यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथअयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई देश की सर्वोच्च अदालत में चल रही है. कोर्ट के फैसले के बाद ही ये तय हो पाएगा कि यहां मंदिर निर्माण होगा या नहीं. लेकिन अयोध्या को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपनी योजना है.
बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद यूपी की कमान संभाल रहे योगी आदित्यनाथ ने आजतक के शो 'सीधी बात' में श्वेता सिंह के सवालों का जवाब दिया. इस दौरान जब उनसे अयोध्या में सरयू किनारे श्री राम की प्रतिमा को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अयोध्या को लेकर अपना प्लान बता डाला.
योगा आदित्यनाथ ने अपने जवाब में कहा, 'अयोध्या में हम बहुत कुछ करने जा रहे हैं. बहुत कुछ अयोध्या में होने जा रहा है. वो हमारे लिए महत्वपूर्ण है.'
उन्होंने आगे कहा ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि इस देश की जिन सात पवित्र नगरी को शास्त्रों ने मान्यता दी है, उनमें अयोध्या, मथुरा और काशी तीनों उत्तर प्रदेश में हैं.
योगी ने कहा, 'देश की भावनाओं का प्रतिनिधित्व हमारी पवित्र नगरियां करती हैं. साथ ही ये देश और दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल हैं. पर्यटन के साथ तीर्थाटन को भी आगे बढ़ाने के लिए अयोध्या, मथुरा और काशी में हम कार्यक्रम करते हैं.'
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन कुंभ का होता है. महाकुंभ का आयोजन यूपी की धरती पर होता है. यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों में कुंभ को मान्यता दी है और 2019 में कुंभ का भी आयोजन होना है.'

युवाओं को खुशखबरीः मध्य प्रदेश में जल्द होगी 89,000 से अधिक पदों पर भर्तीमंथन न्यूज़ भोपाल -मध्य प्रदेश की भाजपानीत सरकार इस साल नवंबर-दिसंबर में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विभिन्न विभागों में 89,000 से अधिक पदों पर नियुक्ति के लिए आगामी कुछ महीनों में भर्ती करेगी। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गयी है ।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति में कल कहा गया है, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 89,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियों के लिये इस वर्ष अगले कुछ महीनों में भर्तियाँ की जायेंगी। इसमें हालांकि, यह नहीं बताया है कि ये भर्तियों किस-किस तिथि को होंगी।       

गौरतलब है कि बजट सत्र के दौरान विधानसभा में सरकार की तरफ से पेश किये गये आंकड़े के अनुसार पिछले 14 साल (वर्ष 2004 से वर्ष 2017 तक) मध्यप्रदेश में भाजपनीत सरकार के शासनकाल के दौरान 19,226 सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुई हैं, जो औसतन प्रतिवर्ष केवल 1,373 बैठती हैं

'कांग्रेस मुक्त भारत' महज एक राजनीतिक नारा : भागवतमंथन न्यूज़ दिल्ली -आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संघ के समावेशी चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा महज एक राजनीतिक नारा है और यह संघ की भाषा बिल्कुल नहीं है।
1983 बैच के आइआरएस अधिकारी और विदेश मंत्रालय में सचिव (काउंसलर, पासपोर्ट, वीजा और ओवरसीज इंडियन अफेयर्स) दयानेश्वर मुले की छह किताबों के विमोचन अवसर पर संघ प्रमुख ने कहा कि 'मुक्त' शब्द का इस्तेमाल राजनीति में किया जाता है। संघ कभी भी किसी को छोड़ने की भाषा का इस्तेमाल नहीं करता।
संघ देश निर्माण की प्रक्रिया में सभी को शामिल करना चाहता है और इनमें वे भी शामिल हैं जो संघ का विरोध करते हैं। मालूम हो कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि वह महात्मा गांधी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के सपने को साकार करना चाहते हैं। उन्होंने देश की इस सबसे पुरानी पार्टी पर सत्ता में रहते हुए देश के विकास की कीमत पर गांधी परिवारी की स्तुति करने का आरोप भी लगाया था।
बदलाव लाने के लिए सकारात्मक विचारधारा पर बल देते हुए भागवत ने कहा कि नकारात्मक विचारधारा वाले लोग सिर्फ संघर्ष और विभाजन के बारे में ही सोच सकते हैं। ऐसे लोग देश निर्माण की प्रक्रिया के लिए कतई उपयोगी नहीं हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि अगर किसी को खुद पर, अपने परिवार पर और देश पर भरोसा है, वही व्यक्ति देश निर्माण की समावेशी प्रक्रिया की दिशा में कार्य कर सकता है।

