promotion 04 04 2018मंथन न्यूज़ रायपुर - साल भर से पदोन्नति की राह देख रहे शिक्षाकर्मियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। राज्य सरकार शिक्षाकर्मियों को प्रमोशन का तोहफा देने जा रही है। इसके तहत सहायक शिक्षक पंचायत को शिक्षक पंचायत के पद पर प्रमोट किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अकिारियों को पत्र लिखकर रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। सहायक शिक्षक पंचायत (शिक्षाकर्मी वर्ग-3) के प्रदेश में कुल एक लाख 18 हजार 243 पद स्वीकृत हैं जिनमें से करीब 27 हजार पद रिक्त हैं।
सरकार की योजना है कि सहायक शिक्षकों को शिक्षक पंचायत के पद पर प्रमोट करने के बाद रिक्त पदों पर नई भर्ती की जाएगी। प्रदेश में शिक्षक पंचायत (शिक्षाकर्मी वर्ग-2) के स्वीकृत पदों की कुल संख्या 62 हजार 606 है। इसमें से करीब आठ हजार पद वर्तमान में रिक्त हैं।
पिछले एक साल से सहायक शिक्षक की भर्ती की योजना बनती रही है हालांकि प्रमोशन में अड़चन की वजह से यह नहीं किया जा सका। शिक्षाकर्मियों को प्रधानपाठक और प्राचार्य के पदों पर प्रमोट करने की भी योजना बनी थी। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब सरकार ने शिक्षाकर्मी वर्ग-3 को प्रमोट करने की तैयारी शुरू की है। इस योजना का फायदा विज्ञान और गणित विषय के शिक्षाकर्मियों को भी मिल पाएगा।

ravi shankar prasad 23 11 17 04 04 2018मंथन न्यूज़ -सोशल साइटों से लेकर इंटरनेट तक को आपके लिए सुरक्षित बनाने का इंतजार अब बहुत लंबा नहीं रह गया है। डाटा प्रोटेक्शन पर बीएन श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट जल्द आने के आसार हैं। इस शुक्रवार को समिति की अहम बैठक हो रही है, जिसमें सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। समिति की रिपोर्ट सरकार को मिल जाने के बाद देश का पहला डाटा प्रोटेक्शन कानून बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक समिति की बैठक दिनभर चलेगी और कोशिश होगी कि सभी मुद्दों पर सहमति बना ली जाए। खुद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद जोर दे रहे हैं कि समिति की रिपोर्ट मिल जाने से कानून जल्द बनाने में आसानी होगी।
सरकार इस साल के अंत तक यह कानून बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। दरअसल, सरकार के सामने चुनौती यह है कि कानून इस तरह का बनाया जाए जिसे उद्योग जगत और आम जनता दोनों का समर्थन हासिल हो।
बीते एक दशक में ग्राहकों से जुड़ी सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर कानून बनाने की कई बार कोशिश हुई। लेकिन कई वजहों से इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। छह वर्ष पहले निजता मामले पर एपी शाह समिति गठित की गई थी। इसकी सिफारिशों के आधार पर एक विस्तृत कानून बनाने का इरादा था। लेकिन उसकी रिपोर्ट आने के बाद भी कानून नहीं बन पाया।
मंत्रालय चाहता है कि ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखने के मामले में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कानून बनाया जाए। यह कानून सोशल साइटों पर ही नहीं, बल्कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में इस्तेमाल होने वाले ग्र्राहकों से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखने का ढांचा देगा। यह कानून संचार कंपनियों पर भी लागू होगा और इससे फोन कंपनियों की तरफ से ग्र्राहकों से जुड़ी सूचना किसी दूसरी एजेंसी को देने पर रोक लगेगी।
जी-मेल, याहू जैसी ई-मेल कंपनियों पर भी यह लागू होगा और उनके इस्तेमाल को लेकर ग्र्राहक ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे। सरकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यस्था जिस तरह से डिजिटल हो रही है उसे देखते हुए एक मजबूत डाटा प्रोटेक्शन कानून बेहद जरूरी है।
पहली बार तय होगी निजता की परिभाषा-
--समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही भारत में पहली बार निजता (प्राइवेसी) की परिभाषा तय की जाएगी।
--यह सोशल साइटों के ग्र्राहकों को भरोसा देगा कि उनसे जुड़ी सूचना का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
--इससे आने वाले दिनों में फेसबुक व कैंब्रिज एनालिटिका जैसे मामले भारत में नहीं दोहराए जा सकेंगे।

