सफल आयोजन के सुपर हीरो का नाम है नरोत्तम मिश्रा .

पिछोर जिला शिवपुरी शिवपुरी . भाजपा के लिए हमेशा से कड़वे अनुभव वाली रही पिछोर विधानसभा में आज हुए कार्यक्रम में भारी जनसैलाव उमड़ पड़ा। जनता इतनी की सभा स्थल तो छोडो पूरे पिछोर में पैर रखने को जगह नहीं थी ... इस सफल आयोजन के सुपर हीरो का नाम है नरोत्तम मिश्रा .

मध्यप्रदेश शासन के सबसे कद्दावर मंत्री और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विश्वसनीय साथी डॉ नरोत्तम मिश्रा जिन्हें अब ग्वालियर चम्बल संभाग में विकास के मसीहा के नाम से जाना जाता है उन्होंने दतिया के पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र पिछोर को भी 2200 करोड़ से अधिक लागत की वृहद सिंचाई लोअर ओर परियोजना की सौगात दी . इस परियोजना का शिलान्यास करने आज सीएम शिवराज सिंह चौहान जब पिछोर पहुंचे तो एतिहासिक जनसैलाव देखकर उनकी बांछें खिल गईं क्योंकि जिस क्षेत्र में यह कार्यक्रम था वहाँ कांग्रेस के सबसे दमदार विधायक केपी सिंह का सिक्का चलता है वे दो दशक से भी अधिक समय से विधायक हैं , भाजपा की हालत पिछोर में शून्य बटे सन्नाटा सी रहती आई है .इसलिए इस क्षेत्र में एतिहासिक आयोजन की ज़िम्मेदारी  ,स्थानीय मंत्री यशोधरा को दरकिनार कर मुख्यमंत्री ने अपने विश्वसनीय और ऊर्जावान मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सौंपी .नरोत्तम मिश्रा ने मात्र 2 बार पिछोर क्षेत्र का भ्रमण किया और कार्यकर्ताओं के कान में ऐसा गुरु मंत्र फूंका की सभी ऊर्जा से लवरेज हो गए . आज पिछोर में उमड़ी अपार जनता को देख यहाँ म्रतप्राय सी पढ़ी भाजपा को संजीवनी मिल गई . हर तरफ ,हर कोई इस सफल आयोजन के लिए नरोत्तम मिश्रा का ही नाम ले रहा है । पूरे क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा विकास के मसीहा नाम से पहचाने जाने लगे हैं .


भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग पत्रकारों की श्रद्धा-निधि 6 हजार रूपये प्रति-माह से बढ़ाकर 7 हजार रूपये प्रति माह करने का निर्णय लिया गया है। श्रद्धा-निधि के लिये आयु सीमा 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करने का भी निर्णय लिया गया है। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल कर प्रीमियम राशि का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिये जाने का निर्णय लिया है।

उद्यानिकी प्रोत्साहन योजना लागू

मंत्रि-परिषद ने प्याज और लहसुन की फसल के लिये उद्यानिकी प्रोत्साहन योजना लागू करने का निर्णय लिया है। योजना के अंतर्गत प्याज के लिये 400 रू. प्रति क्विंटल तथा लहसुन के लिये 800 रू. प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि बोनी के सत्यापित रकबे तथा निर्धारित औसत उत्पादकता की सीमा को ध्यान में रखते हुए किसान के खाते में सीधे जमा करवायी जाएगी।

प्राईस सपोर्ट स्कीम

मंत्रि-परिषद ने प्राईस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत रबी वर्ष 2017-18 में चना, मसूर और सरसों की खरीदी के लिये म.प्र राज्य सहकारी विपणन संघ और नागरिक आपूर्ति निगम को राज्य शासन द्वारा स्वीकृत नि:शुल्क बैंक गारंटी की अवधि 2 माह से बढ़ाकर 6 माह करने का निर्णय लिया है।

खुरई में खुलेगा कृषि महाविद्यालय

मंत्रि-परिषद ने सागर जिले की तहसील खुरई में कृषि महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आरंभ होने वाले इस महाविद्यालय में वर्ष 2018-19 के शैक्षणिक सत्र में 60 छात्र-छात्राओं के अध्ययन की सुविधा रहेगी। सागर जिले की रहली तहसील में उद्यानिकी महाविद्यालय खोलने के निर्णय को भी मंत्रि-परिषद ने अनुमोदित किया।

