पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा


भारतीय फौज पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी कर रही


दावा: कार्रवाई 16-20 अप्रैल के बीच हो सकती है


लाहौर। बालाकोट में भारतीय एयरस्ट्राइक से बौखलाया पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है। उसने आरोप लगाते हुए कहा है कि भारत कभी भी पाकिस्तान पर हमला कर सकता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया है कि भारतीय फौज पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसको लेकर उन्हें एक निश्चित तिथि भी मालूम है।


सैन्य कार्रवाई करने की योजना

कुरैशी ने दावा किया है कि भारत में चल रहे चुनाव के बीच भारत अप्रैल के तीसरे सप्ताह में पाकिस्तान के खिलाफ अधिक सैन्य कार्रवाई करने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की गुहार लगाई। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने मुल्तान में मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि पाक सरकार के पास विश्वसनीय सूचना है कि भारत एक नई योजना तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर एक और हमले की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार,यह कार्रवाई 16-20 अप्रैल के बीच हो सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देशों को पहले ही दे दी है।

आयकर विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा।


इंदौर। आयकर विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा। देर रात 3 बजे दिल्ली से आए 15 से अधिक अधिकारियों की टीम स्कीम नंबर 74 स्थित निवास पर पहुंची। इसके साथ ही विजय नगर स्थित शोरूम, बीएमसी हाइट्स स्थित ऑफिस, शालीमार टाउनशिप और जलसा गार्डन सहित अन्य स्थानों पर भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। कार्रवाई में उनके घर से बड़ी मात्रा में नकद राशि मिलने की बात सामने आ रही है।

प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे। प्रवीण कक्कड़ सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया के काफी करीबी माने जाते हैं। जब आयकर विभाग की टीम देर रात पहुंची तो कक्कड़ के परिवार के लोग घबरा गए थे। जब उन्हें पुख्ता हो गया कि ये सभी आयकर के अधिकारी हैं तो उन्होंने जांच में सहयोग किया।

कांतिलाल भूरिया को दिलाई थी चुनाव में जीत

प्रवीण कक्कड़ को पुलिस विभाग में रहने के दौरान उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। इसके बाद उन्होंने 2004 में अपने नौकरी छोड़ दी और कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के ओएसडी बन गए। कहा जाता है कि 2015 में कांतिलाल भूरिया को रतलाम-झाबुआ सीट पर मिली जीत प्रवीण कक्कड़ द्वारा बनाई रणनीति से मिली। दिसंबर 2018 में वे सीएम कमलनाथ के ओएसडी बने थे।



अशोकनगर।सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने समर्थकों पर शायद भरोसा नहीं रह गया है। इसलिए उन्होंने रोटरी, लायन्स, लायनेस, इनरव्हील क्लब और इस तरह के कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क का काम सौंप दिया है। सिंधिया ने समाजसेवियों से कहा कि आपके लिए 17 साल मैंने मेहनत की और पूरे पांच साल करता हूं। लेकिन 5 साल में एक दिन मैं भी अभिलाषी हूं कि आप मेरे लिए मेहनत करेंगे। 


बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। पूर्वी उत्तरप्रदेश प्रियंका गांधी को सौंपा गया है। प्रियंका गांधी लगातार उत्तरप्रदेश में दौरे कर रहीं हैं परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही लोकसभा सीट पर फंसे हुए हैं। यह हालात तब हैं जबकि भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। कहा जा रहा है कि लोकसभा सीट में इस बार हालात कुछ अच्छे नहीं हैं। गुना और शिवपुरी विधानसभा से तो ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछली बार भी हार गए थे। अब कुछ अन्य विधानसभाओं में भी सिंधिया का सत्कार फीका सा पड़ता जा रहा है। सिंधिया इस बात से भी घबराए हुए हैं कि आम जनता उनसे सवाल ही नहीं कर रही। वो पूरी तरह से चुप हो गई है। 


रोटरी और लायंस के लोग पोलिंग संभालें

सांसद ने रोटरी भवन में रोटरी, लायन्स, लायनेस और इनरव्हील क्लब के सदस्यों से कहा कि इस बार अपने-अपने पोलिंग, वार्ड, ब्लॉक लायंस और रोटरी क्लब के सदस्य भी संभालें लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि लायंस और रोटरी क्लब राजनीति में आ रहे हैं। ये चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया एक राजनीतिज्ञ के रूप में नहीं लेकिन एक जनसेवक के रूप में लड़ रहा है, और क्लब के संस्था के संविधान में लिखा है कि जनसेवा का साथ सदैव देना है। 



जबलपुर।पत्रकार श्री रजनीश शुक्ला की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि एससी-एसटी एक्ट में अगर ठोस साक्ष्य न हों तो केवल शिकायतकर्ता का बयान आरोपी के खिलाफ अभियोजन चलाने का आधार नहीं बन सकता। खासतौर पर ऐसे मामलों में जिनमें विश्वसनीय साक्ष्य और गवाह शिकायतकर्ता के बयान को झूठा साबित करते हों। जस्टिस जेपी गुप्ता की एकलपीठ ने कहा कि सभी अदालतों की यह जिम्मेदारी है वे कि हर स्तर पर इस बात का संज्ञान लें कि अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो।


