जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर कुल 1528 मतदान केंद्रों पर वोटिंग के बाद शासकीय पीजी कॉलेज शिवपुरी में स्ट्रांग रूम बनाकर सारी ईव्हीएम मशीनें रखी गईं हैं। मतगणना वाले दिन तक ईवीएम मशीनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला पंचायत सीईओ ने पीजी कॉलेज प्राचार्य को आदेश थमाया है। जिसमें छात्र-छात्राओं सहित पूरे स्टाफ के साथ पॉलिटेक्निक कॉलेज में कक्षाएं संचालित करने को कहा है। इसी आदेश के साथ छात्र-छात्राएं सोमवार को जब कॉलेज पहुंचे तो उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया। अब पॉलिटेक्निक कॉलेज में मंगलवार से कक्षाएं संचालित की जाना है। पीजी कॉलेज के बराबर पॉलिटेक्निक में स्थान उपलब्ध नहीं है। जिससे पढ़ाई प्रभावित होना लाजमी है। यानी आठ दिनों में स्टाफ सहित छात्र-छात्राओं को पॉलिटेक्निक कॉलेज तक भागदौड़ करना पड़ेगी। हालांकि चुनाव परिणाम तक ईवीएम की सुरक्षा भी जरूरी है। वर्तमान में प्रदेश भर में ईवीएम को लेकर विवाद चल रहा है। ऐसे में स्थानीय अधिकारी किसी भी सूरत में शिकायत की नौबत नहीं आने देना चाहते हैं। यही वजह रही कि 28 नवंबर को मतगणना के बाद ईवीएम कॉलेज में बनाए स्ट्रांग रूम में रख दीं और छह दिन बाद कॉलेज संचालन के लिए स्थान बदलने की याद आई। 

परीक्षा फार्म भरने के लिए भटके छात्र-छात्राएं : पीजी कॉलेज में स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए बीएसएफ सहित अन्य पुलिस बल तैनात किया गया है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच छात्र जब कॉलेज पहुंचे तो सुरक्षा में तैनात जवानों ने अंदर नहीं घुसने नहीं दिया। पूरे दिन छात्र-छात्राएं परेशान रहे। परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है, इसलिए यूनिवर्सिटी द्वारा परीक्षा फार्म भरवाए जा रहे हैं। अधिकतर छात्र परीक्षा फार्म भरने के लिए भटके नजर आए। 

पॉलिटेक्निक बिल्डिंग में कक्षाएं संचालित करेंगे 

आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों के विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं। साथ ही यह भी संभावना है कि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव भी साथ ही कराए जा सकते हैं।

हाइलाइट्स

2019 के लोकसभा चुनाव के साथ 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव संभव


आंध्र, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में हो सकते हैं चुनाव


चारों विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून 2019 में होगा खत्म


आम चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर में भी असेंबली चुनाव मुमकिन


नई दिल्ली 
 चुनाव आयोग अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव करवा सकता है। चुनाव आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह बताया है। चारों विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून 2019 में समाप्त होगा। सूत्रों ने यह भी बताया कि आम चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव कराए जाने की भी संभावना है। 

बताते चलें की हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग कर दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनावों के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराकर चुनाव आयोग पहले की परंपरा को निभाएगा। जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग किए जाने के बाद चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर वहां फिर से चुनाव कराना है। एक अधिकारी ने कहा, ‘आखिरी सीमा मई में समाप्त हो रही है। हम लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर में चुनाव करवा सकते हैं लेकिन यह पहले भी हो सकता है। हम आगामी दिनों में देखेंगे।’ 

जम्मू-कश्मीर में भी साथ ही हो सकता है विधानसभा चुनाव 
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का छह साल का कार्यकाल 16 मार्च 2021 को खत्म होने वाला था। अन्य राज्यों की विधानसभा और लोकसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। बहरहाल, सरकार में मौजूद सूत्रों ने बताया कि जब राज्य में लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती होगी तो चुनाव प्राधिकार के लिए एक साथ विधानसभा चुनाव कराने में सहूलियत होगी । सिक्किम विधानसभा का कार्यकाल 27 मई 2019 को खत्म हो रहा है और आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल क्रमश: 18 जून, 11 जून और 1 जून को खत्म होगा। 