मगरौनी बनेगा नगर परिषद

मंत्रि-परिषद ने शिवपुरी जिले की ग्राम पंचायत मगरौनी को नगर परिषद स्वरूप में गठित करने की अनुशंसा राज्यपाल को भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, मंत्रि-परिषद ने महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित केन्द्र प्रवर्तित किशोरी बालिका योजना को प्रदेश के सभी 51 जिलों में संचालित करने की स्वीकृति प्रदान की है। बैठक में योजना के क्रियान्वयन पर होने वाले व्यय के लिये रू. 209 करोड़96 लाख की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

मंत्रि-परिषद के अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चिकित्सा शिक्षक आदर्श सेवा नियम,2018 को मंजूरी दी है। साथ ही, पिछड़ा वर्ग की सूची में सौधिंया जाति प्रविष्टि क्रमाँक 12 को विलोपित करने और कैफियत में सौधिंया राजपूत भी शामिल होने का उल्लेख कर एवं पृथक से क्रमांक 93 में दर्ज करने का निर्णय लिया गया है। मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग की सूची के सरल क्रमाँक 58 पर अंकित खैरूवा जाति को सूची से विलोपित करने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने एशियन डेवलपमेंट बैंक ऋणांश एवं मध्यप्रदेश राज्यांश से मध्यप्रदेश स्किल्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत स्थापित किये जाने वाले ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल की स्थापना, प्रशासन एवं प्रबंधन के लिये मध्यप्रदेश फर्म्स एवं सोसायटी अधिनियम 1973 के अन्तर्गत ग्लोबल स्किल्स पार्क समिति का गठन एवं पंजीयन का अनुमोदन किया।

ग्लोबल स्किल पार्क में युवाओं को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का रोजगार परख प्रशिक्षण दिया जायेगा। इससे उन्हें देश एवं विदेश में उच्च वेतनमान के रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे। युवाओं को स्व-रोजगार के अधिक अवसर भी प्राप्त होंगे। इससे ग्लोबल स्किल्स पार्क में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की कार्य-कुशलता एवं जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार हो सकेगा।

मध्यप्रदेश स्किल्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिये प्रोजेक्ट स्टेयरिंग कमेटी और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी और का गठन कर उत्तरदायित्व एवं शक्तियों का निर्धारण तथा प्रोजेक्ट डायरेक्टर के उत्तरदायित्व एवं शक्तियों का निर्धारण किया गया है।

मंत्रि परिषद द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी 'ग' श्रेणी को प्रथम क्रमोन्नत वेतनमान और मुख्य नगर पालिका अधिकारी 'ख' श्रेणी के अनुरूप रूपये 8000-13500 स्वीकृत किया गया। निर्णय के फलस्वरूप 267 अधिकारी लाभांवित होंगे।

कर्मचारियों की समाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के मकसद से सरकार आने वाले दिनों में एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। श्रम मंत्रालय ने आवश्यक कवरेज के तहत वेतन सीमा में 6 हजार की बढ़त का प्रस्ताव तैयार किया है। नए प्रस्ताव के तहत ईपीएफओ के तहत आवश्यक कवरेज के लिए वेतन की सीमा 15 हजार से बढ़कर 21 हजार कर दिया जाएगा। 

ऐसा करने ईपीएफओ सदस्यों की संख्या भी बढ़ेगी, साथ ही सदस्यों की तरफ से आने वाला कंट्रीब्यूशन भी बढ़ेगा। सरकार का ये प्रस्ताव फिलहाल वित्त मंत्रालय के पास दोबारा भेजा गया है। पहले का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय ने कुछ संशोधनों के लिए श्रम मंत्रालय के पास भेज दिया था। अब श्रम मंत्रालय ने एक नया प्रस्ताव तैयार किया है और वित्त मंत्रालय को भेज दिया है। सरकार इस प्रस्ताव पर फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है, क्योंकि इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर से पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की मंजूरी भी चाहिए होती है। 

