रायपुर। छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में अब नौकरी का पिटारा खुलेगा। उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने मंत्रालय में सोमवार को सभी विश्वविद्यालय के कुलपति, कुल सचिवों की बैठक ली। इसमें मंत्री ने कुलपतियों से सबसे बड़ी समस्या पूछा, तो सभी कुलपतियों ने प्राध्यापकों की कमी बताई।

इस पर मंत्री ने तीन दिन में रिक्त पदों की सूची भेजने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि वित्त विभाग से अनुमति लेकर दिसंबर तक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस बार प्राध्यापकों की भर्ती व्यापमं के माध्यम से होगी। इसके साथ ही अगले शिक्षा सत्र से सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में एक जैसा प्रवेश शुल्क होगा। इसमें ऑनलाईन प्रवेश प्रक्रिया में सुधार के लिए अध्ययन समिति बनाने का निर्णय लिया गया।

करीब छह घंटे चली बैठक में पटेल ने कहा कि अगले शिक्षा सत्र से विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणाम 15 जून तक घोषित किए जाए। उन्होंने कहा कि आकादमिक कैलेण्डर का अनिवार्य रूप से पालन होना चाहिए। उन्होंने कुलपतियों को परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। अगले शिक्षा सत्र से सभी विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा के लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा।

विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों में एक तिहाई पद के लिए वित्त विभाग से अनुमति ली जाएगी। बैठक में अगले सत्र से परिणाम घोषित करने के लिए 15 जून और पुनर्मूल्यांकन के लिए 30 अगस्त तक का समय तय किया गया है।

बैठक में मूल्यांकन केन्द्र, मूल्यांकनकर्ता, परीक्षा परिणाम, रूसा और यूजीसी के अंतर्गत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। पटेल ने नैक मूल्यांकन में पंडित रविशंकर और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को ए ग्रेड प्राप्त करने पर बधाई दी। बैठक में प्रमुख सचिव रेणु पिल्ले, आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, दिलीप वासनिकर, जीआर चुरेंद्र मौजूद थे।



रायपुर। कांग्रेस सरकार ने जुलाई की पहली तारीख को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ा दिया है। सरकार ने इसकी घोषणा पहले ही कर दी थी, अब आदेश भी जारी कर दिया गया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 15 सौ रुपए बढ़ाया गया है, इससे अब उन्हें 65 सौ स्र्पये प्रतिमाह मिलेगा। राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के स्वीकृत पदों की संख्या 46660 है। इनती ही साहियकाओं के भी पद स्वीकृत हैं। वहीं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 5814 है। मानदेय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने अपना हिस्से के अंश में बढ़ोतरी की है।

राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब तक पांच हजार स्र्पये मानदेय दिया जा रहा था। इसमें केंद्र का हिस्सा तीन व राज्य का दो हजार स्र्पये था। राज्य सरकार ने अब अपना हिस्सा बढ़ाकर 35 सौ कर दिया है। सहायिकाओं को दिए जा रहे 2500 के मानदेय में केंद्र सरकार का हिस्सा 15 सौ और राज्य सरकार का एक हजार स्र्पये था। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से 750 स्र्पये की बढ़ोतरी की है।

इसी तरह मिनी आंगनबाड़ी वालों को 3250 स्र्पये देने के लिए केंद्र सरकार 2250 और राज्य सरकार एक हजार स्र्पये दे रही थी। राज्य सरकार ने अपना हिस्सा बढ़ाकर 2250 स्र्पये कर दिया है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपना मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर 50 दिनों तक हड़ताल की थी।



   


मध्यप्रदेश में हेलमेट को लेकर नया नियम आ गया है , जानिए क्या है ये नियम.....

भोपाल। 1 जुलाई 2019 से मध्यप्रदेश में हेलमेट को लेकर नया नियम लागू कर दिया गया है। हेलमेट को लेकर परिवहन विभाग ने नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार यदि आप कोई भी नई बाइक या स्कूटर खरीदते हैं तो आरटीओ में उसका रजिस्ट्रेशन तभी होगा जब रजिस्ट्रेशन आवेदन के साथ आप दो हेलमेट लेंगे। अगर आपके पास हेलमेट पहले से है तो आपको प्रमाण स्वरूप जीएसटी वाला बिल लगाना होगा। बिल नंबर देने के बाद ही आपकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।




नए नियम आने के बाद से सभी चालकों की ये जिम्मेदारी बनती है कि वे इसका पालन करें साथ ही वाहन खरीदते समय या तो नए हेलमेट परिवहन विभाग के तय मानकों वाला बिल के साथ खरीदे या फिर पुराने हेलमेट का बिल साथ में रखे। वहीं बात अगर महिलाओं की करें तो परिवहन विभाग ने हेलमेट खरीदना अनिवार्य कर दिया है लेकिन मप्र अधिनियम के तहत हेलमेट लगाने में छूट मिली हुई है।

ट्रफिक पुलिस का कहना है कि नए नियम को लाने की वजह यह है कि भोपाल शहर में बात अगर केवल जून माह की करें तो लगभन 1304 सड़क हादसे हो चुके हैं। इन सड़क हादसों में 900 लोग इनमें घायल हुए हैं। साथ ही 112 लोगों की जान जा चुकी है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए हेटमेट पहनना बहुत जरूरी है।



