भोपाल मंथन न्युज -कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में सबसे बड़ा बदलाव कर दिया है। कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वो रैली के माध्यम से अपनी ताकत भी दिखा रहे हैं परंतु भाजपा के दिग्गज उनके नाम से ही राहत में हैं। वो शिवराज के सामने कमलनाथ को कोई चुनौती नहीं मानते। उनका कहना है कि कमलनाथ की ताजपोशी से खुद कांग्रेस के नेता ही नाराज हैं जबकि भाजपा के नाराज कार्यकर्ता भी संगठन के नाम पर एकजुट हैं। नरोत्तम मिश्रा ने कटाक्ष किया कि उनके यहां तो एक चार का झगड़ा चल रहा है।
मरी हुई है कांग्रेस, कमलनाथ नहीं कर पाएंगे कुछ

जीएडी राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि कांग्रेस मरी हुई है। कमलनाथ के लिए गरीब कोई मायने नहीं रखते। भाजपा विकास के आधार पर काम कर रही है और फिर सरकार बनाएगी।भाजपा चुनाव प्रबंध समिति की पहली बैठक में आज केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गेहलोत और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय नहीं आए। दोनों नेता हाल ही में गठित चुनाव प्रबंध समिति के सदस्य हैं।

कांग्रेस में एक चार का झगड़ा: नरोत्तम

चुनाव प्रबंध समिति के सह संयोजक और मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कमलनाथ कोई चुनौती नहीं हैं। कांग्रेस में परिवार की लड़ाई चल रही है और वहां एक चार का झगड़ा ही पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है। इधर गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस में एकजुटता का अभाव है। जब से कमलनाथ अध्यक्ष बने हैं, सभी कांग्रेस नेता एक सुर से अलग हैं।

न कमलनाथ न कांग्रेस से चुनौती: पटेल

सांसद प्रहलाद पटेल ने कहा कि कमलनाथ और कांग्रेस दोनों ही बीजेपी के लिए कोई चुनौती नहीं हैं। भाजपा का लक्ष्य अगले चुनाव में 200 पार का है और इसके लिए सभी एकजुट होकर काम करेंगे।

बीजेपी तवे पर कांग्रेस लाशों पर सेंकती है रोटी

पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा के लिए कांग्रेस और कमलनाथ दोनों ही चुनौती नहीं हैं। एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनेगी। सांसद प्रहलाद पटेल द्वारा रोटी सेंकने को लेकर हुए सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता तवे पर रोटी सेंकते हैं जबकि कांग्रेस के लोग लाशों पर रोटी सेंकने का काम करते हैं।

मंथन न्युज
भोपाल। यह सवाल अब राजनीति के गलियारों में लहरा रहा है। दरअसल, जनाक्रोश रैली के बाद दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश आ गए जबकि दिल्ली में मप्र के नेताओं की कोर कमेटी बैठक चल रही थी। राहुल गांधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जीतू पटवारी, विवेक तन्खा, दीपक बाबरिया समेत कई दिग्गज मौजूद थे, केवल दिग्विजय सिंह नहीं थे। पहले खबर आई कि दिग्विजय सिंह रूठे हुए हैं परंतु अब बताया जा रहा है कि राहुल गांधी उनसे नाराज हैं

सच क्या है यह तो दोनों ही जानें लेकिन बताया जा रहा है कि पिछले दिनों दिग्विजय सिंह के 2 कदम ऐसे थे जिससे राहुल गांधी नाराज हो गए। 
पहला: राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया को मप्र में सीएम कैंडिडेट बनाना चाहते थे परंतु दिग्विजय सिंह, नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह एवं इनके गुट के नेताओं ने इसका विरोध किया। 
दूसरा: नर्मदा यात्रा के बाद दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए थे परंतु राहुल गांधी उनसे नहीं मिले। लम्बे इंतजार के बाद दिग्विजय सिंह वापस आ गए और उन्होंने राजनैतिक यात्रा का ऐलान कर दिया। संगठन की अनुमति के बिना इतनी बड़ी यात्रा का ऐलान करना राहुल गांधी को पसंद नहीं आया। 

