दतिया-मध्यप्रदेश शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेंहू की फसल की खरीदी की जा रही है अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश के चलते फसलों को भारी नुकसान हुआ है गेंहू की फसल में दाग पड़ने के कारण ख़रीदी केंद्रों पर नही खरीदे जा रहे है इसी को लेकर पूर्व मंत्री एव दतिया विधायक नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा है।
पत्र में मेरा आपसे अनुरोध है कि मैंने दतिया विधानसभा के गांव बाजनी, भागौर, चौपरा, पलोथर, सलैया , पवार पठारी , बिलौनी, डांग, नौनेर, खदराबनी, उदगंवा, नन्दपुर ग्राम बामरोल के ओला प्रभावित गांव का निरीक्षण किया। मैं हमारे अन्नदाताओ कि परेशानी देखकर बहुत दुःखी हूं। किसानों की फसलें खराब हो गयी हैं। अगर आपको चुनावी पर्यटन से थोड़ी फुर्सत मिल जाए तो महोदय जरा इस और भी ध्यान दें ,जिस किसान को कर्ज माफ और बिजली बिल हाफ के झांसे में फंसाकर आपने सरकार बनाई है। आज वही अन्नदाता संकट के दिनों से गुजर रहा है।
सोसाइटी एवं खरीदी केंद्र किसानों का गेहूं खराब बताकर वापस कर रहे हैं, आपके जमीनी अधिकारियों को यह बात समझ में आनी चाहिए कि ओला और बारिश के चलते गेहूं का रंग बदलता है। मेरी आपसे मांग है की हमारे अन्नदाता के गेहूं को खरीदा जाए,उन्हें परेशान न किया जाय और किसानों को हर सम्भव सुविधा जल्द से जल्द प्रदान की जाए।
खरीद केंद्रों पर किसानों को तीन दिन रुकना पड़ रहा है। किसानों को 1840 /-की पर्ची दी जा रही है उसमें बोनस का उल्लेख नहीं है आंकड़े बताते हैं कि आपने द्वारा कराई जा रही खरीद की स्पीड बहुत धीमी है। आपने आज दिनांक तक 15 लाख 11 हजार मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की है। जबकि हमारी भाजपा सरकार ने पिछले साल वर्ष 2018 -19 में आज ही की तारीख तक 32 लाख 19 हजार मीट्रिक टन गेंहू की खरीद कर ली थी। जो इस साल की आपकी अब तक कि कुल खरीदी से दोगुनी थी।
माननीय कमलनाथ जी पूर्व की हमारी सरकार एक हेक्टेयर पर किसानों से 42 क्विंटल गेंहू की खरीदी समर्थन मूल्य पर करती थी। परंतु आपकी सरकार द्वारा किसानों के साथ भेदभाव करते हुए खरीदी की मात्रा को कम करते हुए एक हेक्टेयर पर मात्र 30 क्विंटल ही गेंहू खरीदी कराई जा रही है। जबकि इस बार सिंचाई की अच्छी व्यवस्था के चलते किसानों के यहाँ बम्पर गेहूं की पैदावार हुई है। किसानों से एक हेक्टेयर पर 42 क्विंटल की खरीद होनी चाहिए। कमलनाथ जी आप पूरे प्रदेश के मुखिया हैं और प्रदेश का हर किसान आपकी ओर आस की टकटकी लगाए देख रहा है लेकिन आपका सिस्टम उसका विश्वास तोड़ रहा है ।
मध्य प्रदेश का किसान हमारा अन्नदाता है कृपया उसकी परेशानी का हल जल्द से जल्द कीजिए।

मध्य प्रदेश में कमलनाथ-ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया की जोड़ी ने म‍िलकर 15 साल से जमी बीजेपी सरकार को उखाड़ कर कांग्रेसी सरकार का झंडा फ‍हराया था. अब उन्हीं ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया को उनके गढ़ गुना-श‍िवपुरी में घेरने के ल‍िए बीजेपी ने एक डॉक्टर को मैदान में उतारा है. डॉक्टर केपी यादव पहले कांग्रेस में ही थे और स‍िंध‍िया की जीत के राजदार रहे थे लेक‍िन प‍िछले उपचुनाव में अपनी अनदेखी से कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए. अब लोकसभा चुनाव में वे उन्हीं स‍िंधिया के ख‍िलाफ ताल ठोक रहे हैं, 

