मंथन न्यूज दिल्ली राज्यसभा में तीन तलाक बिल बुधवार को पेश होगा और सरकार इस पर बहस भी कराएगी. पहले यह बिल मंगलवार को ही राज्यसभा में आना था, लेकिन विपक्षी दलों में आम राय नहीं हो पाने के कारण सरकार ने इसे मंगलवार को पेश करना उचित नहीं समझा. क्या बुधवार को तीन तलाक बिल के कानून बन पाने का रास्ता साफ होगा या नहीं?, इसको लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. मंगलवार की शाम को राज्यसभा के कार्य मंत्रणा समिति की इस बारे में बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका.

सरकार चाहती है कि लोकसभा में जिस तरह से यह बिल पास हुआ है, राज्यसभा भी उस बिल को बिना किसी बदलाव के ठीक उसी तरह पास करवा दे. इसे राष्ट्रपति के पास दस्तखत के लिए भेजा जा सके और यह फौरन कानून बन सके.

राज्यसभा की कार्यमंत्रणा समिति में सरकार ने विपक्षी पार्टियों को बताया कि यह बिल सरकार की प्राथमिकता में शामिल है और सरकार इसे हर हालत में जल्दी से जल्दी पास कराना चाहती है. विपक्षी पार्टियों की तरफ से सरकार को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला कि वह इस बिल को सेलेक्ट कमेटी भेजने या फिर इसमें कुछ संशोधन करने के लिए सदन में दबाव नहीं डालेंगे.

कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई विपक्षी दल ऐसे हैं जो सीधे सीधे इस बिल का विरोध तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि इस पर और विचार विमर्श करने के लिए इसे राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए. इन विपक्षी पार्टियों का तर्क है कि इस दिल में तीन तलाक की हालत में पति को 3 साल तक के लिए जेल भेजने का जो प्रावधान है वह गैर जरूरी है. इससे मामला सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझ जाएगा. विपक्षी नेताओं का कहना है कि सिविल मामले को क्रिमिनल मामला बनाना ठीक नहीं है, क्योंकि ऐसे कानून का दुरुपयोग भी हो सकता है.

सरकार का कहना है कि यह बेहद छोटा सा कानून है जोकि सुप्रीम कोर्ट के कहने पर बनाया जा रहा है और इसमें हर स्थिति से निपटने के लिए इंतजाम किए गए हैं.

सूत्रों के मुताबिक सरकार विपक्षी पार्टियों के इस असमंजस का फायदा उठाना चाहती है कि अगर वह बिल का विरोध करेंगे तो महिला विरोधी कहलाएंगे और उन पर कट्टरपंथी होने का आरोप भी लगेगा. कांग्रेस पार्टी पहले से ही लोकसभा में बहस के दौरान बार-बार शाहबानो के मामले का जिक्र होने की वजह से बैकफुट पर है और इस मामले में ज्यादा अड़ंगा नहीं लगाना चाहती. बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने साफ कहा कि इस बिल को लेकर सरकार के दोनों हाथों में लड्डू है अगर बिल पास होता है तो सरकार को इसका श्रेय मिलेगा और अगर विपक्षी पार्टियां इस बिल को पास नहीं होने देती हैं तो उन को बेनकाब करने का हमें मौका मिलेगा.

जानकारों के मुताबिक अगर सरकार इस बिल को बुधवार को पास नहीं करा पाती है और विपक्षी पार्टियां इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने पर जोर देती हैं तो सरकार इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने के लिए तैयार हो जाएगी. राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा बिल है जिसके पास नहीं हो पाने की हालत में भी सरकार इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी और इसका विरोध करने वालों को आगे आने वाले चुनाव में निशाना बनाएगी.

मंथन न्यूज़ दिल्ली पुणे के भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर हुई हिंसा की आरएसएस ने निंदा की है. आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा दुखद है. इस घटना के दोषियों को कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए.

RSS ने ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ ताकतें नफरत फैलाने का काम कर रही हैं. RSS के मनमोहन वैद्य ने जनता से अपील की है कि वो राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखें.

मायावती ने BJP-RSS को बताया जिम्मेदार

पुणे में हुई इस हिंसा के लिए बीएसपी नेता मायावती ने बीजेपी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा पर बयान दिया कि इस घटना को रोका जा सकता था. सरकार को वहां सुरक्षा की उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी. वहां बीजेपी की सरकार है और उन्होंने वहां हिंसा करवाई. लगता है इसके पीछे बीजेपी, आरएसएस और जातिवादी ताकतों का हाथ है.