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में सरकारी सदस्यों की संख्या तो नियत रहती है और लेकिन गैर सरकारी सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का ही होता है। पुराने बोर्ड का कार्यकाल इस साल मई में खत्म हो गया है। नए सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज यानि सीबीटी का गठन मई के बाद शुरू हो जाना था लेकिन अब तक केवल सरकार ने सभी संगठनों से इसके लिए नाम मांगे हैं। सूत्रों की माने तो इस पूरी प्रक्रिया में एक से दो महीने का वक्त और लग सकता है। इस बोर्ड के गठन के बाद ही कर्मचारियों से जुड़े प्रस्ताओं को अमलीजामा पहनाना शुरू किया जाएगा। 

अभी क्या है प्रावधान 

ईपीएफ एंड एमपी एक्ट में ये प्रावधान हैं कि कंपनी और कर्मचारी आमतौर पर मूल वेतन का 12 फीसदी एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) एकाउंट में जमा करते हैं। कर्मचारी की तरफ से जमा कराया गया 12 प्रतिशत ईपीएफ के मद में ही जाता है। वहीं कंपनी की तरफ से जमा कराए गए 12 फीसदी में से 8.33% को ईपीएस या कहें पेंशन फंड में जमा किया जाता है जबकि बाकी बचे 3.67 फीसदी हिस्से को ईपीएफ में निवेश किया जाता है। इस प्रस्ताव के पास होने के बाद ईपीएफओ के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की राशि में भी इजाफा संभव है क्योंकि वेतन सीमा बढ़ाए जाने के बाद एंप्लॉई पेंशन स्कीम के तहत सरकार का योगदान भी बढ़ जाएगा।



भोपाल। ANI रिपोर्टर संदीप सिंह के अनुसार मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बयान दिया है कि हमें कोई आशीर्वाद नही चाहिए, हम आशीर्वाद मांगने नही जाएंगे, हमारा विश्वास है कि जनता खुद आएगी हमें आशीर्वाद देने। सोशल मीडिया पर कमलनाथ के इस बयान को अतिआत्मविश्वास और कांग्रेस के लिए नुक्सानदायक बताया जा रहा है। बता दें कि इन दिनों सीएम शिवराज सिंह चौहान जन आशीर्वाद यात्रा पर हैं और मप्र की सभी 230 विधानसभाओं में जा रहे हैं जबकि कमलनाथ भोपाल के होटलों में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को बुलाकर लक्झरी कांफ्रेंस करने में व्यस्त हैं। 

कमलनाथ छिंदवाड़ा फोविया से ग्रस्त हैं

भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष श्री कमलनाथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है और एक वरिष्ठ नेता से इतनी संकीर्ण सोच की अपेक्षा नहीं थी। डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि श्री कमलनाथ दशकों तक केंद्रीय मंत्री मंडल में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी करते रहे हैं। यदि इस दौरान उन्होंने विकास के लिए सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र को चुना तो यह संवैधानिक गैर जिम्मेदारी ही कही जायेगी। मंत्री जब शपथ लेता है तो सभी क्षेत्रों पर समभाव रखने की प्रतिबद्धता जाहिर करता है लेकिन बार-बार छिंदवाड़ा के विकास का दंभ लोकतांत्रिक अवधारणा के खिलाफ है। श्री कमलनाथ छिंदवाड़ा फोविया से ग्रस्त हैं और उन्हें मध्यप्रदेश के पचास जिले से कोई मतलब नहीं है, यह प्रदेश के साढ़े सात करोड़ जनता का अपमान है।

पर्यावरण मंत्री थे तब अपने निजी टूरिस्ट रिसार्ट के लिए नदी मोड़ दी थी

उन्होंने कहा कि सही बात तो यह है कि कमनाथ छिंदवाड़ा तक सीमित रहे हैं इसलिए उन्हें प्रदेश के अन्य जिलों, ग्रामीण अंचल की जानकारी नहीं है। वे श्योपुर से शहडोल तक जाये तो उन्हें छिंदवाड़ा से उत्कृष्ट सड़कें, पुल-पुलिया अधोसंरचना नजर आयेगी लेकिन जिस तरह पर्यावरण मंत्री रहते उनकी चिंता हरियाणा के टूरिस्ट रिसार्ट तक सीमित हो गई थी और उन्होंने नदी की धारा मोड़ने में संकोच नहीं किया था। वे आज छिंदवाड़ा की ही बार-बार बात करते हैं।