मंथन न्यूज़ - भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार आरक्षण नहीं हटाएगी और न ही किसी को ऐसा करने की अनुमति देगी। उन्होंने कहा कि संविधान में बीआर आंबेडकर द्वारा निर्धारित आरक्षण नीति को नहीं बदला जाएगा। अपने दो दिवसीय ओडिशा दौरे पर बुधवार को भुवनेश्वर पहुंचे शाह ने भवानीपाटना में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में खदान से लेकर श्रमशक्ति तक सब कुछ होने के बावजूद यह राज्य लाचार प्रशासक होने के चलते गरीब है। ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकने की जरूरत है।
amit-shah gujarat gaurav yatra new 04 04 2018जनसभा में उमड़े जनसमूह से गदगद शाह ने कहा कि मैं भीड़ देखकर समझ गया हूं कि ओडिशा में अगली सरकार भाजपा की बनेगी। यह भीड़ दर्शाती है कि नवीन सरकार ने ओडिशा का विकास नहीं किया है। जबकि देशभर में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास का रथ दौड़ रहा है, जो गांव-गांव, गली-गली जा रहा है। मोदी सरकार 2021 से पहले ओडिशा के हर आदिवासी के घर में बिजली पहुंचाएगी। हर परिवार के लिए पक्का घर बनाएगी।
शाह ने बीजद सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज भी राज्य में 50 लाख लोग कधो घरों में रह रहे हैं, नवीन बाबू ने आज तक लोगों को पक्का घर क्यों नहीं दिया। राज्य के 12 हजार गांव आज भी सड़क से नहीं जुड़े?
उन्होंने कहा कि नवीन पटनायक कुर्सी छोड़ दें तो भाजपा का मुख्यमंत्री दो साल में इन गांवों को सड़क से जोड़ देगा। पांच साल में ओडिशा के हर गांव में बिजली व शुद्ध पेयजल देने का काम भाजपा सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी भाजपा की सरकार बनेगी।

मंथन न्यूज़ दिल्ली -सुप्रीम कोर्ट ने दलित आरक्षण से जुड़े मामलों पर विचार के लिए संविधान पीठ गठित कर शीघ्र सुनवाई की मांग खारिज कर दी है। आरक्षण से जुड़े जिन मुद्दों पर विचार होना है उनमें अनुसूचित जाति व जनजाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान करके सक्षम लोगों को लाभ से वंचित करने पर विचार भी शामिल है। इस व्यवस्था को सरकारी कर्मियों की प्रोन्नति से भी जोड़े जाने की मांग है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व में कहा था कि आरक्षण संबंधी अपेक्षाओं पर विचार के लिए पांच जजों वाली संविधान पीठ गठित की जाएगी। इस मामले में 2006 में एम नागराज मामले में आए आदेश को देखा जाएगा। पीठ ने कहा, क्रीमी लेयर अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) से जुड़ा मसला है। इसे सरकारी नौकरियों में अनुुसूचित जाति और जनजाति के कर्मियों की प्रोन्नति के मामलों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इस मसले पर विचार के लिए अलग से पीठ स्थापित की जाएगी लेकिन उसके लिए कुछ समय चाहिए।
supreme-court-of-india new 04 04 2018पीठ ने यह बात अधिवक्ता नरेश कौशिक और सुयश मोहन गुरु की जल्द संविधान पीठ गठित करने की मांग पर कही। मामले की सुनवाई कर रही मौजूदा पीठ में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं।
आरक्षण मामले पर पहले भी शीर्ष अदालत की दो न्यायाधीशों की पीठ संविधान पीठ गठित करने की संस्तुति कर चुकी है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश की सरकार सहित कई कर्मचारी संगठन भी सुप्रीम कोर्ट आकर कर्मियों के प्रोन्नति के मसले पर नई व्यवस्था बनाए जाने की मांग कर चुके हैं।
सन 2006 में एम नागराज बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति व जनजाति कर्मियों के बीच क्रीमी लेयर तय करने की मांग खारिज कर दिया था। इस मामले में 1992 के इंदिरा साहनी मामले और 2005 के ईवी चेनैय्या मामले में आए फैसलों की भी नजीर पेश की गई थी।


