मंथन न्यूज भोपाल मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशानुसार राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए चलाये गए राजस्व अभियान के बाद प्रकरणों के निराकरण का प्रतिशत 51 से बढ़कर 108 हो गया है। दिनांक 10 जुलाई 2017 तक कुल दर्ज प्रकरण 8 लाख 3 हजार 70 में से मात्र 4 लाख 9 हजार 598 प्रकरण निराकृत हुए। दिनांक 11 जुलाई से 20 सितंबर के बीच 4 लाख 49 हजार 724 प्रकरण दर्ज किये गए, जबकि 4 लाख 86 हजार 260 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने जानकारी दी है कि सीमांकन के प्रकरणों का निराकरण 135, बंटवारा के प्रकरणों का 151 और नामांतरण के प्रकरणों का 291 प्रतिशत निराकरण 11 जुलाई से 20 सितंबर के बीच हुआ है। मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह द्वारा इस बीच संभागवार राजस्व प्रकरणों की समीक्षा की गयी।

मंथन न्यूज दिल्ली आगामी विधानसभा चुनावों के साथ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का खाका तैयार करने के लिए आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि 2019 में पार्टी पिछली बार से भी बड़ी जीत हासिल करेगी. वहीं उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा की भी निंदा की.

पीयूष गोयल ने कार्यकारिणी बैठक के बारे मीडिया को बताते हुए कहा, 'केरल और बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा की निंदा करते हुए अमित शाह ने कहा कि हिंसा से बीजेपी का कार्यकर्ता डरने वाला नहीं. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अमित शाह ने कहा कि हिंसा का कीचड़ कोई कितना भी फैलाए, भाजपा का कमल उतना ही ज़्यादा निखार के आएगा. इसके साथ ही बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता 3-17 अक्टूबर तक केरल में पदयात्रा करेंगे.'

अमित शाह ने इस बैठक में कहा, 'देखते जाइए, 2019 की जीत पहले से भी बड़ी होगी. उन्होंने कहा कि भारत का हर नागरिक चाहता है कि देश गंदगी, गरीबी, तुष्टीकरण की राजनीति आदि से मुक्त हो.' पीयूष गोयल ने अमित शाह के हवाले से बताया, 'पीएम मोदी की जनकल्याण योजनाओं की वजह से भारत ही नहीं दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है. सरकार की विभन्न जनकल्याण योजनाओं की बदौलत लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है. हमने दो करोड़ महिलाओं का मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया. 7.5 करोड़ लोगों का मुद्रा योजना का लाभ मिल रहा है. हम न्यू इंडिया के मॉडल पर काम कर रहे हैं, जहां गरीबी हटाने, युवाओं को रोजगार मुहैया कराने पर जोर होगा.'

वहीं राहुल गांधी पर प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा कि वह भारत की गरिमा को धूमिल कर हैं. वंशवाद कांग्रेस की संस्कृति है. अमित शाह ने कहा, 'राहुल गांधी जिस तरह की तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं, उसे देश की जनता नकारती है. भाजपा पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेन्स पर विश्वास करती है. राजनीति ऐसी होनी चाहिए जिसमे सबकी चिंता होनी चाहिए.'

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह,  गृहमंत्री राजनाथ सिंह, लाल कृष्ण आडवानी समेत तमाम वरिष्ठ नेता बैठक में पहुंचे.

बताया जा रहा है कि पीएम मोदी कार्यक्रम के अंत में बैठक को संबोधित करेंगे. जिसमें मोदी सरकार की उपलब्धियां सरकार द्वारा किए गए काम और आगे की दशा-दिशा तय होगी.

