मंथन न्यूज़ -सेंट्रल जेल भोपाल से सिमी के आठ कैदियों के फरार होने के बाद जेल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए हाई सिक्युरिटी यूनिट गठित होगी। इसके लिए जेल विभाग ने 130 अधिकारी और प्रहरी के नए पद बनाने का प्रस्ताव दिया था पर वित्त विभाग इससे सहमत नहीं था।
कैबिनेट में वित्त विभाग के अधिकारियों ने कहा कि 17 पद काफी हैं पर मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को खारिज कर दिया। उन्होंने जेल विभाग के प्रस्ताव को जायज करार देते हुए मात्र दस पद कम करते हुए 120 पदों को मंजूरी दे दी।
narottam mishra 03 04 2018इसी तरह बरसों से इंदौर प्रेस क्लब के भवन को लेकर चले आ रहे विवाद का भी मंगलवार को पटाक्षेप हो गया। यह भवन अब लोक निर्माण विभाग की भवन सूची में शामिल होगा और प्रेस क्लब को प्रचलित बाजार दर से तय होने वाले किराए से सिर्फ 10 फीसदी में दिया जाएगा।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि वित्त विभाग की आपत्ति को मुख्यमंत्री ने दरकिनार कर हाई सिक्युरिटी यूनिट की स्थापना में 120 पदों को मंजूरी दी है। जेल में बंद सिमी के कैदियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह बड़ा कदम उठाया गया है।
बैठक में लोकायुक्त संगठन में चल रहे इंदौर प्रेस क्लब के भवन के विवाद को देखते हुए सरकार ने इस भवन को लोक निर्माण विभाग की सूची में शामिल करने का फैसला किया है। इसमें स्थायी और अस्थायी निर्माण शामिल है।
इसके अलावा बड़े पशुओं की उत्प्रेरणा योजना और छोटे पशुओं एवं पक्षियों की उत्प्रेरणा योजना को 2020 तक जारी रखने की अनुमति दी गई। एमपीएसआईडीसी के कर्जदारों के भुगतान के लिए 44 करोड़ 32 लाख रुपए मंजूर करते हुए योजना 2018-19 में जारी रखने का फैसला किया गया।
50 फीसदी कम भाव पर बिकी लहसुन तो नहीं मिलेगा भावांतर
प्रदेश सरकार ने लहसुन को भावांतर भुगतान योजना में शामिल करने का निर्णय किया है। इसकी खरीदी 1 अप्रैल से 31 मई तक मान्य होगी। योजना के लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादकता 75 क्विंटल तय की गई है। भावांतर की देय राशि लहसुन के घोषित मूल्य के 25 फीसदी मूल्य तक ही दी जाएगी।
घोषित मूल्य से लहसुन का भाव पचास फीसदी से कम मिलता है तो किसान को भावांतर का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके मायने यह हुए कि 32 सौ रुपए प्रति क्विंटल का भाव होने पर लहसुन यदि 16 सौ रुपए में बिकती है तो भावांतर नहीं दिया जाएगा।

vallabh bhavan 01 04 2018भोपाल। राज्य मंत्रालय (वल्लभ भवन) में अब कम्प्यूटर के माध्यम से फाइल मूवमेंट होगा। इसके लिए ई-ऑफिस व्यवस्था को सोमवार से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर विभागों के बाबुओं तक फाइलें कम्प्यूटर से ही आगे बढ़ेंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ई-ऑफिस व्यवस्था के लिए सभी विभागों में तैयारियां हो चुकी हैं। यह कोशिश होगी कि सभी विभागों में सोमवार से फाइलें कम्प्यूटर के माध्यम से ही आगे बढ़ें। इसके लिए सभी को लॉगिन-पासवर्ड दिए जा चुके हैं।
इस व्यवस्था से यह भी पता लगता रहेगा कि फाइल किस स्तर पर कब से लंबित है। यदि अधिकारी चाहें तो वे सीधे फाइल भी अपने पास बुला सकेंगे। सूत्रों का कहना है कि शुरुआती दिनों में कुछ फाइलें जरूर मौजूदा व्यवस्था से चलेंगी पर एक माह में ई-ऑफिस पूरी तरह लागू हो जाएगा। मंत्रालय के बाद इस व्यवस्था का विस्तार संचालनालय तक किया जाएगा।

