NEW DELHI: ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने ग्राहकों के लिए नई सुविधा शुरू की है। कंपनी के मुताबिक, अब कोई भी ग्राहक 5 किलो का रसोई गैस Cylinder हाथों-हाथ खरीद सकता है। यानी ग्राहक को पैसे जमा करते ही 5 किलो का kitchen gas मिल जाएगा। अब ग्राहक को इंतजार करने की जरूरत नहीं।

कहां से खरीद सकते हैं सिलेंडर / Where can buy cylinders

IOC ने ट्वीट कर बताया है कि ग्राहक अपने शहर में इंडेन के किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर या प्वाइंट ऑफ सेल पर जाकर 5 किलो का रसोई गैस सिलेंडर खरीद सकते हैं। वो भी ऑन द स्पॉट।

एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं- No address proof

कंपनी के मुताबिक, 5 किलो का रसोई गैस सिलेंडर खरीदने के लिए किसी एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं है. पैसे दें, गैस ले जाएं।

क्या कीमत है / What is the price

आईओसी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत बिना सब्सिडी के 340 रुपये है।

कहां कराएं रिफिल / Where to refill

कंपनी के अनुसार, ग्राहक इंडेन के किसी भी सेलिंग प्वाइंट पर 5 किलो का रसोई गैस सिलेंडर रिफिल करा सकते हैं। यह सिलेंडर BIS प्रमाणित सिलेंडर है, जिससे सुरक्षा और बढ़ जाती है।

मध्य प्रदेश में मतदान के बाद अब ईवीएम की सुरक्षा को लेकर घमासान छिड़ गया है. कांग्रेस ने वीडीयो जारी करते हुए चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई है और आरोप लगाया है कि बीजेपी ईवीएम से छेड़छाड़ कर जनादेश पलटना चाहती है.


पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच देश के 23वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर सुनील अरोड़ा रविवार को अपना पदभार ग्रहण करेंगे. लेकिन कुर्सी संभालते ही सुनील अरोड़ा को ईवीएम और चुनावों में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों से रूबरू होना पड़ेगा. अब तक ईवीएम संबंधी शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग की तरफ एक ही जवाब आता रहा है कि 'ईवीएम से छेड़छाड़ की ही नहीं जा सकती.' और इसे साबित करने के लिए आयोग हैकाथन का आयोजन भी करा चुका है.

मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में  बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रांग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पया.

कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल ने ट्वीट करते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हार देखते हुए कुछ लोग स्ट्रांग रूम में ईवीएम से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आयोग से गुजारिश है कि वो जांच करे और कड़ी कर्रवाई करे.

आयोग ने माना अधिकारियों से हुई गलती

वहीं चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं है जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना है कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई.

दरअसल यह मामला तब प्रकाश में आया जब बुधवार को हुई वोटिंग से 48 घंटे बाद एक बिना नंबर प्लेट लगी ईवीएम से भरी बस सागर जिला कलेक्टर दफ्तर पहुंची. यह मशीनें मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के खुरई विधानसभा क्षेत्र से आई थीं. हालांकि शुक्रवार को चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि यह आरक्षित श्रेणी की मशीने थीं जिन्हें बैक अप से लिए रखा गया था. लेकिन शनिवार को आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.

चुनाव आयोग द्वारा जारी बयान में कहा गया कि मशीनों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. मशीने देरी से पहुंचने के लिए नायब तहसीलदार राजेश मेहरा को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं शुक्रवार को शाजापुर जिले में एक बीजेपी नेता के होटल में ईवीएम मशीनों के साथ अधिकारियों के वीडियो सामने आने पर भी चुनाव आयोग ने कहा कि अधिकारियों द्वारा होटल में ईवीएम मशीनों के साथ जाना नियमों की अनदेखी थी और जैसे ही खबर मिली संबंधित अधिकारियों को हटा दिया गया.

ईवीएम को लेकर क्या है नियम ?

चुनाव आयोग द्वारा यह सफाई कांग्रेस की शिकायत के बाद दी गई. चुनाव आयोग के नियम के अनुसार प्रयोग में न लाई जाने वाली मशीनें अलग रखी जाती है. लेकिन नियम में भी यह भी लिखा है कि प्रयोग न लाई जाने वाली मशीने अगले दिन संबंधित अधिकारी के पास जमा होंगी और खुरई विधानसभा के मामले में ऐसा नहीं हुआ जिसकी वजह से मशीने 48 घंटे में पहुंची.