मंथन न्यूज दिल्ली ]। एक कहावत है कि फरेब की उम्र लंबी नहीं होती है। ये बात अलग है कि लोग अपने फायदे के लिए फरेब का सहारा लेते हैं। अगर आम लोग फरेब करें तो शायद वक्त के साथ लोग उसे भूल जाते हैं। लेकिन फरेब ही किसी देश की घोषित नीति हो तो उस पर आप क्या कहेंगे। पाकिस्तान अपने उदय से लेकर आज तक फरेब की नीति पर ही काम करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में जब भारतीय विदेश मंत्री ने दमदार तरीके से अपनी बात रखी तो पाकिस्तान तिलमिला उठा। पाकिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि मलिहा लोधी ने भारत को कश्मीर के मुद्दे पर जमकर घेरा। भारत की घेरेबंदी में मलीहा भूल गईं कि जिस तस्वीर के जरिए वो भारतीय सुरक्षाबलों द्वारा जुल्म-ओ-सितम का जिक्र कर रही थीं। वो सिर्फ और सिर्फ फरेब था। दुनिया के दूसरे मुल्कों की आंखों में धूल झोंका जा रहा था, लेकिन शुक्र है सोशल मीडिया का जिसमें उनका झूठ पकड़ा गया। आइए आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है। 

फरेबी पाकिस्तान की खलनायिका मलीहा लोधी

आतंकवाद के मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के जोरदार जवाब से तिलमिलाए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भी नापाक हरकत कर ही दी। सुषमा के संबोधन पर ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कश्मीर के मसले पर पूरी दुनिया को गुमराह करने की कोशिश की और इस क्रम में अपने ही देश को शर्मसार कर डाला। लोधी ने भारत पर कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कथित रूप से पैलेट गन से घायल 17 साल की एक ऐसी लड़की की तस्वीर दिखाई, जिसके पूरे चहरे पर जख्म के निशान हैं। उन्होंने कहा कि यही भारतीय लोकतंत्र का चेहरा है। लेकिन मलीहा जो तस्वीर दिखा रही थीं, वह वास्तव में गाजा पट्टी के एक अस्पताल में इलाज कराते वक्त ली गई फलस्तीनी लड़की राव्या अबू जोमा की थी। वह 2014 में इजरायल के हमले में घायल हो गई थी। राव्या के घर पर बमबारी हुई थी, जिसमें उसके तीन चचेरे भाइयों और उसकी बहन की मौत हो गई थी। इस तस्वीर को प्रख्यात फोटो पत्रकार हेइदी लेवाइन ने खींचा था। गाजा में खींची गई तस्वीरों के लिए उन्हें इंटरनेशनल वूमेंस मीडिया फाउंडेशन ने पुरस्कृत भी किया था। यूरोमेडिटरेनियन ह्यूमन राइट्स मॉनिटर के संस्थापक डॉ. रैमी आब्दू ने अपने ट्विटर हैंडल पर यह तस्वीर 27 मार्च 2015 को साझा की थी।

जानकार की राय

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने Jagran.Comसे खास बातचीत में कहा कि पाकिस्तान अब एक्सपोज हो चुका है। पिछले 70 साल से वो दुनिया को बेवकूफ बनाता रहा है। लेकिन मलीहा लोधी ने जिस साक्ष्य को विश्व मंच को दिखाया उससे साफ है कि पाक हमेशा बदनीयती से काम करता रहा है। दुनिया को अपने पाले में लाने की कोशिश पाकिस्तान की तरफ से होती रही है, हालांकि अब उसका परम मित्र चीन भी किनारा कर चुका है। चीन ने साफ किया कि अब वो कश्मीर मुद्दे पर दखल नहीं देगा। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन के रुख  में किसी तरह की नरमी नहीं है। ट्रंप प्रशासन मानता है कि आतंकियों को लेकर पाकिस्तान की कथनी और करनी में फर्क है, लिहाजा उन्हें ये साबित करना होगा कि वो अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं करेंगे। 