बता दें कि पुणे में 200 साल पुराने भीमा-कोरेगांव युद्ध की बरसी को लेकर जातीय संघर्ष छिड़ गया है. यहां के भीमा-कोरेगांव में सोमवार को बरसी पर हुए कार्यक्रम के दौरान हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे. जगह-जगह हिंसक प्रदर्शनोंके चलते यहां सुरक्षा बढ़ा दी गई. विरोध प्रदर्शन की वजह से मुंबई के कई हिस्सों में धारा 144 लगा दी गई. राज्य में विभिन्न जगहों से 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और इस बीच भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वाहन कर दिया.

मेवानी-खालिद के खिलाफ शिकायत

पुणे के दो युवा अक्षय बिक्कड और आनंद डॉन्ड ने पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में विधायक जिग्नेश मेवानी और जेएनयू के छात्र उमर खालिद के खिलाफ लिखित में शिकायत देकर FIR दर्ज करने की मांग की. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद हिंसा भड़की. शिकायतकर्ताओं की मानें तो भाषण के दौरान जिग्नेश मेवानी ने एक खास वर्ग को सड़क पर उतर कर विरोध करने के लिए उकसाया, जिसके बाद लोग सड़क पर उतर आए और फिर धीरे-धीरे भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया. शिकायतकर्ताओं के मुताबिक पुणे हिंसा के लिए ये दोनों जिम्मेदार हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री ने किया 10 लाख मुआवजे का ऐलान

इस बारे में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे. हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी. कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई. इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा.

आखिर क्या है भीमा कोरेगांव की लड़ाई

बता दें कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में हुई थी. यह लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था.

हर साल नए साल के मौके पर महाराष्ट्र और अन्य जगहों से हजारों की संख्या में पुणे के परने गांव में दलित पहुंचते हैं, यहीं वो जयस्तंभ स्थित है जिसे अंग्रेजों ने उन सैनिकों की याद में बनवाया था, जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई थी. कहा जाता है कि साल 1927 में डॉ. भीमराव अंबेडकर इस मेमोरियल पर पहुंचे थे, जिसके बाद से अंबेडकर में विश्वास रखने वाले इसे प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर देखते हैं.

Image result for manthan news photoपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ शिवपुरी -जिला पंचायत सीईओ नीतू माथुर के तबादले के बाद प्रभार ब्रम्हेन्द्र गुप्ता को सौंपा गया है। शनिवार को उस समय खासा हंगामा हो गया, जब चेंबर में सीईओ गुप्ता मौजूद थे और इसी मौके पर उनके दो अधीनस्थ अधिकारी आपस में जमकर उलझ बैठे। हालात नौंकझौंक से बढ़कर हाथापाई तक जा पहुंचे थे तभी प्रभारी सीईओ ने हाथ जोड़कर दोनों को चुप कराया और चेंबर से बाहर जाने की हिदायत दी। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान तेज आवाज में नोकझोंक हो रही थी, अन्य कर्मचारी यह आवाज सुनकर चेंबर के बाहर जमा हो गए थे। जैसे-तैसे स्थिति संभाली जा सकी और मामला शांत हुआ। दरअसल वरिष्ठ लेखा अधिकारी नीरज विजयवर्गीय और सामाजिक न्याय विभाग के लिपिक शिवकुमार सोनी के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई थी, तमाशा खड़ा हो गया। इधर प्रभारी सीईओ ब्रम्हेंद्र गुप्ता का कहना है कि हल्की नोकझोंक हुई थी। इसके बाद दोनों को समझाया गया था और मामला शांत हो गया था।