shivraj cabinet2 01 04 2018भोपाल। सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 करने के बाद सरकार ऐसे पद जो एक साल तक नहीं भरे जाते हैं, उन पर संविदा नियुक्ति देगी। यह नियुक्ति सीधी भर्ती औेर पदोन्नति के पदों पर मिलेगी। इसके लिए सरकार संविदा नियुक्ति नियमों में बदलाव कर नई शर्त जोड़ेगी।
साथ ही हर प्रकरण कैबिनेट में जाएगा और अंतिम निर्णय वही होगा। प्रकरणों की छानबीन सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन गठित होने वाली समिति करेगी।
सूत्रों के मुताबिक संविदा नियुक्ति नियम बनने के बाद इसमें जो व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही थीं, उन्हें दूर करने के लिए करीब तीन माह से प्रयास चल रहे हैें। नियम में बदलाव की फाइल विभागीय राज्यमंत्री लालसिंह आर्य के पास थी, लेकिन पिछले दिनों इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर वापस बुलाकर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया।
बताया जा रहा है कि नियम में तीन बदलाव करने पर सहमति बन गई है। पहला- नियमित और पदोन्नति के ऐसे पद जो एक साल तक नहीं भरे जा सकते हैं, उन पर संविदा नियुक्ति दी जाएगी। दूसरा- हर प्रकरण कैबिनेट में रखा जाएगा और अंतिम निर्णय वहीं होगा। तीसरा- निगम व मंडल में संविदा पर रखे जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए भी राज्य के संविदा नियुक्ति के पैमाने लागू होंगे।

मंथन न्यूज़ -मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। वे आज यहां मीडिया महोत्सव 2018 के अंतर्गत आयोजित ''भारत की सुरक्षा, मीडिया, विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे।
श्री चौहान ने कहा कि व्यापक अर्थ में राष्ट्रीय सुरक्षा में महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और गरीबों की सुरक्षा भी शामिल है। उन्होने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गई है। श्री चौहान ने कहा कि बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के मानव अधिकार नहीं होते। इनका महिमामंडन किसी भी हाल में नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फांसी देने का कानून बनाया गया है। श्री चौहान ने कहा कि झूठी खबरों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिये श्रमिकों को जमीन और घर देने तथा महिलाओं को सुरक्षा देने जैसे कदम उठाये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में चुनावों की तैयारियां चलती रहती हैं और सरकारों को विकास पर फोकस करने के लिय कम समय मिल पाता है। इसीलिये लोक सभा और विधान सभा के चुनावों को एक साथ कराने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया को भी इस विषय पर विचार करना चाहिये। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर श्री निखिल दवे की किताब ''अंतस यात्रा'' और श्री ओम प्रकाश की किताब 'सृजन समुच्चय' का लोर्कापण किया।
इस अवसर पर प्रतिष्ठित विचारक श्री के एन गोविंदाचार्य, वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश उपाध्याय, श्री शिव अनुराग पटैरिया, कांग्रेस प्रवक्ता सुश्री प्रियंका चतुर्वेदी और बडी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

शहडोल- संविदा कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है, पिछले कुछ समय से संविदा कर्मचारी लगातार नियमितीकरण की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। जिस पर अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कह दिया है कि संविदा कर्मचारी जल्द ही नियमित कर दिए जाएंगे।

संविदा कर्मचारियों को किया जाएगा नियमित 
दरअसल अभी हाल ही में राज्य स्तरीय बैगा सम्मेलन शहडोल के लालपुर में हुआ, जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। जिसके बाद रात्रि को विश्राम भी धनपुरी में एसईसीएम गेस्ट हाउस में किया। और वहीं शनिवार को सुबह-सुबह पत्रकार वार्ता के दौरान संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी बात कही।

नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदा कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल और आन्दोलन को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने संविदा कर्मचारियों के पक्ष में बड़ी घोषणा पत्रकार वार्ता के दौरान की,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जल्द ही सभी विभागों में संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा और संविदा कर्मचारी पद समाप्त किया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि संविदा व्यवस्था के खिलाफ मैं स्वयं हूं, यह शोषण करने वाली व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारी एक तरफ आन्दोलन भी कर रहे हैं, और दूसरी तरफ नियमितीकरण की मांग कर आंदोलन कर रहे हैं। संविदा कर्मचारियों को आन्दोलन समाप्त कर बात करनी चाहिए। जल्द ही उनके लिए फैसला लिया जाएगा।

अशिक्षा के अंधकार को मिटाने के होंगे प्रयास 
सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि अशिक्षा के अंधकार को मिटाने के लिए प्रदेश में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में अभी भी लोगों में अशिक्षा है इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी छात्र-छात्राओं को सभी प्रकार की शैक्षणिक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है ताकि वे पढ़ लिखकर आगे बढ़ सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोई भी अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति के लाभ से वंचित न रहे इसको दृष्टिगत रखते हुए सेवानिवृत्ति की आयु को 60 से 62 वर्ष किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की वर्तमान सरकार ने कर्मचारी कल्याण के लिए काफी कुछ कार्य किया है तथा कर्मचारियों के हित में काफी कुछ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अतिथि शिक्षकों के लिए भी बोले सीएम 
उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों को उनके परिश्रम का लाभ मिले इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के सभी बैगा परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे तथा उन्हें सभी प्रकार की शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले कुछ समय में पार्टी में युवा चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का सिलसिला शुरू कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी कोर टीम ही नहीं बल्कि पार्टी कार्यसमिति में भी नए चेहरों को तरजीह देंगे और आम चुनाव की वैतरणी को युवा मतदाताओं की डोर थामकर पार करने की रणनीति पर काम करेंगे.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल ने 18 मार्च को पार्टी के महाधिवेशन में संगठन के भीतर युवा एवं अनुभवी पीढ़ी के बीच की दीवार गिराने की जो बात कही थी, उसे उन्होंने अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है. ऐसे में यदि वह नई कार्यसमिति में कुछ बड़े नामों की छुट्टी कर दें तो इसे आश्चर्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि पार्टी में संगठन महासचिव के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी अशोक गहलोत को सौंप कर राहुल ने यह भी संदेश दिया है कि 'जमीनी स्तर पर काम करने वाले अविवादित एवं अनुभवी नेताओं की अनदेखी नहीं की जाएगी.' गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान गहलोत के साथ राहुल ने करीब से काम किया था तो उनकी कार्यशैली को अच्छी तरह परखा-भांपा भी था.
गुजरात चुनाव के बाद कर्नाटक विधानसभा के चुनाव कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहे हैं. इस चुनाव के नतीजों की प्रतिध्वनि अगले साल लोकसभा चुनाव तक में सुनी जाएगी. राहुल गांधी कर्नाटक चुनाव से पहले पार्टी की कार्यसमिति का गठन करते हैं या नहीं, यह अभी तक तय नहीं है. किंतु उन्होंने गहलोत को पार्टी का संगठन महासचिव बनाकर एक तरह से कार्यसमिति के गठन की अनौपचारिक शुरुआत कर दी है. आमतौर पर नए अध्यक्ष के बनने के बाद पहले कार्यसमिति ही बनती थी.
