में बदल देता है। व्यक्ति अगर राजनेता हो तो प्रशासक, संगठक और कार्यकर्ता की भूमिकाओं से उसका व्यक्तित्व बनता है। श्री राजेन्द्र शुक्ल ने विचारों की व्यापकता व्यक्तित्व की विशालता, व्यवहार की सहजता और विशिष्ट संवाद क्षमता के अद्धुत संयोग से ऐसे ही व्यक्तित्व का निर्माण किया है, जो नफरत करने वालों के दिल में प्यार भर देता है। वे समय के साथ जनहित कार्यों को समर्पित लोक-हितैषी और अच्छी छवि के राजनेता के रूप में उभरे हैं।
श्री राजेन्द्र शुक्ल के व्यक्तित्व का सशक्त पहलू व्यापक धारा है। यह धारा व्यवहारिकता और आध्यात्मिकता के अनूठे संयोजन से बनी है। सहज, सरल, सुलभ और निश्छलता के चलते उनकी सफलताओं, करिश्माई व्यक्तित्व और सोच ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। जनता ही उनकी भगवान है और उसी की सेवा में उन्हें नारायण के दर्शन होते हैं। उनके व्यक्तित्व में पारिवारिक संस्कार साफ-साफ दिखाई देते हैं। सत्तारूपी काजल की कोठरी में भी बेदाग श्री शुक्ल अपनी प्रशासनिक कार्य-शैली भी वे इस तरह का संतुलन बनाकर रखते हैं। विचारों की व्यापकता उनकी रुचि-नीति में भी दिखती है।
श्री शुक्ल के दरवाजे से जरूरतमंद और आम आदमी बिना अपनी समस्या के निदान के न जाने पाये, इसी संकल्प और नेक नीयत ने उन्हें विनम्रता को और मधुर वाणी का वह गुण दिया है जो हम अपने आदर्शों में तलाश करते हैं। उनकी सादगी उन्हें प्रदेश की राजनीति में अलग बनाती है। वे असाधारण व्यक्तित्व वाले साधारण जनसेवक हैं। उनके पास मानवीय संवेदनाओं, अनुभूतियों के उदार गुणों से भरा दिल है, जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के लिये धड़कता है। उनकी सफलताओं का आधार एक अलग पहचान बना रहा है।
एक योगी की तरह हर आम-खास की बात, समस्या सुनना, मनन करना, तार्किकता की कसौटी पर कसना और तत्काल निर्णय कर समस्या के समाधान का निर्देश देना, उनका ऐसा गुण है, जिससे आम 'जन' के 'मन' से उनका एक आत्मीय रिश्ता बन जाता है। मानवीय संवेदनाओं अनुउद्वार गणों से भरा दिल है जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के धड़कता है। वे कार्यों पर जितनी चौकस निगाह उतनी उनको चिंता है कि दरवाजे पर आए गंभीर रोग से पीड़ित और हर दुखियारे की मदद कर उसका दुख-दर्द दूर किया। उन्होंने कभी छवि निर्माण के प्रयास नहीं किये। उनकी सदइच्छाओं ने उनकी छवि को इतना पुख्ता कर दिया है कि लाख कोशिशें उसे धुँधला कर पाने में अक्षम हैं।

*विंध्य विकास की लिखी नई इबारत*
विन्ध्य माने पिछड़ापन। यह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन हकीकत थी। बड़े कद्दावर और प्रभावशाली नेता इस क्षेत्र में रहे, पर विन्ध्य की पहचान नहीं बनी। विश्व के नक्शे में रीवा को नाम दिलाने वाला एक व्हाइट टाइगर था, वह भी समय के साथ लुप्त हो चुका था, पर इसकी टीस श्री राजेन्द्र शुक्ल के मन में थी। उन्होंने उसे वापस ला दिखाया। लक्ष्य के प्रति जो जुनून और समर्पण श्री शुक्ल में है, वह विंध्य के विकास के रूप में चप्पे-चप्पे पर नजर आता है। विंध्य को देश के मानचित्र में एक स्पष्ट और चटखदार पहचान दिलाने में शुक्ल की अभूतपूर्व भूमिका है। उनकी प्रतिबद्धता और संकल्पबद्धता से विकास के सैकड़ों ऐसे छोटे-बड़े काम हैं, जिन्होंने क्षेत्र का चेहरा बदल दिया है।
विंध्य के क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन विकास को श्री शुक्ल ने प्राथमिकता में रखा है। अपने क्षेत्र के विकास के लिये उनके ड्रीम प्रोजेक्ट मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को मूर्त रूप देकर सफेद शेरों सहित अन्य वन्य-जीवों के अभ्यारण्य की स्थापना उनका बड़ा काम है। रीवा शहर चारों ओर से फोरलेन सड़कों से जुड़ रहा है। उनके प्रयास ही हैं कि कई फोर-लेन सड़कों का निर्माण तेजी से शुरू हो चुका है। श्री शुक्ल ने सड़कों के निर्माण के लिये केन्द्र सरकार से राशि मंजूर कराई। पहले चरण में सड़कों को चलने लायक बनवाया, जिनमें मनगवाँ से चाकघाट, रीवा-हनुमना, जबलपुर-बेला, रीवा-सतना, रीवा-सीधी-सिंगरौली आदि सड़कें शामिल हैं। रीवा से बनारस तक की सड़क बन चुकी है। रीवा से शहडोल-अमरकंटक मार्ग को प्रधानमंत्री चतुर्भुज योजना में शामिल कराया। निकट भविष्य में 6-लेन की सड़कें बनने वाली हैं। इन सड़कों के अलावा श्री शुक्ल ने स्थानीय, कस्बाई तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछवा दिया है। आज रीवा के लगभग सभी गाँव की सड़कें मुख्य सड़कों से जुड़ चुकी हैं।
