मंथन न्यूज़ भोपाल -हाईस्कूल और हायर सेकंडरी का मूल्यांकन 60 फीसदी पूरा हो गया है। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल 12 से 15 मई के बीच दोनों कक्षाओं का परिणाम एक साथ देने की तैयारी कर रहा है। फाइव बेस्ट सिस्टम (पांच विषय में रिजल्ट) लागू होने के कारण हाईस्कूल के परीक्षा परिणाम में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। मंडल ने दावा किया है कि नकल को लेकर सख्ती बरतने के कारण इस बार प्रदेश में सामूहिक नकल के प्रकरण सामने नहीं आए हैं।
मंडल अध्यक्ष एसआर मोहंती ने मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा में बताया कि दोनों कक्षाओं का मूल्यांकन चल रहा है। हम 12 से 15 मई के बीच रिजल्ट देने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में नए प्रयोग और सख्ती की वजह से नकल के प्रकरणों में गिरावट आई है।
इस बार एकल नकल के 2085 प्रकरण बने हैं, जो पिछले साल की तुलना में 169 कम हैं। पिछले साल 2254 प्रकरण बने थे। जबकि सामूहिक नकल के प्रकरण सामने नहीं आए हैं। मोहंती ने बताया कि मुरैना, बैतूल और डिंडौरी में सबसे ज्यादा नकल हुई है।
जबकि प्रदेश के 18 जिलों में 10 से भी कम प्रकरण बने हैं। सात जिले ऐसे भी हैं, जिनमें एक भी नकल प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि सबसे ज्यादा मुरैना में हाईस्कूल में 347 और हायर सेकंडरी में 420 नकल प्रकरण बने हैं। मंडल ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील जिलों में वीडियोग्राफी भी कराई और प्रेक्षक नियुक्त किए थे।
ये नए प्रयोग किए
25 मिनट पर पहले लिफाफा खोलना
मंडल ने परीक्षा शुरू होने से 25 मिनट पहले पेपर के लिफाफे खोलने और परीक्षा सुबह साढ़े आठ बजे की बजाय नौ बजे से कराने का निर्णय सख्ती से लागू कराया गया।
बेस्ट फाइव सिस्टम
हाईस्कूल में यह सिस्टम पहली बार लाया गया है। इसमें उन विषयों की अंक जोड़कर रिजल्ट तैयार किया जाता है, जिनमें विद्यार्थी के सबसे ज्यादा अंक हों। जिस विषय में अंक कम आएंगे, उन अंकों को अंकसूची में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि इस विषय की परीक्षा दी है, ये अंकसूची में दर्शाया जाएगा।
क्यूआर कोड रहेगा
अंकसूची पर इस बार भी क्यूआर कोड रहेगा। पिछले साल इसके अच्छे परिणाम सामने आए थे। विद्यार्थियों को अंकसूची का सत्यापन कराने मंडल तक नहीं आना पड़ा था।
रीवा मॉडल स्कूल में होगा काम
मंडल ने भोपाल के मॉडल स्कूल में वातानुकूलित (एसी) कक्षाएं शुरू कर दी हैं। अब रीवा मॉडल स्कूल की बारी है। इसके लिए 13 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।
स्कूलों को दिए 40 करोड़
मंडल ने फर्नीचर खरीदने के लिए प्रदेश के 862 स्कूलों को 40 करोड़ रुपए दिए हैं। जिससे स्कूलों में विद्यार्थियों को टाटपट्टी की जगह फर्नीचर मिल गया है।

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