इसके साथ ही प्रयोग ने लाई जाने वाली आरक्षित श्रेणी की मशीनों को लेकर आयोग का नियम कहता है कि इस तरह की मशीनों को कहा रखा जाना है यह पहले से तय होता और राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को इसकी सूचना देनी होती है. और यह किसी भी संदेह को जगाने के लिए संग्रह और गिनती केंद्र के आसपास नहीं होना चाहिए.

शनिवार को कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और मध्य प्रदेश व छ्त्तीसगढ़ में पार्टी कार्यकर्ताओं स्ट्रांग रूम पर 11 दिसंबर तक नजर रखने के निर्देश दिए हैं. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट में लिखा, "सभी कांग्रेसजन , कांग्रेस प्रत्याशियों से अपील 11 दिसम्बर मतगणना तक स्ट्रॉंग रूम व ईवीएम पर निगरानी रखे, विशेष सावधानी रखे. कांग्रेस की सरकार बनना तय है."

अब जिस तरह से विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर देश की विभिन्न संस्थाओं को कमजोर करने के लगातार आरोप लगा रही है. ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़ा होना चिंता का विषय है.



भोपाल- देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कार्यकाल शनिवार 1 दिसंबर को पूरा हो गया। अंतिम दिन भी वह पूरी मुस्तैदी से आयोग में सक्रिय रहे और शिकायतों का निपटारा करते रहे। उन्होंने कहा कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है, अंतिम दिन मध्यप्रदेश कांग्रेस की ओर से मिली शिकायतों की जांच कराकर तुरंत कार्रवाई भी सुनिश्चित कराई। रावत बोले- अगली भूमिका के बारे में अभी कुछ तय नहीं, भोपाल में ही बसेंगे और लिखने-पढ़ने के शौक को पूरा करेंगे।

नईदुनिया से विशेष बातचीत में रावत ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनका करीब एक साल का कार्यकाल शानदार रहा। इस दौरान पूरे कमीशन का भरपूर सहयोग मिला, उनके बाद आयोग की कमान सुनील अरोरा को सौंपी जा रही है। राजस्थान कैडर के आईएएस अरोरा रविवार को अपना पदभार संभालेंगे। ईवीएम की सुरक्षा को लेकर रावत ने बताया कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है। इस संबंध में जो भी शिकायतें मिलीं उनकी तुरंत जांच और कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई। इस संबंध में उन्होंने खासतौर पर सागर के मामले का भी जिक्र किया। उनके कार्यकाल में वीवीपेट जैसा नया प्रयोग शुरू हुआ, इसका जिक्र करने पर वह बोले इसमें गड़बड़ करना संभव नहीं है।

इतनी महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील जवाबदारी के दौरान कभी किसी तरह का राजनीतिक दबाव महसूस किया? इस पर उनका जवाब था ऐसा मौका कभी नहीं आया, पूरे कमीशन ने उन्हें हर समय पूरा सहयोग दिया। वह बताते हैं कि मैं अपने कार्यकाल से पूरी तरह संतुष्ट हूं। आगामी योजना अथवा नई भूमिका के बारे में सवाल होते ही वह कहते हंै कि अभी कुछ भी तय नहीं। हां, बसने के लिए भोपाल ही आ रहा हूं वहीं सब मित्रों के बीच रहूंगा और लिखने-पढ़ने का शौक भी पूरा करूंगा।