शिवराज सिंह के लिए सभी 51 जिले एक समान हैं

डॉ. विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें प्रदेश के सभी 51 जिलों की बात करके कांग्रेस की विस्तृत सोच का दर्शन कराना चाहिए। जहां तक मुख्यमंत्री के छिंदवाड़ा प्रवास का सवाल है यह आकस्मिक नतीजे जनता के प्रथम सेवक के रूप में जहां जनता चाहेगी मुख्यमंत्री जाकर जनता से संवाद कर लोकतंत्र को सार्थक बनाएंगे। मुख्यमंत्री के लिए साढ़े सात करोड़ जनता और 51 जिले सभी समान है। यह भारतीय लोकतंत्र का संघवाद है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 30 जुलाई को शिवपुरी जिले के पिछौर में 2208.03 करोड़ रुपये लागत की लोअर और वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया। इस परियोजना से शिवपुरी और दतिया जिले के 343 ग्रामों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। जल-संसाधान मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने  इस दौरान अपर मुख्य सचिव जल-संसाधन श्री आर.एस. जुलानिया भी मौजूद थे।

परियोजना से 19.44 मेगावॉट विद्युत ऊर्जा उत्पादन का प्रावधान

जनसम्पर्क, जल-संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना की पूर्ण जल-ग्रहण क्षमता 371.80 मैट्रिक घनमीटर होगी और जल-ग्रहण क्षेत्र 1843 वर्ग किलोमीटर रहेगा। यह परियोजना बाँध स्थल खनियाधान से 25 किलोमीटर और चन्देरी से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उन्होंने बताया कि बाँध की कुल लम्बाई 2070 मीटर रहेगी और उच्चतम स्तर 383 मीटर रहेगा। बाँध में कुल 7 द्वार होंगे। बाँध निर्माण से 12 गाँव की 2690 हेक्टेयर भूमि डूब क्षेत्र में आयेगी। इससे एक हजार परिवार विस्थापित होंगे, जिनके पुनर्वास के लिये पास के गाँवों में व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।

जल-संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने जानकारी दी कि परियोजना से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये सिंचित क्षेत्र को दो भागों में विभाजित किया गया है। परियोजना से 60 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्र में जल का उद्वहन कर सिंचाई किया जाना प्रस्तावितहै। उन्होंने बताया कि शेष 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में भूमिगत पाइप लाइन से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जायेगी। डॉ. मिश्र ने बताया कि परियोजना से 19.44 मेगावॉट विद्युत ऊर्जा उत्पादन का प्रावधान है।

जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सेवा कार्यों से वे कभी विमुख नहीं होंगे। आमजन की मदद के लिए वे निरंतर तत्पर रहेंगे। मंत्री डॉ. मिश्र आज दतिया में यादव समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि राजनीति उनके लिए सेवा का माध्यम है। यादव समाज प्रगतिशील है और समरसता के भाव से दतिया के विकास में भागीदार भी बना है। उन्होंने यादव समाज के सामुदायिक भवन के लिए दस लाख रूपए की राशि प्रदान की। इस अवसर पर यादव समाज की नवगठित कार्यकारिणी ने शपथ ग्रहण की।

भोपाल। मध्यप्रदेश में एक बार फिर आईपीएस पर आईएएस लॉबी भारी पड़ गई। पुलिस कमिश्नर प्रणाली की तेज होती मांग से अपने स्र्तबे में कमी होते देख आईएएस अफसरों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। इसके तहत अब हर जिले में एक दांडिक शाखा बनाई जाएगी। इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर को बतौर दांडिक अधिकारी तैनात किया जाएगा। इन्हें जिले में कलेक्टर चाहकर भी दूसरा कोई काम नहीं सौंप सकेंगे। ये दांडिक अधिकारी सिर्फ कानून व्यवस्था और दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन कार्यपालिक दंडाधिकारियों के कामकाज की नियमित देखरेख और समीक्षा करेगा।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली के विकल्प के इस मसौदे पर सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट में फैसला होगा। प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर विचार की घोषणा की थी। खस पर आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच स्र्तबे को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। आईपीएस अफसर भी न्यायिक अधिकार प्राप्त करने लामबंद भी हो गए थे। तब आईएएस अफसरों ने चुप्पी साध ली और इसका तोड़ खोजने में जुट गए।