अधिकारी ने कहा, ‘लोकसभा चुनाव के लिए इंतजाम होने और उसी दौरान विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की स्थिति में स्वाभाविक है कि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं।’ चुनाव आयोग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों को चार राज्यों और लोकसभा में चुनावों के साथ मिला दिया जाए तो 2019 में कोई और चुनाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं। अगर पार्टी दोनों विधानसभा को तय समय से छह महीने पहले भंग करने का फैसला करती है तो लोकसभा और चार राज्यों के साथ वहां का चुनाव कराया जा सकता है । दोनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2019 में खत्म होगा।


भोपाल। विधानसभा के लिए मध्यप्रदेश में इस बार यानि 2018 में करीब 75 प्रतिशत मतदान हुआ है। ऐसे में जैसे-जैसे मतगणना की तिथि करीब आ रही है हार-जीत के कयासों का दौर फिर तेज हो गया है। कई तरह की भविष्यवाणियों के बीच हर कोई असमंजस्य madhya pradesh exit poll 2018में है, कि आखिर सरकार किसकी बनेगी। 

जानकारों के अनुसार MP में यह 61 साल में रिकॉर्ड मतदान Voting है। यह मतदान 2013 के चुनाव से करीब 4 फीसदी ज्यादा है और यही 4 फीसद ज्‍यादा वोटिंग भाजपा व शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chouhan के लिए खतरे की घंटी बनी हुई है।


राजनीति के जानकार कहते हैं कि इतिहास में भी जब-जब राज्‍य में 4 फीसदी से ज्‍यादा वोटिंग हुई, मौजूदा सरकार उखड़ गई।


हालांकि सरकार किसकी बनेगी इस बात का फैसला 11 दिसंबर को होगा। इसके पहले कई सीटों पर बनते बिगड़ते समीकरणों madhya pradesh final exit poll 2018 ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित हो गया है।


कई सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी कांटे की टक्कर दे रहे है, तो कई सीटों पर बागी प्रत्याशी भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं, जो परिणाम बदलने तक की ताकत रखते है।



ये है अब तक का इतिहास...
: सरकार में बदलाव के संबंध में राजनीति के जानकार डीके शर्मा बताते हैं कि 1990 में दिवंगत सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए। जिसके चलते तत्कालीन कांग्रेस की सरकार उखड़ गई।


: वहीं 1990 के चुनाव के मुकाबले 1993 में 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा, तो BJP की पटवा Sundar Lal Patwa सरकार पलट गई। बता दें 1990 में 54.2 फीसद वोट पड़े थे, जबकि 1993 में यह 6.03 प्रतिशत बढ़कर वोटिंग 60.5 फीसद हो गई।


: इसके बाद 1998 के चुनाव में वोटिंग .3 प्रतिशत घटकर 60.2 रह गया। जबकि इससे पहले 1993 में 60.5 फीसद वोटिंग हुई थी। इस साल वोटिंग में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ और इसका परिणाम ये हुआ कि दिग्विजय सिंह की सरकार दोबारा बन गई।


: वहीं 2003 के चुनाव में भाजपा BJP उमा भारती के नेतृत्व में मैदान उतरी। राज्य में जहां 1998 में कुल 60.2 फीसद वोटिंग हुई थी, वहीं इस बार यानि 2003 में वोटिंग प्रतिशत 67.3 पर पहुंच गया। यानि करीब 7 फीसदी की वोटिंग में बढ़ोतरी हुई, जिसके चलते दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार को सत्ता से बाहर हो गई।


: इस बार यानि 2018 में प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होने के बाद अब मतदाताओं की नजरें ऐसी सीटों पर टिकी हैं जहां भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद करीबी हो गया है। वही इस बार मतदान प्रतिशत भी बढ़ा है, जिससे उलटफेर के आसार भी बढ़ते हुए नजर आ रहे है। इस तरह कई सीटों की रोचकता बढ़ गई है।