इस मत के साथ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता सुशांत पुरोहित के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में फसल कटाई में देरी और मजदूरी भुगतान को लेकर विवाद था। इससे उद्वेलित होकर महिला ने झूठा प्रकरण दर्ज कराया था। यह था मामला : दरअसल, 5 अप्रैल 2016 को शिकायतकर्ता महिला सुशांत के खेत में काम कर रही थी। महिला ने  थाने में शिकायत दर्ज कराई कि सुशांत ने फसल कटाई में देरी के कारण उसके साथ मारपीट की और उसका घर जलाने की धमकी भी दी।  


इसके बाद अजाक थाना प्रभारी ने जांच की और आरोप झूठे पाए। घटना के समय मौजूद लोगों ने ऐसी कोई घटना होने से पूरी तरह इनकार किया। पुलिस अधिकारी ने एसडीओ को रिपोर्ट पेश कर दी। लेकिन, शिकायतकर्ता महिला हाईकोर्ट पहुंची और सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी वाले मामले को आधार बनाते हुए सुशांत के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर एसपी को महिला की शिकायत पर पुन: विचार करने के निर्देश दिए, जिसके बाद सुशांत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद सुशांत ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। 

महिला ने शिकायत के बाद बनवाया जाति प्रमाण-पत्र

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्श मुनि त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि घटना के समय उनका मुवक्किल इस बात से अनजान था कि महिला एससी-एसटी वर्ग की है। महिला ने मुस्लिम से शादी की है, इसलिए शादी के बाद उसे एससी-एसटी का नहीं माना जा सकता। इसके अलावा अभियोजन ने चालान पेश करते समय जो जाति प्रमाण-पत्र पेश किया वह महिला ने केस दर्ज करने के बाद बनवाया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अभियोजन ने चार्जशीट में ऐसा कोई साक्ष्य या प्रमाण भी पेश नहीं किया कि अभियुक्त एससीएसटी जाति का नहीं है, जोकि ऐसे मामलों में एक अहम तथ्य होता है।



भोपाल।लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी एक और लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में छिंदवाड़ा एवं ग्वालियर के टिकट फाइनल कर दिए गए हैं। ग्वालियर से विवेक शेजवलकर को टिकट दिया गया है। 

भाजपा की आज जारी लिस्ट में छिंदवाड़ा से नत्थन शाह को टिकट दिया गया है। इससे पहले भाजपा ने यहां से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मनमोहन शाह बट्टी को चुनाव लड़ाने का विचार किया था परंतु पार्टी के अंदर मनमोहन शाह बट्टी का भारी विरोध हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को प्रभारी बनाकर भेजा गया। 

भाजपा की लिस्ट


भाजपा ने देवास से महेंद्र सोलंकी एवं ग्वालियर से विवेक शेजवलकर को टिकट दिया है। ग्वालियर सीट से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सांसद हैं परंतु भारी विरोध के कारण वो इस सीट को छोड़कर चले गए हैं। भाजपा ने उन्हे मुरैना से प्रत्याशी घोषित किया है




   


तोमर के इस बयान ने मचाया बवाल, भाजपा पर अब इस सीट को बचाने का भारी दबाव...

यहां होंगे दो कद्दावर नेता आमने समाने, फिर होगा ये!


भोपाल। इसी माह से शुरू होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर अब तक दोनों कांग्रेस व भाजपा सकते में हैं, एक ओर जहां भाजपा अपने पुराने गढ़ों को बचाने की कोशिश करती दिख रही है। वहीं कांग्रेस अपनी पिछली लोकसभा चुनावों में मिली हार का बदलना लेने में जुटी हुई है।

इन्हीं सब के बीच कई लोकसभा सीटें अब तक भंवर में फंसी दिख रही हैं। इन्हीं में से एक सीट भाजपा का करीब तीन दशकों से बना गढ़ भोपाल भी है। इस बार कांग्रेस ने यहां अपनी रणनीति के तहत दिग्विजय सिंह को उतारा है।

वहीं भाजपा पर अब इस सीट को बचाने का भारी दबाव बनता सा दिख रहा है। ऐसे में दिग्विजय जैसे नेता के सामने किसी सामान्य नेता का टिकना कठिन माना जा रहा है।

जानकारों के अनुसार इसी उपापोह की बनी स्थिति में भाजपा अब तक यहां के लिए अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं कर सकी है।

वहीं जानकार मानते हैं इस बार इस सीट पर भाजपा के साथ भितरघात की स्थिति भी पैदा हो सकती है, जिसके चलते पहले शिवराज का नाम यहां सामने आया। लेकिन अब सामने आए ताजा बयानों ने ये काफी हद तक साफ कर दिया है कि दिग्विजय के सामने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर चुनाव लड़ सकते हैं।



