नई दिल्ली। 7th Pay Commission के तहत बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की मांग खारिज होने के बाद देशभर के 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को झटका लगा है। सरकार की ओर से बेसिक सैलरी बढ़ोतरी की मांग खारिज होने से केंद्रीय कर्मचारियों में मायूसी है,लेकिन इन कर्मचारियों को खुश करने के लिए सरकार ने प्रमोशन के नियम को नया और सख्त करने की पेशकश कर राहत दी है। केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के प्रमोशन का नया और सख्‍त नियम लाकर उन्हें सौगात दे सकती है। प्रमोशन के नए नियम का प्रस्‍ताव तैयार हो चुका है और इसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर कर्मचारियों को तोहफा देगी। इस नियम से कर्मचारियों को सबसे ज्‍यादा लाभ होगा और प्रमोशन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से होगा। नए नियम का लाभ जहां काम करने वाले कर्मचारियों को होगा तो वहीं निठल्ले कर्मचारियों की शामत आएगी। इस नियम से अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को ही प्रमोशन मिलेगा और अच्‍छा इंक्रीमेंट मिलने की उम्‍मीद है।



बेसिक सैलरी बढ़ोतरी को लगा झटका


केंद्र सरकार कर्मचारियों की बेसिक पे बढ़ाने की मांग पर कोई विचार नहीं कर रही है। कर्मचारियों ने महंगाई को देखते हुए अपना फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 गुना से 3.68 गुना करने की मांग रखी है और बेसिक सैलरी को 18000 रुपए से 26000 रुपए करने की मांग की थी, लेकिव केंद्रीय वित्‍त राज्‍य मंत्री आर राधाकृष्‍णन के बयान से साफ हो गया है कि सरकार कर्मचारियों की मांग पर विचार नहीं कर रही है। दरअसल दो राज्‍यसभा सदस्‍यों रवि प्रकाश वर्मा और नीरज शंकर ने वित्‍त मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मांगी, जिसके जवाब में राज्‍यसभा में वित्‍त राज्‍य मंत्री राधाकृष्‍णन ने कहा कि 7वें वेतन आयोग के तहत जो फिटमेंट फैक्‍टर तय हुआ था वह 2.57 गुना पर फिक्‍स रहेगा। इससे साफ हो गया था कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी का कोई विचार नहीं है, लेकिन प्रमोशन का नया नियम आने की खबर कर्मचारियों के लिए सुकून भरी है।




प्रमोशन के नियम के साथ मिल सकता है तोहफा


सरकार प्रमोशन के नए नियम के साथ कर्मचारियों को थोड़ी राहत दे सकती है। नई प्रक्रिया से कर्मचारियों की प्रमोशन में पक्षपात की शिकायत खत्‍म होगी और उन्हें जल्‍दी और पारदर्शी प्रमोशन भी मिलेगा। केंद्रीय कर्मचारियों के प्रमोशन नियम में बदलाव 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत हो सकता है, जिसमें कर्मचारियों के प्रदर्शन के हिसाब से ग्रेडिंग होगी।नए नियम के मुताबिक पब्लिक डोमेन में काम करने वाले कर्मचारी को ग्रेडिंग मिलेगी। वहीं पब्लिक के हाथों में उनका फीडबैक होगा। पब्लिक डोमेन में काम करने वाले कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए उनके काम, लोगों के प्रति उनका व्‍यवहार, समस्‍या को जल्‍दी निपटाने के आधार पर जनता से फीडबैक लेकर उनकी ग्रेडिंग की जाएगी। नए प्रमोशन प्रस्ताव में प्रमोशन में करीब 80% वेटेज पब्लिक फीडबैक को दिया जाएगा। जिससे न केवल मेहनती कर्मचारियों को प्रमोशन मिलेगा बल्कि कर्मचारियों में अच्छा काम करने की ललक जागेगी। माना जा रहा है कि 1 अप्रैल 2019 से मॉडिफाइड एश्‍योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन प्रोसेस (MACP) लागू हो सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर

जहां केंद्रीय कर्मचारियों को बेसिक सैलरी न बढ़ाने का झटका लगा है तो वहीं रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर आई। जल्द ही रेलवे के गैंगमैन, टैकमैन व गेट गेटमैन जैसे रेल कर्मियों को मिलने वाले भत्ते में बढ़ोतरी की जाएगी। भत्ते में वृद्धि के साथ-सात उनकी सुरक्षा के लिए भी कई कदम उठाए जाएंगे। ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा बताया कि रेलवे के गेटमैन व टैकमैन के लिए सुरक्षा अहम होता है, कई बार काम के दौरान उनपर हमले हुए हैं। कर्मचारियों की इन मांगों को बोर्ड की ओर से गंभीरता से लिया गया है। रेलवे बोर्ड की ओर से गैंगमैन, ट्रैकमैन, गेटमैन जैसे कर्मियों को मिलने वाले रिस्क ऑन ड्यूटी अलाउंस को 1000 रुपए से बढ़ाकर से बढ़ा कर 4100 करने की की बात को स्वीकार कर लिया गया है ।

भोपाल: म.प्र (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री कमलनाथ के मत्रिंमडल(Kamal Nath Cabinet) में शामिल न किए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी (Congress) में बगावत शुरू हो गई है. मंत्री न बनाए जाने पर नाराज चल रहे पूर्व मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के समर्थन में कांग्रेस पार्टी से गुरुवार को पहला इस्तीफा हुआ है. मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा सीट पर कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष मदन शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है. 


मुरैना-श्योपुर से आठ में से सात सीट जीतने के बाद भी जिले से किसी को भी मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराजगी चल रही थी. शर्मा ने पार्टी पर मुरैना जिले की उपेक्षा का आरोप लगाया है. संभावना जताई जा रही है कि मदन शर्मा के इस्तीफे के बाद मुरैना से और भी कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं.

शर्मा ने अपनी इस्तीफा प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजा है. उन्होंने लिखा है, ''मंत्रीमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन में भारी कमी के कारण पार्टी में मुरैना श्योपुर संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी रोष है. इसकी वजह से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को भारी नुकसान उठना पड़ सकता है. मुरैना श्योपुर संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सभा क्षेत्र में से सात सीटों पर कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है. यहीं से ही एदल सिंह कंसाना चार बार विधायक निर्वाचित हुए हैं. इसके बाद भी उन्हें मंत्रीमंडल में जगह नहीं दी गई, इसकी वजह से पूरे समाज में गुस्सा है.'

बता दें कि विधायक विजयलक्ष्मी साधौ, सज्जन सिंह वर्मा, हुकुम सिंह कराड़ा, डॉ. गोविन्द सिंह, बाला बच्चन, आरिफ अकील, बृजेन्द्र सिंह राठौर, प्रदीप जायसवाल, लाखन सिंह यादव, तुलसी सिलावट, गोविन्द सिंह राजपूत, इमरती देवी, ओमकार सिंह मरकाम, डॉ. प्रभु राम चौधरी, प्रियव्रत सिंह एवं सुखदेव पानसे, उमंग सिंघार, हर्ष यादव, जयवर्धन सिंह, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, लखन घनघोरिया, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, पी सी शर्मा, प्रद्युम्न सिंह तोमर, सचिन यादव, सुरेन्द्र सिंह बघेल एवं तरूण भनोत को कैबिनेट में जगह दी गई है.

कमलनाथ ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 6 दिन बाद 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ अकेले ली थी. मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुआ था और 11 दिसंबर को आए चुनाव परिणाम में प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं। उसने बसपा के दो, सपा के एक और चार अन्य निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई है। उसे फिलहाल कुल 121 विधायकों का समर्थन हासिल है. वहीं, भाजपा को 109 सीटें मिली हैं. मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे. मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 7 जनवरी से शुरू होगा. 


