शहडोल/सीधी.  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जनआशीर्वाद यात्रा के तहत शनिवार को शहडोल जिले के ब्यौहारी पहुंचे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में शीघ्र ही शिक्षकों की भर्ती शुरू होगी। इसकी प्रक्रिया इसी माह से प्रारंभ हो जाएगी।
सीएम ने ब्यौहारी क्षेत्र के लिए 116.78 करोड़ की लागत से बनने वाली हिरवार माइक्रो सिंचाई परियोजना के निर्माण की आधारशिला रखी। वहीं भन्नी माइक्रो सिंचाई परियोजना की घोषणा की। यह जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना होगी। उधर, सीधी में शिवराज सिंह चौहान   ने कहा कि सीधी और सिंगरौली जिले के बैगा आदिवासियों को हर माह 1000 रुपये की पोषण आहार सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में विकास के साथ प्रदेशवासियों की जिंदगी में खुशहाली लाने के ठोस इंतजाम किए हैं। उन्होंने संबल योजना, बकाया बिजली बिल माफी योजना, सौभाग्य योजना तथा कृषि विकास एवं कृषक कल्याण योजनाओं की जानकारी देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे अधिकारपूर्वक इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आएं।

पोहरी विधानसभा सीट पर पिछले 2 चुनावों से बीजेपी का कब्जा है. यहां के विधायक प्रहलाद भारती हैं. भारती लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं.



एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान


पोहरी विधानसभा सीट शिवपुरी जिले में आती है. इस सीट पर पिछले दो चुनावों से बीजेपी का कब्जा है. 2013 के चुनाव में बीजेपी के प्रहलाद भारती ने 45209 वोट हासिल कर बीएसपी के हरिवल्लभ शुक्ला को 19 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. यहां पर कुल 2 लाख 19 हजार मतदाता हैं.


2008 के चुनाव में भी प्रहलाद भारती ने जीत हासिल की थी. भारती को 53068 वोट मिले थे. इस बार भी बीएसपी के हरिवल्लभ शुक्ला 49443 वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे. बता दें कि पोहरी विधानसभा सीट पर भी बसपा खासी मजबूत है.

इस सीट पर यदि कांग्रेस का बसपा से गठबंधन हो जाता है तो बीजेपी की राह काफी मुश्किल हो सकती है. बता दें कि कांग्रेस इस सीट पर लगातार 5 चुनाव हार चुकी है. वहीं इस बार के चुनाव आम आदमी पार्टी भी अपना उम्मीदवार उतार रही है. 'आप' ने नरेंद्र व्यास को अपना उम्मीदवार बनाया है.

ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस इलाके के लोग एकमात्र कृषि पर ही आधारित रहते हैं. पोहरी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और सिंचाई जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझता आया है. पोहरी विधानसभा सीट पर मुख्य रूप से धाकड़ और ब्राहणों की वर्चस्व की लड़ाई होती है.

इस सीट पर बीजेपी की ओर से एक बार फिर वर्तमान विधायक प्रहलाद भारती टिकट के दावेदार हैं. इसके अतिरिक्त इस सीट से पूर्व विधायक नरेन्द्र बिरथरे, सोनू बिरथरे, ग्वालियर की सालौनी धाकड के अतिरिक्त कैलाश कुशवाह भी टिकट की दौड़ में हैं.

2013 में हुए चुनाव के नतीजे

मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.

सोशल मीडिया पर उनकी रथयात्रा की जमकर चर्चा हो रही है, तस्वीरों में उमड़ती भीड़ बता रही है कि शिवराज सिंह का जादू और प्रभाव अब भी कम नहीं हुआ है

जनता के द्वार रथयात्रा लेकर पहुंचे शिवराज, क्या जनता देगी आशीर्वाद?

मध्य प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए अपने काम का लेखाजोखा लेकर जनता के बीच में हैं. सोशल मीडिया पर उनकी रथयात्रा की जमकर चर्चा हो रही है. तस्वीरों में उमड़ती भीड़ बता रही है कि शिवराज सिंह का जादू और प्रभाव अब भी कम नहीं हुआ है.

उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद राज्य की सत्ता की कमान बीते 13 सालों से शिवराज सिंह चौहान के पास रही है. वह एमपी के सबसे विश्वसनीय ब्रांड बनकर उभरे हैं. सूबे में वे एक ऐसे सीएम बनकर उभरे हैं जिन्हें अर्जुन सिंह के बाद सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली है.

मध्य प्रदेश को सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों के बीच से सत्ता संभालने वाले शिवराज सिंह ने राज्य को बीमारू और पिछड़े राज्यों की लिस्ट से बाहर किया है. कृषि क्षेत्र में भी एमपी ने बीते एक दशक में खासी प्रगति की है. हालांकि बीते तीन सालों में व्यापमं से लेकर मंदसौर में किसानों की हत्या जैसे मामलों ने शिवराज सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर कटघरे में खड़ा किया गया है, बावजूद इसके राज्य के दूर दराज और ग्रामीण इलाकों उनका प्रभाव कम नहीं हुआ है.

उमा को क्रेडिट दे रहे हैं शिवराज

'मैं' के नाम पर चुनाव लड़ने वाले शिवराज ने टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट पर लोगों को संबोधित करते हुए पहली बार प्रदेश के विकास का श्रेय किसी और को दिया है. उन्होंने कभी भाजपा के कार्यकाल के पूरे होने का नहीं बल्कि अपना कार्यकाल पूरा होने का जश्न मनाया. शिवराज ने अपने 15 साल के कार्यकाल में पहली बार जनता के बीच उमा भारती का नाम लेते हुए कहा कि 2003 में दिग्विजय सिंह सरकार खिलाफ अभियान का नेतृत्व उमा भारती ने किया और कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंका गया.

बकौल शिवराज, 'उमा ने मध्यप्रदेश के विकास की आधारशिला रखी. मैंने, उमा भारती और बाबूलाल गौर ने मिलकर प्रदेश की किस्मत को बदलने का काम किया है.'

ट्राइबल इलाकों को कर रहे हैं टारगेट

रोजाना करीब दो-ढाई सौ किलोमीटर की यात्रा करके लोगों के बीच पहुंच रहे शिवराज का पहला टारगेट है ट्राइबल ग्रामीण इलाका है, क्योंकि वो यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि इन्हीं सीटों पर कांग्रेस फिर से वापसी कर सकती है. इन 47 में से 32 सीट्स बीजेपी के पास हैं, वहीं 15 पर कांग्रेस का कब्जा है. लोकसभा की 29 सीट्स में से 6 सीटें आदिवासी हैं. इनमें से 5 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस है. यानी कहा जा सकता है कि बीजेपी आदिवासी सीटों के दम पर जीत सकती है.

ग्रामीण, किसान और आदिवासी इलाका कांग्रेस की ताकत बन सकता है और भाजपा यहीं कमजोर पड़ सकती है. जन आशीर्वाद यात्रा अलीराजपुर से जोबट और वहां से थांदला की ओर जा रही है और यह पूरा आदिवासी इलाका है. लेकिन सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए काम ने इस इलाके को जैसे छोटे शहरों में तब्दील कर दिया है.

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12 से 14 घंटे कर रहे हैं काम

पिछले तीन बार से प्रदेश के मुखिया रहे शिवराज इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. इस बार भी शिवराज चुनाव की तैयारी उसी तरह कर रहे हैं जैसे पहली बार कोई नेता जनता के बीच खड़ा हो. जनता के मुखातिब होने का एक भी मौका न छोड़ने वाले शिवराज दिन में 12 से 14 घंटे काम कर रहे हैं.

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14 जुलाई से अपनी रथयात्रा शुरू कर चुके शिवराज इस बार भी चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. हर छोटी-बड़ी जगह जहां शिवराज की काफिला पहुंच रहा है उसके चारों तरफ हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ नजर आती है. जहां तक नजरें जाती हैं बस लोगों की उत्साहित भीड़ नजर आती है जो अपने मुखिया को सुनना चाहती हैं. शिवराज यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि भाजपा कहां कमजोर पड़ सकती है और कांग्रेस कैसे इस बात का फायदा उठा सकती है.