shivraj nandkumar 31 12 2017पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़  भोपाल -साल 2018 मप्र के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा। मप्र की जनता साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में नई सरकार चुनेगी। इसके लिए सरकार, भाजपा और कांग्रेस पूरे साल अपने आप को झोंक देंगे। इस साल चौंकाने वाले राजनीतिक घटनाक्रम घटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के साथ-साथ चुनाव के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की जमावट और लोगों को ज्यादा से ज्यादा राहत देने पर फोकस करेगी।
सरकार की बदलेगी शक्ल, होगा विस्तार
नए साल के शुरुआती सप्ताह में शिवराज मंत्रिमंडल की शक्ल बदल सकती है। हालांकि यह काम दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ही हो जाना था, लेकिन दिल्ली से हरी-झंडी नहीं मिल पाने से इसे कुछ समय के लिए आगे बढ़ाना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी तरफ से विस्तार की तैयारी कर रखी है।
पिछले रविवार को वे दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे से मुलाकात कर चुके हैं। पहले 28 दिसंबर की तिथि तय हुई थी, जिसे आगे बढ़ा दिया गया। सूत्र बताते हैं कि चुनावी साल में पार्टी नेतृत्व चाहता है कि एक-एक कदम ठोक-बजाकर चला जाए। इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार काफी सोच-समझकर किया जा रहा है। पता चला है कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी इस बारे में बात कर ली है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो विस्तार जनवरी के पहले सप्ताह में हो जाएगा।
चुनावी रंग में रहेगी सरकार
नए साल में सरकार पूरी तरह से चुनाव रंग में रंगी रहेगी। नई योजना व कार्यक्रम घोषित होंगे तो समीक्षाओं का दौर भी तेजी से चलेगा। राजस्व विभाग जमीन के पट्टे युद्ध स्तर पर बांटेगा। समाधान एक दिन योजना की शुरुआत 14 जनवरी से होगी। बड़े वोट बैंक को देखते हुए रबी फसलों में भी भावांतर योजना तो डिफॉल्टर किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के दायरे में लाने समाधान योजना भी लागू होगी।
नाराज कर्मचारियों को मनाने के लिए सरकार बड़े निर्णय ले सकती है। सूखे की समस्या से निपटना, पेयजल व्यवस्था बनाना, स्मार्ट सिटी व मेट्रो रेल परियोजना को पटरी पर लाने के साथ बजट प्रबंधन बड़ी चुनौती रहेगी। चुनावी साल होने से बजट में लोकलुभावनी घोषणाएं हो सकती हैं।
प्रशासनिक स्तर पर होगा भारी उलटफेर
चुनावी साल के मद्देनजर प्रशासनिक दृष्टिकोण से बड़े बदलाव होंगे। नए मुख्य सचिव नियुक्त होंगे तो कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की सेवाएं केंद्र को सौंपी जा सकती हैं। 10 नए प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी मिलने के बाद मंत्रालय में जिम्मेदारियां नए सिरे से तय होंगी।
वहीं, भोपाल में डीआईजी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापनाएं होंगी। कुछ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों की छुट्टी हो सकती है। तीन साल से ज्यादा एक स्थान पर जमे अधिकारियों की चुनाव आयोग के निर्देश पर बदली भी होगी। चुनावी साल के दृष्टिगत तबादला नीति जारी करने से सरकार पीछे हट सकती है। पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे का तोड़ निकालने के लिए नए नियम भी लागू किए जा सकते हैं।
चुनौतियों से पार पाना होगा कांग्रेस
वर्ष 2018 में कांग्रेस को संगठन से लेकर जमीन तक पर कई चुनौतियों का सामना करना है। संगठन में प्रदेश कांग्रेस में छाई अनिश्चितता की स्थिति को आम कार्यकर्ता के दिलो-दिमाग से दूर करना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हो या विधानसभा चुनाव में चेहरा घोषित करने या गुजरात तर्ज पर अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दिग्गजों को दिए जाने के लिए तैयार करना भी नेतृत्व के सामने बड़ा काम है।
अभा कांग्रेस के महासचिव व प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया को संगठन में ब्लॉक से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी तक को नया रूप देना है। विधानसभा चुनाव में वही टीम काम करेगी तो जितना जल्दी हो, उसे बनाना आज की जरूरत है।
उपचुनाव-नगरीय निकाय चुनावों में परीक्षा
प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 के पहले मुंगावली और कोलारस विधानसभा सीटों के उपचुनाव होना हैं तो जनवरी में नगरीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं। 15वीं विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव के पहले विधानसभा उपचुनाव व नगरीय निकाय चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए सेमीफाइनल हैं।
इन क्षेत्रों में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा प्रभाव है, लेकिन सीएम से लेकर कई मंत्री-विधायक व संगठन के पदाधिकारियों की टीम के सक्रिय होने से सिंधिया के लिए भी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं धार, बड़वानी, खंडवा, गुना, शिवपुरी व अनूपपुर में नगरीय निकाय चुनाव भी भाजपा व कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव 2018 का ट्रायल रन साबित होंगे।
कार्यकर्ताओं को साधते हुए सत्ता बरकरार रखने की चुनौती
भारतीय जनता पार्टी के लिए साल 2018 की सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करना है। पिछले कुछ सालों में भाजपा के लिए कार्यकर्ताओं की नाराजगी सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरी है। ऐसे में विधानसभा उपचुनावों में इस नाराजगी को दूर करते हुए सत्ता को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि अमित शाह की घोषणा के मुताबिक मौजूदा नेतृत्व ही चुनाव की कमान संभालेगा या किसी बहाने मप्र से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय स्तर के नेताओं को चुनावी नैया पार लगाने के लिए मप्र भेजा जाएगा। इसके अलावा आने वाले दिनों में कोलारस और मुंगावली विधानसभा उपचुनावों में भी पार्टी का लिटमस टेस्ट होना है।

