मंथन न्यूज रीवा
पूनम पुरोहित

मध्यप्रदेश के जनसंपर्क जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री एवं रीवा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा एक दिवसीय दौरे पर रीवा पहुंचे जहां!
मंत्री डॉ मिश्रा ने सर्किट हाउस में  कैरियर प्रशिक्षण एवं कौशल उन्नयन की गतिविधियों के लिए सीआईए द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण के संबंध में बैठक की अध्यक्षता की!
इस अवसर पर कुलपति अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रोफेसर के के एन सिंह यादव तथा कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक उपस्थित रहीं
आज मंत्री डॉ मिश्रा रीवा में विभिन्न कार्यक्रमों बैठको में भाग लेने के पश्चात चित्रकूट पहुंचकर भागवान कामतानाथ के दर्शन भी करेंगे



नई दिल्ली/भोपाल.  इस साल देशभर में जमकर बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने बुधवार को जारी दूसरे और आखिरी पूर्वानुमान में बारिश की संभावना और बढ़ा दी है।  यह अनुमान भी जताया है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के इलाकों में 100 फीसदी तक बारिश होगी। वहीं दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्व में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। यह लगातार तीसरा साल है जब मानसून सामान्य रहेगा। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि मप्र में सिर्फ अगस्त माह में सामान्य से कम बारिश होगी।

 

जुलाई में सबसे ज्यादा तो अगस्त में कम होगी बारि

जुलाई के दौरान देशभर में एलपीए की 101%, जबकि अगस्त के दौरान 94% बारिश होने का अनुमान है। यह नौ फीसदी कम या ज्यादा रह सकती है।

 

केरल से कर्नाटक-तमिलनाडु की ओर बढ़ा मानसून 
दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 दिन पहले केरल पहुंचा। यह लगभग पूरे केरल को कवर चुका है। मानसून अब कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों और तमिलनाडु की ओर बढ़ रहा है। 48 घंटे के दौरान इसके उत्तर-पूर्वी राज्यों की तरफ बढ़ने की स्थितियां भी बन रही हैं। 6 जून तक गोवा और महाराष्ट्र में बारिश शुरू होने की संभावना है।

 

 भोपाल में 11 दिन बाद 43 डिग्री से नीचे आया पारा, गर्मी से राहत नहीं

- शहर में भीषण गर्मी का दौर बुधवार को भी जारी रहा। दिन में पारा 2.5 डिग्री लुढ़का। इसके बावजूद यह सामान्य से दो डिग्री ज्यादा रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि गुरुवार को और ऐसी ही तपिश बनी रह सकती है। अनुमान है कि एक जून से मौसम बदल सकता है। शहर में बादल छाने और गरज- चमक की स्थिति बनने की संभावना है।

 

11 दिन से दिन का तापमान 43 डिग्री पार बना हुआ

- बुधवार को दिन का तापमान 42.7 डिग्री दर्ज किया गया। 11 दिन से दिन का तापमान 43 डिग्री पार बना हुआ था। इससे पहले 18 मई को दिन का तापमान 42.2 डिग्री दर्ज किया गया था।

- बुधवार को बाजारों में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर इक्का- दुक्का वहन ही नजर आए। पिछले पांच दिन से शहर ऐसा ही तप रहा है। एक दिन की मामूली राहत के बाद रात भी दो दिन से खूब तप रही है।

 

गुरुवार को शहर और ऐसा ही तप सकता है

-  बुधवार को रात का तापमान 30.6 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 4 डिग्री ज्यादा रहा। इसमें 0.1 डिग्री की मामूली गिरावट हुई। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि गुरुवार को शहर और ऐसा ही तप सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव होने की संभावना है।

यह है खास वजह
मौसम वैज्ञानिक शुक्ला ने बताया कि देश के उत्तरी हिस्से  हवा का रुख  पश्चिमी से बदलकर पूर्वी हो रहा है। इसे मानसून आने से पहले ईस्टरली सेट होना कहते हैं। इस वजह से तापमान में गिरावट हुई है।  

 

30 में से 28 दिन रात का तापमान सामान्य से ज्यादा

शहर में इस बार दिन के साथ रातें भी बहुत तपी। 30 में से 28 दिन तापमान सामान्य से ज्यादा रहा। मई के पहले दिन ही रात का तापमान सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा रहा था। अगले दिन 5 डिग्री अधिक रहा। इसके बाद एक- दो दिन ही यह सामान्य रह सका।

