भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए 8 महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी भी सरकार के मंत्रियों और अफसरों के बीच तालमेल सही नही है। मंत्री और विधायको के विवाद आए दिन सामने आ रहे हैं। कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमकार सिंह मरकाम का अफसरों के रवैये पर दर्द छलका है। उन्होंने अफसरों के रवैये पर सवाल उठाते हुए महापुरुषों के फोटो हटाकर उनके फोटो अपने कमरे में लगाने की बात कही है।
दरअसल, मप्र के सीएम कमलनाथ ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वहीं बैठक खत्म होने के बाद कैबिनेट मंत्री मरकाम का दर्द छलका। उन्होंने ने कहा कि मैं मेरे कक्ष में लगे महापुरुषों के फोटो हटाकर आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के फोटो लगाऊंगा, ताकि मेरी सुनवाई हो सके। आपको बता दें कि यह कोई पहली बार नही है कि जब इस तरह अफसरों के कामकाज को लेकर सवाल उठे हो। पहले भी कई बार बैठको में यह मुद्दा उठ चुका है। हालांकि इसके चलते कईयों के तबादले भी किए गए हैं, लेकिन तालमेल अब भी नहीं बन रहा है। आए दिन मंत्री-विधायकों की अफसरों के साथ अनबन की खबरे मीडिया में सुर्खियां बनी हुई है।



   


 एक आदेश में न्यायालय ने राज्य शासन द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए किए गए 27 फीसदी आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगा दी है

 देश के अलग-अलग राज्यों में आरक्षण को लेकर बड़ी बहस चल रही है। सरकारें अपने वोट बैंक और राजनीती चमकाने के लिए आरक्षण की घोषणा तो कर रही हैं। लेकिन न्यायालय सविंधान का हवाला देकर उस पर रोक लगा रही है। पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने वाली मध्य प्रदेश सरकार को जबलपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है।एक आदेश में न्यायालय ने राज्य शासन द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए किए गए 27 फीसदी आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगा दी है।दूसरी ओर इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के फैसलों पर भी सवाल उठाया जा रहा है।


उल्लेखनीय है कि विगत 8 मार्च 2019 को प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने अध्यादेश के जरिए ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था जिसकी मिश्रित प्रतिक्रिया हुई थी और बहुतों ने इसका विरोध किया था। कुछ लोग न्यायालय पहुंच गए थे जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला दिया। जाहिर है इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार पेशोपस में पड़ गई है।

दूसरी ओर इस फैसले ने छत्तीसगढ़ के उन लोगों का उत्साह और उम्मीद बढ़ा दी है जो छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुजरे दिनों पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है जिसके बाद एसटी को 32 फीसदी, एससी को 13 फीसदी तथा पिछड़ा वर्ग को 14 की बजाय 27 फीसदी आरक्षण यानि कुल 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा। हालांकि अभी सरकार ने आदेश जारी नही किया है महज घोषणा ही हुई है।



भोपाल। सुप्रीम कोर्ट में भले ही पदोन्नति में आरक्षण का मामला लंबित हो पर सरकार ने पदोन्नति नियम को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शिवराज सरकार के वक्त बने नियम के मसौदे को विभागीय मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को भेज दिया है।

हालांकि, अब अनुसूचित जाति-जनजाति का पिछड़ापन साबित करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इसकी वजह से तथ्यों को नए सिरे से देखना होगा, क्योंकि नए नियमों का जो मसौदा तैयार किया गया था, वह आरक्षित वर्ग की सामाजिक व आर्थिक स्थिति के साथ प्रशासन में भागीदारी के हिसाब पर आधारित था।

बताया जा रहा है कि विभाग की मंशा प्रस्तावित नियम के मसौदे को विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेजने की है, ताकि वहां कानून के हिसाब से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके।

सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट से लोकसेवा पदोन्नति नियम 2002 के निरस्त होने के बाद शिवराज सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मनोज गोरकेला की देखरेख में नए नियमों का मसौदा तैयार करवाया था।

मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने सभी वर्गों के कर्मचारी संगठनों से इसको लेकर प्रारंभिक चर्चा कर सहमति बनाने की कोशिश भी की पर कामयाबी नहीं मिली। मसौदे के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति और अनारक्षित वर्ग की पदोन्न्ति के लिए अलग-अलग चैनल बनाने का प्रस्ताव था। इसमें पदोन्नति को लेकर कोई विवाद ही नहीं होता, जिस वर्ग के लिए जितने पद आरक्षित होते, वे उसी में वरिष्ठता के हिसाब से पदोन्नति पाता जाता।