indo china relation 201841 172024 01 04 2018मंथन न्यूज़ दिल्ली -डोकलाम विवाद के बाद भारत ने चीन सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। बीजिंग की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए सामरिक रूप से महत्वूपर्ण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है। पिछले साल डोकलाम में भारत और चीन की सेना में तनातनी का दौर लंबा चला था। दोनों ओर की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं।
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी बेहद चाकचौबंद कर लिया है। इन क्षेत्रों की टोह लेने के लिए नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों से भी गश्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी जैसे दुर्गम इलाकों में अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। इन इलाकों में 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और नदियां हैं। इन क्षेत्रों से लगती सीमाओं पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव की काट के तौर पर भारत ने यह रणनीति अपनाई है।
अहम सामरिक इलाकों पर भी ध्यान
चीन के तिब्बती क्षेत्र से लगते अरुणाचल के गांव किबिथू में तैनात सेना के एक अधिकारी का कहना है, "डोकलाम के बाद हमने सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत, चीन और म्यांमार के ट्राई जंक्शन समेत अहम सामरिक इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्त (लांग रेंज पेट्रोल्स) को बढ़ा रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिनों के लिए गश्त पर भेजी जाती है।
चीन तेजी से कर रहा निर्माण कार्य
सेना के उक्त अधिकारी ने बताया कि चीन, भारत की सीमा से सटे तिब्बती इलाके में तेजी से ढांचों का निर्माण कर रहा है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि भारत भी इन इलाकों में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाए, जिससे सेना की शीघ्रता के साथ आवाजाही हो सके। चीन, भारत से लगती करीब चार हजार लंबी सीमा पर सड़कों का जाल बिछा रहा है।
फुट सस्पेंशन ब्रिज से होती है सैन्य आपूर्ति
सेना को किबिथु पोस्ट तक सैन्य आपूर्ति के लिए फुट सस्पेंशन ब्रिज का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह लोहित नदी के पूर्वी और पश्चिमी किनारों को जोड़ने का एकमात्र रास्ता है। हालांकि सीमा सड़क संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिबांग और लोहित घाटी को जोड़ने समेत कई सड़कों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इनके निर्माण से अरुणाचल के इन क्षेत्रों में आवाजाही सुगम हो जाएगी।

police comissioner system mp 201841 15131 01 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्यप्रदेश में इन दिनों पुलिस कमिश्नर प्रणाली की चर्चाएं जोरों पर हैं। भोपाल के भौंरी स्थित मप्र पुलिस अकादमी के मंथन में इसका प्रस्ताव रखा गया और सप्ताहभर बाद ही कानून व्यवस्था की समीक्षा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव-पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के सामने इसे लागू करने की बात रखी। फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) व राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) अधिकारियों ने इसकी खामियां गिनाना शुरू कर दिया मगर अगले ही दिन प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने रणनीति के तहत चुप्पी साध ली।
अब आईपीएस व राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी भी इस पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। जब हमने इस ताजा मुद्दे पर कुछ आईपीएस अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने इससे स्वयं तो दूर रखने की बात कही। 1984 बैच के आईपीएस व पुलिस सुधार में विशेष पुलिस महानिदेशक मैथिलीशरण गुप्त बमुश्किल इसके कुछ पहलुओं पर बातचीत के लिए तैयार हुए। पेश है बातचीत के खास अंश...
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से क्या बदलाव होगा?
- आम जनता को राहत मिलेगी। उसका समय बचेगा।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली को आईएएस-आईपीएस यानी अलग-अलग दृष्टि से क्यों देखा जाता है?
- पुलिस कमिश्नर प्रणाली को आईएएस-आईपीएस की दृष्टि से बिलकुल नहीं देखा जाना चाहिए। प्रणाली कोई भी हो, उसे जनता, अपराधी और व्यवस्था को देखकर अपनाया जाना चाहिए।
मौजूदा पुलिस सिस्टम में क्या कमी है?
- अभी जब अच्छा होता है तो कोई कुछ नहीं कहता। जब स्थिति बिगड़ती है तो जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होता। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से क्या इसमें सुधार होगा?
- इससे पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से पुलिस निरंकुश हो जाएगी तो जनता परेशान होगी?
- पुलिस में कर्मचारियों और अधिकारियों को सजा देने की सख्त व्यवस्था है। इससे पुलिस पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
आप पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर ज्यादा बात करने को तैयार नहीं हैं तो आप होमगार्ड में भी रहे हैं और वहां आपके खिलाफ नगर सैनिकों ने बगावत क्यों की थी?
- होमगार्ड में सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर नियम के विपरीत काम हो रहा था। तब मेरी व गृह सचिव की सदस्यता वाली कमेटी ने नियम बनाए, जिन्हें स्वार्थी तत्वों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर भ्रामक प्रचार किया था। जबकि कमेटी ने नियम के मुताबिक नगर सैनिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र 41 साल से बढ़ाकर 50 साल करने और मौजूदा नगर सैनिकों की सेवानिवृत्ति 60 साल में ही करने की सिफारिश की थी। मगर अमल वाली वरिष्ठ सचिव स्तरीय कमेटी ने 41 साल से ज्यादा उम्र के नगर सैनिकों को तीन साल में सेवानिवृत्त करने व सेवानिवृत्ति आयु 41 साल करने का फैसला किया। इसका भ्रामक प्रचार किए जाने से बगावत हुई।
आपने इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री को नहीं बताया?
- मैंने मुख्यमंत्री से समय मांगा था और इससे जुड़े सही तथ्यों के दस्तावेज भी तैयार थे। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री को जब भी समय मिलेगा तो मुझे अवश्य देंगे।
सबड़े मुद्दे पर चुप्पी भी बड़ी
1981 के बाद फिर सुर्खियों में आई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर नौकरशाहों ने एक- दो दिन तो चर्चा की लेकिन अब न प्रशासनिक अफसर कुछ बोलने को तैयार हैं तो न पुलिस अधिकारी। आईएएस अधिकारी तो कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक के बाद से ही इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे हैं मगर उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को चुपके से आगे कर दिया। समीक्षा बैठक के अगले दिन राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की बैठक हुई और उसमें पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर बातचीत भी हुई। बैठक के बाद पदाधिकारियों ने यहां तक कहा कि अभी पुलिस कमिश्नर प्रणाली का मसौदा तो बने फिर बात करेंगे। वहीं आईपीएस अधिकारी एक-दो दिन मुखर रहे लेकिन अब उन्होंने भी इस मुद्दे पर मौन धारण कर लिया है। हालांकि पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के फायदे गिनाने से आज भी वे पीछे नहीं हटते। पुलिस अफसर इसको लेकर सकारात्मक हैं कि मुख्यमंत्री पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर गंभीर हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अप्रैल महीने में भोपाल-इंदौर में यह लागू हो सकती है।