पहली बार पोस्टर में अपने अलावा मोदी को जगह

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खास बात यह है कि पहली बार शिवराज ने पोस्टर और होर्डिंग में अपने अलावा किसी और को जगह दी है. 2013 के चुनाव में भाजपा के अकेले नायक रहे शिवराज इस बार पोस्टर और होर्डिंग में पीएम मोदी के साथ नजर आ रहे हैं.

सोशल मीडिया का भरपूर प्रयोग

चौथी बार वोट मांगने के लिए जनता के बीच खड़े शिवराज जहां ग्रामीण वोटरों को जोड़ने के लिए जन आशीर्वाद यात्रा कर रहे हैं, वहीं युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया का भी भरपूर प्रयोग कर रहे हैं. शिवराज की इस यात्रा का पूरी ब्यौरा उनके अधिकारिक ट्विटर और फेसबुक हैंडल पर मौजूद हैं. हजारों लोगों की भीड़ में घिरे शिवराज की इस यात्रा की ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद हैं जिसे स्क्रोल करते वक्त भीड़ देखकर आप भी एक मिनट के लिए ठहर जाएंगे.

उधर शिवराज बोलना शुरू करते हैं और इधर उनके अधिकारिक हैंडल से लाइव शुरू हो जाता है. कुल मिलाकर इसे आप एक पंथ दो काज भी कह सकते हैं. उनके भाषण में कही गई महत्वपूर्ण बातों की बकायदा प्रेस रिलीज भी जारी कर दी जाती है.

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क्या सत्ता आएगी हाथ

सैकड़ों वेलफेयर स्कीम चलाने वाले शिवराज सिंह के पॉलिटिकल मॉडल का कोई मुकाबला नहीं है. हर छोटी से छोटी समस्या का समाधान निकालने में माहिर शिवराज को शायद इसी वजह से अर्जुन सिंह के बाद सबसे अधिक लोकप्रियता मिली है. करीब दो लाख से ज्यादा विकास योजनाएं देने का दावा करने वाली शिवराज सरकार की इस जन आशिर्वाद यात्रा का कितना असर होगा यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा, लेकिन जिस तरह इस यात्रा में लोगों का सैलाब उमड़ रहा है उससे साफ नजर आ रहा है कि जनता शिवराज मामा को कितना पसंद करती है.

भोपाल। आने वाले दिनों में मानसून मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में कहर बरपा सकता है। इस संबंध में मौसम विभाग ने बड़ी चेतावनी जारी की है।


मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में देश के मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में जमकर बारिश होगी। वहीं मौसम विभाग ने अब केरल के बाद उत्तराखंड़, हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी इलाकों में जोरदार बारिश की चेतावनी दी है।


इसके चलते मध्यप्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक भोपाल, इन्दौर, जबलपुर में कुछ जगहों पर तेज बारिश का अनुमान है। वहीं ग्वालियर में भी इस दौरान रूक रूककर बारिश होती रहेगी।


मौसम विभाग से रिटायर्ड एके शर्मा के अनुसार मौसम के चित्रों के मुताबिक भोपाल में 3 सितंबर से 5 सितंबर तक, इंदौर व जबलपुर में 1 से 5 सितंबर तक लगातार बारिश हो सकती है।


ये रहेगा अगले 7 दिनों तक मौसम का हाल(MP Weather Forecast Bhopal)...
- 01 सितंबर यानि शनिवार को हल्की बारिश के साथ आम तौर पर बादल छाए रहेंगे।


- 02 सितंबर यानि रविवार को हल्की बारिश के साथ आम तौर पर बादल छाए रहेंगे।


- 03 सितंबर यानि सोमवार को बारिश या तूफान या धूल की संभावना के साथ आम तौर पर बादल छाए रहेंगे।