कौन हैं बीजेपी के केपी यादव जो गुना से सिंधिया के खिलाफ ठोक रहे ताल
केपी यादव (Photo: Facebook)

मध्य प्रदेश में कमलनाथ-ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया की जोड़ी ने म‍िलकर 15 साल से जमी बीजेपी सरकार को उखाड़ कर कांग्रेसी सरकार का झंडा फ‍हराया था. अब उन्हीं ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया को उनके गढ़ गुना-श‍िवपुरी में घेरने के ल‍िए बीजेपी ने एक डॉक्टर को मैदान में उतारा है. डॉक्टर केपी यादव पहले कांग्रेस में ही थे और स‍िंध‍िया की जीत के राजदार रहे थे लेक‍िन प‍िछले उपचुनाव में अपनी अनदेखी के बाद कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए. अब लोकसभा चुनाव में वे उन्हीं स‍िंधिया के ख‍िलाफ ताल ठोक रहे हैं, ज‍िनके कभी वे साथ थे.

क्यों म‍िला केपी यादव को ट‍िकट

45 साल के केपी यादव पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं. उनके प‍िता अशोकनगर में कांग्रेस के ज‍िलाध्यक्ष रहे हैं. केपी यादव कभी ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंध‍िया के नजदीकी रहे हैं. स‍िंध‍िया की चुनाव की तैयार‍ियों को वह अच्छी तरह देखते थे. मुंगावली व‍िधानसभा के उपचुनाव में केपी यादव ट‍िकट के मुख्य दावेदार थे. स‍िंध‍िया ने इनसे तैयारी के ल‍िए भी कह द‍िया था और वे क्षेत्र में सक्र‍िय भी हो गए थे. लेक‍िन ऐन मौके पर उनका ट‍िकट काट द‍िया गया. इससे इन्हें काफी मानस‍िक पीड़ा हुई और वे कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आ गए. मुंगावली में कांग्रेस के ट‍िकट पर लड़ रहे बृजेंद्र प्रताप से उनका मुकाबला हुआ. इस मुकाबले में व‍ह स‍िर्फ दो हजार वोटों से हार गए थे.

2 लाख यादव वोटों के सहारे दे रहे स‍िंधिया को चुनौती

गुना श‍िवपुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत दो लाख यादव वोट हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव को ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंध‍िया ने स‍िर्फ सवा लाख वोटों से जीता था. यहां की 8 व‍िधानसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी हावी थी. ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है क‍ि केपी यादव के उम्मीदवार होने से यादव वोट एकतरफा बीजेपी की झोली में आएंगे. वहीं, क‍िसान का बेटा होने से वे कांग्रेस के कर्जमाफी के सच को भी जनता के सामने रखेंगे. स‍िंध‍िया ने व्यक्त‍िगत रूप से केपी यादव का जो नुकसान क‍िया, उसको भी भुनाने का प्रयास यहां से बीजेपी का है. यद‍ि बीजेपी के समीकरण ठीक बैठ गए तो इस बार स‍िंध‍िया को उसी के गढ़ में हार का स्वाद भी म‍िल सकता है.   

व‍िधानसभा सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस का असर  

गुना लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. यहां पर शिवपुरी, बमोरी, चंदेरी, पिछोर, गुना, मुंगावली, कोलारस, अशोक नगर विधानसभा सीटें हैं. यहां की 8 विधानसभा सीटों में से 4 पर बीजेपी और 4 पर कांग्रेस का कब्जा है.

वोटों के गण‍ित में उलझ सकती है कांग्रेस

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी के जयभान सिंह पवैया को हराया था. इस चुनाव में सिंधिया को 5,17, 036 (52.94 फीसदी) वोट मिले थे और पवैया को 3, 96, 244 (40.57 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 1, 20, 792 वोटों का था. वहीं बसपा के लखन सिंह 2.81 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे.

इससे पहले 2009 के चुनाव में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को जीत मिली थी. उन्होंने तब बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था. सिंधिया को 4, 13, 297 (63.6 फीसदी) वोट मिले थे तो नरोत्तम मिश्रा को 1, 63, 560 (25.17 फीसदी) वोट मिले थे. सिंधिया ने 249737 वोटों से जीत हासिल की थी. वहीं बसपा 4.49 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी.