भोपाल। सागर, सतना और खरगोन की घटनाएं सामने आने के बाद कांग्रेस ने सागर के जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार सिंह पर खुला आरोप लगाते हुए उन्हे मतगणना की प्रक्रिया से बाहर करने की मांग की है। कांग्रेस ने कहा है कि हम चाहते हैं कि स्ट्रांग रूम के नजदीक ऐसी जगह हमें स्थान दिया जाए जहां से हम सीधे आखों से स्ट्रांग रूम पर नजर रख सकें। कांग्रेस का कहना है कि ज्यादातर प्रत्याशी घबराए हुए हैं और प्रशासन पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मंडल ने विधानसभा चुनाव में हुए मतदान और ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की आशंका जातते हुए अवांछित गतिविधियों पर रोक लगाये जाने के संबंध में एक ज्ञापन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी.एल. कांताराव को सौंपा। ज्ञापन में लिखा है कि मध्यप्रदेश में विधान सभा के आम चुनाव का मतदान दिनांक 28 नवंबर 2018 को सम्पन्न हो चुका है, मतगणना दिनांक 11 दिसम्बर, 2018 को होना है। मतगणना के लिए सभी संबंधित ईवीएम मशीनों को जिला स्तर पर बनाए गए स्ट्रांग रूम में रखी होने के बावजूद उनमें छेडछाड की स्थिति बनी हुई है और इनसे चुनाव परिणाम प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। 

प्रदेश के अन्य कई क्षेत्रों से भी शिकायतें आ रही है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि मतगणना के लिए स्ट्रांग रूम में रखी गई ईवीएम मशीनों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरों के संबंध में डिजीटल वीडियों रिकार्डिंग का लिंक सार्वजनिक किया जावे जिससे कि कांग्रेस प्रत्याशी या उसके प्रतिनिधि आवश्यकतानुसार देखकर संतुष्टि कर सके। मतगणना हेतु सुरक्षित रखी गई मशीनों की निगरानी के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों या उनके प्रतिनिधियों को स्ट्रांग रूम के नजदीक स्थान उपलब्ध कराया जावे जहां से वे स्ट्रांग रूम में होने वाली गतिविधियों का निरीक्षण कर संतुष्टि कर सके कि उसके चुनाव से संबंधित ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई हैं तथा उनके साथ कोई छेडछाड नहीं हो रही है। क्योंकि अधिकतर विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशियों द्वारा यह शिकायत की जा रही है कि स्ट्रांग रूम के बाहर जिला प्रशासन, भाजपा सरकार एवं उनके नेताओं के दबाव में उन्हें स्ट्रांग रूम के बाहर नजदीक कोई स्थान उपलब्ध नहीं करा रहा है और स्थिति यह है कि स्ट्रांग रूम से आधा अथवा एक किलोमीटर की दूरी पर निगरानी के लिए स्थान निश्चित किया जा रहा है जहां से स्ट्रांग रूम में रखी मशीनों की निगरानी करना असंभव है। 



भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए मतदान हो गया परंतु चुनाव परिणाम नहीं आए हैं एवं आचार संहिता लागू है। इस बीच शनिवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान अचानक मंत्रालय जा पहुंचे जहां उन्होंने अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। विपक्षी पार्टियों ने इस पर आपत्ति जताई है। अब देखना यह है कि यह गतिविधि आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आती है या नहीं 


मध्यप्रदेश शासन की ओर से आधिकारिक रूप से कहा गया है कि यह मीटिंग प्रदेश में दलहन, तिलहन, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिए आयोजित की गई थी। इस बैठक को 'खाद्यान्न उपार्जन और उर्वरक वितरण की समीक्षा बैठक' नाम दिया गया है। 

बैठक में आधिकारिक तौर पर कृषि उत्पादन आयुक्त प्रमुख सचिव कृषि, प्रमुख सचिव खाद्य, प्रमुख सचिव सहकारिता, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तथा संबंधित विभाग के आयुक्त उपस्थित थे। बता दें कि इस बैठक की कोई पूर्व सूचना सार्वजनिक नहीं हुई थी और बैठक के फोटो भी मंत्रालय के प्रेस रूम द्वारा जारी नहीं किए गए।

भोपाल। वर्ष 2019 के चुनावों से पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने की लगातार कोशिश में है। चर्चा है कि ऐसे में अब सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।


दरअसल कई राज्यों में विधानसभा चुनावों का माहौल है। लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड के विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2019 में होने हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के चुनावों को लेकर भी सुगबुगाहट बनी हुई है।


पूर्व में दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का फायदा नए साल में मिलेगा। लेकिन, सैलरी कितनी बढ़ेगी इस पर कोई स्थिति साफ नहीं है। साथ ही कर्मचारियों को भी उम्मीद है कि उनकी मांग स्वीकार की जा सकती है। क्योंकि, अगले साल आम चुनाव होने हैं और केंद्र सरकार चुनाव से पहले कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगी।


