Image result for madhya pradesh police photoमंथन न्यूज़ पूनम पुरोहित शिवपुरी -शिवपुरी। शहर के पुलिस कम्युनिटी हॉल में पुलिस दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों ने अपनी समस्याओं से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। अवकाश से लेकर मेडिकल क्लेम और अन्य समस्याओं के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिसकर्मियों ने जानकारी दी जिस पर उनकी समस्याओं पर जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया गया। कार्यक्रम में आईजी अनिल कुमार, एसपी सुनील  एएसपी कमल मौर्य आदि मौजूद थे।

ram nath kovind 24 11 17 27 12 2017पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ अमरावती -राष्ट्रपति जैसी शख्सियत को अपना भाषण बीच में रोकना पड़ जाए, ऐसा अक्सर नहीं होता। लेकिन आंध्र प्रदेश के अमरावती में इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन कांफ्रेंस के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपना भाषण कुछ देर रोकना पड़ा।
हुआ यूं कि कांफ्रेंस के दौरान कोविंद मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे। श्रोताओं में प्रतिनिधियों के साथ विद्यार्थी भी मौजूद थे। आयोजकों को लगा कि ये काफी देर से कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे, लिहाजा इन्हें खाने व पीने की चीजें दे दी जाएं। कोविंद के भाषण के बीच में ही उन्हें खाने के पैकेट वितरित किए जाने लगे, लेकिन इससे अफरातफरी मच गई।
समारोह स्थल पर शोरगुल के साथ आपाधापी की स्थिति बन गई। मौजूद लोगों का ध्यान कोविंद के संबोधन के बजाए खाने के पैकेटों पर था। राष्ट्रपति को यह स्थिति नागवार गुजरी और उन्होंने भाषण बीच में रोक दिया। आयोजकों से अपील की कि कुछ देर के लिए खाने का वितरण बंद करा दें।
खाने की वितरण तो तत्काल बंद करा दिया गया पर स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को मैदान में उतरना पड़ गया। जब हालात सामान्य हुए तब कहीं जाकर कोविंद ने भाषण फिर से शुरू किया। खाने का वितरण बाद में किया गया।
आंध्रा फाइबर ग्रिड का उद्घाटन-
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अमरावती में चंद्रबाबू नायडू सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फाइबर ग्रिड का उद्घाटन किया। इससे प्रदेश के सभी हिस्सों व लोगों को हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। कोविंद ने कहा कि आज के दौर में सरकार को हर समय आन लाइन, आन टाइम और हर समय तत्पर रहना होगा। इससे हर नागरिक को केबल सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी।
उन्होंने एपी सर्विलांस प्रोजेक्ट के साथ एपी ड्रोन प्रोजेक्ट की भी श्रीगणेश किया। उनका कहना था कि तकनीक एक ऐसी चीज है जिसकी जरूरत हर व्यक्ति को है। इंटरनेट की सुविधा सुलभ हो तो किसान घर बैठे अपने उत्पाद के खरीदार तलाश कर सकता है। वह खेती से जुड़ी नई तकनीकों के साथ भी तालमेल बिठा सकता है। वर्चुअल क्लासरूम की सराहना करते हुए वह बोले कि इससे ग्रामीण व शहरी इलाकों के विद्यार्थियों के बीच का अंतर कम होगा।
उन्होंने राज्य सरकार की रियल टाइम गवर्नेस स्कीम की भी प्रशंसा की। कोविंद ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि राज्य सरकार ड्रोन के जरिये सरकार की कार्यप्रणाली से लोगों को जोड़ रही है। यह प्रणाली सुरक्षा को भी चाक चौबंद बना रही है। इस दौरान राज्यपाल एएसएल नरसिम्हन, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के साथ सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रामना भी मौजूद रहे।