बता दें, पिछले सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष ने तीन नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी. गुजरात के चार बार के विधायक अमित चावड़ा को गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. उन्हें भरत सिंह सोलंकी की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा लोकसभा सदस्य राजीव सातव को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है.
इसी प्रकार पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को ओडिशा का प्रभारी बनाया गया है. पार्टी अध्यक्ष बनने से पहले ही राहुल गांधी ने पूर्व केंद्रीय  मंत्री आरपीएन सिंह को झारखंड का प्रभारी एवं लोकसभा सदस्य सुष्मिता देव को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था.
पार्टी में सामर्थ्यवान युवाओं को आगे बढ़ाने का राहुल गांधी का संदेश संगठन के निचले पायदानों तक उतरने लगा है. गुजरात पीसीसी के नवनियुक्त अध्यक्ष अमित चावड़ा ने अपनी प्राथमिकताओं की चर्चा करते हुए मीडिया से कहा कि वह राज्य भर का दौरा कर जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवा कार्यकर्ताओं को सामने लाएंगे. हालांकि उन्होंने भी अपने नेता की तरह कहा कि अनुभवी नेताओं की राज्य में अनदेखी नहीं की जाएगी.
चावड़ा ने कहा, 'राहुल गांधी ने उनसे यही कहा कि युवा संगठन के साथ जुड़ें और तथा राजनीति के माध्यम से वे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण के लिए काम करें.'
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की रणनीति अगले आम चुनाव के लिए बहुत हद तक युवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की है. युवाओं से जुड़े हर मुद्दे को वह आगे बढ़कर उठाने का प्रयास कर रही है. बेरोजगारी के मुद्दे पर तो वह पिछले दो साल से काम कर ही रही थी. किंतु एसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी तथा अब सीबीएसई परीक्षा पत्रों के लीक होने के मुद्दे को पार्टी ने सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पूरे दमखम के साथ उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है.
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार तथा कई अन्य राज्यों में जमीनी स्तर पर पार्टी का निष्प्रभावी संगठन तथा इन क्षेत्रों में जाति के आधार पर बंटे वोट बैंक में सेंध लगाने की कम गुंजाइश को देखते हुए युवा मतदाताओं का भरोसा जीतना ही एक ऐसा मंत्र है, जिसका जादू भारत की हर भौगोलिक सीमा में जग सकता है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस वर्ग को अपनी तरफ लाने में काफी हद तक सफलता पाई थी.
राहुल ने पार्टी महाधिवेशन के मंच को खाली रखकर युवा शक्ति को यह स्पष्ट संदेश दिया था कि उनके लिए संगठन के द्वार खुले हुए हैं. किंतु इस बात को अमली जामा पहनाने में उन्हें कार्यसमिति के गठन सहित तमाम चुनौतियों से गुजरना होगा.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाहराजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में अब कोई चूक नहीं करना चाहती है. कर्नाटक दौरे के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को बीजेपी शासित तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पार्टी दफ्तर में अहम बैठक की. इसी के साथ शाह ने राम माधव समेत कई बीजेपी महासचिवों से वन टू वन मुलाकात भी की. इस बैठक का मुख्य एजेंडा 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर विमर्श करना था.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अमित शाह से मुलाकात के लिए बुलाया गया था. सूत्रों के मुताबिक राजस्थान की सीएम राजे से चुनावी क्षेत्रों के आधार पर बातचीत की गई. बीजेपी राजस्थान उपचुनाव के नतीजों से काफी चिंतित है.
राजस्थान में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सूपड़ा साफ कर देने वाली भारतीय जनता पार्टी का राजस्थान उपचुनावों में खुद ही सूपड़ा साफ हो गया था. यहां कमजोर और बंटी हुई मानी जा रही कांग्रेस ने उपचुनाव की तीनों सीटों पर जीत दर्ज की. ये तीनों सीटें पहले बीजेपी की थीं. अलवर और अजमेर लोकसभा सीटों पर 2014 के मुकाबले बीजेपी का वोट शेयर 61 और 56 फीसदी से घटकर क्रमशः 40 और 44 फीसदी रह गया. मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर तो बीजेपी का वोट शेयर 2013 के 52 फीसदी से गिरकर 32 फीसदी पर आ गया है.

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