यही वजह है कि केंद्र की मोदी सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले रही थी। इसे लेकर 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की नजर केंद्र सरकार की टिकी हैं।


चर्चा है कि केंद्रीय कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत एक अलग चैनल के माध्यम से वेतन वृद्धि मिल सकती है। ये डियरनेटस अलांउस (डीए) के जरिए हो संभव होगा।


इसके पहले, सातवें वेतन आयोग लागू होने के साथ ही सरकार ने डीए को पूरी तरह से हटाकर शून्य कर दिया था। लेकिन दैनिक मांग में आने वाली चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद डीए में बढ़ोतरी की उम्मीद जतार्इ जा रही है।


सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। लेकिन, उसका ऐलान अभी नहीं होगा। इस पर पीएम मोदी से चर्चा होनी है, ऐसे में अगले साल आम चुनाव हैं इसलिए सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि आम चुनाव से पहले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ऐलान किए जा सकते हैं।


जानकारों का कहना है कि 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह के ऐलान पहले भी होते रहे हैं, इसलिए यह दिन इस वजह से खास है कि लाल किले से पीएम मोदी अपने इस कार्यकाल के आखिरी भाषण में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अपनी झोली खोल देंगे।


हालांकि, 15 अगस्त को भी पीएम मोदी से ऐसी ही उम्मीदें की गई थीं, लेकिन जानकारों का मानना है कि 26 जनवरी को यह ऐलान करना सरकार की मजबूरी होगी। क्योंकि, इसके बाद 1 फरवरी को आम बजट है। सूत्रों की मानें तो बजट में सातवें वेतन आयोग से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को भी शामिल किया जा सकता है।



इस माह से होगी बढ़ोतरी!...
बढ़ती मांग के बाद सरकार फिर से डीए बहाल करेगी। वर्तमान में, केंद्रीय कर्मचारियों को 9 फीसदी का डीए मिलता है। उनके वेतन में बढ़ोतरी डीए के माध्यम से होती है। हाल ही में इसे 7 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी किया गया था।


इस संबंध में जानकारों का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए लागू होने एक अच्छी खबर है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों को इसका फायदा आगामी मार्च 2019 से मिलना शुरू हो जाएगा इसके बाद उनके वेतन में इसी अनुरूप में बढ़ोतरी होगी। यदि केंद्र वर्तमान में, 2.57 गुना स्तर के ऊपर फिटमेंट फैक्टर कारक को बढ़ाकर वेतन बढ़ाता है तो यह बेहतर होगा।



जानिये कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी...
सातवें वेतन आयोग के तहत, 18,000 रुपए की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को 1620 रुपए का डीए मिलने की चर्चा है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी मेट्रिक्स के आधार पर तय होती है।


जानकारों के अनुसार मान लीजिए किसी कर्मचारी को 1620 रुपए का डीए मिलता है, जो कि 18000 रुपए का 9 फीसदी है। ये आंकड़ा जुलार्इ 2018 में डीए में 2 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद है। डीए में 2 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद न्यूनतम 360 रुपए की बढ़ोतरी होगी।


वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांगों में से एक पर सहमति जता दी है। कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली पर आधारित नई पेंशन योजना (NPS) को पुरानी पेंशन योजना (OPS) से बदलने की मांग कर रहे थे।


अब दिल्ली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को तोहफा देते हुए दिल्ली विधानसभा में नई पेंशन योजना को पुरानी पेंशन योजना से बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।


दिल्ली विधानसभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार 26 नवंबर 2018 को भारत सरकार से आग्रह किया गया कि मोदी सरकार तत्काल प्रभाव से नई पेंशन स्कीम को खत्म करके दिल्ली एनसीआर में काम कर रहे सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बार फिर से सभी सुविधाओं के साथ पुरानी पेंशन स्कीम लागू करें।


पुरानी पेंशन योजना के विपरीत नई पेंशन स्कीम कर्मचारियों को निवेश पर गारंटेड रिटर्न या न्यूनतम पेंशन की कोई गारंटी नहीं देता है। एनपीएस पारिवारिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा प्रदान नहीं करता है। नई पेंशन स्कीम जरूरत पड़ने पर लोन सुविधा प्रदान नहीं करता है।