भोपाल। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पढ़ा रहे साढ़े चार हजार अतिथि विद्वानों को नियमित करने को लेकर कैबिनेट बैठक में मंत्रियों और अफसर के बीच जमकर तर्क-वितर्क हुआ। अतिथि विद्वानों के पक्ष में दलील देते हुए मंत्री उन्हे नियमित करने की बात कह रहे थे एवं मांग कर रहे थे कि तब तक एमपी पीएससी से हो रही अस्सिटेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रोक दी जाए। जबकि अफसरों का कहना था कि यदि नियुक्ति रोक दी गई तो मप्र में अच्छे शिक्षक नहीं आएंगे और भावी पीढ़ी पर इसका असर पड़ेगा। वह बर्बाद हो जाएगी। बड़ी बात यह है कि पूरे मामले में सीएम शिवराज सिह चौहान चुप रहे। जब मंत्री और अधिकारियो की बहस बढ़ी तो सीएम ने मामला टाल दिया और अगले विषय पर बातचीत शुरू हो गई

इन मंत्रियों ने किया अतिथि विद्वानों का समर्थन 

मप्र के वाणिज्य, उद्योग व रोजगार मंत्री राजेंद्र शुक्ला जब, मप्र लोक सेवा आयोग से की जा रही भर्तियों को रोकने की बात कर रहे थे, तब वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह और जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी शुक्ला का पक्ष लिया। बता दें कि अतिथि विद्वानों से मुलाकात के दौरान राजेन्द्र शुक्ला ने वादा किया था कि वो इस संदर्भ मे सीएम शिवराज सिंह से बात करेंगे। उन्होने पीएससी की भर्ती प्रक्रिया को गलत बताया था। नरोत्तम मिश्रा भी अतिथि विद्वानों को नियमित करने के पक्ष में खुलकर बात कर चुके हैं। 

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट बैठक के दौरान अतिथि विद्वानों के मानदेय बढ़ाने का मामला आया। इसी से चर्चा की शुरुआत हुई। राजेंद्र शुक्ला के कहने के बाद अतिथि विद्वान सालों से पढ़ा रहे हैं। डॉ. शेजवार ने कहा कि इनको अस्सिटेंट प्रोफेसर का पद देते हुए नियमित किया जाना चाहिए। रुस्तम सिंह ने भी यही बात दोहराई। इस पर मुख्यमंत्री कुछ बोलते, उससे पहले ही मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि एमपी पीएससी से हो रही नियुक्ति के दौरान पांच साल से अधिक समय से पढ़ा रहे अतिथि विद्वानों को 20 बोनस अंक दिए जा रहे हैं। वे योग्य हैं तो आगे आएं। विकसित देशों में शिक्षा पर इतना ध्यान दिया जा रहा है, क्या मप्र के बच्चों को अच्छे शिक्षक नहीं मिलने चाहिए। ऐसे तो पीढ़ी को नुकसान होगा। वैसे भी अतिथि विद्वानों का रिक्रूटमेंट भाजपा सरकार में नहीं हुआ। बहस को बढ़ता देख मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर बाद में बात करेंगे। 

कर्नाटक के नतीजों से मायावती उत्साहित हैं. कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन के बावजूद बीएसपी का एक ही विधायक जीत पाया है. लेकिन कांग्रेस को दूसरी नंबर की पार्टी बनाने में मायावती का अहम योगदान है. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ बेंगलुरु में मायावती की तस्वीर नए राजनीतिक समीकरण की तरफ इशारा करती है.


बज़ाहिर सब कुछ ठीक नज़र आ रहा है. लेकिन मायावती अपनी अहमियत समझ गई हैं. बीएसपी का वोट जिता ना पाए लेकिन हरा ज़रूर सकता है. इसलिए कांग्रेस भी मायावती की तरफ उम्मीद से निगाह गड़ाए हुए है. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीएसपी के साथ कांग्रेस चुनावी समर में उतरना चाहती है. कांग्रेस के नेता इस को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं.

हालांकि बीएसपी को कांग्रेस के साथ लाना आसान नहीं है. मायावती ने पार्टी की बैठक में कहा कि बीएसपी गठबंधन के लिए तैयार है. लेकिन जब बीएसपी को सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी. बीएसपी अध्यक्ष के इस पैंतरेबाजी से कांग्रेस के माथे पर बल पड़ गए हैं. बीएसपी का राजस्थान के कुछ इलाके में और मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से में खासा-असर है. बीएसपी-कांग्रेस का गठबंधन बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है.