गुना-श‍िवपुरी लोकसभा सीट का प्रोफाइल

गुना शहर मध्य प्रदेश के उत्तर में स्थित है. गुना शहर में मुख्यतः हिन्दू, मुस्लिम तथा जैन समुदाय के लोग रहते हैं. खेती यहां का मुख्य कार्य है. आजादी से पहले गुना ग्वालियर राजघराने का हिस्सा था, जिस पर सिंधिया वंश का अधिकार था. 2011 की जनगणना के मुताबिक गुना की जनसंख्या 24, 93, 675 है. यहां की 76.66 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.34 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. गुना में 18.11 फीसदी लोग अनुसूचित जाति और 13.94 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के हैं. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 में गुना में कुल 16, 05, 619 मतदाता थे. जिसमें से 7, 48, 291 महिला मतदाता और 8, 57, 328 पुरुष मतदाता थे. 2014 के चुनाव में इस सीट पर 60.83 फीसदी मतदान हुआ था.

गूगल प्ले स्टोर और एप्पल से हटा TikTok, कोई नहीं कर पाएगा डाउनलोड

भारत में बेहद लोकप्रिय वीडियो ऐप TikTok को ऐप स्टोर्स

TikTok App Ban in India: शॉर्ट वीडियो बनाने और शेयर करने वाली मनोरंजन ऐप टिक टॉक पर भारत में रोक लगा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गूगल और एपल को नोटिस जारी कर इसे अपने-अपने ऐप्लीकेशंस स्टोर्स से हटाने के लिए कह दिया है। ऐसे में यह टिक टॉक के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।

दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इस ऐप के जरिए बनने और वायरल होने वाले आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को लेकर चिंता जाहिर की थी। कोर्ट ने उसी संबंध में तीन अप्रैल को एक आदेश भी जारी किया था। कोर्ट ने उसमें सरकार को देश भर में इस ऐप की डाउनलोडिंग पर रोक लगाने के लिए कहा था।

‘इकनॉमिक टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े जानकारों के हवाले से बताया गया, “अब और लोग इस ऐप को डाउनलोड नहीं कर सकेंगे। वहीं, जिन्होंने इसे डाउनलोड कर रखा है, वे इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। सरकार ने गूगल और ऐपल से अपने-अपने ऐप स्टोर से इस ऐप को डिलीट करने के लिए कहा है। अब यह इन कंपनियों पर निर्भर करता है कि वह बात मानेंगी या फिर आदेश को चुनौती देंगी।”

टिक टॉक के विवादों में घिरने की प्रमुख वजह यह भी है कि हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक 19 साल के लड़के की हत्या कर दी गई थी। हैरत की बात है कि उस दौरान उसके दोस्त टिक टॉक ऐप पर घटना का वीडियो शूट कर रहे थे। वहीं, ऐप पर विभिन्न प्रकार के भद्दे और अश्लील कंटेंट को लेकर भी अक्सर आपत्तियां आती रही हैं।

टिक टॉक, चीन में डॉउयिन नाम से जाना जाता है। यह एक किस्म की मीडिया ऐप है, जिस पर यूजर्स द्वारा छोटे-छोटे मनोरंजक वीडियो बनाए और शेयर किए जाते हैं। यह ऐप बाइट डांस का है, जिसे डॉउयिन के तौर पर 2016 में चीन में लॉन्च किया गया था, जबकि एक साल बाद इसे विदेशी बाजार में पेश किया गया था।




भोपाल। मध्यप्रदेश में चल रही बिजली कटौती ने अब मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी परेशान कर दिया है। कहने की जरूरत नहीं कि राहुल गांधी की तमाम लुभावनी योजनाओं की मध्यप्रदेश में बिजली कटौती के कारण बत्ती गुल हो सकती है। जनता में भारी नाराजगी नजर आ रही है। अब ग्राउंड रिपोर्ट सीएम कमलनाथ तक भी पहुंच गई है। कमलनाथ ने ऊर्जा मंत्री और प्रमुख सचिव उर्जा से एक महीने की रिपोर्ट मांगी है। 