मंथन न्यूज
जम्मू-कश्मीर में सेना का ऑपरेशन ऑलआउट जारी है, इसके बावजूद पुलवामा में फिदायीन आतंकी हमला हुआ. कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मोदी सरकार पर सेना के प्रति रवैये को लेकर हमला बोला है.

संदीप दीक्षित का कहना है कि एक बात तो साबित हो गई है कि सरकार की नीति, खासकर सर्जिकल स्ट्राइक के जो इनके नाटकीय प्रदर्शन रहे हैं, उसका कोई असर नहीं हो पाया है. हमें दूसरे तरीके से सोचना होगा और मुझे नहीं लगता है कि सरकार के बस में है कि सेनाओं को सुरक्षित रख सकें.

आपको बता दें कि 2017 के आखिरी दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हुआ. इस आतंकी हमले में 5 जवान शहीद हुए, जबकि 3 आतंकियों को मार गिराया गया. जिस बिल्डिंग में हमला हुआ था उसे रविवार रात को ही उड़ा दिया गया था, अब सोमवार सुबह से ही आर्मी वहां पर सर्च ऑपरेशन चला रही है.

गौरतलब है कि रविवार तड़के हुए इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए मोहम्मद ने ली थी. देर शाम जिस इमारत में तीसरा आतंकी छिपा हुआ था, उसका ऊपरी हिस्सा उड़ा दिया गया है. इसके बाद से फायरिंग रुकी हुई थी.

हुआ था सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2!

अभी हाल ही में भारतीय सेना के कमांडो ने पाकिस्तान को उसकी हद में घुसकर धूल चटाने का कारनामा किया था. जम्मू-कश्मीर में पुंछ सेक्टर के पास रावलकोट इलाके में कमांडो ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार की और खास प्लानिंग के साथ दुश्मन सेना को परास्त किया. भारतीय सेना ने 48 घंटे के अंदर बॉर्डर वाले बदले से पाकिस्तान को जो ट्रेलर दिखाया, उससे पाकिस्तान भी सकते में आ गया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने 4 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया था.

 दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहली बार भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज को लेकर बयान दिया। पार्लियामेंट्री पैनल की मीटिंग के दौरान सुषमा ने कहा कि जबतक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंक फैलाना और सैनिकों पर फायरिंग करना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच क्रिकेट सीरीज की कोई संभावना नहीं है। मीटिंग में विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर और विदेश सचिव एस जयशंकर भी शामिल थे। 

 

न्यूट्रल वेन्यू पर भी नहीं खेली जाएगी सीरीज

- न्यूट्रल वेन्यू (भारत-पाकिस्तान के अलावा किसी देश में) में सीरीज रखने के एक सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा जबतक पाकिस्तान आतंकियों का खात्मा और सीमापार से गोलीबारी बंद नहीं करता है तब तक एेसी किसी सीरीज की संभावना नहीं है।
- उन्होंने साफ किया कि क्रिकेट और आतंक साथ-साथ नहीं चल सकते।   

 

5 साल से नहीं हुई कोई सीरीज

- भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी सीरीज 2012-13 के दौरान खेली गई थी। भारत में खेली गई 3 मैचों की वनडे सीरीज पाकिस्तान ने 2-1 से जीता था। 

 