*(अमित शाह की पसंद बनते डॉ नरोत्तम मिश्रा उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव के  भी बने प्रभारी)*

*(लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने उत्तर प्रदेश का लोकसभा चुनाव प्रभारी बना कर जताया नरोत्तम मिश्रा पर विश्वास)*

*(उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी जताया नेतृत्व ने भरोसा)*

*(डॉ नरोत्तम मिश्रा के सहयोग से 2019  लोकसभा  फतह की तैयारी)*

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनाव 2019 की दृष्टि से दतिया विधायक एवं पूर्व केविनेट मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को उत्तर प्रदेश का लोकसभा चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है!
डॉ नरोत्तम पहले भी उत्तर प्रदेश  विधानसभा चुनाव में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं! जिसमे उत्तर प्रदेश  बुंदेलखंड की 26 सीटों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा उन्हें सौंपी गई थी! जिसमें सभी सीटों को भाजपा की झोली में डाल कर डॉ नरोत्तम मिश्रा ने  उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड मैं भाजपा का परचम फहराया था ! इसी को देखते हुए डॉ नरोत्तम मिश्रा को अमित शाह द्वारा पुनः2019 लोकसभा चुनाव में प्रभारी बनाया है!
डॉ मिश्रा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने के पीछे अमित शाह की सोच उत्तरप्रदेश मे ब्राह्मण मतदाताओं का अधिक होना  भी है! डॉ मिश्रा ब्राह्मणों में एक ऐसा चेहरा है जिसे मध्य प्रदेश हो य उत्तर प्रदेश दोनों ही प्रदेश में लोकप्रियता हासिल है !
डॉ मिश्रा ने गुजरात में भी विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका निभाई थी और लगातार अपनी भूमिका में सफल प्रदर्शन देने के कारण वह अमित शाह की पसंद बन चुके हैं! इसी के चलते उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 मे पुनः जीत दिलाने ओर और ब्राह्मण मतदाताओं को  आकर्षित करने के लिए लोकसभा चुनाव प्रभारी की  जिम्मेदारी सौंपी है!

भोपाल। मध्य प्रदेश में यूरिया संकट को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को ट्वीट कर अधिकारियों को चेतावनी देनी पड़ रही है।

पिछले कई दिनों से प्रदेश में जारी यूरिया संकट को लेकर कमलनाथ ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि प्रदेश में यूरिया का संकट शीघ्र हल होगा। किसान भाई परेशान न हों। सतत प्रयासों से पर्याप्त मात्रा में यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यूरिया लेने के लिए आ रहे किसानों पर लाठियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि यह कमलनाथ की सरकार है, जो किसान हितैषी है। अधिकारी अपनी पुरानी मानसिकता बदलें। उन्होंने कहा कि यह पुरानी सरकार नहीं, जहां किसानों के सीने पर गोलियां तक दागी गईं। अधिकारी कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़ने दें, किसानों का दमन बर्दाश्त नहीं होगा। मेरी सभी जिम्मेदारों को खुली चेतावनी है।

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने अवमानना याचिका का निराकरण करते हुए 3 माह के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों को चेताया भी है कि यदि तय समय पर ऐसा नहीं होता है तो उनसे कॉस्ट की वसूली की जाएगी।

दमोह बटियागढ़ निवासी गुड्डू लाल चक्रवर्ती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि दमोह में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत उसके पिता पूरनलाल चक्रवर्ती की कार्य के दौरान एक अगस्त 2017 को मृत्यु हो गई थी। शासन के नियमों के तहत उसने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया,लेकिन उसे अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी गई।

इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई जिस पर कोर्ट ने 7 फरवरी 2018 को निर्देश दिया कि 3 माह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार किया जाए। लेकिन आदेश के बाद भी उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली।

इसी वजह से इस मामले में दमोह कलेक्टर डॉ. जे विजय कुमार और जिला शिक्षा अधिकारी एसएन हसन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने तर्क दिया कि आदेश के बाद भी अनावेदक याचिकाकर्ता के अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार नहीं कर रहे हैं।

सुनवाई के बाद एकल पीठ ने जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी के साथ 3 माह में अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया है।