यह गंभीर मामला है, लापरवाही सहन नहीं होगी

सीएम कमलनाथ ने डीटेल रिपोर्ट मांगते हुए कहा है कि कटौती क्यों की गई इसका कारण भी बताएं। उन्होंने कहा कि इस बात का भी पता लगाएं चुनाव के समय ही कटौती की शिकायतें क्यों आ रही है? क्या इसके पीछे कुछ साजिश-षड्यंत्र तो नहीं है? इसकी भी जांच की जाए।मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं को 24 घंटे और कृषि कार्य के लिए 10 घंटे बिजली मिले, ये सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही सहन नहीं होगी। कुछ स्थानों पर आंधी-बारिश से बिजली वितरण में व्यवधान की बात सामने आई है, जिसे तत्काल दुरुस्त भी कर लिया गया, लेकिन जहां बिना कारण से अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें आ रही हैं, वो गंभीर मसला है। 


बिजली सरप्लस तो क्यों हो रही बिजली 

मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों से इस बात का भी जवाब मांगा है कि जब प्रदेश में बिजली सरप्लस में उपलब्ध है तब कटौती की शिकायतें क्यों आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का भी पता लगाया जाये कि चुनाव के समय ही कटौती की शिकायतों क्यों आ रही है ? क्या इसके पीछे कुछ साज़िश-षड्यंत्र तो नहीं है ? इसकी भी जानकारी ली जाए।

मुख्य सचिव से किया जवाब-तलब 

उन्होंने ऊर्जा विभाग से मांग और आपूर्ति के संबंध में भी जानकारी मांगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कटौती के संबंध में बिजली कर्मियों को संवेदनशील और तत्पर बनाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से कहा कि इसके लिए अतिरिक्त संसाधन जरूरी हो तो वह भी बिजली महकमे को तत्काल उपलब्‍ध कराई जाए। इसमें किसी प्रकार की शिकायत व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 



भोपाल। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के सामने भारतीय जनता पार्टी का कोई भी दिग्गज नेता आने को तैयार नहीं। पहले शिवराज सिंह ने बड़ी विनम्रता से इंकार किया फिर उमा भारती ने बड़ी चतुराई से कदम खींच लिए और बॉल शिवराज के पाले में डाल दी। शिवराज ने भी उमा भारती की ही ट्रिक यूज की और बॉल को अमित शाह के पाले में डाल दिया। अब भाजपा के पास ना तो दिन शेष बचे हैं ना विकल्प। प्रज्ञा सिंह ठाकुर ही एकमात्र विकल्प हैं। 

दिग्विजय सिंह के सामने आने कोई तैयार नहीं हुआ

भोपाल सीट बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक मानी जाती है। बीजेपी यहां 1989 से ही जीतती आ रही है। इस सीट से अंतिम बार 1984 के चुनाव में कांग्रेस से के एन प्रधान जीते थे। कांग्रेस भोपाल से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नाम की घोषणा करीब 25 दिन पहले ही कर चुकी है। दिग्विजय सिंह के नाम की ओर भोपाल से भाजपा के प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा दावेदारी कर रहे थे लेकिन दिग्विजय सिंह का नाम आने के बाद उनका नाम चर्चा में नहीं आया। इसके बाद शिवराज सिंह और उमा भारती से पार्टी ने चुनाव लड़ने कहा, लेकिन दोनों ही नेताओं ने चुनाव लड़ने मना कर दिया। 


प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चम्बल की वीरांगना भी कहते हैं

अपने नाम की चर्चा के बीच प्रज्ञा ने माडिया से चर्चा करते हुए कहा कि वह दुश्मन को परास्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मेरी कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं, जिनके लिए दिग्विजय सिंह जिम्मेदार हैं। मैं कभी उन धब्बों को नहीं भूल सकती, जो उन्होंने मेरी जिंदगी पर लगाए हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी की तरफ से आपके चुनाव लड़ने को लेकर कोई फैसला लिया गया है, तो उन्होंने कहा कि वह दुश्मन को परास्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसके बाद से दिग्विजय सिंह के खिलाफ पार्टी ने प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर विचार किया। साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था। हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। वह एबीवीपी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं।


भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 1 लाख से ज्यादा अतिथि शिक्षक कमलनाथ सरकार से नाराज हैं। चुनाव से पहले तक विधायक कुणाल चौधरी इनके नेता बने हुए थे और सीएम कमलनाथ से आए दिन मुलाकातें करवाते थे परंतु शिक्षक भर्ती में जब से पीईबी ने शर्तें बदलीं हैं, अतिथि शिक्षकों का कोई पालनहार ही नहीं बचा। ना तो अधिकारी बात करने को तैयार हैं और ना ही सरकार सुन रही है। 

पीईबी ने आनन-फानन में संशोधित आदेश दिया

अतिथि शिक्षकों के अनुसार पीईबी ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 28 सितम्बर को विज्ञापन निकाला था। कमलनाथ सरकार ने सभी अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई। इसके बाद पीईबी ने आनन-फानन में संशोधित आदेश 5 अक्टूबर को निकाला, जिसमें चुनिंदा शिक्षकों को ही 25 फीसदी आरक्षण का लाभ देने की बात कही गई। इस मुद्दे को लेकर जब शिक्षक पीईबी के अधिकारियों से मिले तो उन्होंने सभी को अनुभव के आधार पर 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की बात कही लेकिन परीक्षा के बाद वे अपनी बात से मुकर गए। अब जिम्मेदार अधिकारी पीड़ितों से मिलने से भी कतरा रहे हैं। 


साजिश का शिकार हुए अतिथि शिक्षक

सूत्रों की मानें तो पीईबी के इस विज्ञापन में साजिश के तहत सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया है। क्योंकि संशोधित विज्ञापन में सामान्य आवेदकों के साथ बाहरी राज्य के आवेदकों को शैक्षणिक योग्यता पूर्ण करने का अवसर दिया गया लेकिन उन अतिथि शिक्षकों को समय नहीं दिया गया, जिनके अनुभव में दो से तीन महीने का समय बचा था। पूर्व के विज्ञापन में सभी को समान अवसर दिया गया, लेकिन बाद में सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों अतिथि शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 

आश्वासन के बाद पलट गए

पीड़ित परीक्षार्थियों के अनुसार उन्होंने अचार संहिता के दौरान जारी किए गए संशोधित विज्ञापन का विरोध किया था। तब अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि उन्हें अनुभव का लाभ मिलेगा। लेकिन परीक्षा के बाद वे अपने वादे से पलट गए। अधिकारी उसी समय स्थिति क्लीयर कर देते तो वे परीक्षा देने की जगह कोर्ट की शरण लेते। अपने को ठगा महसूस करने वाले अतिथि शिक्षक अब न्यायालय की शरण जाने का प्लान बना रहे हैं, ताकि इस फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। 

बिना योग्यता के दिया मौका.. 

सामान्य और दूसरे राज्य के उन आवेदकों को इस पात्रता परीक्षा में मौका दिया गया, जिनकी शैक्षणिक योग्यता अधूरी है। इनकी डिग्रियां मई-जून में पूरी होंगी लेकिन हमें झूठा आश्वासन देकर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। पहले आश्वासन देकर अब अधिकारी मिलने से भी कतरा रहे हैं। 
सुबोध सिंह, परीक्षार्थी 

विभाग की गाइडलाइन 

पात्रता परीक्षा में किसी भी पात्र उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं होगा। आरक्षण नियमों का पालन संबंधित विभाग द्वारा दी गई गाइड लाइन के अनुसार ही किया जाएगा। 
विशाल जोशी, संयुक्त परीक्षा नियंत्रक, प्राेफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड 

इस तरह अतिथि शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी की गई

अतिथि शिक्षकों के अनुसार शिक्षक भर्ती नियम 2018 के नियम 11(7) ख (चार) में अतिथि शिक्षकों को 25 प्रतिशत के आरक्षण का जिक्र है। यह लाभ शासकीय स्कूलों में तीन शैक्षणिक सत्र एवं 200 दिवस के अध्यापन कार्य के लिए दिया जाता है। पीईबी के विज्ञापन में अध्याय -2 के बिंदू क्रमांक 2.2 में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूर्ण मांगी गई। लेकिन बाद में पीईबी ने चालाकी से आचार संहिता लागू होने के बाद विज्ञापन जारी कर अध्याय-1 के बिंदू क्रमांक 7(2) में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में छूट देकर अतिथि शिक्षकों से पूर्ण अनुभव मांग लिया, जिससे आवेदक भड़क गए। जब उन्होंने भेदभाव का आरोप लगाया तो अधिकारियों ने उन्हें झूठा दिलासा देकर शांत कर दिया। 