बीएसपी-कांग्रेस सीटों के लिए जद्दोजहद

कर्नाटक में बीएसपी 18 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. इस लिहाज़ से बीएसपी 10 फीसदी सीटों पर अपना दावा ठोंकने का मन बना रही है. बीएसपी को लग रहा है कि इससे उसकी सत्ता में भागीदारी बढ़ेगी. पार्टी का वजूद भी बढ़ेगा. मध्य प्रदेश में बीएसपी का वजूद कई दशकों से है. राजस्थान में भी बीएसपी कमतर नहीं है. 2008 से 2013 तक अशोक गहलोत की सरकार बीएसपी के बाग़ी विधायकों के बल पर चलती रही है. हालांकि चुनाव के बाद भी बीएसपी का सहयोग लिया जा सकता है. लेकिन कर्नाटक के चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है. मध्य प्रदेश में बीएसपी 35 सीटों के लिए दबाव बना सकती है. वहीं राजस्थान में 25 सीट और छत्तीसगढ़ में तकरीबन दस सीट बीएसपी लड़ना चाहती है. हालांकि कांग्रेस को इतनी सीटें ज्यादा लग रही हैं.

भोपालः मध्य प्रदेश में चुनावी चौसर सजने लगी है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ही अंदाज में हर असंतोष को दबाने के लिए दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल के ‘जख्मों’ को कुरेदना शुरू कर दिया है. मतदाताओं के बीच बिजली, सड़क से लेकर कर्मी कल्चर की चर्चा छेड़ते हुए सौगातों की बरसात कर दी है.


राज्य में भाजपा की सरकार को डेढ़ दशक होने को है. मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज को 13 साल हो चुके है. लगातार चौथी बार जीत किसी भी राज्य में किसी भी दल के लिए आसान नहीं होती. लिहाजा, चौहान ने इस जीत के लिए अभी से पांसे फेंकने शुरू कर दिए हैं.

सड़क-बिजली को बनाया हथियारइसके लिए उन्होंने बड़ा हथियार बनाया है, सड़क, बिजली और कर्मचारियों की स्थिति को. चौहान ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लिया इसके मुताबिक, अध्यापक संवर्ग का शिक्षा विभाग में संविलियन किए जाने के साथ डाइंग (समाप्त) घोषित किए गए शिक्षक कैडर के फैसले को खत्म किया गया. अब सभी शिक्षक होंगे. उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस काल अर्थात दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की याद ताजा करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में गुरुजी-शिक्षाकर्मी कल्चर पैदा किया गया, जिसे भाजपा ने खत्म किया है. राज्य सरकार के इस फैसले से 2,37000 अध्यापक लाभन्वित होंगे. एक तरह से शिवराज ने इस फैसले के जरिए इन अध्यापकों के परिवारों का दिल जीतने का काम किया है.


राज्य अध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव का कहना है कि दिग्विजय सिंह सरकार के शिक्षा विभाग के उस काले अध्याय का अंत हो गया है, जिसके जरिए व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के पद को मृत घोषित किया गया था. यह निर्णय तत्कालीन सरकार ने 12 जुलाई 1994 को लिया गया था. मंगलवार को वर्तमान सरकार ने अध्यापकों को शिक्षक बनाने का फैसला लेकर दिल जीत लिया है.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका आदि के वेतन में वृद्धिशिवराज सरकार इससे पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका आदि के वेतन में वृद्धि का ऐलान कर चुकी है. साथ ही जेल प्रहरियों के बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आयु को 16 वर्ष किया जा चुका है. इसके अलावा कई और भी फैसले लिए गए. राजनीति के जानकारों की मानें तो शिवराज ने यह मास्टर स्ट्रोक तब मारा है, जब दिग्विजय सिंह राज्य की सियासत में सक्रिय हो रहे हैं. शिवराज की तैयारी दिग्विजय काल की याद दिलाने की है. उस समय कांग्रेस की पराजय के बड़े कारण कर्मचारी, बिजली और सड़क थे. शिवराज अब इन्हीं तीन मुद्दों पर अपने को फोकस कर रहे हैं. इससे सत्ता के खिलाफ जो भी माहौल हो, वह दिग्विजय के काल की याद दिलाकर खत्म किया जा सके.