करीब एक माह से जिलों में एक ऐसी व्यवस्था बनाने की तैयारी चल रही थी, जिससे कलेक्टर या अन्य कार्यपालक अधिकारियों के कार्यालयों में लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों को तेजी से निपटाया जा सके। इसके मद्देनजर राजस्व विभाग ने सभी 51 जिलों में दांडिक कार्य शाखा, प्रभारी अधिकारी (दांडिक अधिकारी) सहित अन्य स्टाफ के लिए पद निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है।

ये बनाया आधार : राजस्व विभाग का कहना है जिला प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय, आपराधिक प्रकरणों की समयबद्ध सुनवाई और तेजी से निराकरण के लिए समन्वय बनाना बेहद जरूरी है। कलेक्टर, अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर्स, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को दांडिक शक्तियां दी गई हैं। इनके पास राजस्व प्रबंध्ान, शिष्टाचार, विभागीय समन्वय, विकास प्रशासन, योजनाओं का क्रियान्वयन और जनशिकायत निवारण सहित ढेरों काम होते हैं।

स्टाफ की कमी और काम की अधिकता के कारण दंडाधिकारी के तौर पर प्रचलित प्रकरणों के निराकरण में परेशानी होती है। जिले में आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा के लिए कोई संस्थागत व्यवस्था भी नहीं है। इसके मद्देनजर कलेक्टर कार्यालय में आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जो सिर्फ एक ही काम करेगी। 51 जिलों में प्रभारी अधिकारी के पद बनाए जाएंगे। इसके अलावा 51 सहायक ग्रेड 3 और इतने ही भृत्य के पद नए बनाए जाएंगे।

वित्त विकास निगम लेगा सौ करोड़ का कर्ज

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय में कैबिनेट बैठक होगी। इसमें वित्त विकास निगम को सौ करोड़ रुपए का कर्ज लेने की मंजूरी मिल सकती है। इसके लिए सरकार अपनी गारंटी देगी। वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर अजातशत्रु श्रीवास्तव को संविदा नियुक्ति देने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय में ओएसडी का एक पद बनाया जाएगा। मौजूदा विशेष कर्त्तव्यवस्थ अधिकारी अरुण कुमार भट्ट की संविदा अवधि में वृद्धि की जाएगी।

कैबिनेट में 30 से ज्यादा प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। सागर के रेहली में उद्यानिकी और खुरई में कृषि कॉलेज खोलने, पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पाद में मिलाने के लिए प्रयोग होने वाले डिनेचर्ड स्प्रिट पर फीस ड्यूटी और नियंत्रण को समाप्त करने, मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रेणी 'ग" के लिए क्रमोन्नत वेतनमान तय करने, वरिष्ठ पत्रकारों को दी जाने वाली श्रृद्धा निधि बढ़ाने और आयु सीमा 62 से घटाकर 60 साल करने और पत्रकार बीमा योजना में गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को शामिल करने, किशोर बालिका योजना पूरे प्रदेश में लागू करने सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा कर फैसला लिया जा सकता है।

ये करेंगे दांडिक अधिकारी

- दंड प्रक्रिया संहिता व अन्य अपराध विधियों, जिनमें कार्यपालिक दंडाधिकारी की भूमिका होती है, नियमित समीक्षा करेंगे।

- पंजीकृत व निराकृत प्रकरणों का डाटा बेस तैयार कर विश्लेषण करके कलेक्टर के सामने रखेंगे।

- कार्यपालिक दंडाधिकारियों और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद, संपर्क और समन्वय बनाना।

- अदालतों में चल रहे प्रकरणों को लेकर संयुक्त आयुक्त लिटिगेशन कार्यालय से समन्वय करना।

- प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के प्रकरण के निराकरण में देरी पर समाधान की कोशिश करना।

- गंभीर अपराधों के लेकर जानकारी तैयार करना।

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