मंथन न्युज भोपाल-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने शिबपुरी जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप देखते हुये प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की कक्षायें प्रातःकाल लगाने की माँग की है।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री परमजीत सिंह गिल से दूरभाष पर चर्चा करते हुये सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि मेरे पास जिले से अनेक पालकों के फ़ोन आये हैं जिसमें उन्होंने शिबपुरी जिले का तापमान लगभग 40 डिग्री होना बताया है इतने तापमान में दोपहर में कक्षायें लगने के कारण बच्चों का स्वास्थ्य खराब होने की आशंका है पालकों की माँग है कि बच्चों की कक्षायें सुबह लगाई जायें।
सुरेन्द्र शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी को पालकों की माँग से अगवत कराया एवं साथ ही उन्हें बताया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा भी कल एक आदेश जारी किया गया है जिसमें भीषण गर्मी को देखते हुये जिला शिक्षा अधिकारी के प्रतिवेदन पर जिलाधीश महोदय कक्षाओं का समय परिवर्तित कर सकते हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री परमजीत सिंह गिल ने इस पर सकारात्मक जवाब देते हुये ज़िलाधीश महोदय से चर्चा कर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
प्रकाशन हेतु सादर
सुरेन्द्र शर्मा
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
भारतीय जनता पार्टी(म. प्र.)
मो.9074600001

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भोपाल -मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज  सिंह चौहान ने 5 बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने का फैसला लिया तो सूबे की सियासत अचानक गर्म हो गई। चुनावी मौसम में शिवराज सिंह चौहान के इस कदम को एक तीर से दो निशाना साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। राज्यमंत्री का दर्जा पाते ही कल तक सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे संतों का एक ही झटके में 'हृदय परिवर्तन' भी हो गया। जिन पांच बाबाओं को शिवराज ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उनमें से 2 तो कल तक उनकी ही सरकार पर नर्मदा  घोटाला का आरोप लगा यात्रा निकाल रहे थे। ऐसे में शिवराज का यह फैसला चौंकाऊ है। इस बात की भी चर्चाएं हैं कि अपनी नर्मदा यात्रा समाप्त करने के करीब पहुंच चुके दिग्विजय  सिंह  को इसका राजनीतिक फायदा उठाने से से पहले शिवराज ने सधी हुई चाल चल दी है।

आपको बता दें कि मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदानंद महाराज, हरिहरनंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। राज्यमंत्री का दर्जा पाए संतों में हरेक को 7,500 रुपये प्रतिमाह वेतन, 15 हजार रुपये मकान किराया, सरकारी गाड़ी और एक हजार किलोमीटर के लिये ईंधन के साथ-साथ 3 हजार रुपये सत्कार भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा वे अपना स्टाफ भी रख सकेंगे। रोचक बात यह है कि इस फैसले से ठीक पहले संत समाज की एक बैठक में शिवराज सरकार पर नर्मदा घोटाले का आरोप लगाया गया था। 45 जिलों के साधु-संत समाज ने 45 दिन की नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने का ऐलान किया था। यह रथयात्रा एक अप्रैल से शुरू हो गई थी और इसे 15 मई तक चलना था। इस यात्रा का नेतृत्व कंप्यूटर बाबा कर रहे थे और इसके संयोजक पंडित योगेंद्र महंत थे। 
इन दोनों का ही नाम उन पांच बाबाओं में है जिन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। साधु-संत समाज ने शिवराज सरकार पर आरोप लगाए थे कि नर्मदा के किनारे 6 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया है जिसका नामोनिशान नहीं है। इसके अलावा अवैध उत्खनन किया जा रहा है। अब मंत्री बनते ही इन बाबाओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। कंप्यूटर बाबा का कहना है कि शिवराज सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं। नर्मदा पर एक समिति बना दी है और हमें उसका सदस्य बना राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है। 