 


इन 10 जिलों की विधानसभाएं जो फंसा सकती हैं मामला...
अनूपपुर की विधानसभा अनूपपुर में इस बार 12.07 फीसदी अधिक मतदान हुआ। वहीं धार की विधानसभा गंडवानी में 11.73 प्रतिशत, झाबुआ की विधानसभा झाबुआ में 8.5 प्रतिशत, पन्‍ना की विधानसभा गुन्‍नौर में 8.49 फीसदी, रायसेन की विधानसभा उदयपुरा में 8.4 प्रतिशत,धार की विधानसभा सरदारपुरा में 7.78 प्रतिशत,बैतूल की विधानसभा भैंसदेही में 7.68 फीसदी, दतिया की विधानसभा भांडेर मे 7.65 प्रतिशत,सिंगरौली की विधानसभा देवसर में 7.64 फीसदी व सतना की विधानसभा रायगांव में 7.46 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है।


यहां महिलाएं पलट सकती हैं बाजी...
सतना जिले की विधानसभा रायगांव में इस बार 10.12 प्रतिशत महिला वोटिंग में इजाफा हुआ है। इसी तरह धार जिले की विधानसभा सरदारपुरा में 13.53 प्रतिशत,दतिया जिले की विधानसभा भांडेर में 11.85 प्रतिशत, धार जिले की विधानसभा गंडवानी में 12.1 प्रतिशत, पन्‍ना जिले की विधानसभा गुन्‍नौर में 10.65 प्रतिशत,रायसेन जिले की विधानसभा उदयपुरा में 10.17 प्रतिशत,अनूपपुर जिले की विधानसभा अनूपपुर में 13.61 प्रतिशत,गुना जिले की विधानसभा चचोड़ा में 9.86 प्रतिशत,सिंगरौली जिले की विधानसभा चिंतरांगी में 9.64 प्रतिशत व ग्‍वालियर जिले की विधानसभा ग्‍वालियर ग्रामीण में 9.27 प्रतिशत महिला वोटिंग का इजाफा दर्ज किया गया है।


2018 Election: वहीं इस बार कई ऐसी सीटें भी हैं जहां बसपा, सपा व अन्य दलों ने भी ताकत दिखा दी है, जिसके कारण मुकाबला त्रिकोणीय या फिर चतुष्कोणीय हो चला है, ऐसे में ये कह पाना मुश्किले है कि जीत भाजपा की होगी या फिर कांग्रेस की...


इन सीटों पर है सबकी नजर...
1. होशंगाबाद - यहां भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा और कांग्रेस ने भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे सरताज सिंह को मैदान में उतारा। दोनों की ही क्षेत्र में गहरी पैठ है। भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज सरताज ने कांग्रेस का दामन थामा था।


2. खुरई - गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह का मुकाबला कांग्रेस के अरुणोदय चौबे से हाेने से यह सीट चर्चा में है। यहां भी दोनों के बीच कांटे का मुकाबला रहा। बुंदेलखंड अंचल की यह सीट चर्चा का केंद्र बनी हुई है।


3. जबलपुर पश्चिम - भाजपा केे पूर्व विधायक हरेंद्रजीत सिंह बब्बू की सीधी टक्कर कांग्रेस के वर्तमान विधायक तरूण भनोत से है। पिछले चुनाव में बब्बू 923 वोटों से हारे थे।


4. ग्वालियर दक्षिण - यहां से भाजपा से बागी हुई पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता पार्टी के प्रत्याशी नारायण सिंह कुशवाह के लिए बड़ी चुनाैती बनीं। समीक्षा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। कांग्रेस से प्रवीण पाठक मैदान में रहे।