लगातार सवाल किया जा रहा था कि यह कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा होगी या दिग्विजय सिंह की। बीते रोज बातों बातों में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी राजनीतिक यात्रा का रूपरेखा संगठन बनाएगा। बिना राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति के उन्होंने मप्र में, चुनावी साल में इस तरह की यात्रा का ऐलान क्यों किया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। 

मंथन न्युज भोपाल-
मध्‍य प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब हैं। लगातार तीन बार शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व में जीत का परचम लहराने वाली बीजेपी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने कमलनाथ को प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया है। शिवराज के गढ़ में कमलनाथ के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं, लेकिन उनकी तैयारी देखकर ऐसा लग रहा है कि इस बार वह बीजेपी के सामने कठिन चुनौती पेश करने वाले हैं। इसी क्रम में उन्‍होंने अपनी पहली चाल चल भी दी है। कमलनाथ मध्‍य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, यह बात सच है कि बसपा का मध्‍य प्रदेश में कोई ज्‍यादा बेस नहीं है, लेकिन कांग्रेस के साथ मिलकर बीजेपी को मायावती बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं। 'द प्रिंट' के साथ बातचीत में खुद कमलाथ ने इस बात को स्‍वीकार किया कि कांग्रेस मध्‍य प्रदेश में बसपा के साथ प्री-पोल अलांयस करना चाहती है। कमलनाथ ने कहा, 'हम राज्‍य में बीजेपी को हराने के लिए बसपा समेत समान विचारधारा वाले दलों से बात करेंगे।'

बसपा के साथ हुआ कांग्रेस का गठबंधन तो खड़ी होगी बीजेपी के लिए मुश्किल


देखा जाए तो बसपा मध्‍य प्रदेश में कोई बहुत बड़ी ताकत नहीं है। वह अपने दम बीजेपी को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है, लेकिन मयावती की पार्टी ने मध्‍य प्रदेश में पिछले कई चुनावों के दौरान कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मध्‍य प्रदेश में 2003 विधानसभा चुनाव से शुरुआत करते हैं, जो कि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्‍व में लड़ था। इस चुनाव में कांग्रेस 230 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में केवल 38 सीटें जीत सकी थी। 2003 के इसी विधानसभा चुनाव में बसपा मात्र 2 सीटें जीत पाई थी। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 25 सीटें सिर्फ बसपा की वजह से हार गई थी। कुछ ऐसा ही बसपा के साथ भी हुआ था। इसी चुनाव में बसपा 14 सीटों पर सिर्फ इसलिए हार गई थी, क्‍योंकि कांग्रेस के साथ वोट बंट गए थे। अगर इन दोनों पार्टियों के नुकसान को जोड़ा जाए तो 25+14=39, ये वो सीटें हैं, जो दोनों दल अलग-अलग लड़ने की वजह से हार गए थे। बसपा मध्‍य प्रदेश में कोई बहुत बड़ी ताकत भले न हो, लेकिन हर चुनाव में वह 5 से 7 प्रतिशत वोट जरूर पाती है। अगर 2003 में बसपा और कांग्रेस ने साथ में चुनाव में लड़ा होता तो कम से कम 79 सीटें तो इन्‍हें मिल ही जातीं।


   


2008 में भी कांग्रेस को बसपा ने पहुंचाया बड़ा नुकसान


मध्‍य प्रदेश के 2008 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर किया जाए कांग्रेस पिछले चुनाव से बेहतर स्थिति में नजर आती है। 2003 में 38 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 2008 में 71 सीटों पर विजयी रही थी। वहीं, 2003 में 173 सीटें जीतने वाली बीजेपी 143 सीटों पर जीत के साथ सत्‍ता में लौटी थी। इस चुनाव में बसपा ने कांग्रेस को करीब 39 पर झटका दिया था, जबकि खुद बसपा को करीब 14 सीटें पर कांग्रेस की वजह से मात खानी पड़ी। अगर 71+39+14 को जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा 131 पहुंच जाता है। मतलब बीजेपी की 143 सीटों के बेहद करीब।

