Kamal Nath Government : मंत्रियों की लगेगी पाठशाला, सीखेंगे कामकाज के तौर-तरीके


Kamalnath Government : नीति सुशासन स्कूल में कराया जा सकता है एक दिन का प्रशिक्षण।

भोपाल। प्रदेश सरकार के मंत्रियों को प्रशासनिक काम में दक्ष करने के लिए प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। इसके लिए एक दिन की पाठशाला अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल में फरवरी में हो सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने स्तर पर इसकी तैयारियों भी शुरू कर दी हैं। हालांकि, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

कांग्रेस सरकार के 28 मंत्रियों में सात पहले भी मंत्री रह चुके हैं। जबकि दो मंत्री संसदीय सचिव रहे हैं। इस प्रकार से देखा जाए तो सरकारी कामकाज का अनुभव 21 मंत्रियों को सीधे तौर पर नहीं है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा तेजी के साथ काम करने की है। यही वजह है कि वे मंत्रालय में ज्यादा से ज्यादा वक्त दे रहे हैं। यही अपेक्षा उनकी मंत्रियों से भी है। इसको लेकर वे उन्हें ताकीद भी कर चुके हैं कि ज्यादा से ज्यादा वक्त विभाग को दें।

 

हालांकि, नई जिम्मेदारी होने की वजह से इसमें मंत्रियों को स्वभाविक तौर पर समय लग रहा है। इसे देखते हुए मंत्रियों को सरकारी कामकाज का प्रशिक्षण दिलाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें बिजनेस रूल्स, कार्य आवंटन नियम, मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर जानकारी दी जा सकती है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रशिक्षण के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय से तारीख अभी तय नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण नीति सुशासन स्कूल में कराया जा सकता है। स्कूल ने भी अपने स्तर पर तैयारी कर ली है। सामान्य प्रशासन विभाग से बिजनेस रूल्स, कार्य आवंटन नियम, मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर जानकारियां बुलवा ली हैं।



भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब ग्वालियर-चंबल पर अपना फोकस कर दिया है। 1 मार्च से पहले यहां पुलिस और प्रशासन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव नजर आएंगे। सिंधिया अपनी प्राथमिकताओं की लिस्ट सीधे सीएम कमलनाथ और सीएस एसआर मोहंती को सौंप आए हैं

बीते रोज ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल में थे। इस बार वो पार्टी अपने कुछ काम लेकर आए थे। भाजपा के 3 दिग्गज नेताओं को कांग्रेस में शामिल करवाया। इसके बाद मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे मंत्रालय पहुंचे और रात करीब सवा दस बजे वहां से रवाना हुए। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। एक घंटे से ज्यादा दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। काफी देर तक दोनों नेताओं के बीच लॉबी में भी बातचीत हुई। सिंधिया इसके बाद मुख्य सचिव एसआर मोहंती से भी मिले। इस दौरान सिंधिया ने ग्वालियर और चंबल संभाग में प्रशासनिक व पुलिस महकमे सहित अन्य फेरबदल पर चर्चा की।

बताया जा रहा है कि दोनों में एकांत चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में पहले से मौजूद राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव सहित ग्वालियर व चंबल क्षेत्र के विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात हुई। इसमें विधायकों ने अपने क्षेत्रों से संबंधित कुछ कामों की बात रखी तो मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सभी पर काम होगा। 

ग्वालियर स्थित आर.आर.एस इण्डिया सिक्योरिटी सर्विसेस प्रायवेट लिमिटेड के प्रशिक्षिण अकादमी में आयोजित स्मार्ट सिटी प्रेस क्लब के पत्रकार मिलन एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में स्वराज के मुख्य संयोजक, संपादक, प्रेस क्लब अध्यक्ष व्ही.एस.भुल्ले, मुख्य अतिथि विधायक मुन्नालाल गोयल, प्रवीण पाठक, चेम्बरों आॅफ काॅमर्स के सचिव प्रवीण अग्रवाल कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ. सुरेश सम्राट विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राम विद्रोही, केशव पांडे, देव श्रीमाली, प्रदीप मांडरे, एवं अकादमी के डायरेक्टर योगेश शर्मा संगठन के महासचिव आनंद त्रिवेदी की उपस्थिति में प्रतीक चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर विलेज टाइम्स के प्रबंध संपादक मुकेश तिवारी सहित बड़ी मात्रा में ग्वालियर के पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