भारत के प्रहार से नहीं बच सका पाकिस्तान

भारत के प्रहार से उबरने की कोशिश में पाकिस्तान ने किसी कनिष्ठ नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र में तैनात अपनी दूत मलीहा लोधी को ही उतार दिया। लोधी ने भारत को ‘उलटा चोर कोतवाल को डांटे’ के अंदाज में आरोपों के कठघरे में खड़ा करने की भरपूर कोशिश की। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय के बयानों का सहारा लिया। रॉय ने कहा था कि जो भारत में हो रहा है, वह पूरी तरह आतंक है। फिर लोधी भारत के कथित धर्मनिरपेक्षतावादियों के उन बोलों पर आ गईं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फासिस्ट व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ उन्मादी के रूप में चित्रित किए जाते रहे हैं। उन्होंने भारत के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में आदित्यनाथ की नियुक्ति पर भी सवाल उठा दिए। लोधी ने कहा, मोदी सरकार फासिस्ट मानसिकता के तहत काम कर रही है। वह आगे बोलीं कि भारत सरकार का नेतृत्व आरएसएस की विचारधारा से निकला है।


पाकिस्‍तान पर सुषमा का वार

सुषमा स्वराज ने यूएनजीए में कहा कि हम तो गरीबी से लड़ रहे हैं, किन्तु हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि दो दिन पहले जब पाक पीएम शाहिद खक्‍कान अब्‍बासी भारत पर आरोप लगा रहे थे तो सुनने वाले कह रहे थे–Look, who is talking। जो मुल्क हैवानियत की हदें पार करके दहशतगर्दी के जरिये सैकड़ों बेगुनाहों को मौत के घाट उतरवाता है, वो यहां खड़े होकर हमें इंसानियत के सबक के साथ मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहा था ?

पीएम मोदी की दोस्‍ती की नीयत

सुषमा ने अब्‍बासी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शांति और दोस्ती की नीयत दिखाई थी और हर तरह की रुकावटों को पार करते हुए दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया था। लेकिन इस दोस्‍ती को बदरंग कर दिया गया, इसका जवाब पाक पीएम को देना है हमें नहीं।

लाहौर और शिमला समझौते का जिक्र

विदेश मंत्री ने कहा कि अब्‍बासी यहां खड़े होकर संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों की बात भी कर रहे थे। लेकिन वह भूल गए कि शिमला समझौते और लाहौर डिक्‍लेयरेशन में दोनों देशों ने अपने मसलों को आपस में बैठकर ही तय करने का फैसला किया था। लेकिन पाकिस्‍तान अपनी सुविधा के लिए जब चाहें तब उसे भूल जाने का नाटक करता है।

मंथन न्यूज दिल्ली भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन से जल्दी से प्रत्यपर्ण कराने के लिए नकेल कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी ने खुलासा किया है कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए गए 6 हजार करोड़ से अधिक के लोन को विदेश में स्थित शेल कंपनियों में डायवर्ट किया था। 

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सीबीआई और ईडी ने 7 देशों में मौजूद शेल कंपनियों में यह पैसा इन्वेस्ट किया था। यह कंपनियां यूएस, यूके, फ्रांस, आयरलैंड में स्थित हैं जिनके बारे में जानकारी मांगी गई है।

माल्या ने लिया था 17 बैंकों से 6027 करोड़ का लोन
माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस को सुधारने के लिए 17 बैंकों के कंशोर्सियम से 6027 करोड़ का लोन लिया था। इसमें से सबसे ज्यादा एसबीआई से लिया था, जिसका अमाउंट 1600 करोड़ रुपये था।  सीबीआई ने इसी आधार पर ब्रिटेन से माल्या का भारत जल्द प्रत्यपर्ण कराने के लिए लंदन स्थित कोर्ट में अर्जी दाखिल करने का फैसला किया है। इसके लिए नई चार्जशीट जल्द ही दाखिल की जाएगी।  

20 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने के लिए  प्रत्यर्पण केस की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। माल्या भारतीय बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपए का लोन लेकर फरार है। माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है और उसे प्रर्त्यपण वारंट मामले में अप्रैल 2017 में भी गिरफ्तार किया गया था।
 
बता दें कि ब्रिटेन सरकार से भारत ने माल्या के प्रत्यर्पण की गुहार लगाई है। जिसके बाद लंदन कोर्ट ने माल्या के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करते हुए गत 18 अप्रैल को गिरफ्तार भी किया था लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया था।