army final pic 271217 28 12 2017पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -सेना के तीनों अंगों में करीब 60000 पद रिक्त हैं। सबसे ज्यादा 27000 रिक्तियां थलसेना में है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बुधवार को बताया कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारियों के कुल 9,259 पद रिक्त हैं। इससे निचले स्तर के रिक्त पदों की संख्या 50,363 है।
एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ने कहा कि एक जुलाई को थलसेना की कुल शक्ति 12.37 लाख थी। कुल स्वीकृत शक्ति 12.64 लाख है। इस तरह कुल 27,864 पद रिक्त हैं। नौसेना की मौजूदा ताकत 67,228 है और रिक्त पदों की संख्या 16,255 है। वायुसेना में भी 15,503 कर्मी कम हैं। इसकी स्वीकृत शक्ति 1.55 लाख है। सेना में भर्ती की प्रक्रिया जारी रहती है। कमी दूर करने के लए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान कुल 418 जवानों ने आत्महत्या की। ऐसे मामलों में 335 अकेले सेना के हैं। उन्होंने बताया कि चार वर्षों में सशस्त्र बलों के 41,960 जवानों ने समय से पहले सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया है।
न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रस्ताव नहीं मिला-
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के छह पद रिक्त हैं। नौ हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश भी नहीं है। लेकिन सरकार को अभी तक शीर्ष अदालत कोलेजियम की तरफ से इन पदों को भरने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। केंद्रीय कानून राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में इस आशय की जानकारी दी।
सीआइसी में 26000 मामले लंबित-
केंद्रीय सूचना अयोग (सीआइसी) के पास इस वर्ष एक अप्रैल तक कुल 26,449 अपील लंबित थे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया, 'सबसे पुरानी शिकायतों की संख्या छह है। ये शिकायतें 2012 में दर्ज कराई गई थीं।'
विदेश में भारतीय छात्रों पर हमले-
इस वर्ष भारतीय छात्रों पर 10 देशों में हमले की 21 घटनाएं सरकार की जानकारी में आई है। इनमें से नौ की जानकारी पोलैंड से मिली है। विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी।

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्यप्रदेश में एग्जम्पटेड श्रेणी के करीब 70 हजार कर्मचारी हैं जो अगले महीने केरल हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित होंगे। बढ़ी हुई पेंशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट को जनवरी में एग्जम्पटेड श्रेणी के कर्मचारियों का फैसला सुनाने की गाइडलाइन जारी की है। इसके बाद बीएचईएल भोपाल के कर्मचारियों का मामला भी हाईकोर्ट में तय होगा।court 27 12 2017
प्रदेश में बढ़ी हुई पेंशन को लेकर हजारों पेंशनर्स केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने में जुटे हैं। वर्ष 2014 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी एवं एग्जम्पटेड श्रेणी के 70 हजार कर्मचारियों का मामला उलझा हुआ है। ये कर्मचारी प्रदेश के 74 संस्थानों में कार्यरत हैं जो कि एग्जम्पटेड श्रेणी के हैं। इनमें बीएचईएल (भेल), एचईजी, डबरा शुगर मिल एवं अन्य निगम-मंडल आदि शामिल हैं। बीएचईएल भोपाल के कर्मचारियों ने भी इस मुद्दे पर मप्र हाईकोर्ट में अपनी याचिका लगाई है।

एग्जम्पटेड श्रेणी के कर्मचारियों को बढ़ी हुई पेंशन देने के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट को जनवरी में फैसला देने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई हैं। ईपीएफओ ने 'अनएग्जम्पटेड" संवर्ग को बढ़ी हुई पेंशन का लाभ देने की तैयारी की है।