दुनिया को सबसे पहले ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, व्यापार सफल, सार्थक, व्यवस्था, सेवा, कल्याण, त्याग-तपस्या से अवगत कराने वाले महान भू-भाग आर्यवृत भरतखण्डे अर्थात भारतवर्ष का हर्ष स्वार्थवत सत्ताओं और हमारी महान संस्कृति, स्वभाव के चलते ऐसा होगा किसी ने कभी सपने में भी न सोचा होगा। 
मगर आज हम उस महान भारत के वंशजों का कटु सच यह है कि आज हम धन, लालची, अहंकारी, स्वार्थी, जघन्य व्यापारियों के लिए कच्चे के माल और कामगारों का हब बन चुके है। जो इस महान राष्ट्र के लिए दर्दनाक भी है और हमारे लिए शर्मनाक भी।
अगर हम महान भारतवर्ष के लोग चाहते तो हम हमारे पूर्वजों की त्याग-तपस्या कुर्बानियों से भरी विरासत को बचा राष्ट्र में मौजूद प्राकृतिक संपदा, प्रतिभाओं का संरक्षण, सम्बर्धन कर उन्हें सहज, संसाधन और अवसर उपलब्ध करा, अपनी समृद्धि को बचा अपने नौनिहालों को सहज, समृद्ध, खुशहाल माहौल मुहैया करा, इस महान राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल बना सकते थे। मगर हमारी महान संस्कृति, स्वभाव तथा स्वार्थवत सत्ताओं ने कभी ऐसा होने नहीं दिया। 
पहलंे हम मान-सम्मान, स्वाभिमान के शिकार हुए फिर सुरक्षा, संरक्षण और आज हम सेवा कल्याण के शिकार है। 
हम न तो तब सेवा, संरक्षण के नाम सूतखोरी और धृृष्टता से निजात पा सके, न ही आजादी के बाद इस कलंक को धो सके। परिणाम कि आर्थिक विकास के नाम पर एक मर्तवा फिर से हम उस धृष्टता, सूतखोर प्रवृति के शिकार हो गए। जो सृष्टि, सृजन में बाधक थे और रहे है। 
अगर आज भी हम आध्यात्म, ज्ञान, विज्ञान, तकनीक के महारथियों के उत्तराधिकारी, वंशज नहीं जागे, तो आने वाला हमारा भविष्य नवसंस्कृति के बीच समृद्ध, खुशहाल रहने वाला नही। 
क्योंकि जिस तरह से आज की सियासत में गिरोहबंद संस्कृति और काॅरपोरेट कल्चर का सत्ता सौपानों तक पहुंचने का प्रचलन चल पड़ा है और जिस तरह से तथाकथित दल, संगठन, या शख्सियतों ने आवरण ओढ़ सेवा कल्याण का नारा बुलंद कर रखा है। ऐसी संस्कृति के बीच हमें बहुत अधिक उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। 
क्योंकि अर्थ, अहंकार में तब्दील लोकतंत्र की बागडोर अब ठेकेदारी प्रथा में तब्दील हो चुकी है। फिर वह कोई व्यक्ति, संस्था, संगठन, दल या फिर कोई शख्सियत ही क्यों न हो। हर जगह ठेका, पेटी और मजदूरी पर मामला आ टिका है। जिसके चलते स्वतः सिद्ध शख्सियत, दल, संगठन, संस्थाओं के नाम ठेका प्रथा को मजबूत बनाने वाले स्वार्थवत लोग हम भोले-भाले महान भारतवर्ष के लोगों के बीच विकास, कल्याण, सेवा का तमगा लगा कोई न कोई अघोषित रूप से ठेकेदार ही बैठा है। जो धन लालसा बस हमें भ्रमित कर हमारी महान भावनाओं को लूटने का कार्य सत्ता सौपानों तक पहुंचने के लिए करता है। 
अघोषित रूप से स्थापित इस निर्जीव तंत्र को तोड़ने इस महान राष्ट्र के बच्चे, युवा ही नहीं, हर उस बुजुर्ग समझदार नागरिक को जागना होगा कि यह महान राष्ट्र ही नहीं, अपने स्वयं के अस्तित्व तथा अपनों को समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए हमें हमारी महान संस्कृति, संस्कारों, आध्यात्म, ज्ञान, विज्ञान, तकनीक को बचाना होगा। यहीं हम महान भारतवासियों का धर्म और यहीं हमारा कर्म होना चाहिए। आज इस महान राष्ट्र को यहीं सबसे बड़ी समझने वाली बात होना चाहिए।
जय स्वराज 