cm e attandance 201841 141142 01 04 2018मंथन न्यूज़ -स्कूल शिक्षा विभाग में सोमवार से अनिवार्य रूप से लागू होने वाली ई-अटेंडेंस व्यवस्था स्थगित कर दी गई है। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस व्यवस्था को स्थगित करने की घोषणा की है। कर्मचारी नेता सेवानिवृत्ति आयुसीमा 60 से बढ़ाकर 62 साल करने पर मुख्यमंत्री का सम्मान करने सीएम हाउस पहुंचे थे।
विभाग दो साल से ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है। इस बार विभागीय मंत्री विजय शाह सख्त थे। विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री ने नए शैक्षणिक सत्र (दो अप्रैल) से इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद विभाग ने ताबड़तोड़ कार्यवाही की और इसे लेकर हाईकोर्ट की सभी बेंच में कैविएट भी दायर की। उधर, अध्यापक और शिक्षक इसके खिलाफ खुलकर आ गए थे। इसे लेकर आंदोलन की तैयारी हो गई थी। राज्य कर्मचारी कल्याण परिषद के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने यह बात जब मुख्यमंत्री को बताई तो सीएम ने रविवार को इसकी घोषणा कर दी। 'नवदुनिया" ने रविवार के अंक में इसकी संभावना भी जताई थी। 
ई-अटेंडेंस लागू करने का कारण 
विभाग ई-अटेंडेंस खासकर अध्यापकों को लेकर लागू करना चाहता है। विभाग के मुताबिक प्रदेश में 45 फीसदी से अधिक अध्यापक नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रहे हैं। मैदानी रिपोर्ट आने के बाद से ही विभाग ई-अटेंडेंस लागू करने की कोशिशों में जुटा है, लेकिन अध्यापकों के विरोध के चलते सफल नहीं हो पा रहा।

भोपाल : रविवार, अप्रैल 1,
जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सात दिवसीय पंजीयन अभियान का शुभारंभ किया। डॉ. मिश्र ने इस मौके पर लोगों का आव्हान किया कि प्रत्येक नागरिक अपने मोहल्ले, बस्ती और ग्राम के श्रमिकों के पंजीयन फार्म भरवाने में सहयोग करे। कार्यक्रम में श्री विक्रम सिंह बुन्देला सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रशासन और मीडिया का सम्मान : दतिया के रावतपुरा कॉलेज में जिले के अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि दतिया में जनकल्याण और विकास की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है। अपराधों पर नियंत्रण कायम हुआ है। पर्यटन विकास के लिये सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में चार धाम स्थापित कर धार्मिक पर्यटन बढ़ाने की पहल हुई है। माँ पीताम्बरा मंदिर के साथ ही उनाव बालाजी, रतनगढ़ और सनकुआ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है

MARI themes

Powered by Blogger.