आरक्षित वर्ग का मानना था कि इससे उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप अनारक्षित वर्ग में मेरिट के आधार पर जो पदोन्नति अभी मिलती है, वो मौके खत्म हो जाएंगे। इसी मुद्दे को लेकर आम राय नहीं बन पाई और मामला अभी तक अटका हुआ है। कमलनाथ सरकार आने के बाद एक बार फिर पदोन्नति को लेकर चर्चा का दौर शुरू हुआ है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण को देखने के लिए नया प्रभारी अधिकारी नियुक्त कर दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण की शीघ्र सुनवाई और यथास्थिति को स्थगन में तब्दील करने का आवेदन लगाने पर सैद्धांतिक सहमति हो गई है। आवेदन का मसौदा भी स्टैंडिंग काउंसिल को भेज दिया गया है।

उधर, नियमों का मसौदा सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को आगामी कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एम. नागराज के मामले में सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जो नई व्यवस्था दी है, उसके हिसाब से प्रस्तावित नियमों का परीक्षण करना होगा। कानूनी मामला होने से विधि विभाग ही इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकता है।

पदोन्नति के बिना 15 हजार से ज्यादा सेवानिवृत्त

सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2016 से अब तक 15 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अजाक्स हो या फिर सपाक्स, सब यही चाहते हैं कि पदोन्नति के रास्ते खुल जाएं, क्योंकि बिना पदोन्न्ति सेवानिवृत्त होने से पेंशन में आर्थिक नुकसान हो रहा है। उपसचिव स्तर के अधिकारी, जो दो साल पहले अपर सचिव पद पर पदोन्नत हो जाते, उनका कहना है कि उन्हें 15 से 20 हजार रुपए महीने का नुकसान हो रहा है। भले ही सरकार ने दो साल सेवा की अवधि बढ़ा दी हो पर पेंशन में नुकसान तो होगा ही।

मोजर बेयर बैंक फ्रॉड केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने कारोबारी रतुल पुरी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रतुल पुरी को आज अदालत में पेश किया था. .


 


मंथम न्यूज

मोजर बेयर बैंक फ्रॉड केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने कारोबारी रतुल पुरी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रतुल पुरी को आज अदालत में पेश किया था. ईडी ने कोर्ट से रतुल पुरी की 14 दिन की हिरासत मांगी थी. बता दें कि रतुल पुरी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे हैं. रतुल पुरी अगस्ता वेस्टलैंड मामले में जांच के घेरे में हैं. रतुल पुरी पर उनकी कंपनी के जरिए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है.


वही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने भांजे रतुल पुरी के व्यापार से अपना कोई संबंध नहीं बताते हुए मंगलवार को कहा कि पुरी की गिरफ्तारी दुर्भावना से प्रेरित है और देश की संस्थाओं का राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है। पुरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार देर रात धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर यहां मानस भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुरी की गिरफ्तारी के सवाल पर संवाददाताओं से कहा, ''रतुल पुरी के व्यापार से मेरा कोई सम्बंध नहीं है..मेरा कोई संबंध कभी रहा भी नहीं है..पर ये जो गिरफ्तारी की गई है, मैं मानता हूं कि यह दुर्भावना से प्रेरित है..सब संस्थाओं का जिस तरह से राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा

उन्होंने आगे कहा, मुझे पूरा विश्वास है, अदालत इस पर सही फैसला करेंगी...यह सब जनता के सामने है। कभी चिदंबरम, कभी अहमद पटेल, कभी शिवसेना के नेताओं के, कभी उद्योगपतियो के पीछे.... यह देश कहां घसीटा जा रहा है..? मैं किसी बात की परवाह नहीं करता। दूसरी ओर, भाजपा की मध्यप्रदेश इकाई ने कहा है कि ईडी द्वारा पुरी के खिलाफ की गई कार्रवाई जांच के आधार पर है। 

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने पीटीआई भाषा को बताया कि देश का धन लूटने में शामिल लोगों को किसी के संबंधी होने के बावजूद जांच से मुक्त नहीं होने दिया जाएगा। मालूम हो कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को ईडी ने 354 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है।



   


मध्यप्रदेश में देव मुरारी बाबू ने सरकार के आश्वासन के बाद मरने का इरादा छोड़ा

भोपाल. मध्यप्रदेश में एक से बढ़कर एक बाबा हैं। सियासी गलियारों में इनकी दखलअंदाजी भी खूब है। कुर्सी के लिए रविवार को देव मुरारी बापू नाम के बाबा ने सोमवार को सीएम कमलनाथ के आवास के बाहर खुदकुशी करने का ऐलान किया था। बाबा की धमकी के आगे कमलनाथ की सरकार ने सरेंडर कर दिया है। सरकार बाबा को मलाई देने का वादा किया तो बाबा ने मरने का इरादा छोड़ दिया है।


 