दरअसल लंबे समय से ये बातें सामने आ रही थी कि नरेंद्र सिंह भोपाल से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। लेकिन उसी दौरान पूर्व सीएम शिवराज सिंह का नाम सामने आने लगा।

इसके बाद तोमर का नाम भाजपा की सूची में मुरैना सीट से आने के बावजूद तोमर के ताजा बयानों ने एक बार फिर भोपाल सीट से उनके चुनाव लड़ने की संभावना को बल दे दिया है।

दरअसल तोमर ने अभी कुछ ही दिनों पहले ये बयान देकर सबको चौंका दिया कि अब तक मेरा फाइनल नहीं है कि मैं आखिर कहां से चुनाव लड़ूंगा।

इस बयान ने मचाई हलचल...
उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगने शुरू हो गए हैं कि तोमर को भाजपा भोपाल से प्रत्याशी बना सकती है। जिसके चलते अब केंद्रीय मंत्री व मौजूदा ग्वालियर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर के भोपाल से चुनाव लड़ने की संभावनाएं एक बार फिर बड़ गईं हैं।

ये बोले थे तोमर...
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मध्य प्रदेश के मुरैना संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बावजूद पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शिवपुरी में कहा था कि "मुझे अभी यह नहीं मालूम कि मैं मुरैना से भी चुनाव लड़ूंगा या नहीं।"



कठिनाइयों के बीच कई तरह का सहयोग भी...
राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि भाजपा के लिए भोपाल से नरेंद्र सिंह तोमर जहां एक अच्छे प्रत्याशी हो सकते हैं, वहीं उनके चलते कुछ कठिनाईयां भी पैदा होने की संभावना है।

शर्मा के अनुसार भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह का आना ये तो स्पष्ट करता है कि चुनाव बहुत कड़ा होगा। ऐसे में जहां भाजपा के कुछ नेता तक शिवराज को उनके सामने कमजोर प्रत्याशी मानते हैं। वहीं नरेंद्र सिंह उस स्थिति में मजबूत सिद्ध होंगे।

विरोध में आ सकती है कमी!
शर्मा के मुताबिक भोपाल भाजपा में बगावत या भितरघात के संदेह के बीच नरेंद्र सिंह स्थितियों को काफी हद तक संभाल सकते हैं। क्योंकि वे बाबूलाल गौर से लेकर शिवराज तक अपनी खास पेंठ रखते हैं, लेकिन उन्हें केवल बाहरी होने का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वहीं अन्य नेताओं के मामले में तकरीब अधिकांश एक दूसरे के विरोधी है और खुद खड़ा होना चाहते हैं।

ऐसे में चाहे बाबूलाल गौर हों, मेयर आलोक शर्मा हों या आलोक संजर से लेकर तमाम नेता नरेंद्र सिंह के साथ अपनी खास पहचान के चलते भितरघात से दूर रहने के लिए अन्य को भी तैयार कर सकते हैं।

वहीं पूर्व में भोपाल सीट के लिए वीडी शर्मा का नाम भी सामने आया था, चर्चा है कि पार्टी उन्हे मुरैना से टिकट दे सकती है।

 

इसलिए अब ग्वालियर नहीं!
वहीं ग्वालियर जो कि नरेंद्र सिंह तोमर का ग्रह क्षेत्र है, वहां भी इन दिनों ये चर्चाएं तेज हैं कि नरेंद्र सिंह इस बार भोपाल से चुनाव लड़ सकते हैं। जबकि ग्वालियर छोड़ने का उनका प्रमुख कारण ग्वालियर में अपने ही नेताओं द्वारा उनका विरोध किया जाना बताया जा रहा है।

प्रकाशनार्थ

शिवपुरी के अभिनव भारत निर्वाचन आयोग के भोपाल कार्यालय में काम करेंगे ।

शिवपुरी /    / भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के आदेशानुसार अभिनव सक्सेना भारतीय सूचना सेवा अधिकारी भारत सरकार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यालय में सेवाएं देने के लिए लोकसभा चुनाव 2019 की एम सी एम सी समिति, स्वीप कोर  समिति, स्टीयरिंग समिति, सोशल मीडिया आउटरीच, निर्वाचन संबंधी चुनाव प्रबंधन  एवं अन्य कार्यों के लिए भोपाल भेजा है । अभिनव सक्सेना आई. आई. एस. अधिकारी के सहयोग के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जन सम्पर्क अधिकारी भोपाल को लाइजनिंग अधिकारी और अधीक्षक भू अभिलेख को समन्वय अधिकारी का दायित्व सौंपा है ।
अभिनव सक्सेना निर्वाचन संबंधी विभिन्न कार्यों को संपादित करते हुए अपनी जॉब ट्रेनिंग में चुनाव प्रबंधन के विभिन्न आयामों को समझेंगे । भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के आदेशानुसार भारतीय सूचना सेवा अधिकारी  अभिनव सक्सेना और नवीन श्रीजीत 8 अप्रैल से भोपाल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश श्री वी एल कांताराव के कार्यालय  में उनके निर्देशानुसार अपनी सेवाएं देंगे ।

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