5. वारासिवनी - कांग्रेस ने इस सीट से मुख्यमंत्री के-साले संजय मसानी को मैदान में उतारा। भाजपा से योगेंद्र निर्मल चुनाव लड़ रहे हैं। वे यहां से विधायक भी हैं। मसानी के चुनाव लड़ने के कारण यह सीट चर्चा में है।


6. निवाड़ी - यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने से सीट फंस गई है। भाजपा ने यहां से अनिल जैन, कांग्रेस ने सुरेंद्र सिंह यादव और सपा ने मीरा यादव को मैदान में उतारा।


7. नागौद - भाजपा ने यहां से नागेंद्र सिंह और कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। जातिगत समीकरण की वजह से यहां दोनों में कांटे की टक्कर रही।


8. रैगांव - पिछले चुनाव में इस सीट पर बसपा की ऊषा चौधरी ने भाजपा के पुष्पराज बागरी को 4109 मतों से हराया था। चौधरी इस बार भी इसी सीट से चुनाव लड़ीं। उनका मुकाबला भाजपा के पूर्व मंत्री जुगलकिशोर बागरी और कांग्रेस की कल्पना वर्मा से था। यहां त्रिकोणीय मुकाबला है।


9. सीहोर - पिछले चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए सुदेश राय को भाजपा ने यहां से टिकट दिया। इस बार यहां से भाजपा के पूर्व विधायक रमेश सक्सेेना की पत्नी ऊषा सक्सेना निर्दलीय चुनाव लड़ी। कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह ठाकुर मैदान में थे। इस वजह से यह सीट चर्चा का केंद्र है।


10. अमरवाड़ा - भाजपा के प्रेमनारायण ठाकुर और कांग्रेस से वर्तमान विधायक कमलेश शाह यहां से मैदान में हैं। गाेंडवाना गणतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता मनमोहन शाह बट्‌टी भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2003 में गोंगपा से विधायक रह चुके हैं।


11. अंबाह - बसपा ने वर्तमान विधायक सत्यप्रकाश का मुकाबला भाजपा के गब्बर सिंह और कांग्रेस के कमलेश जाटव से रहा। यह सीट भी रोचक मुकाबले में फंसी है।



12. अटेर - भाजपा के अरविंद भदौरिया का मुकाबला कांग्रेस से वर्तमान विधायक हेमंत कटारे से है। क्षेत्र में जातिगत समीकरण का भी गहरा प्रभाव है। इस वजह से यह सीट भी चर्चा में है।


13. छतरपुर - इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के भाई आलोक चतुर्वेदी और भाजपा की अर्चना सिंह का मुकाबला रहा। भाजपा में मंत्री ललिता यादव ने यहां से अपनी सीट बदली थी।


14. कालापीपल - कांग्रेस ने यहां से युवा कांग्रेस के कुणाल चाैधरी पर भरोसा जताया। भाजपा से बाबूलाल वर्मा प्रत्याशी थे। यहां भी दाेनों दलों के प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला है।


15. भोपाल दक्षिण-पश्चिम- इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक उमाशंकर गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा के बीच कांटे की टक्कर रही। यह भोपाल की सबसे ज्यादा चर्चित सीट बनी हुई है।


16. विदिशा - लंबे समय से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर मुकेश टंडन की सीधी टक्कर कांग्रेस के शशांक भार्गव से रही। आप प्रत्याशी पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य के यहां से मैदान के उतरने के कारण यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया।



17. इंदौर 3 - भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश यहां से पहली बार चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी के भतीजे अश्विन जोशी से है। दोनों ही यहां पूरी ताकत लगा रहे हैं। यह सीट पर प्रदेश भर में चर्चा में है।


18. सांची - भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित ने पहली बार यहां से चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रभुराम चौधरी से है। यह सीट भी चर्चा का केंद्र है।


19. सिलवानी - भाजपा सरकार में मंत्री रामपाल सिंह का मुकाबला कांग्रेस के देवेंद्र पटेल से रहा। कांटे की टक्कर की वजह से इस सीट पर मतदाताओं की नजर है।