पाकिस्तान के सामने उठाया कैदियों को छोड़ने का मुद्दा

- मीटिंग में विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के राजदूत के साथ अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। स्वराज ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के सामने 70 साल की उम्र से ज्यादा के कैदियों या महिलाओं या दिमागी रूप से बीमार लोगों को मानवीय आधार पर छोड़ने का प्रस्ताव रखा है। 
- मीटिंग में मौजूद एक मेंबर के मुताबिक, मीटिंग का एजेंडा ‘रिलेशनशिप विद द नेबरहुड’ (पड़ोसी के साथ रिश्ता) रखा गया था। 

 

चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल में हुआ था सामना

- भारत और पाकिस्तान आखिरी बार चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में आमने-सामने आए थे। 
- इस मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को हराकर ट्राफी पर कब्जा जमाया था।

मंथन न्यूज़ साल 2017 के आखिरी दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने नए साल के जश्न को थोड़ा फीका कर दिया, लेकिन इस हमले को हमारे साहसी सैनिकों के अदम्य साहस ने ज्यादा कामयाब होने नहीं दिया. हालांकि हमले में 5 सैनिक शहीद हो गए. वहीं दो आतंकियों को मार गिराया गया.

हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद ने ली. 31 दिसंबर को जिस चार मंजिला इमारत में फिदायीन हमला किया गया उसे रविवार रात को ही उड़ा दिया गया था. हमले में मारे गए 2 फिदायीनों में एक की शिनाख्त होने पर सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए. फिदायीन हमले में मारा गया एक आतंकी पुलिस कांस्टेबल का बेटा निकला.

IG की सुरक्षा से बाहर किया गया

इस नए खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है. मारा गया फिदायीन पुलिस कांस्टेबल गुलाम मोहम्मद खांडे का बेटा है. कांस्टेबल खांडे को कुछ महीने पहले तक आईजी कश्मीर मुनीर खान की सुरक्षा में लगाया गया था. मुनीर को हाल ही में तरक्की मिली और एडीजी रैंक के अधिकारी बने थे.

हालांकि कुछ समय बाद पुलिस कांस्टेबल खांडे के बेटे के आतंकी संगठन के साथ जुड़ने के सुराग मिलने पर उनको मुनीर की सुरक्षा टीम से हटा दिया गया था. किसी भी तरह विवाद से बचने के लिए खांडे को सुरक्षा से हटाया गया था. मुनीर ने आशंका जताई थी कि ऐसे सैकड़ों युवा आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं.

पुलवामा हमले में मारे गए कांस्टेबल के फिदायीन बेटे का नाम फरदीन अहमद खांडे है. जैश का यह आतंकी महज 17 साल का है. तीन महीने पहले ही उसने आतंक की राह चुनी. इन तीन महीनों में ही उसका ब्रेन वॉश इस कदर कर दिया गया कि वह फिदाइन बन गया. फरदीन दसवीं में पढ़ाई करता था. फरदीन हिजबुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी के गांव त्राल का ही रहने वाला था. दूसरे फिदाइन की शिनाख्त मंजूर बाबा के रूप में हुई है. उसकी उम्र 22 थी. मंजूर दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का ही रहने वाला था. तीसरा आतंकी देर शाम तक इमारत में छिपा हुआ था.

14 साल बाद पहला ऐसा मौका

कश्मीर में 2003 के बाद यह पहला मौका है जब कोई स्थानीय नागरिक आतंकी फिदायीन बना है. कश्मीर के युवाओं को आतंक के रास्ते से हटाने के लिए सेना ने बीते कई वर्षों से तमाम प्रोत्साहन योजनाएं चलाईं, लेकिन स्थानीय आतंकी के फिदायीन बनने के इस खुलासे ने सबकी नींद उड़ा दी है.

जैश के फिदायीन आतंकी कड़ाके की ठंड के बीच रविवार देर रात कैंप में घुसे थे. आतंकियों ने पहले यहां ग्रेनेड से हमला किया और इसके बाद अंधाधुंध फायिरंग शुरू कर दी. सीआरपीएफ जवानों ने जवाबी कार्रवाई की तो आतंकी कैंप में बनी एक इमारत में घुस गए. जहां आतंकी छुपे हुए थे, वो वो चार मंजिला इमारत है. इस बिल्डिंग में सीआरपीएफ सेंटर का एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक है, जहां कंट्रोल रूम भी है. ये भी जानकारी मिली आई कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस कैंप पर फिदायीन हमले की स्पेसिफिक चेतावनी दी थी.

MARI themes

Powered by Blogger.