यहां एक बात बताना लाजिमी होगा कि पिछले दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी राज्य में भाजपा को ‘अंगद का पैर’ बताया था और एक पुस्तिका का विमोचन किया था, जिसमें दिग्विजय के कार्यकाल वर्ष 2002-03 और वर्ष 2017-18 की तुलना की गई है. इसमें खस्ता हाल सड़क, बिजली की बुरी हालत, सिंचाई की स्थिति आदि का ब्यौरा है.

शिवपुरी। शिवपुरी शहर में पड़ रही तेज़ गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। बुधवार को परेशान लोगों ने जल क्रांति आंदोलन कर्ताओं के नेतृत्व में एक रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। परेशान लोगों का कहना था कि शिवपुरी शहर में पीने के पानी की परेशानी है और निरंकुश अफसरशाही जनता की परेशानी की सुनवाई नहीं कर रही है। 40 दिन से माधव चौक पर धरना प्रदर्शन जारी है, इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही सिंध जल आवर्धन योजना के प्रोजेक्ट को लेकर नहीं की जा रही है। 


रैली में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि सिंध जल आवर्धन योजना के तहत प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है और पाइप लाइन के जरिए घरों तक पानी नहीं आ पाया है। लोगों का आरोप है उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा है। प्रदशर्न करने वाले लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। पानी की समस्या  से  परेशान लोग बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पर ज्ञापन देने के लिए गए तो कोई भी वरिष्ठ अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए नहीं आया, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई। जल क्रांति आंदोलन करता और पानी से परेशान लोगों ने बताया है कि उन्होंने पहले ही जिला प्रशासन को रैली निकालकर ज्ञापन देने की सूचना दे दी थी। 

उसके बाद भी नवागत कलेक्टर शिल्पा गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर ज्ञापन लेने के लिए नहीं आया। एक घंटे तक नारेबाजी के बाद में लोग माधव चौक पर एकत्रित हो गए और उन्होंने चक्का जाम कर दिया। लोगों का आरोप है कि शिवपुरी में प्रशासन असंवेदनशील बना हुआ है और लोगों की परेशानी को हल नहीं किया जा रहा है।

*पानी को लेकर परेशान लोगों ने निकाली रैली, कलेक्टर नहीं आईं ज्ञापन लेने तो विरोध में हुई नारेबाजी, बाद में किया चक्का जाम*

- *पेयजल समस्या को लेकर परेशान लोगों ने निकाली रैली*

- *कलेक्टर सहित कोई भी वरिष्ठ अधिकारी नहीं आया ज्ञापन लेने*

*शिवपुरी।*
शिवपुरी शहर में पड़ रही तेज़ गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। बुधवार को परेशान लोगों ने जल क्रांति आंदोलन कर्ताओं के नेतृत्व में एक रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। परेशान लोगों का कहना था कि शिवपुरी शहर में पीने के पानी की परेशानी है और निरंकुश अफसरशाही जनता की परेशानी की  सुनवाई नहीं कर रही है। 40 दिन से माधव चौक पर धरना प्रदर्शन जारी है, इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही सिंध जल आवर्धन योजना के प्रोजेक्ट को लेकर नहीं की जा रही है। रैली में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि सिंध जल आवर्धन योजना के तहत प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है और पाइप लाइन के जरिए घरों तक पानी नहीं आ पाया है। लोगों का आरोप है उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा है। प्रदशर्न करने वाले लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। पानी की समस्या  से  परेशान लोग बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पर ज्ञापन देने के लिए गए तो कोई भी वरिष्ठ अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए नहीं आया, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई। जल क्रांति आंदोलन करता और पानी से परेशान लोगों ने बताया है कि उन्होंने पहले ही जिला प्रशासन को रैली निकालकर ज्ञापन देने की सूचना दे दी थी। उसके बाद भी नवागत कलेक्टर शिल्पा गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर ज्ञापन लेने के लिए नहीं आया। एक घंटे तक नारेबाजी के बाद में लोग माधव चौक पर एकत्रित हो गए और उन्होंने चक्का जाम कर दिया। लोगों का आरोप है कि शिवपुरी में प्रशासन असंवेदनशील बना हुआ है और लोगों की परेशानी को हल नहीं किया जा रहा है।

MARI themes

Powered by Blogger.