मध्‍य प्रदेश के इन इलाकों में ताकतवर रही है बसपा

मध्‍य प्रदेश के कुछ इलाकों में बसपा लंबे समय से ताकतवर रही है। चंबल और उत्‍तर प्रदेश की सीमा से सटे अन्‍य इलाकों में बसपा काफी मजबूत रही है। बसपा की मध्‍य प्रदेश में मजबूत स्थिति के पीछे सबसे अहम कारण है- एमपी में 15 प्रतिशत दलितों की मौजूदगी। कुला मिलाकर देखें तो राज्‍य के करीब 22 जिलों में बसपा का खास प्रभाव है। यही कारण है कि बसपा के साथ गठजोड़ को लेकर कांग्रेस में फार्मूले पर भी चर्चा हो रही है। इस वक्‍त कमलनाथ के नेतृत्‍व में बसपा के लिए जो ऑफर तैयार किया जा रहा है, उसमें 15 सीटें देने की बात है। कांग्रेस लीडरशिप चाहती है कि बसपा को वो चार सीटें दे दी जाएं, जिन पर 2013 में उसने जीत दर्ज की थी और उन 11 सीटों को भी दे दिया जाए, जिन पर वह दूसरे स्‍थान पर रही थी। हालांकि, सीटों का यह नंबर फाइनल नहीं है। इसमें थोड़ा बहुत जोड़-घटाव संभव है, लेकिन फार्मूला जो भी होगा, वह इसी आंकड़े के आसपास रहेगा।

पैवेलियन में बैठकर भी विपक्षी बल्‍लेबाज को आउट कर सकती हैं मायावती

कमलनाथ की रणनीति यह है कि अगर बसपा को कुछ सीटें देने से उसके खाते में 40 के आसपास सीटें आ रही हैं, तो उसमें नुकसान ही क्‍या है। वैसे भी गोरखपुर और फूलपुर में देश का हर चुनाव विश्‍लेषक देख चुका है कि मायावती पैवेलियन में बैठकर भी विपक्षी पार्टी के बल्‍लेबाज को आउट करा सकती हैं। ऐसे में कोई शक नहीं है कि अगर बसपा और कांग्रेस मध्‍य प्रदेश में साथ आते हैं तो बीजेपी के लिए रास्‍ता बेहद कठिन हो जाएगा।



scindia kamalnath bhopal 01 05 2018मंथन न्यूज़ भोपाल -मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि भाजपा वाले दूसरों के मंदिर जाने पर सवाल करते हैं क्या उन्होंने हिंदू धर्म का ठेका ले लिया है। वहीं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि हिंदू धर्म भाजपा की बपौती नहीं है। हिंदू धर्म हिंदुस्तान का धर्म है। ये वो हिंदुस्तान है, जिसने धर्म निरपेक्षता, उदार विचारधारा और सांप्रदायिक सद्भाव को जन्म दिया है।
कमलनाथ और सिंधिया ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में यह बात कही। नवनियुक्त अध्यक्ष ने कहा कि आज के नौजवानों को ठेका या कमीशन नहीं, रोजगार चाहिए। मप्र में कई इन्वेस्टर मीट हुईं, लेकिन पता नहीं प्रदेश में कितना निवेश आया है।
प्रदेश की आर्थिक गति रुकी
कमलनाथ ने प्रदेश की शिवराज सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य की आर्थिक गति रुक गई है। उन्होंने सरकार पर जीडीपी बढ़ने के दावे पर तंज कसा कि मैं केंद्र में वाणिज्य मंत्री रहा हूं और जीडीपी के बारे में जानता हूं। जीडीपी को जैसा चाहे वैसे ही इस्तेमाल किया जा सकता है। खेती, रोजगार या विकास से जोड़कर जीडीपी के आंकड़े तैयार किए जा सकते हैं।
धार में आरक्षक भर्ती की तस्वीर भाजपा की असली पहचान
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कहा कि अभी सबके सामने मध्यप्रदेश का भविष्य दिखाई दे रहा है। व्यक्ति पर ध्यान नहीं है। सरकार बनाने पर जोर है। वहीं सिंधिया ने धार के आरक्षक भर्ती परीक्षा में सीने पर एससी-एसटी लिखे जाने को लेकर फिर कहा कि भाजपा की असली पहचान यही है कि वह लोगांे को जातियों में बांटती है। कांग्रेस विकास, अमन-चैन की दिशा देने के लिए काम करेगी।
मप्र कांग्रेस कमेटी में पांच नियुक्तियां, शेखर उपाध्यक्ष गोयल कोषाध्यक्ष
मप्र कांग्रेस कमेटी में कमलनाथ के अध्यक्ष पद संभालते ही जहां पांच नियुक्तियां की गईं। वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मप्र कांग्रेस के प्रभारी दो और सचिवों की नियुक्ति हुई हैं। जानकारी के मुताबिक पीसीसी का उपाध्यक्ष (संगठन प्रभार) चंद्रप्रभाष शेखर, कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल, मीडिया कमेटी का चेयरमैन मानक अग्रवाल, कार्यालय प्रबंधन राजीव सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा को बनाया है।
उधर, एआईसीसी ने प्रभारी सचिव के रूप में मप्र में दो और नेताओं हर्षवर्धन सपकाल और वर्षा गायकवाड़ की नियुक्ति की है। अभी प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया के साथ दो प्रभारी सचिव संजय कपूर व जुबेर खान काम देख रहे थे।