जानिए ये जरूरी बातें

- मध्यप्रदेश राज्य में भी अब टू-व्हीलर पर सवार दोनों चालकों को हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

- अगर आप नया टू-व्हीलर खरीदने जाते है तो आपके पास दो हेलमेट या फिर दो हेलमेट का बिल होना अनिवार्य है।

- गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होने के लिए भी अब दो हेलमेट होना जरूरी है।

हेलमेट लगाने के फायदे

- हेलमेट पहनने से जहां आपके सिर की सुरक्षा होती है, वहीं हेलमेट पहनना आंखों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। 

- इससे हमारे कानों में पड़ने वाला तेज शोर धीमा होकर पहुंचता है, जिससे कानों की मांसपेशियों पर बुरा असर नहीं पड़ता।

- बारिश, ठंड और लू से भी हेलमेट बचाव करता है।

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के लिए सोमवार को राज्यसभा में भी प्रस्ताव पास हो गया। इससे पहले सदन में तीखी बहस हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने आजादी के बाद नेहरू सरकार के फैसलों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला।



हाइलाइट्स

लोकसभा के बाद राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी


3 जुलाई से अगले 6 महीने तक के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर मुहर


राज्यसभा में डिबेट के दौरान तीखी बहस, कांग्रेस ने घेरा तो शाह का हमला


गृह मंत्री ने नेहरू की भी चर्चा की, कहा- यूएन जाने की जरूरत क्या थी?


नई दिल्ली 
तीखी बहस के बाद सोमवार को राज्यसभा  ने जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अगले 6 महीने के लिए यह प्रस्ताव 3 जुलाई से प्रभावी होगा। इसके साथ ही राज्यसभा ने जम्मू और कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल 2019 को भी ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह दोनों प्रस्ताव पिछले शुक्रवार को ही लोकसभा से पारित हो चुके हैं। आपको बता दें कि तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजू जनता दल ने भी आखिर में समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। 

इससे पहले कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने चुनाव कराने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए थे, जिस पर अमित शाह ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि सबसे ज्यादा बार आर्टिकल 356 का प्रयोग कांग्रेस की सरकारों ने किया है। शाह ने यह भी कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग जब भी तैयार होगा, केंद्र सरकार एक दिन की भी देरी नहीं करेगी। 

नेहरू के बारे में गलत विचार नहीं पर UN क्यों गए: शाह 

राज्यसभा में विपक्षी नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। शाह ने कांग्रेस के नेताओं से सवाल पूछते हुए कहा, 'भारत के साथ महाराजा के संधि करने के बाद कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा बन गया था तो संयुक्त राष्ट्र जाने की जरूरत क्या थी?' उन्होंने पूछा कि क्या यह गलती नहीं थी? 

गृह मंत्री ने आगे कहा कि हम पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में कोई गलत विचार बनाना नहीं चाहते हैं और न जनता को गुमराह करना चाहते हैं लेकिन एक बात जरूर है कि इतिहास की भूलों से जो देश नहीं सीखते हैं उनका भविष्य अच्छा नहीं होता है। पहले हुई भूलों की चर्चा होनी चाहिए और इतिहास की भूलों से सीखना भी चाहिए। 

1949 में सीजफायर पर कांग्रेस को घेरा 
गृह मंत्री ने कहा, 'कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 में जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया? यह सीजफायर न हुआ होता तो झगड़ा ही न होता, आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होतीं। इन सबका मूल कारण सीजफायर ही था।' 

घाटी में आतंकी वारदातों पर बोलते हुए शाह ने कहा, 'हमने अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर प्रतिबंध रखने का काम किया। JKLF पर इतने समय तक प्रतिबंध नहीं लगता था, हमने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का काम किया।' 

कर्नाटक की एचडी कुमारस्वामी सरकार की मुसीबतें उस वक्त बढ़ गई जब सोमवार को कांग्रेस के दो विधायक आनंद सिंह और रमेश जरकिहोली ने राज्य विधानसभा से अपना इस्तीफा दे दिया।


अमेरिका में छुट्टी मना रहे कुमारस्वामी ने अपने सहयोगी दल कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे के लिए बीजेपी को कसूरवार ठहराया है। कुमारस्वामी ने कहा कि इसके बावजूद बीजेपी की तरफ से उनकी सरकार गिराने का प्रयास एक सपना बनकर ही रह जाएगा।


राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी कर्नाटक अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा, जिन्होंने यह बात कही थी कि वह गठबंधन सरकार नहीं गिराना चाहते हैं, उन्होंने अब कहा कि समाचार के जरिए कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे की खबर के बारे में जाना है। लेकिन, उन्होंने और ज्यादा इस्तीफा होने की भविष्यवाणी की।


येदियुरप्पा ने कहा- “मैं निश्चित तौर पर यह जानता हूं कि गठबंधन में 20 असंतुष्ट विधायक हैं। हमें इंतजार कर यह देखना होगा और उसके बाद यह तय करना होगा कि क्या सरकार बनाने का दावा करें।”


कर्नाटक विधासभा में बीजेपी के पास 104 विधायक है जबकि कांग्रेस के पास दो विधायकों के इस्तीफे के बाद अब 78 का संख्याबल रह गया है। जबकि, उसके सहयोगी जनता दल(सेक्युलर) के बाद 37 विधायक है। बीएसपी और निर्दलीय विधायक भी गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं


राज्यसभा में अभी 6 खाली सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 5 जुलाई तक पूरी हो जाएगी. इसके बाद राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 235 होगी. 4 राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग कारणों से फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं.