राज्यमंत्री का दर्जा पाते ही बदले बाबाओं के सुर 
राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद संतों के सुरों में नाटकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। कंप्यूटर बाबा के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर अपलोड प्रोग्राम बदल गया। 24 घण्टे पहले सरकार को गाली देने बाले कम्प्यूटर बाबा एक कुशल राजनेता की तरह शिवराज का गुणगान करते नजर आए। उन्होंने साफ-साफ कहा कि अब राज्यमंत्री का दर्जा है तो हमें सहायक भी चाहिए और सुरक्षा भी। गाड़ी भी चाहिए और अन्य सुविधा भी। अब हम नर्मदा के संरक्षण के लिए काम करेंगे। 

उधर सोशल मीडिया में सरकार के खिलाफ अभियान चलाने बाले महन्त योगेंद्र भी बुधवार को शिवराज का गुणगान करते नजर आए। उन्होंने तो मीडिया के सामने यहां तक कहा कि संतो की यह समिति नर्मदा का नियमित प्रवाह सुनिश्चित करेगी। उन्होंने एक राजनीतिक समर्थक की तरह मुख्यमंत्री की तारीफ की। कंप्यूटर बाबा ने तो शिवराज सरकार को सर्वश्रेष्ठ सरकार का तमगा तक दे डाला। 

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के पूर्व दामाद उदयसिंह देशमुख उर्फ भय्यूजी महाराज ने खुद को राष्ट्रवादी संत बताते हुए कहा कि देशहित के किसी भी काम से जुड़ने को मैं हमेशा तैयार रहता हूं। लेकिन उन्होंने राज्यमंत्री के दर्जे के साथ मिलने बाली सुविधाएं लेने से इनकार किया है। भय्यूजी महाराज ने कुछ दिन पहले ही अपनी एक शिष्या से विवाह किया है। उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया था। एक बेटी के पिता भय्यूजी महाराज मूलरूप से शाजापुर जिले के रहने वाले हैं। उनके समर्थक महाराष्ट्र में ज्यादा हैं। वहां वह एन.जी.ओ. भी चलाते हैं। इंदौर में उनका एक बड़ा और भव्य आश्रम भी है। कुछ दिन पहले वह तब चर्चा में आये थे जब उन्हें किसी ने जान से मारने की धमकी दी थी। बाकी जिन 2 संतो को समिति में रखा गया है उनके नर्मदा के तटों पर बड़े-बड़े आश्रम हैं। 

शिवराज ने साधी चुप्पी, कहीं निशाने पर दिग्विजय तो नहीं? 
बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के सवाल पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। चुनावी माहौल में शिवराज भले खामोश हों लेकिन स्थानीय मीडिया इस मामले को दिग्विजय सिंह से भी जोड़ कर देख रही है। दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। उनकी यह परिक्रमा यात्रा 9 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यात्रा समाप्त कर दिग्विजय सिंह नर्मदा किनारे पौधारोपण, अवैध खनन, सफाई जैसे मुद्दों में कथित तौर पर घोटाले का मामला उठा शिवराज सरकार पर हमलावर हो सकते हैं। 

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के लिए आस्था का विषय है और इससे पहले शिवराज खुद 'नमामि देवी नर्मदे' सेवा यात्रा निकाल चुके हैं। शिवराज सिंह की यह यात्रा 11 दिसंबर 2016 को शुरू होकर 15 मई 2017 को समाप्त हुई थी। इसके बाद 5 जून से 15 जून 2017 तक पेड़ लगाओ यात्रा की शुरुआत हुई थी। सरकार ने एक साथ एक दिन 2 जुलाई को 6 करोड़ पौधे लगा वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाने का दावा किया था। अभी राज्यमंत्री बनाए गए बाबाओं के अलावा राजनीतिक दलों ने भी आरोप लगाया था कि इन पौधों का नामोनिशान नहीं है। 