transfer245 01 05 2018मंथन न्यूज़ भोपाल - सोमवार देर रात आईएएस अफसरों के तबादले करने के बाद सरकार एक बार फिर मैदानी स्तर पर बदलाव करेगी। इसमें करीब आधा दर्जन जिलों के कलेक्टर बदल जाएंगे। वहीं, राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) के 75 से ज्यादा और राजस्व के 50 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले भी होंगे। मंत्रालय में इनकी सूची बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हरी झंडी मिलते ही तबादला आदेश जारी हो जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक सरकार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सोच-समझकर मैदानी जमावट करेगी। इसके मद्देनजर ही छिंदवाड़ा कलेक्टर जेके जैन को हटाने के बाद भी किसी अधिकारी को पदस्थ न करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोहित सिंह को प्रभार सौंपा गया है।
यहां ऐसा अधिकारी भेजा जाएगा, जो सरकार के हिसाब से योजनाओं के कामों को गति दे सके। नगरीय विकास विभाग के उप सचिव भरत यादव का नाम भी छिंदवाड़ा भेजे जाने वाले अफसरों में प्रमुखता से लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के मद्देनजर भिंड कलेक्टर इलैया राजा टी., अशोकनगर कलेक्टर बीएस जामोद और शिवपुरी कलेक्टर तरुण राठी को बदला जा सकता है।
दरअसल, आयोग के नियम हैं कि चुनाव के दरम्यान जिन अधिकारियों को लेकर विवाद उठ जाते हैं, उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा जाता है ताकि चुनाव की निष्पक्षता पर कोई उंगली न उठा सके। इसी तरह कुछ अन्य जिलों में भी सरकार बदलाव कर तेजतर्रार अधिकारियों को पदस्थ कर सकती है। इसके साथ ही राप्रसे के अधिकारियों के तबादले बड़े पैमाने पर प्रस्तावित हैं
सामान्य प्रशासन विभाग ने 75 से ज्यादा अधिकारियों की सूची भी तैयार कर ली है। इसके साथ ही 2013 का विधानसभा चुनाव कराने वाले अधिकारियों की भी बदली की जाएगी। इसी तरह राजस्व विभाग के मैदानी अधिकारियों के तबादले होंगे। विभाग ने 50 से ज्यादा अधिकारियों के नाम चिन्हित कर लिए हैं।
सांसद व विधायकों का दबाव
सूत्रों का कहना है कि सरकार के ऊपर सांसद और विधायकों का चुनाव के मद्देनजर तबादलों को लेकर काफी दबाव है। इसके मद्देनजर तबादलों पर से प्रतिबंध हटाने के लिए नीति भी लाने की तैयारी है।

मंथन न्युज दिल्ली-पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच मोदी सरकार के लिए एक अच्छी खबर आई है. दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल भंडार वाले देश वेनेजुएला ने भारत को एक बड़ा ऑफर दिया है.

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच मोदी सरकार के लिए एक अच्छी खबर आई है. दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल भंडार वाले देश वेनेजुएला ने भारत को एक बड़ा ऑफर दिया है. उसने कहा है कि भारत क्रूड आयात के लिए अगर उसकी करेंसी पेट्रो का यूज करे तो वह उसे कम से कम 30 फीसदी सस्‍ता तेल देने के लिए तैयार है. वेनेजुएला ने हाल ही में न्‍यू ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी आधारित करेंसी ‘पेट्रो’ लॉन्‍च किया है. 