20. भोपाल मध्य - यहां भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह और कांग्रेस के आरिफ मसूद के बीच करीबी मुकाबला है। काफी हद तक हिंदू-मुस्लिम मतदाता यहां प्रत्याशी की जीत-हार तय करते हैं। आरिफ ने यहां से पिछला चुनाव भी लड़ा था।


21. चाचौड़ा - कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह और भाजपा से विधायक ममता मीना का आमने-सामने का मुकाबला है। इस सीट पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


22. इंदौर 1 - भाजपा ने यहां के वर्तमान विधायक सुदर्शन गुप्ता को फिर मौका दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस के संजय शुक्ला से हुआ। यहां भी दोनों प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने का मुकाबला रहा।


23. भोजपुर - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी का सीधा मुकाबला भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्र पटवा से है। पिछली बार पटवा ने पचौरी को शिकस्त दी थी। इस सीट पर भी प्रदेश की नजरें लगी हुई हैं।


24. इंदौर 5 - यहां से भाजपा से वर्तमान विधायक महेंद्र हार्डिया और कांग्रेस के सत्यनाराण पटेल के बीच कांटे का मुकाबला है।


25. मुरैना - भाजपा के वरिष्ठ नेता रुस्तम सिंह का मुकाबला कांग्रेस के रघुराज सिंह कसाना और बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया से है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने से सीट चर्चा में है।


26. राजनगर - यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी के सपा से चुनाव लड़ने की वजह से चर्चा में है। यहां से भाजपा के प्रत्याशी अरविंद पटेरिया और कांग्रेस से विक्रम सिंह नातीराजा हैं। वे यहां से विधायक भी हैं।


27. घटि्टया - यहां से भाजपा ने कांग्रेस के नेता रहे प्रेमचंद गुड्‌डू के बेटे अजीत बौरासी को टिकट दिया। कांग्रेस से रामलाल मालवीय मैदान हैं। भाजपा के वर्तमान विधायक का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही। इस वजह से यह सीट भी उलझी हुई है।


28. जबलपुर पूर्व - यहां से भाजपा ने अंचल सोनकर पर पुन: विश्वास जताया। उनका मुकाबला लखन घनघोरिया रहा। इस सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है।


29. जबलपुर उत्तर - भाजपा ने शरद जैन को यहां से फिर टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के विनय सक्सेना से है। लेकिन जैन के सामने युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा से बागी हुए धीरज पटैरिया निर्दलीय खड़े हो गए जो जैन के लिए बड़ी चुनौती हैं।


30. बालाघाट - यहां भाजपा के गौरीशंकर बिसेन का मुकाबला कांग्रेस विश्वेश्वर भगत से है। वहीं, सपा से अनुभा मुंजारे मैदान में हैं जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं थी। यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले की वजह से चर्चा में है।


31. दमोह - वित्त मंत्री जयंत मलैया की टक्कर कांग्रेस के राहुल सिंह लोधी से है। लेकिन उनके लिए भाजपा से ही बागी हुए रामकृष्ण कुसमरिया बड़ी चुनौती थे। इस वजह से शुरू से यह सीट चर्चा का विषय रही।


32. मनगवां - इस सीट से बसपा की वर्तमान विधायक शीला त्यागी मैदान में हैं। इस बार भाजपा ने यहां अपना प्रत्याशी बदला है। उनका मुकाबला भाजपा के पंचूलाल प्रजापति और कांग्रेस की बबीता साकेत से था।


33. मैहर - भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी का मुकाबला कांग्रेस के श्रीकांत चतुर्वेदी से है। बसपा और सपा के प्रत्याशी भी दोनों दलों के नेताओं के लिए चुनौती बने हुए हैं।


34. ग्वालियर - भाजपा सरकार में मंत्री जयभान सिंह पवैया का मुकाबला कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर से है। यह सीट भी सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र है।


