मंथन न्यूज़ -सोशल साइटों से लेकर इंटरनेट तक को आपके लिए सुरक्षित बनाने का इंतजार अब बहुत लंबा नहीं रह गया है। डाटा प्रोटेक्शन पर बीएन श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट जल्द आने के आसार हैं। इस शुक्रवार को समिति की अहम बैठक हो रही है, जिसमें सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। समिति की रिपोर्ट सरकार को मिल जाने के बाद देश का पहला डाटा प्रोटेक्शन कानून बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक समिति की बैठक दिनभर चलेगी और कोशिश होगी कि सभी मुद्दों पर सहमति बना ली जाए। खुद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद जोर दे रहे हैं कि समिति की रिपोर्ट मिल जाने से कानून जल्द बनाने में आसानी होगी।
सरकार इस साल के अंत तक यह कानून बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। दरअसल, सरकार के सामने चुनौती यह है कि कानून इस तरह का बनाया जाए जिसे उद्योग जगत और आम जनता दोनों का समर्थन हासिल हो।
बीते एक दशक में ग्राहकों से जुड़ी सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर कानून बनाने की कई बार कोशिश हुई। लेकिन कई वजहों से इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। छह वर्ष पहले निजता मामले पर एपी शाह समिति गठित की गई थी। इसकी सिफारिशों के आधार पर एक विस्तृत कानून बनाने का इरादा था। लेकिन उसकी रिपोर्ट आने के बाद भी कानून नहीं बन पाया।
मंत्रालय चाहता है कि ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखने के मामले में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कानून बनाया जाए। यह कानून सोशल साइटों पर ही नहीं, बल्कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में इस्तेमाल होने वाले ग्र्राहकों से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखने का ढांचा देगा। यह कानून संचार कंपनियों पर भी लागू होगा और इससे फोन कंपनियों की तरफ से ग्र्राहकों से जुड़ी सूचना किसी दूसरी एजेंसी को देने पर रोक लगेगी।
जी-मेल, याहू जैसी ई-मेल कंपनियों पर भी यह लागू होगा और उनके इस्तेमाल को लेकर ग्र्राहक ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे। सरकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यस्था जिस तरह से डिजिटल हो रही है उसे देखते हुए एक मजबूत डाटा प्रोटेक्शन कानून बेहद जरूरी है।
पहली बार तय होगी निजता की परिभाषा-
--समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही भारत में पहली बार निजता (प्राइवेसी) की परिभाषा तय की जाएगी।
--यह सोशल साइटों के ग्र्राहकों को भरोसा देगा कि उनसे जुड़ी सूचना का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
--इससे आने वाले दिनों में फेसबुक व कैंब्रिज एनालिटिका जैसे मामले भारत में नहीं दोहराए जा सकेंगे।

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