आगरा में छात्रा को जिंदा जलाने का मामला सुलझाने का दावा

पुलिस के मुताबिक चचेरे भाई ने वारदात को दिया था अंजाम


पहला सबूत लाइटर मिला, आरोपी योगेश ने कर ली थी खुदकुशी


18 दिसंबर को स्कूल से लौट रही छात्रा को जिंदा जला दिया था



पिछले दिनों आगरा में छात्रा को जिंदा जलाने के मामले को सुलझा लेने का दावा पुलिस ने किया। पुलिस ने कहा है कि छात्रा चचेरे भाई ने ही कथित तौर पर उसे आग लगाई थी। एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि जांच में पाया गया कि मामले का मुख्य आरोपी लड़की का चचेरा भाई योगेश था। योगेश के अलावा उसके कुछ रिश्तेदारों की भी इस हत्याकांड में संलिप्तता की बात सामने आ रही है। 


पुलिस के मुताबिक, छात्रा संजलि को जिस जगह पर जलाया गया वहां पुलिस को पहला सबूत लाइटर के तौर पर मिला। इस लाइटर के जरिए जांच आगे बढ़ी। इस लाइटर पर आरोपियों के फिंगर प्रिंट मिले। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान योगेश के रिश्तेदार विजय और आकाश का नाम भी आरोपी के तौर पर सामने आया। योगेश पहले ही खुदकुशी कर चुका है। विजय, योगेश के मामा का बेटा है जबकि आकाश, विजय का रिश्तेदार बताया जाता है। 


इस मामले का खुलासा करते हुए आगरा के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि इस घटना में शामिल दो अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकल, मोबाइल, हेल्मेट और बैग आदि बरामद कर लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘घटना को पीड़िता के ही एक रिश्तेदार ने अंजाम दिया। घटना के एक दिन बाद आरोपी ने भी जहरीला पदार्थ पीकर अपनी जान दे दी थी, जिसके बाद पुलिस को इनपर शक हुआ।' 


छात्रा की मौत के बाद पुलिस की टीम योगेश के घर की तलाशी लेने पहुंची तो उन्हें एक पत्र मिला। इसके बाद साफ हो गया कि योगेश की इस मामले में भूमिका संदिग्ध है। घटना के बाद लड़की को 60 फीसदी जली हुई हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था जहां उसकी मौत हो गई थी। जिस जगह पर छात्रा को जलाया गया उससे ठीक 100 मीटर की ही दूरी पर 23 नवंबर को उसके पिता हरेंद्र पर भी हमला हुआ था। 

आगरा के थाना मलपुरा अंतर्गत लालऊ गांव की कक्षा दसवीं की छात्रा 18 दिसंबर को स्कूल से वापस लौट रही थी। वह अकोला के एक इंटर कॉलेज में दसवीं कक्षा की छात्रा थी। रोजाना की तरह वह अपनी साइकल से घर वापस लौट रही थी। जैसे ही वह अपने घर के करीब पहुंची, तभी वहां पहले से मौजूद दो युवकों ने लड़की पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसे आग के हवाले कर दिया । छात्रा की हत्या और योगेश की मौत को लेकर पुलिस ने कड़ियां जोड़ना शुरू कीं तो शुरुआती जांच में मामला एकतरफा प्यार का निकलकर सामने आया है। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है। 


भोपाल। कमलनाथ मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के बाद देर रात राज्‍य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का तबादला कर दिया गया।

इंदौर कलेक्‍टर निशांत वरवड़े को राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन भोपाल का संचालक बनाया गया है। भोपाल नगर निगम आयुक्‍त अविनाश लवानिया को वाणिज्यिक कर अपर आयुक्‍त बनाया गया है। उमरिया कलेक्‍टर मालसिंह को उपसचिव बनाया गया है।

निशांत वरवड़े के मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल का कार्यभार ग्रहण करने पर डॉ पल्लवी जैन गोविल इस दायित्व से मुक्त होंगी।


बुरहानपुर, मंडला, झाबुआ के साथ ही टीकमगढ़, राजगढ़, सिवनी और नीमच के कलेक्‍टर का भी तबादला कर दिया गया है। इसके साथ ही अनेक जिलों के डिप्‍टी कलेक्‍टरों के साथ कुछ अन्‍य राज्‍य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का भी तबादला किया गया है।



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