मुख्यमंत्री  आदित्यनाथ योगी अध्यक्षता में सोमवार को लखनऊ के लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में 16 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी. वहीं बैठक के दौरान पुलिस विभाग के कर्मचारियों को वाहन भत्ता दिये जाने का फैसला लिया गया है. साइकिल भत्ते के मद में 100 से 200 रुपये. वर्दी नवीनीकरण के लिए सभी हेड कांस्टेबल को 3000 रुपये व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 1500 से 2000 रुपये दिया जाएगा. इसके अलावा सीवर सफाई के दौरान सेफ्टी टैंक में मृत्यु होने पर सफाई कर्मचारियों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली.इन प्रस्तावों पर लगी मुहर#बाल शिक्षा अधिकार 2011 में तृतीय संशोधन हुआ है जिसके अंतर्गत  6 से 12 साल का बालक या बालिका बगैर विद्यालय का माना जायेगा 45 दिन तक लगातार अनुपस्थित रहने पर भी यह नियम लागू होगा, शिक्षा के गुणवत्ता के लिए प्राप्त किये गए शिक्षा परिणाम पर विद्यालय की ग्रेडिंग की जाएगी, इससे अध्यपको की जवाबदेही तय होगी.#जनपद गौतमबुद्ध नगर में जेवर एयरपोर्ट 2300 प्रति वर्ग मीटर की दर से 1245 .3 वर्ग मीटर के लिए 4500 करोड़ में से राज्य सरकार के अंश के तहत 1500 करोड़ की वित्तीय अनुमति प्रदान की गई है , 2.5 प्रतिशत धनराशि को राजस्व विभाग को दिए जाने में छूट प्रदान की गई है.#आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को परफार्मेंस के आधार पर इंसेंटिव दिया जाएगा. 500 रुपये कार्यकत्री और 200 रुपये मुख्य सेविका को दिया जाएगा.#3 से 6 वर्ष के बच्चो को मध्यान भोजन के लिए हॉट कुक्कड़ फूड उसी केंद्र में बनाया जाएगा, जिसे वही आंगनवाड़ी केंद्र में वितरित किया जाएगा, सभी 75 जनपदों में 4.50 प्रति व्यक्ति 505 करोड़ वार्षिक व्यय आएगा.#प्रदेश के समस्त जनपदों किशोरी बालिका के लिए एडोस एंड गर्ल योजना लागू करने के विषय मे 11 से 14 वर्ष के स्कूल न जाने वाली बालिकाओं को शामिल किया गया है. वर्ष में 300 दिन बालिकाओं को पोषण आहार दिया जाएगा, जिसमे दलिया ललड्डू आदि दिया जाएगा.#पुलिस विभाग  वाहन भत्ते का निर्णय लिया गया है साइकिल 100 रुपये से 200 रुपये दिया जाएगा ,वर्दी नवीनीकरण के लिए सभी हेड कंटेबल कांस्टेबल 2250 को 3000 किया गया है. चतुर्थ श्रेणिक 1500 से 2000 किया गया है.#गोरखपुर में मध्यान भोजन कार्यक्रम अक्षय पात्र करेगा, जिसमें किचन निर्माण में सरकार मदद करेगी.#जनपद में यह संस्था भोजन व्यवस्था करेगी याब गोरखपुर बढ़ाने के 12 हो गया है.#उत्तर प्रदेश कताई संघ  मिल को लेकर सरकार ने फैसला किया है, अब निजी क्षेत्र में कार्य होगा.#सीवर सेफ्टी टैक में सफाई के दौरान मृत्यु होने पर सरकार की तरफ से 10 लाख का मुआवजा दिया जाएगा. नगर क्षेत्र में नगर विकास यह देगा और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत विभाग मुआवजा देगा. 67 व्यक्ति को तुरंत लाभ दिया गया है.#उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर विकसित किये जाने के विषय मे पहले बुंदेलखंड को लिया गया था जिसमे 5125 हेक्टेयर जमीन का चिन्ही करण कर लिया है. अब सरकार की अनुमति से इसे खरीदना शुरू करेंगे, जिन कंपनियों ने काम करने की इच्छा जाहिर की हैं ,उन्हें बगैर किसी फायदा के उसी रेट में जमीन देंगे. इसमें आईआईटी कानपुर को एक अलग व्यवस्था देंगे. जिससे वह अपनी कई स्थानों में यूनिट लगा सके साथ ही भारत सरकार और यूपी सरकार के संयुक्त उपक्रम में विशेष वाहन बनाये जाएंगे. अलीगढ़, जालौन, आजमगढ़ झांसी, कानपुर, चित्रकूट में यह जमीन ली जाएगी.#पर्यटन मंत्रालय के अंर्तगत प्रसाद योजना के तहत  वाराणसी से क्रूस बोट 1070.65 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है.#प्रदेश में पशुओं में सेक्स वर्गीकृत योजना जिसमे सरकार 581 में 522 मादा पशु उत्पन्न हुआ है. सरकार ने कृतिम गर्भाधान के जरिये सरकार ने योजना बनाई थी सिर्फ उच्च नस्ल के मादा पशु ही पैदा हो जिसमें 90 प्रतिशत सफलता मिली है. इससे नर पशुओं की संख्या कम होगी. 75 जिलों में 4 फेस में यह कार्यक्रम उपलब्ध होगा.#सहकारी चीनी मिलों को लेकर बाईबकम्पोस्ट सायंत्रो को शासकीय गारंटी माफ करने के लिए 15642.00 लाख का 1173 लाख की शासकीय गारंटी प्रदान की जानी है.#प्रदेश में निर्माणाधीन तापीय परियोजना में ऊर्जा विभाग से संबंधित 400 केवी के टैरिफ बेस निर्माण हेतु प्राइवेट कंपनी को चयन का अनुमोदन प्रदान किया गया है. सम्पूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन के रूप में अपनाई गई है.#प्रदेश में निर्माणाधीन 400 केवी उपकेंद्र बंदायू में अडानी ग्रुप को दिया गया है. दोनों परियोजना में 1400 करोड़ का निवेश आएगा,  शासन का कोई भी खर्च नहीं होगा