दरअसल, रविवार के दिन मीडिया के सामने कथावाचक देव मुरारी बापू प्रकट हुए। प्रकट होकर देव मुरारी बापू ने कहा कि हमने चुनावों के दौरान कांग्रेस के लिए काम किया था। लेकिन सरकार से मुझे इनाम नहीं मिला। सरकार मुझे गौ संवर्धन बोर्ड का अध्यक्ष बनाए। कमलनाथ जी से मिलकर मैंने 15 अगस्त तक का अल्टीमेटम भी दिया था। लेकिन उन्होंने पीसी शर्मा के हवाले मामला कर दिया। उसके बाद मैं खुदकुशी का फैसला लिया हूं।


 


बाबा ने छोड़ दिया इरादा
कथावाचक देव मुरारी बापू सोमवार को मीडिया के सामने आकर कहा कि कमलनाथ जी ने हमारी मांग को स्वीकार कर लिया है। गौ संवर्धन बोर्ड अभी राज्य में गठित नहीं है, इसलिए हमें दूसरे किसी जगह पर मान-सम्मान देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सीएम के प्रतिनिधि के रूप में मंत्री पीसी शर्मा ने आकर हमसे मुलाकात की। उन्होंने जल्द ही कहीं सम्मानजनक पद देने का आश्वासन दिया है।

बॉडीगार्ड भी मिले
बाबा के बारगेनिंग के आगे मध्यप्रदेश की सरकार पूरी तरह से झुक गई है। बाबा ने सुरक्षा की मांग भी सरकार से की थी। मरने का इरादा छोड़ने वाले देव मुरारी बापू ने कहा कि मुझे सुरक्षा प्रदान कर दी गई है। ऐसे में अगर सरकार ने मेरे मान-सम्मान का ख्याल रखा है तो मैं भी सरकार के मान-सम्मान का ख्याल रखूंगा। इसीलिए हमने अब अपने कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है।

kamal nath government

 

मिर्ची बाबा ने भी किया था नौटंकी
लोकसभा चुनावों के दौरान मिर्ची बाबा ने भी ऐसे ही नौटंकी किया था। उन्होंने कहा था कि मैं दिग्विजय सिंह के चुनाव हारने के बाद जल समाधि ले लूंगा। उनके चुनाव हारने के बाद बाबा गायब हो गए थे। फिर जब वापस लौटे तो खुदकुशी करने का नौटंकी करने लगे। बाद में बाबा भोपाल में नाटक कर राजनीतिक सीन से गायब हो गए। लेकिन इस दौरान मिर्ची बाबा ने चर्चा खूब बटोरी।

kamal nath government

 

कंप्यूटर बाबा को भी मिला है इनाम
नर्मदा न्यास बोर्ड के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा को भी कमलनाथ की सरकार ने इनाम दिया है। बाबा ने भी चुनावों के दौरान कांग्रेस के लिए प्रचार किया था। बाबा ने पद संभालने के बाद कांग्रेस की सरकार से और भी डिमांड की थी। लेकिन अभी वो डिमांड पूरी नहीं हुई है। लेकिन कंप्यूटर बाबा ने छाए जरूर रहते हैं और मध्यप्रदेश की सरकार के समक्ष अपनी ख्वाहिशें जाहिर करते रहते हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री यानि कमलनाथ जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने वाले है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक व्यक्ति एक पद के फॉर्मूले के अनुसार कमलनाथ पीसीसी चीफ अध्यक्ष पद से जल्द ही मुक्त होने वाले हैं। वहीं, 22 अगस्त को दिल्ली में होने वाली राजीव गांधी के 75वें जयंती समारोह के बाद नए पीसीसी चीफ के नाम का ऐलान होगा।

प्रदेश के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सीएम कमलनाथ के पंसद के व्यक्ति को मिलेगी ताकि सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम हो सके। उन्होंने कहा की इसके लिए बाला बच्चन पीसीसी चीफ के लिए उपयुक्त चेहरा है।

सीएम कमलनाथ और सोनिया गांधी के बीच बातचीत के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद के नाम का ऐलान होगा। साथ ही सज्जन वर्मा ने कहा की 22 अगस्त को होने वाले राजीव गांधी की जयंती के आयोजन में मप्र कांग्रेस के सभी जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल होंगे।

भोपाल| कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए रायशुमारी के बाद शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात कर इस बारे में जानकारी दी। इससे पहले रायशुमारी के दौरान उन्होंने कई नेताओं से चर्चा कर फीडबैक लिया। बावरिया ने दिनभर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की और उनसे संगठन की स्थिति के बारे में पूछा। जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन की गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने सभी से पूछा कि प्रदेश अध्यक्ष में क्या खूबी होना चाहिए। अध्यक्ष के रूप में उनकी पसंद के बारे में भी पूछा गया। वे आभा सिंह, सुरेंद्र चौधरी, मोहम्मद सलीम, यादवेंद्र सिंह, विनोद डागा आदि से मिले। शाम लगभग साढ़े 7 बजे उन्होंने सीएम से मुलाकात की। इस दौरान उनके बीच संगठन को लेकर चर्चा हुई। 

MARI themes

Powered by Blogger.