What to expect from budget 2019: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले 1 फरवरी को मोदी सरकार अंतरिम बजट पेश करेगी। जानिए आम जनता क्या खास उम्मीद रख सकती है..

राजीव सिंह

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यानी 1 फरवरी 2019 को संसद में पेश होने वाले अंतरिम बजट पर हर किसी की नजर है। माना जा रहा है कि मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार कुछ खास घोषणाएं कर सकती है। सरकार का सबसे ज्यादा फोकस होगा, ग्रामीण और शहरी मध्यम वर्ग के मतदाताओं पर। ध्यान रखें कि मौजूदा सरकार राजकोष का विवेकपूर्वक इस्तेमाल करने को लेकर प्रतिबद्ध है यानी इस बजट में विस्तारवादी राजकोषीय नीति को लेकर बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 3.3 फीसदी है। वहीं जीएसटी संग्रह से संकेत मिलता है कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करना कठिन होगा।

 

किसान और गांवों पर फोकस

हमारा मानना ​​है कि राजकोषीय घाटा बहुत बड़ी चिंता नहीं होगी। खर्च पर कंट्रोल कर या सार्वजनिक उपक्रमों से उच्च लाभांश हासिल करके इससे मैनेज किया जा सकता है। वहीं कृषि क्षेत्र को संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, लेकिन इनका तत्काल असर नजर नहीं आएगा। सरकार कुछ ऐसे कदम जरूर उठा सकती है, जिनसे निकट भविष्य में किसानों को राहत मिले। पीएम ने कृषि ऋण माफी को खारिज कर दिया है।

सरकार सब्सिडी के बदले नकद हस्तांतरण या डीबीटी का विकल्प आजमा सकती है। इसके अलावा, इस बजट में ऐसी योजनाओं की उम्मीद कर सकते हैं जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो। फसल बीमा योजना में बदलाव भी एक विकल्प हो सकता है। साथ ही कृषि ऋण प्रवाह में वृद्धि के साथ गांवों में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की अपेक्षा भी इस बजट में की जा सकती है।

इन्कम टैक्स में मिल सकती है छूट

प्रत्यक्ष करों की व्यापक समीक्षा लंबित है और इसमें समय लग सकता है। हालांकि सरकार शहरी मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए वर्तमान स्लैब में बदलाव कर सकती है। सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है कि न्यूनतम टैक्स स्लैब को 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया जाए। वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट का दायरा भी बढ़ सकता है। धारा 80-सी के तहत छूट को मौजूदा 1,50,000 रुपए से बढ़ाकर 2,50,000 रुपए किया जा सकता है।

वहीं कॉरपोरेट टैक्स की बात करें तो 25% टैक्स की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में 250 करोड़ से कम के राजस्व वाली फर्मों पर 25% टैक्स लगता है। इसे बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए किया जा सकता है। अभी इक्विटी बाजारों में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर और एसटीटी, दोनों पर टैक्स लगता है।

हम चाहेंगे कि इस विसंगति को दूर किया जाए, चाहे एसटीटी हटाकर या पूंजीगत लाभ कर की गणना करते समय टैक्स का राशि में से भुगतान किए गए एसटीटी को घटाकर। वर्तमान कर प्रणाली में लाभांश पर दोहरे/तिहरे कर के रूप में काफी बोझ है। इसमें कुछ राहत मिलती है तो स्वागत योग्य होगा।