नई दिल्ली। अगले साल से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन में सबसे अहम भूमिका पब्लिक फीडबैक की रहेगी। जिस अधिकारी और कर्मचारियों की ग्रेडिंग बेहतर होगी, उन्हें बेहतर प्रमोशन मिल सकेगा। किसी प्रॉडक्ट की तरह इन कर्मचारियों की भी ग्रेडिंग करने का पूरा सिस्टम बनाया गया है। इसके लिए पीएमओ ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल ऐंड ट्रेनिंग को निर्देशित किया था। 

सूत्रों के अनुसार पीएमओ के निर्देश पर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल ऐंड ट्रेनिंग (DoPT) ने इस प्रस्ताव को मान लिया है और 1 अप्रैल 2019 से नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी कामकाज के दौरान आम लोगों का अनुभव किस तरह होता है और वे बाबू और कर्मचारियों को किस तरह की ग्रेडिंग देंगे, इसे पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा। आम लोगों की ओर से मिली ग्रेडिंग इन अधिकारियों के प्रमोशन से लेकर वेतन वृद्धि तक तय करेगी। पीएमओ के निर्देश पर इसका फॉरमैट तैयार किया गया। 

सातवें वेतन आयोग ने दिया था सुझाव

नए फॉरमैट में अधिकारी के कामकाज को ग्रेड और अंक देने की व्यवस्था है। इसे उस अधिकारी और कर्मचारी के रेकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इसका मतलब कि अब केंद्र सरकार के दफ्तरों में फाइव स्टार या वन स्टार अधिकारी या कर्मचारी के बारे में लोग पहले ही जान सकेंगे। दरअसल, सातवें वेतन आयोग में इनके कामकाज की समीक्षा को और बेहतर करने के कई सुझाव दिए गए थे। जिन मंत्रालयों और विभागों का अधिकतर वास्ता सीधे आम लोगों से पड़ता है, वहां अब प्रमोशन और बेहतर अप्रेजल के लिए 80 फीसदी वजन पब्लिक फीडबैक को दिया जाएगा।

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