माल्या ने अदालत के बाहर मीडिया से कहा, ‘मैं किसी भी अदालत से भाग नहीं रहा हूं। मेरे पास अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं।’ माल्या ने कहा, ‘मैं मीडिया में इसलिए बयान नहीं देता क्योंकि उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। मेरे पास पर्याप्त सुबूत हैं। मैं एक क्रिकेट मैच के दौरान भारत का समर्थन करने पहुंचा तो मीडिया ने उन्माद पैदा कर दिया। ऐसे में बेहतर है कि मैं कुछ भी न बोलूं।’ 

दिल्ली : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारणी की दो दिवसीय बैठक रविवार से शुरू हुई. बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से बैठक संपन्न होगी, जिसमें वह अर्थव्यवस्था की स्थिति पर विपक्ष की आलोचना का जवाब दे सकते हैं. 

उस दिन हिंदुत्व विचारक दीन दयाल उपाध्याय की जयंती है. प्रधानमंत्री इस अवसर पर पार्टी के खास एजेंडों और प्रस्तावों की भी चर्चा करेंगे. अमित शाह ने बैठक के पहले दिन उन एजेंडों और प्रस्तावों की रूप-रेखा तय करने के लिए पदाधिकारियों, राज्य प्रमुखों और प्रमुख संगठन नेताओं के साथ विचार किया. बैठक में शाह ने पिछले एक साल में विस्तार अभियान की समीक्षा की.

महासचिव भूपेंद्र यादव ने बताया कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए 4100 विधानसभा सीटों पर पार्टी के चार लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने सरकार की विभिन्न विकास पहलों को लोगों के साथ साझा किया.

जर्मनी बर्लिन। जर्मनी में आम चुनाव के मतदान में 63 वर्षीय चांसलर एंगेला मर्केल को चौथी बार देश की कमान मिल गई है। इस जीत से खुश मर्केल ने माना है कि पहली बार पार्टी के लिए तय किए गए 40 प्रतिशत वोट के लक्ष्य को पाने में असफल रहे हैं। इस चुनाव में 60 साल में पहली बार धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) पार्टी भी संसद में अपनी पहली सीट जीतकर इतिहास रचा है।

मतदान बाद हुए एग्जिट पोल के मुताबिक मर्केल के कंजर्वेटिव क्रिश्चियन यूनियन सीडीयू-सीएसयू गठबंधन को 33 प्रतिशत वोट मिले हैं और उसने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी मार्टिन शुल्ज के नेतृत्व वाली मध्य वाम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) से दोहरे अंकों की बढ़त बना ली थी।

एएफडी ने किया धमाका

लेकिन जर्मन की व्यवस्था में सबसे बड़ा धमाका इस्लाम विरोधी, प्रवासी विरोधी और मात्र चार साल पुरानी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) ने किया है।

उसे करीब 13 प्रतिशत वोट मिले हैं और वह देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। एएफडी के सीटें जीतने की संभावना महीनों से थी लेकिन विश्लेषक इसे जर्मनी के इतिहास में ऐतिहासिक पल बता रहे हैं। बर्लिन में पार्टी मुख्यालय में समर्थक एकत्र हुए और जश्न मनाया। जैसे ही टीवी पर नतीजे आए, कई समर्थक जर्मनी का राष्ट्रगान गाने लगे।

एएफडी का हो रहा था विरोध

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से पहली बार बुंडेसटैग में असली नाजियों के प्रवेश से सतर्क नेताओं ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में मतदाताओं से अनुरोध किया कि वे दक्षिणपंथी एएफडी को खारिज कर दें। बर्लिन स्थित ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक थॉस्टर्न बेनर ने कहा कि यदि एएफडी प्रमुख विपक्षी पार्टी बनती है तो वे लोग मुख्य विषयों को चुनौती देंगे। यह संसद में चर्चा के सुर को बहुत ज्यादा बदल देगा।