गरीबों संग उद्योगों का भी ख्याल

सरकार गरीबों के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम की रूपरेखा बता सकती है। हालांकि समय बहुत कम बचा है, इसलिए इसे इस साल लागू किए जाने की संभावना नहीं है, लेकिन बजट भाषण और पार्टी घोषणा-पत्र में यह बड़ा मुद्दा हो सकता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर हम उम्मीद करेंगे कि आबंटन पिछले साल (5.97 ट्रिलियन रुपए) से ज्यादा हो। जिससे भारतमाला, सागरमाला, आवास, स्वच्छता और पानी की जरूरतों जैसी प्रमुख योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। इसके अलावा, विद्युतीकरण और यात्री सुरक्षा के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए रेलवे में आवंटन किया जाएगा।

घरेलू उद्योग को बराबरी का मौका प्रदान करने के लिए कैपिटल गुड्स सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के रेशनलाइज़ेशन की आवश्यकता है। सरकार ने हाल ही में एंजेल टैक्स के नियमों से स्टार्ट-अप को कुछ राहत प्रदान की है, फिर भी इंडस्ट्री को यह अपर्याप्त लगता है और बजट में ज्यादा राहत दी जा सकती है।

कुल मिलाकर, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार एक लोकलुभावन बजट से माध्यम से किसानों और शहरी मध्यम वर्ग का वोट हासिल करने की कोशिश करेगी। हालांकि, इस सब में बैंकों का भी ख्याल रखेगी। इस तरह एक संतुलन बैठाने की कोशिश होगी। उसे राजस्व जुटाने की आवश्यकता होगी, और हम उम्मीद करते हैं कि इसके लिए आने वाले समय में ज्यादा विनिवेश होगा।


भाजपा की पहचान बने मुद्दों पर मध्‍यप्रदेश की कमलनाथ सरकार का मास्टर स्ट्रोक


भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाजपा पर बुधवार को कसे गए इस तंज पर गौर कीजिए। 'मुझे बड़ा दुख होता है कि जो लोग खुद को गोरक्षक कहते थे, उन्होंने 15 सालों में एक भी गोशाला का निर्माण नहीं किया।'

इस तंज में दम भी है और उन्हें इसका हक भी, क्योंकि उनकी सरकार मंगलवार को एक हजार गोशालाओं के निर्माण को मंजूरी दे चुकी है। जहां एक लाख निराश्रित गोवंश को ठौर ठिकाना मिलेगा, जो अभी सड़कों पर भटकते रहते हैं। गोशाला अकेला मुद्दा नहीं है। ऐसे और भी कई मामले हैं, जहां कांग्रेस सरकार भाजपा के पर्याय बने मुद्दों पर उसे चित करते नजर आती है।

 

शुरू से धर्म-अध्यात्म भाजपा की सुविधा का विषय रहे हैं। लंबे अरसे से कांग्रेस इस मुद्दे पर बैकफुट पर खड़ी नजर आती थी, लेकिन 'वक्त है बदलाव का' के नारे के साथ ही सूरते हाल भी बदला है। अब कांग्रेस भी बढ़-चढ़कर धर्म-अध्यात्म के मुद्दों पर सक्रिय दिखती है। सरकार बनते ही जिस तरह कमलनाथ सरकार के मंत्रियों ने शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करते हुए कुर्सी संभाली वह देखने लायक था। कमलनाथ सरकार ने आते ही पहला छक्का मारते हुए अध्यात्म के नाम पर एक पृथक महकमा ही बना डाला।

मध्य प्रदेश इकलौता ऐसा प्रदेश होगा, जहां अध्यात्म सरकारी महकमा बना। इस महकमे को नर्मदा न्यास, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी के न्यास के गठन, मध्य भारत गंगाजलि निधि न्यास, पवित्र नदियों को जीवित इकाई बनाने के संबंध में कार्रवाई करने, राम वन गमन पथ में पड़ने वाले अंचलों का विकास सहित धर्मस्व और आनंद विभाग के सारे काम सौंपे गए। इससे वह सारे साधु-संत कांग्रेस के ज्यादा नजदीक आ गए, जो किसी न किसी वजह से भाजपा सरकार से नाराज चल रहे थे।