इसके अलावा नई पेंशन स्कीम वार्षिक वृद्धि और डीए पर वृद्धि भी प्रदान नहीं करता है। एनपीएस कर्मचारियों को मेडिकल इमरजेंसी को पूरा करने के लिए अपने पेंशन फंड से पर्याप्त धन वापस लेने की अनुमति नहीं देता है।


यहां एनपीएस कर्मचारियों को शेयर बाजारों और उन ताकतों की दया पर छोड़ देता है जो बाजार में छेड़छाड़ कर रहे हैं। एनपीएस पेंशन फंड से निकासी पर ड्रैकोनियन प्रतिबंध लगाता है।


एनपीएस बीमा कंपनियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी कम से कम दस साल तक वार्षिकी खरीदने के लिए मजबूर करने के साथ कर्मचारियों का शोषण करने की अनुमति देता है, और संविधान में निहित कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत चलता है।


कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका प्रदेश के सभी जाबांज कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि वो भी मतगणना तक स्ट्रांग रूम पर कड़ी नजर रखे जिससे भाजपा किसी भी तरह की साज़िश में कामयाब ना हो सके.

कार्यकर्ताओं से बोले सिंधिया- EVM में हो सकती है धांधली, चौकस रहें
फोटो-manthannews.in

मध्य प्रदेश का चुनाव खत्म हो गया है. इस बीच एमपी कांग्रेस के बड़े नेता और पार्टी की ओर से सीएम पद के दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ईवीएम  में हेर-फेर की साजिश की आशंका जताई है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगाह किया है कि वे स्ट्रांग रूम की निगरानी में तनिक भी चूक नहीं होने दें, ताकि बीजेपी किसी तरह की साजिश नहीं कर सके.

जनमत कुचलने पर आमादा बीजेपी

बता दें कि एमपी विधानसभा चुनाव की मतगणना 11 दिसंबर को है. इस बीच ईवीएम को स्ट्रांग रूम में बेहद कड़ी निगरानी में रखा गया है. कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य ने कहा है कि भोपाल में स्ट्रांग रूम का लाइट बंद हो जाना बड़ी साजिश की ओर इशारा है. उन्होंने ट्वीट किया, "भोपाल में स्ट्रांग रूम के बाहर लगी एलईडी बन्द होना, सागर में गृहमंत्री की विधानसभा सीट की रिजर्व ईवीएम मशीनों का 48 घंटे बाद पहुँचना, सतना-खरगोन में अज्ञात बक्से से स्ट्रांग रूम में ले जाने के वीडियो का सामने आना कही ना कही बड़ी साजिश की और इशारा है" 

ज्योतिरादित्य ने आगे ट्वीट कर कहा है, "भाजपा अपनी संभवित हार को देखते हुए लोकतंत्र और जनता के मत को कुचलने पर आमादा हो गयी है, ये सरकार के संरक्षण में लोकतंत्र की हत्या का प्रयास है, चुनाव आयोग शीघ्र सख्त कदम उठाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर मतगणना तक ईवीएम की कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित क

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका प्रदेश के सभी जाबांज कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि वो भी मतगणना तक स्ट्रांग रूम पर कड़ी नजर रखें जिससे भाजपा किसी भी तरह की साज़िश में कामयाब ना हो सके.एक्शन ले चुनाव आयोग- अहमद पटेल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने भी कहा है कि हार की आशंका से घबराए कुछ लोगों ने अभी से ईवीएम में टेंपरिंग शुरू कर दी है. इस बावत उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है. 30 नवंबर के इस वीडियो में कुछ लोग स्ट्रांग रूम के बाहर कुछ लेकर जा रहे हैं. अहमद पटेल ने इस बावत चुनाव आयोग से कार्रवाई करने की मांग की है.

कांग्रेस-AAP कार्यकर्ताओं का पहरा

वहीं ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका के चलते भोपाल की पुरानी जेल में बने स्ट्रांग रूम के बाहर कांग्रेस के कार्यकर्ता दिन-रात पहरा दे रहे हैं. इस काम में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं. दोनों पार्टी के कार्यकर्ता शिफ्ट बांटकर रात और दिन स्ट्रांग रूम के बाहर मौजूद हैं.

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