पुलिस कमिश्नर प्रणाली : जनता को मिलेगी राहत, पुलिस होगी जिम्मेदार

police comissioner system mp 201841 15131 01 04 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्यप्रदेश में इन दिनों पुलिस कमिश्नर प्रणाली की चर्चाएं जोरों पर हैं। भोपाल के भौंरी स्थित मप्र पुलिस अकादमी के मंथन में इसका प्रस्ताव रखा गया और सप्ताहभर बाद ही कानून व्यवस्था की समीक्षा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव-पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के सामने इसे लागू करने की बात रखी। फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) व राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) अधिकारियों ने इसकी खामियां गिनाना शुरू कर दिया मगर अगले ही दिन प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने रणनीति के तहत चुप्पी साध ली।
अब आईपीएस व राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी भी इस पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। जब हमने इस ताजा मुद्दे पर कुछ आईपीएस अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने इससे स्वयं तो दूर रखने की बात कही। 1984 बैच के आईपीएस व पुलिस सुधार में विशेष पुलिस महानिदेशक मैथिलीशरण गुप्त बमुश्किल इसके कुछ पहलुओं पर बातचीत के लिए तैयार हुए। पेश है बातचीत के खास अंश...
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से क्या बदलाव होगा?
- आम जनता को राहत मिलेगी। उसका समय बचेगा।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली को आईएएस-आईपीएस यानी अलग-अलग दृष्टि से क्यों देखा जाता है?
- पुलिस कमिश्नर प्रणाली को आईएएस-आईपीएस की दृष्टि से बिलकुल नहीं देखा जाना चाहिए। प्रणाली कोई भी हो, उसे जनता, अपराधी और व्यवस्था को देखकर अपनाया जाना चाहिए।
मौजूदा पुलिस सिस्टम में क्या कमी है?
- अभी जब अच्छा होता है तो कोई कुछ नहीं कहता। जब स्थिति बिगड़ती है तो जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होता। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से क्या इसमें सुधार होगा?
- इससे पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली से पुलिस निरंकुश हो जाएगी तो जनता परेशान होगी?
- पुलिस में कर्मचारियों और अधिकारियों को सजा देने की सख्त व्यवस्था है। इससे पुलिस पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
आप पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर ज्यादा बात करने को तैयार नहीं हैं तो आप होमगार्ड में भी रहे हैं और वहां आपके खिलाफ नगर सैनिकों ने बगावत क्यों की थी?
- होमगार्ड में सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर नियम के विपरीत काम हो रहा था। तब मेरी व गृह सचिव की सदस्यता वाली कमेटी ने नियम बनाए, जिन्हें स्वार्थी तत्वों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर भ्रामक प्रचार किया था। जबकि कमेटी ने नियम के मुताबिक नगर सैनिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र 41 साल से बढ़ाकर 50 साल करने और मौजूदा नगर सैनिकों की सेवानिवृत्ति 60 साल में ही करने की सिफारिश की थी। मगर अमल वाली वरिष्ठ सचिव स्तरीय कमेटी ने 41 साल से ज्यादा उम्र के नगर सैनिकों को तीन साल में सेवानिवृत्त करने व सेवानिवृत्ति आयु 41 साल करने का फैसला किया। इसका भ्रामक प्रचार किए जाने से बगावत हुई।
आपने इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री को नहीं बताया?
- मैंने मुख्यमंत्री से समय मांगा था और इससे जुड़े सही तथ्यों के दस्तावेज भी तैयार थे। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री को जब भी समय मिलेगा तो मुझे अवश्य देंगे।
सबड़े मुद्दे पर चुप्पी भी बड़ी
1981 के बाद फिर सुर्खियों में आई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर नौकरशाहों ने एक- दो दिन तो चर्चा की लेकिन अब न प्रशासनिक अफसर कुछ बोलने को तैयार हैं तो न पुलिस अधिकारी। आईएएस अधिकारी तो कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक के बाद से ही इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे हैं मगर उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को चुपके से आगे कर दिया। समीक्षा बैठक के अगले दिन राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की बैठक हुई और उसमें पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर बातचीत भी हुई। बैठक के बाद पदाधिकारियों ने यहां तक कहा कि अभी पुलिस कमिश्नर प्रणाली का मसौदा तो बने फिर बात करेंगे। वहीं आईपीएस अधिकारी एक-दो दिन मुखर रहे लेकिन अब उन्होंने भी इस मुद्दे पर मौन धारण कर लिया है। हालांकि पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के फायदे गिनाने से आज भी वे पीछे नहीं हटते। पुलिस अफसर इसको लेकर सकारात्मक हैं कि मुख्यमंत्री पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर गंभीर हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अप्रैल महीने में भोपाल-इंदौर में यह लागू हो सकती है।