इस संवर्ग के सदस्यों के पीएफ पेंशन का पैसा ईपीएफओ में जमा होता है जबकि 'एग्जम्पटेड" संवर्ग अर्थात भेल, ओएनजीसी जैसे केन्द्र सरकार के उपक्रमों में सदस्य का पैसा संस्था के ट्रस्ट में ही जमा होता है। यह ट्रस्ट संस्थान का प्रबंधन ही संचालित करता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन(ईपीएफओ) की सहमति से ही यह ट्रस्ट गठित हुआ था। ईपीएफओ का कहना है कि उनके पास इन कर्मचारियों का अंशदान ही नहीं आता तो बढ़ी हुई पेंशन कैसे दें। निवृत्त कर्मचारी 1995 समन्वय समिति के उप महासचिव चंद्रशेखर परसाई का कहना है कि केरल हाईकोर्ट का फैसला मप्र के 70 हजार एग्जम्पटेड श्रेणी के कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।
यह है 'एग्जम्पटेड"
सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों ने पेंशन योजना लागू होते समय अपनी अंशनिधि ईपीएफओ में जमा करने से छूट ले ली थी। यह रकम उन्होंने अपने संस्थान के ट्रस्ट में राशि जमा कराई। इसलिए इनका पैसा ईपीएफओ में जमा नहीं किया गया। ऐसे संस्थानों के कर्मचारियों को 'एग्जम्पटेड" वर्ग में रखा गया जिनकी अंशनिधि ईपीएफओ में जमा होती है उन्हें 'अनएग्जम्पटेड"कहा जाता है।

मंथन न्यूज शिवपुरी
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जहॉ स्वच्छ भारत अभियान के लिए प्रयासरत  है वही  शिवपुरी के वार्ड नम्बर 18 में नगरपालिका परिषद शिवपुरी के द्वारा नुक्कड़ नाटक स्वच्छता के उददेश्य  आरम्भ किया गया !जिसमे शहर की प्रतिभाओं ने नाटक के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया ! इस तरह के नाटक एवं नुक्कड  के माध्यम से जन चेतना में स्वच्छता का सदेंश और जनजगृती लाना है।स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक स्वच्छता मिशन है। यह अभियान 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वें जन्मदिन के अवसर पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर शुरू किया गया था| यह एक राजनीति मुक्त अभियान है और देशभक्ति से प्रेरित है।

व्ही एस भुल्ले
म.प्र. शिवपुरी- अपने तूफानी दौरे पर कोलारस विधानसभा क्षेत्र के बदरबास सेक्टर में पहुंचे म.प्र. शासन के सिंचाई एवं जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ग्राम सड़ लिलबारां में सिन्ध पर स्टॉफ डेम, तो बिजरौनी बड़ौनी में लघु सिंचाई योजना का भूमि पूजन किया। जिसकी लागत लगभग 25 करोड़ के करीब है मंत्री ने अगले चरण में खतौरा ग्राम में रोड शो कर, सम्बोधित करते हुये अपनी पार्टी का प्रत्याशी कमल का फूल बताया तो दूसरी ओर उन्होंने कहा कि अगर आपने इस उपचुनाव में कमल का बटन दबाकर भाजपा को जिताया बाकि जबावदारी हमारी और उपचुनाव तो 4 माह के लिये है। मगर मैं मंत्री मुख्य चुनाव होने तक रहूंगा हम हारे या जीते मगर मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं आप लोगों की सेवा निरन्तर करता रहूंगा। अगर इन 4 महीनो में हमारा काम, हमारी सेवा पसंद आये तो 2018 में हमें वोट देना अन्यथा मत देेना। 
            उन्होंने बीजरी में भूमि पूजन पश्चात स्पष्ट किया कि जिन लोगों की भूमि बीजरी बरौनी परियोजना के डूब क्षेत्र में आयेगी उन्हें हमारी सरकार एक दो नहीं, पूरे ढाई गुना जमीन की कीमत कलेक्टर रेड के आधार पर भुगतान करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्ज्चला योजना और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की लाडली लक्ष्मी योजना का जिक्र करते हुये कहा कि जितना काम जितनी योजनायें माता-बहिनों और बच्चियों के कल्याण के लिये हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चालू कर रखी है। उतनी योजनायें शायद ही देश के किसी राज्य में हो। उनका सपना है कि म.प्र. में मातृशक्ति का सम्मान और स्वाभिमान तभी स्थापित होगा जब हमारे माता-बहिने सशक्त, सम्पन्न, सक्षम और सुरक्षित बन सके। 
              उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, किसान, झुग्गी, झोपड़ी और महिला सम्मान हमारी सरकार के केन्द्र में है। इनके विकास में हमारी सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेने वाली। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को आगाह एवं कॉग्रेस पर निशाना साधते हुये कहा कि हमारी सरकार और हमारे मुख्यमंत्री ने तय किया है कि कोई भी गरीब आवास एवं आवासीय पट्टे से वंचित न रहे और सभी को एक रुपये किलो अनाज और नमक हर हाल में मिले। 
              इस मौके पर सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, सिंचाई के अलावा पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन, नरेन्द्र बिरथरे, वीरेन्द्र रघुवंशी, भाजपा जिला अध्यक्ष सुशील रघुवंशी, राम स्वरुप रिझारी, श्री बिन्दल, युवा नेताओं में प्रबेन्द्र सोनू बिरथरे, आशूतोष शर्मा इत्यादि उपस्थित थे। 

राजस्थान: दिलचस्प है विधायक पुत्र के चपरासी बनने की कहानीमंथन न्यूज़ - गैर कांग्रेसी कहते हैं कि राहुल सिर्फ इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष बन गए क्योंकि वो सोनिया और राजीव गांधी के पुत्र हैं. सचिन पायलट, जितिन प्रसाद, दीपेंद्र हुड्डा या मिलिंद देवड़ा, ये सभी नाम ऐसे बताए जाते रहे हैं जिनको सरनेम के कारण कुर्सी मिली. पिछले दिनों खुद राहुल गांधी कह चुके हैं कि वंशवाद भारत में परंपरा है.
भारतीय राजनीति में ऐसा दौर लगातार दिख रहा है जब नेता लोग येन-केन-प्रकारेण कुर्सी से बिना फेवीकोल के ही चिपके रहते हैं. एक बार नेतागिरी चमक गई तो बेटे-पोतों की बैकडोर एंट्री आम है. लालू यादव जैसे लोग जब अपने नौवीं फेल बेटे को उपमुख्यमंत्री बना देते हों, तब राजस्थान में नई मिसाल देखने को मिली है. ऐसा उदाहरण, जो उदारीकरण के बाद विरले ही दिखा है.
जयपुर के पास जमवा रामगढ़ से बीजेपी विधायक जगदीश नारायण मीना के बेटे रामकृष्ण मीना चपरासी पद पर नियुक्त हुए हैं. ये तो वाकई अचंभे वाली बात हो गई. वो समय गया जब सरदार पटेल या लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेता अपने बेटे-बेटियों के लिए ‘जुगाड़’ नहीं करते थे. पिछले कुछ साल में तो यही दिखा है कि नेता पुत्र चाहे कितना ही ‘पप्पू’ हो, सांसदी या विधायकी उसका जन्मसिद्ध अधिकार ही होता है. पर विधायक पुत्र चपरासी.. सुनने में कुछ असामान्य सा लगता है.
विधायक का बेटा चपरासी क्यों बना?
विधायक जगदीश मीना का कहना है कि उनका बेटा पढ़ाई में कमजोर था. इसलिए ज्यादा पढ़ नहीं पाया और राजनीतिक समझ के अभाव में उसके लिए नौकरी करना ही ठीक रहता. इसीलिए उसने चपरासी पद पर आवेदन किया और अपनी योग्यता से नौकरी हासिल कर ली.
विधायक जी की राय में इसे राजनीतिक शुचिता की मिसाल मानकर उनकी वाहवाही की जानी चाहिए. आखिर सत्ताधारी दल का विधायक होने के बावजूद उन्होने बेटे की राजनीति में बैकडोर एंट्री नहीं कराई. लेकिन विरोधी हैं कि हंगामे से बाज़ नहीं आ रहे. कांग्रेस तो कांग्रेस, कई ‘अपने’ भी टांग खिंचाई में पीछे नहीं हैं.
विरोधियों का आरोप है कि विधायक जी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बेटे को सरकारी नौकरी दिला दी. सरकारी नौकरी भी किसी ऐसे वैसे दफ्तर में नहीं बल्कि देश के सबसे बड़े राज्य की विधानसभा में. ये तो ‘शाही’ नौकरी है. आखिर विधानसभा में दूसरे दफ्तरों की तुलना में काम कम ही रहता है. और जब चपरासी नेतापुत्र हो तो उससे काम कराने की हिम्मत भी कौन करेगा.