ऐसी संभावना है कि अपनी यात्रा समाप्त होने के बाद दिग्विजय सिंह भी नर्मदा नदी के मुद्दे को लेकर शिवराज पर हमला बोलेंगे। इससे पहले शिवराज ने अपने खिलाफ हुए बाबाओं को 31 मार्च को एक समिति गठित कर उसका सदस्य बना राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। कांग्रेस इसे लेकर शिवराज सरकार पर हमलावर हो चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 9 अप्रैल को अपनी नर्मदा यात्रा समाप्त करने वाले दिग्विजय सिंह इसपर क्या स्टैंड लेते हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह पहले ही अपनी इस यात्रा को गैरराजनीतिक बता चुके हैं। 

mp board bhopal 03 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -हाईस्कूल और हायर सेकंडरी का मूल्यांकन 60 फीसदी पूरा हो गया है। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल 12 से 15 मई के बीच दोनों कक्षाओं का परिणाम एक साथ देने की तैयारी कर रहा है। फाइव बेस्ट सिस्टम (पांच विषय में रिजल्ट) लागू होने के कारण हाईस्कूल के परीक्षा परिणाम में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। मंडल ने दावा किया है कि नकल को लेकर सख्ती बरतने के कारण इस बार प्रदेश में सामूहिक नकल के प्रकरण सामने नहीं आए हैं।
मंडल अध्यक्ष एसआर मोहंती ने मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा में बताया कि दोनों कक्षाओं का मूल्यांकन चल रहा है। हम 12 से 15 मई के बीच रिजल्ट देने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में नए प्रयोग और सख्ती की वजह से नकल के प्रकरणों में गिरावट आई है।
इस बार एकल नकल के 2085 प्रकरण बने हैं, जो पिछले साल की तुलना में 169 कम हैं। पिछले साल 2254 प्रकरण बने थे। जबकि सामूहिक नकल के प्रकरण सामने नहीं आए हैं। मोहंती ने बताया कि मुरैना, बैतूल और डिंडौरी में सबसे ज्यादा नकल हुई है।
जबकि प्रदेश के 18 जिलों में 10 से भी कम प्रकरण बने हैं। सात जिले ऐसे भी हैं, जिनमें एक भी नकल प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि सबसे ज्यादा मुरैना में हाईस्कूल में 347 और हायर सेकंडरी में 420 नकल प्रकरण बने हैं। मंडल ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील जिलों में वीडियोग्राफी भी कराई और प्रेक्षक नियुक्त किए थे।
ये नए प्रयोग किए
25 मिनट पर पहले लिफाफा खोलना
मंडल ने परीक्षा शुरू होने से 25 मिनट पहले पेपर के लिफाफे खोलने और परीक्षा सुबह साढ़े आठ बजे की बजाय नौ बजे से कराने का निर्णय सख्ती से लागू कराया गया।
बेस्ट फाइव सिस्टम
हाईस्कूल में यह सिस्टम पहली बार लाया गया है। इसमें उन विषयों की अंक जोड़कर रिजल्ट तैयार किया जाता है, जिनमें विद्यार्थी के सबसे ज्यादा अंक हों। जिस विषय में अंक कम आएंगे, उन अंकों को अंकसूची में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि इस विषय की परीक्षा दी है, ये अंकसूची में दर्शाया जाएगा।
क्यूआर कोड रहेगा
अंकसूची पर इस बार भी क्यूआर कोड रहेगा। पिछले साल इसके अच्छे परिणाम सामने आए थे। विद्यार्थियों को अंकसूची का सत्यापन कराने मंडल तक नहीं आना पड़ा था।
रीवा मॉडल स्कूल में होगा काम
मंडल ने भोपाल के मॉडल स्कूल में वातानुकूलित (एसी) कक्षाएं शुरू कर दी हैं। अब रीवा मॉडल स्कूल की बारी है। इसके लिए 13 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।
स्कूलों को दिए 40 करोड़
मंडल ने फर्नीचर खरीदने के लिए प्रदेश के 862 स्कूलों को 40 करोड़ रुपए दिए हैं। जिससे स्कूलों में विद्यार्थियों को टाटपट्टी की जगह फर्नीचर मिल गया है।

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