सरकार लोगों की धार्मिक भावनाओं का कितना कद्र करती है, यह संदेश देने के लिए उज्जैन कमिश्नर और कलेक्टर को हटाने में जरा-भी विलंब नहीं किया गया। उनका अपराध यह था कि शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा नदी सूखने के कारण श्रद्धालुओं को कीचड़ मिले पानी से स्नान करना पड़ा था। लोगों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए कमलनाथ ने मुख्य सचिव से जांच कराई और दोनों अफसरों को मंत्रालय में बैठा दिया।

ताजा मामला गोशालाओं का है। मंगलवार को कमलनाथ सरकार ने पूरे राज्य में एक हजार गोशालाओं के निर्माण का फैसला लिया है। इसमें एक लाख निराश्रित गोवंश की देखरेख की जाएगी। इसके लिए सरकार ने कुल 450 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। कमलनाथ को बैठक में जब यह बताया गया कि पूरे राज्य में एक भी सरकारी गोशाला नहीं है तो वह चकित रह गए। इसलिए उन्हें यह कहने को मजबूर होना पड़ा कि गोरक्षक होने का दंभ भरने वाले 15 साल में एक भी गोशाला नहीं बना पाए।

मंत्रियों संग मुख्यमंत्री लगाएंगे गंगा में डुबकी

अगले माह मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने कुछ मंत्रियों के साथ कुंभ (प्रयागराज) जा रहे हैं, जहां वह गंगा में डुबकी लगाएंगे। इतना ही नहीं, राम वन गमन पथ के लिए सरकार अगले कुछ दिन में बड़ी घोषणा कर सकती है।

हम प्रचार में नहीं, काम में भरोसा करते हैं

भाजपा धर्म के नाम पर ढकोसला और प्रचार करती है, जबकि हम उनसे ज्यादा धार्मिक हैं, लेकिन दिखावा नहीं करते। कुंभ मेले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जो पंडाल लगाया जा रहा है, वहां प्रदेश के कथावाचक श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगे। प्रदेश के शास्त्रीय कलाकार भी वहां कला का प्रदर्शन करेंगे।

- पीसी शर्मा, मंत्री, जनसंपर्क विधि-विधायी एवं अध्यात्म विभाग

लोकसभा चुनाव 2019: एमपी के लिए अमित शाह ने अनिल जैन को सौंपी कमान!

नई व्यवस्था के मुताबिक अनिल जैन मध्य प्रदेश में चुनाव तैयारियों को लेकर कोऑर्डिनेशन का काम करेंगे और सीधे अमित शाह को रिपोर्ट करेंगे


लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश बीजेपी की कमान चुनाव तैयारी के लिहाज से अमित शाह के करीबी अनिल जैन को सौंपी गई है. नई व्यवस्था के मुताबिक अनिल जैन मध्य प्रदेश में चुनाव तैयारियों को लेकर कोऑर्डिनेशन का काम करेंगे और सीधे अमित शाह को रिपोर्ट करेंगे.जानकारी के मुताबिक लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारी बनाए गए यूपी के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय भी अनिल जैन के नीचे ही काम करेंगे. अनिल जैन अभी छत्तीसगढ़ के प्रभारी हैं. अनिल जैन की सक्रियता चुनाव को देखते हुए एमपी में बढ़ गई है.

चुनाव की तैयारी के लिहाज से होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए अनिल जैन भोपाल पहुंच चुके हैं. अनिल जैन को कमान दिए जाने के पीछे वजह अमित शाह की मध्य प्रदेश को लेकर ज्यादा सक्रियता है. माना जा रहा है कि अनिल जैन को एमपी की कमान इसलिए दी गई है ताकि मध्य प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर ज्यादा से ज्यादा फोकस किया जा सके.हालांकि इससे पहले बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह सिंह को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाकर भेजा था. स्वतंत्र देव सिंह पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं. उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है. इसके बावजूद भी यह देखना दिलचस्प होगा कि अनिल जैन अब किस तरह मध्य प्रदेश में सामजस्य बिठाते हैं.

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