मंथन न्यूज-


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीन तलाक बिल को लेकर कितनी संजीदा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार 2.0 में लोकसभा में जो बिल सबसे पहले पेश हुआ, वह तीन तलाक का रहा. दरअसल ये बिल मोदी सरकार की प्राथमिकता के साथ-साथ प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है. सरकार के सामने इस बिल को पास कराना किसी चुनौती से कम नहीं है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये खासियत है कि वो जो फैसला कर लेते हैं, उसे किसी कीमत पर लागू कराना जानते हैं. इसीलिए सरकार ने राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास कराने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है .

5 जुलाई के बाद ये होगा राज्यसभा का गणित

राज्यसभा में अभी 6 खाली सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 5 जुलाई तक पूरी हो जाएगी. इसके बाद राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 235 होगी. 4 राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग कारणों से फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं.

इन 6 सीटों में गुजरात की 2 सीट बीजेपी के खाते में जाएंगी, जबकि बिहार की एक सीट बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में जा चुकी है. वहीं उड़ीसा की तीन सीटों में एक बीजेपी को मिल रही है. यानी 5 जुलाई के बाद बीजेपी की राज्यसभा में 79 सीटें हो जाएंगी जबकि एनडीए में उसके सहयोगी एआईडीएमके की 13, जेडीयू की 6, शिवसेना 3, लोकजनशक्ति पार्टी 1 और मनोनीत और निर्दलीय 11 सीटें होंगी.

ऐसे में कुल मिलाकर एनडीए की 113 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत से सिर्फ 5 सीटें कम रहेंगी. हालांकि 18 जुलाई को तमिलनाडु की 6 खाली सीटों पर चुनाव होने के बाद एनडीए को एक सीट का नुकसान हो सकता है.

राज्यसभा में ऐसे पास होगा तीन तलाक बिल

बात करें तीन तलाक बिल  की तो बीजेपी की सहयोगी जेडीयू इस बिल का विरोध कर रही है. ऐसे में राज्य सभा में तीन तलाक बिल आने पर जेडीयू विरोध करते हुए राज्यसभा से वॉकआउट कर सकती है. इसके बाद बहुमत से सरकार की दूरी 5 से बढ़कर 8 हो जाएगी. जिसके चलते सरकार की नजर उन दलों पर होगी, जो ना तो एनडीए के साथ हैं, न ही यूपीए के साथ.

इन दलों में 5 सदस्यों वाली बीजेडी, 6 सदस्यों वाली टीआरएस, 2 सीटों वाली वाईएसआर पर रहेगी. इसके अलावा इनकी नजरें एक सदस्यों वाले एनपीएफ और 2 निर्दलीय सदस्यों पर होगी. ये पार्टियां यदि तीन तलाक बिल के समय वॉकआउट भी कर जाती है तो सरकार ये बिल पास करा लेगी.

नई दिल्‍ली, मंथन न्यूज। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक के दौरान मध्‍यप्रदश के सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफे का प्रस्‍ताव दिया है। यह खबर सूत्रों के हवाले से आई है। हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शनिवार को कमलनाथ ने कहा था कि विधानसभा चुनावों के बाद मुख्‍यमंत्री चुने जाने के बाद मैंने दिसंबर में इस्‍तीफे की पेशकश की थी लेकिन मुझसे कहा गया कि इसे जारी रखें। 

गौरतलब है कि मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी 29 से 28 सीटें हार गई थी। केवल छिंदवाड़ा से नकुल नाथ की ही एक सीट जीत सकी थी। वहां पर ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को अध्‍यक्ष बनाने की मांग उठ रही है। 

हालांकि नई दिल्‍ली में पत्रकारों ने अशोक गहलोत से उनके और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा इस्तीफे की पेशकश किए जाने पर सवाल किए गए तो उन्होंने इससे इनकार नहीं किया। इस दौरान अशोक गहलोत ने साफ कहा कि इस्तीफे की पेशकश आज क्या की, जिस दिन चुनाव के परिणाम आए थे, उस दिन इस्तीफे की पेशकश होती है।

उन्होंने आगे कहा कि चुनी हुई सरकारों को स्‍थाई रखना होता है। चुनाव के बाद हाईकमान फैसला करता है कि आगे हमें कैसे काम करना है। पूरी वर्किंग कमिटी ने राहुल गांधी को अधिकृत किया है कि वह जो चाहें फैसला करें, पुनर्गठन करें, बदलाव करें, कुछ भी करें और यह फैसला 25 जून को ही हो चुका है।

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