12 साल से सत्ता में

मर्केल 12 साल से सत्ता में हैं। उन्होंने प्रचार अभियान में अपने शासनकाल में देश में निम्न बेरोजगारी, मजबूत आर्थिक वृद्धि, संतुलित बजट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते महत्व जैसी उपलब्धियों पर जोर दिया। इसका चुनाव पूर्व कराए गए जनमत संग्रहों में भी असर देखने को मिला था। जिनमें मर्केल के गठबंधन को प्रतिद्वंद्वी मार्टिन शुल्ज और उनकी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी पर बढ़त दिखाई गई थी। सरकार बनाने में लगेगा वक्तजर्मनी की संघीय संसद के निचले सदन बुंडेसटैग में प्रवेश के लिए चार पार्टियों के पांच फीसदी की सीमा पार करने का अनुमान है। ऐसे में अगली सरकार के गठन में महीनों लग सकते हैं।

मंथन न्यूज उत्तर प्रदेश

मुलायम सिंह यादव ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसके बाद समाजवादी पार्टी को लेकर उठ रहे कई सवालों का अंत हो जाएगा. बताया जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई पार्टी का ऐलान भी कर सकते हैं. मुलायम सिंह ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लखनऊ के लोहिया ट्रस्ट में बुलाई है और इसमें प्रदेश भर से मुलायम सिंह के समर्थक जमा होंगे. पहले ही ऐलान कर दिया गया था कि 25 सितंबर को मुलायम सिंह की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी और कॉन्फ्रेंस में कई सवाल के जवाब मिल जाएंगे.

हालांकि मुलायम सिंह की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या अलग पार्टी बनेगी? कोई अलग मंच होगा? या कोई मोर्चा होगा? इन सभी सवालों का जवाब आज मुलायम सिंह यादव देंगे. बताया जा रहा है कि नई पार्टी की घोषणा होगी और इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नाराज लोगों को शामिल किया जाएगा.

 

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लोहिया ट्रस्ट की बैठक बुलाई थी,  लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके समर्थकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया  था. बैठक में अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव, आजम खान, धर्मेंद्र यादव और बलराम यादव इस बैठक में नहीं शामिल हुए थे. जिसके बाद मुलायम  सिंह यादव ने अपने भाई रामगोपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट के सचिव पद से बर्खास्त कर दिया था और उनकी जगह  शिवपाल यादव को सचिव बना दिया था.

इसी साल अगस्त में मुलायम ने लोहिया ट्रस्ट की बैठक ली थी, अखिलेश और राम गोपाल उस बैठक में शामिल नहीं हुए थे. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने पिछले दिनों लोहिया ट्रस्ट कार्यालय में हुई बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए अखिलेश के करीबी चार सदस्यों को ट्रस्ट से बेदखल कर दिया था. नतेाजी द्वारा हटाए गए सदस्यों में राम गोविंद चौधरी, ऊषा वर्मा, अशोक शाक्य और अहमद हसन थे. ये सभी सदस्य अखिलेश यादव के करीबी हैं. सपा संरक्षक मुलायम सिंह ने इन चार सदस्यों की जगह शिवपाल के चार करीबियों को सदस्य बनाया. इनमें  दीपक मिश्रा,राम नरेश यादव,राम सेवक यादव और राजेश यादव सदस्य बनाये गए.

वहीं अखिलेश यादव का फिर से समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय है और 5 अक्टूबर को आगरा के राष्ट्रीय अधिवेशन उन्हें दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. इसबार अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की मुहर राष्ट्रीय अधिवेशन में लगेगी.

हाल ही में मुलायम सिंह को लेकर अखिलेश ने कहा था कि मुलायम उनके पिता हैं लेकिन रही बात राजनीति की तो फिलहाल दोनों की लाइन अलग है. बहरहाल मुलायम सिंह हमेशा उम्मीदों के विपरीत फैसला लेने वाले माने जाते रहे हैं, ऐसे में अध्यक्ष पद दोबारा नहीं मिलने पर मुलायम क्या फैसला लेते हैं इसपर सबकी नजर रहेगी.

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