विधायक जगदीश मीना आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि जिसमें जितनी योग्यता होगी, उसको उतना ही मिलेगा. मीना सवाल करते हैं कि वे खुद भी बनना तो मंत्री चाहते हैं लेकिन बन पाए क्या? यानी उनके पुत्र में चपरासी बनने की योग्यता थी और अपनी मेहनत से उसने इसे हासिल किया है.
फिर विपक्ष के आरोपों का क्या? तो विधायकजी का कहना है कि कांग्रेस को इसलिए परेशानी है क्योंकि बीजेपी उनकी तरह भाई-भतीजावाद की ओछी राजनीति नहीं करती. हालांकि भाई-भतीजावाद के आरोपों को हवा चपरासी नियुक्त हुए उनके बेटे के बयान से ही मिल रही है. रामकृष्ण मीना ने मीडिया को बताया कि वे तो खेतीबाड़ी करते थे. पिछले साल ही उन्होने 10वीं पास की है. अब पिता ने कहा कि सरकारी नौकरी ज्यादा मुफीद है तो मैंने कर ली.
बहुत से सवालों के जवाब ‘लापता’
विधायक जगदीश मीना बेटे की ‘योग्यता’ सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. लेकिन यही पर कई सवाल ऐसे उभरते हैं जो गंभीरता के साथ उत्तर मांगते हैं मसलन-
- बताया जा रहा है कि चपरासी के 18 पदों के लिए 18,000 से ज्यादा आवेदन आए थे. इनमें कई आवेदक तो पीएचडी और एमबीए डिग्री धारी भी थे. फिर वो कौनसा पैमाना था, जिस पर 10वीं पास विधायक पुत्र को तरजीह मिली?
- 15 दिसंबर को चपरासी नियुक्ति का नतीजा आया लेकिन इसे तुरंत सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? मीडिया से ही नहीं, बल्कि विधानसभा के स्टाफ से भी इसे क्यों छिपाया गया?
- सफल अभ्यर्थियों को फोन से जानकारी दी गई और उन्हे तुरंत ज्वाइन करने को कहा गया. अधिकतर अभ्यर्थियों ने उसी दिन ज्वाइन भी कर लिया. ऐसी जल्दबाज़ी आखिर क्यों की गई?
आरोप सिर्फ रामकृष्ण मीना पर नहीं है. लोगों का कहना है कि जिन 18 लोगों का चयन हुआ है, वे सब के सब रसूखदारों के रिश्तेदार/नजदीकी हैं. कांग्रेस ने तो इसे सिरे से धांधली बताकर भर्ती को खारिज करने की मांग की है. प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि बीजेपी मैनिफेस्टों में 15 लाख नौकरियों का वादा किया गया था. लेकिन रसूखदारों को नौकरी बांटकर बेरोजगारों के गालों पर तमाचा मारा जा रहा है.
वैसे हालिया समय में ये पहला मौका नहीं है जब बीजेपी के किसी विधायक के बेटे ने चपरासी पद के लिए कोशिश की है. निवाई से विधायक हीरा लाल वर्मा के बेटे हंसराज ने भी 2015 में कृषि विभाग में चपरासी पद के लिए आवेदन किया था. ये भी पहला मौका नहीं है जब सरकारी नौकरियों की रेवड़ियां फिर-फिर कर अपनों को ही बांटी गई हो. इसी साल पंचायत सहायकों के पद चहेतों को देने के आरोप लगने के बाद कम से कम 3011 ग्राम पंचायतों में चयन प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा था.
अब ये जांच के बाद ही साफ हो सकता है कि विधायक पुत्रों का चपरासी बनना राजनीतिक शुचिता की मिसाल है या फिर अपने राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का निकृष्ट तरीका. लेकिन दूसरे राज्यों के उदाहरण देखते हुए जगदीश मीना की इस बात में तो दम लगता है कि अगर उन्हे अपने रसूख का फायदा बेटे को दिलाना ही होता तो मंजिलें और भी थीं

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