कोई हमारी सुनवाई नहीं कर रहा

 सभी अतिथि शिक्षकों ने 200 दिवस और 3 सत्रों का कार्य अनुभव पूर्ण कर लिया है, लेकिन अधिकारी इस अनुभव को नहीं जोड़ रहे हैं। जबकि दूसरे आवेदकों को शैक्षणिक योग्यता को पूरा करने का मौका दिया जा रहा है। हमारे साथ भेदभाव हो रहा है और कहीं-कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 
ममता दीक्षित, परीक्षार्थी 


AAP-Congress Alliance: राहुल का Tweet, हम AAP को 4 सीट देने को तैयार, लेकिन CM केजरीवाल ने लिया यू टर्न

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच लंबे वक्त से गठबंधन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कह भी चुके हैं कि वे कांग्रेस से गठबंधन को तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस इसमें दिलचस्पी नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव का पहला चरण पूरा होने के बाद भी दोनों पार्टियों के बीच इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी।

वहीं सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि 'हम दिल्ली में गठबंधन के तहत आप पार्टी को 4 सीटें देने को तैयार हैं लेकिन अब केजरीवाल ने यू टर्न ले लिया है। हमारे दरवाजे अभी भी खुले हैं, लेकिन वक्त बहुत रफ्तार से जा रहा है।'

Rahul Gandhi

@RahulGandhi

An alliance between the Congress & AAP in Delhi would mean the rout of the BJP. The Congress is willing to give up 4 Delhi seats to the AAP to ensure this.

But, Mr Kejriwal has done yet another U turn!

Our doors are still open, but the clock is running out. 

abAAPki baari 

बता दें कि दिल्ली में 7 लोकसभा सीटें है। आम आदमी पार्टी इस बार भाजपा को मात देने के लिए कांग्रेस से गठबंधन की कई कोशिशें कर चुकी थी, लेकिन बात नहीं बनी थी। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित को इसकी वजह माना जा रहा था, हालांकि अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट के बाद गेंद आम आदमी पार्टी और सीएम अरविंद केजरीवाल के पाले में आ गई है।

राहुल गांधी के ट्वीट करने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर इसका जवाब दिया है। केजरीवाल ने कहा कि 'कौन सा U-टर्न? अभी तो बातचीत चल रही थी। आपका ट्वीट दिखाता है कि गठबंधन आपकी इच्छा नहीं मात्र दिखावा है। मुझे दुख है आप बयानबाजी कर रहे हैं।'

केजरीवाल ने ट्वीट में यह भी जोड़ा कि 'आज देश को मोदी-शाह के ख़तरे से बचाना अहम है।दुर्भाग्य कि आप UP और अन्य राज्यों में भी मोदी विरोधी वोट बाँट कर मोदी जी की मदद कर रहे हैं'

कौन सा U-टर्न?अभी तो बातचीत चल रही थी

आपका ट्वीट दिखाता है कि गठबंधन आपकी इच्छा नहीं मात्र दिखावा है।मुझे दुःख है आप बयान बाज़ी कर रहे हैं

आज देश को मोदी-शाह के ख़तरे से बचाना अहं है।दुर्भाग्य कि आप UP और अन्य राज्यों में भी मोदी विरोधी वोट बाँट कर मोदी जी की मदद कर रहे हो


आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर जिस तरह से खींचतान चल रही थी उससे इसकी संभावना लगभग खत्म हो चुकी थी। लेकिन राहुल गांधी ने अचानक इसे लेकर ट्वीट किया है और कांग्रेस द्वारा गठबंधन को तैयार होने के साथ ही सीएम अरविंद केजरीवाल पर एक बार फिर यू टर्न लेने का आरोप लगा दिया है। इस पर केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देकर एक दूसरे के बीच ट्वीटर वार छेड़ दिया है।

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