रीवा के गुढ़ स्थित पहाड़ पर विश्व के सबसे बड़े 750 मेगावॉट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना भी उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ग्रेट शो-मेन फिल्म अभिनेता स्व. राजकपूर की रीवा से जुड़ी यादों को चिर-स्थाई बनाये रखने तथा विंध्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से करीब 18 करोड़ की लागत से एक हजार सीट के भव्य कृष्णा-राजकपूर ऑडिटोरियम की स्थापना ने नगर को गौरव प्रदान किया है। साथ ही स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला के प्रदर्शन के लिये उचित मंच भी मिला है। श्री शुक्ल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित कर शिक्षा के क्षेत्र में एक महान कड़ी जोड़ दी। बाणसागर की नहरों का जाल बिछाकर किसानों को सिंचाई की सौगात दिलवाना भी कालांतर में उनका उनका बड़ा काम माना जायेगा।
श्री शुक्ल विकास कार्यों के लिये धुन के पक्के माने जाते हैं। उन्होंने रीवा विकास का विजन रखकर उसके चौतरफा विकास में विशेष रुचि ली है। इसी के चलते रीवा विकास का पर्याय बनकर उभरा है। धार्मिक स्थल रानी तालाब, चिरहुआ का सौंदर्यीकरण, स्वामी विवेकानंद पार्क, फ्लाई-ओवर, रिंग-रोड, मॉडल सड़क, शॉपिंग मॉल, कलेक्ट्रेट भवन, गार्बेज ट्रीटमेंट प्लांट, अंतर्राज्यीय बस स्टेण्ड, संजय गाँधी मेमोरियल चिकित्सालय में विभिन्न अत्याधुनिक उपकरण, जिला चिकित्सालय को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाना, फूड प्रोसेसिंग पार्क, मीठा पानी घर-घर पहुँचाने और पार्किंग की सुचारु व्यवस्था आदि जैसी अनेक उपलब्धियाँ आज उनकी ही बदौलत रीवा के नाम दर्ज हैं।
लक्ष्मणबाग गौ-शाला की स्थापना से गायों की सेवा के साथ सुरक्षा हो रही है। गाय के गोबर से अगरबत्ती बनाना और गोबर के गमले बनाने का काम भी गौ-शाला में हो रहा है। ऐतिहासिक बसामन मामा की पुण्य-भूमि पर बेसहारा गौ-वंश को रखने के उद्देश्य से वन्य-विहार गौ-शाला की स्थापना भी की गई है। साथ ही उन्होंने महत्वपूर्ण लो-कास्ट एयरपोर्ट भी स्वीकृत करवाया, जिसका विकास कार्य प्रगति पर है। इससे रीवा सहित पूरे विंध्य को यातायात और संचार के साधन मिलेंगे, जो क्षेत्र का कायाकल्प कर देंगे। रीवा-राजकोट ट्रेन प्रारंभ हो जाने पर विंध्य क्षेत्र का चतुर्दिक आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विकास होगा।
*प्रशासनिक कौशल के धनी*
श्री शुक्ल् अपने तीन कार्यकाल में मंत्रीमंडल में विभागों के दायित्व निर्वहन की कसौटी पर खरे भी उतरे। नेतृत्व के प्रति निष्ठा और राज्य सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने की प्रतिबद्धता श्री शुक्ल की विशेषता हैं। बिजली संकट से जूझते हुए मध्यप्रदेश को रोशन करने की चुनौती को उन्होंने बखूबी उपलब्धि में बदला। आज मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला प्रदेश है। श्री शुक्ल ने उद्योग मंत्री का प्रभार लेते ही प्रदेश में औद्योगिक क्रांति का लक्ष्य लेकर अपने दायित्वों के निर्वहन में कुशलता प्रदर्शित की। आज प्रदेश औद्योगिक निवेश का मॉडल डेस्टिनेशन है। खनिज विभाग का दायित्व भी उन्होंने बखूबी निभाया। खनिज आधारित उद्योग प्रदेश में स्थापित हो, इसके लिए उन्होंने सार्थक और सुचिंतित प्रयास किए और उनके कार्यकाल में खनिज साधन विभाग की राजस्व आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
*ओहदा उनके लिए कभी पहचान नहीं बना*
श्री शुक्ल ने अपने संस्कारवान पिता समाजसेवी स्व. श्री भैयालाल शुक्ल के गुणों को सदैव ध्यान में रखते हुए स्वयं को ढाला। ओहदा उनके लिये कभी पहचान नहीं बना, बल्कि श्री शुक्ल से ओहदे की पहचान बनी। धीर-गंभीर ऋषि-मुनि मानव सेवा के लक्ष्य में एक तपस्वी की तरह लीन रहना उनका लक्ष्य है। उनकी सेवा भावना की तत्परता को कभी किसी पद का लालच धीमा नहीं कर पाया है। लोगों के जीवन में थोड़ी खुशियाँ ला सकें और अपने अंचल, प्रदेश के विकास के लिये कुछ अच्छा कर सकें, यही उनकी पूजा कहे या लक्ष्य है। अगर एक पंक्ति में श्री शुक्ल को परिभाषित करना हो तो यह कहा जा सकता है कि समाज और देश के हित की यात्रा शुरू करने के बाद न कभी उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और न कभी मील के पत्थर गिने। जन नायक श्री शुक्ल के संस्कार और सद्व्यवहार उनके जीवन में साकार होते है।

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