- 04 सितंबर यानि मंगलवार को बारिश या तूफान या धूल की संभावना के साथ आम तौर पर बादल छाए रहेंगे।


- 05 सितंबर यानि बुधवार को बारिश या तूफान या धूल की संभावना के साथ आम तौर पर बादल छाए रहेंगे। साथ ही तापमान में भी वृद्धि हो सकती है।


- 06 सितंबर यानि बृहस्पतिवार/गुरुवार को बारिश या बौछार की संभावना के साथ आसमान में बादल व तेज हवाएं चल सकती हैं।


- 07 सितंबर यानि शुक्रवार को बारिश या आंधी की संभावना के साथ आसमान में बादल रहेंगे।


यहां के लिए हाई अलर्ट:
उत्तराखंड में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कुछ इलाकों में भारी से भारी बारिश की आशंका जताई है।


मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक उत्तराखंड के अधिकांश इलाकों में मूसलाधार बारिश की आशंका जताई है। मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक मसूरी,देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी, नैनीताल और उधमसिंह नगर में भारी बारिश की संभावना है।


वहीं जानकारों की मानें तो मानसून वापसी यानि रिट्रिविंग मानसून भी मध्यप्रदेश में कहर बरपाने को तैयार दिख रहा है, ऐसे में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में होने वाली तेज बारिश प्रदेश में परेशानी का कारण बन सकती है। वहीं भोपाल में पिछले कुछ दिनों से लगातार आसमान पर बादलों ने डेरा जमा रखा है। जिसके चलते भोपाल में भी आगामी दिनों में तेज बारिश का अनुमान है।


मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस में शामिल होने का आमंत्रण दिया है.


भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  को कांग्रेस में शामिल होने का आमंत्रण दिया है. कमलनाथ का यह बयान वरिष्ठ बीजेपी नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के एक बयान के बाद आया है. दरअसल, बाबूलाल गौर ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद और प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमलनाथ की छिंदवाड़ा के विकास के लिए सराहना की थी.

केंद्रीय मंत्री रहते मैंने एमपी को दिए 4500 करोड़ से ज्यादा- कमलनाथ
कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता के दौरान, क्या वह गौर को कांग्रेस में शामिल होने का आमंत्रण देगें के सवाल पर कहा, ‘‘मैं तो शिवराज को भी निमंत्रण देता हूं. केवल बाबूलाल गौर को क्यों.’’ कमलनाथ ने कहा, ‘‘ बाबूलाल गौर जी एक सच्चे इंसान हैं, बीजपी के वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने सच्चाई स्वीकार की.’’ उन्होंने कहा कि गौर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह सच्चाई जानते हैं. गौर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री थे और मैं केंद्रीय शहरी विकास मंत्री. मेरे कार्यकाल में मैंने सबसे ज्यादा धन मध्यप्रदेश को दिया. मैंने मध्यप्रदेश के लिए 4500 करोड़ से अधिक रुपए जारी किए.’’

चुनाव लड़ना अभी तय नहीं- कमलनाथ  
आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा, ‘‘मैंने तय नहीं किया है कि मैं लडूंगा, क्योंकि मैं सांसद हूं. उन्होंने कहा कि चर्चा हो रही है कि चुनाव (लोकसभा और विधानसभा) साथ-साथ कराए जा सकते हैं. जब इन सब चीजों का फैसला होगा, तब मैं भी फैसला करूंगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि अमित शाह (भाजपा अध्यक्ष) ने भी इस बारे में विधि आयोग को चिठ्ठी लिखी है, तो कोई मजाक करने के लिए तो नहीं लिखी और किसी छोटे कार्यकर्ता ने भी नहीं लिखी. अमित शाह ने लिखी है. उन्होंने चिठ्ठी लिखी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और यह मांग कर रहे हैं, तो इससे इसमें गंभीरता दिखती है.’’

पूर्व केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने नोटबंदी को पूरी तरह से असफल करार देते हुए कहा, ‘‘इससे बाजार में प्रचलित नोटों से अधिक नोट बैंकों में जमा हो गए.’’

20 मार्च 2018 का दिन, सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति जनजाति से संबंधित एक केस दो जजों की बेंच के सामने था।जज थे जस्टिस गोयल व जस्टिस ललित।उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें SC-ST(PREVENTION OF ATROCITIES) Act के मामले में त्वरित गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए डीसपी स्तर के अधिकारी द्वारा 07 दिन के अंदर जांच कर अगली कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया।
बस यहीं से जो हुआ उसने समाज में बढ़ती खाई को और चौड़ा करने का काम किया। जिसमें राजनीतिक दल से लेकर मीडिया, सिविल सोसायटी सब तरह के लोगों ने आग में घी डालने का कार्य भी किया। जिसकी प्रतिक्रिया में शांत रहने वाले व चुनाव के मुहाने पर खड़े मध्यप्रदेश में जातिगत हिंसा का जो नंगा नाच हुआ उसने समूचे भारत को स्तब्ध कर दिया। अंततः सरकार इस दबाव को झेल नहीं पायी और फिर सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने जो किया वो इतिहास में एक बार "शाह बानो" केस के रूप में प्रसिद्धि दर्ज करा चुका है। अर्थात हड़बड़ी में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को एक अध्यादेश लाकर पलट दिया गया।

अब प्रतिक्रिया देने की बारी राजनीतिक रुप से सवर्ण समाज का ठप्पा लगाये घूम रहे निर्धन, मध्यमवर्गीय लोगों की थी जो ना केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस से भी जबाब चाह रहा है और NOTA का बटन दबाने की मुहिम चला रहा है।

सवाल यही उठता है कि सरकार से क्या कहीं वही ऐतिहासिक चूक तो नहीं हुई जो राजीव गांधी जी से हुई थी? उन्होंने तो दूसरे धर्म के लोगों को दूरदर्शन पर "रामायण" शुरू करके व आयोध्या में मंदिर कपाट खोलकर मनाने का प्रयास किया था लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि वर्तमान की केंद्र सरकार सवर्ण समाज को खुश करने के लिए किस "रामायण" को शुरू करवायेगा?

भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता 4 से 6 अक्टूबर के बीच लग सकती है। जबकि चुनाव 26 से 30 नवंबर के बीच होने की संभावना है। मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में भी विधानसभा चुनाव साथ होंगे। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि यह समय चुनाव की दृष्टि से सबसे अनुकूल है। पार्टियां चाहती हैं कि वोटिंग से पहले ही दिवाली (7 नवंबर) और ईद (21 नवंबर) के त्योहार हो जाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान में हिस्सा ले सकें।

मध्यप्रदेश में एक और छत्तीसगढ़ में दो चरणों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आयोग ने 4 अक्टूबर 2013 को चुनावी कार्यक्रम जारी किया था। अधिसूचना एक नवंबर और वोटिंग 25 नवंबर 2013 को हुई थी। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं तिथियों के आसपास इस बार भी आचार संहिता लगने की संभावना है। वोटिंग भी 26 से 30 नवंबर के बीच हो सकती है। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन भरने का काम शुरू हो जाएगा। इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी 17 सितंबर से मप्र में चुनावी शंखनाद करने जा रहे हैं, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष 25 सितंबर को जंबूरी मैदान में हो रहे कार्यकर्ता महाकुंभ से चुनावी अभियान का ऐलान करेंगे।

प्रचार के लिए समय बढ़ाने पर विचार

राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के लिए आयोग से अधिक समय मांग रहे हैं। प्रेक्षकों के मुताबिक अभी तक नाम वापसी से लेकर वोटिंग तक 15 दिन का वक्त प्रचार के लिए मिलता है। इसे 20 दिन करने की मांग हो रही है। आयोग भी सहमत है, पर वह कितना समय देगा, इस पर विचार किया जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत से चुनाव कार्यक्रम को लेकर पूछे गए सवाल को यह कहकर टाल दिया कि जब भी कोई बात तय होगी तो सबसे पहले मीडिया को इसकी जानकारी देंगे।

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