घट सकते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
भारत अगर वेनेजुएला के ऑफर के लिए तैयार हो जाता है तो उसे इस ऑफर से काफी लाभ हो सकता है, क्‍योंकि वह अपनी जरूरत का 80 फीसदी क्रूड आयात करता है. ऐसे में भारत अगर अधिकांश ऑयल इम्‍पोर्ट वेनेजुएला से करे तो यहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कमी आ सकती है. इससे लोगों के साथ ही सरकार को भी बड़ी राहत मिल सकती है.


पेट्रोलियम से जुड़ा पहला क्रिप्टोकरेंसी
पेट्रो दुनिया में किसी देश द्वारा समर्थित पहला क्रिप्‍टोकरेंसी है. इसका नाम भी पेट्रोलियम से लिया गया है, क्‍योंकि इस देश में क्रूड का विशाल भंडार और और इसकी इकोनॉमी काफी हद तक इस पर निर्भर करती है. वेनेजुएला में 300 अरब बैरल का दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल रिजर्व है. दूसरे स्‍थान पर सऊदी अरब है. उसके पास 266 अरब बैरल का क्रूड रिजर्व है.

वेनेजुएला की टीम का भारत दौरा
पिछले महीने वेनेजुएला के ब्‍लॉकचेन डिपार्टमेंट के एक्‍सपर्ट की एक टीम भारत आई थी. इस दौरान उसने दिल्‍ली स्थित एक बिटकॉइन ट्रेडिंग फर्म कॉइनसिक्‍योर से एक डील भी की. वेनेजुएला के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कॉइनसिक्योर के जरिए भारत में पेट्रो में निवेश के लिए निजी क्षेत्र दिलचस्पी दिखा चुका है.

30 फीसदी डिस्काउंट का ऑफर
बिजनेस स्‍टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के प्राइवेट सेक्‍टर से उन्‍हें अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स मिला है. रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में वेनेजुएला ने पेट्रो के जरिए क्रूड ऑयल खरीदने पर कम से कम 30 फीसदी डिस्‍काउंट देने का ऑफर दिया.

127 देशों ने दिखाई दिलचस्‍पी
रिपोर्टों के अनुसार, पेट्रो के जरिए अभी तक 3.8 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं. 127 देशों ने इसमें दिलचस्‍पी दिखाई है. 20 मई को वेनेजुएला में राष्‍ट्रपति चुनाव के बाद पेट्रो लॉन्‍च किया जाएगा. माना जा रहा है कि इससे देश की इकोनॉमी में स्थिरता आएगी.

मंथन न्युज दिल्ली -पीएम मोदी ने कहा कि मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वह अपनी मौजूदा कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों पर उनके सामने 15 मिनट तक बिना किसी पेपर के बोलें। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल हिंदी, इंग्लिश या अपनी 'मातृभाषा' में बोल सकते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी कर्नाटक में रैली के दौरान। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कर्नाटक में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी है। आज पीएम मोदी कर्नाटक में 3 रैलियों को संबोधित करेंगे। ये रैलियां चामाराजनगर, उडुपी और बेलागावी में आयोजित की जाएंगी। चामाराजनगर की अपनी पहली रैली में पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लिया। बता दें कि हाल ही में राहुल गांधी कई बार अपने भाषणों के दौरान पीएम मोदी पर निशाना साध चुके हैं। एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने पीएम मोदी को उनके सामने 15 मिनट तक लगातार बोलने की चुनौती दी थी। अब कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को उनके सामने 15 मिनट लगातार बोलने की चुनौती दे डाली।


पीएम मोदी ने कहा कि मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वह अपनी मौजूदा कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों पर उनके सामने 15 मिनट तक बिना किसी पेपर के बोलें। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल हिंदी, इंग्लिश या अपनी ‘मातृभाषा’ में बोल सकते हैं। अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने निर्धारित समय में देश के 18500 गांवों में बिजली पहुंचाकर अपना वादा पूरा कर दिया है। कांग्रेस पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राहुल गांधी उनसे सवाल पूछने की बात करते हैं, लेकिन पहले उन्हें यह पता होना चाहिए कि साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऐलान किया था कि साल 2009 तक देश के हर गांव में बिजली पहुंच जाएगी। ऐसा ही कुछ सोनिया गांधी ने भी कहा था, लेकिन आप देश के हर गांव में बिजली पहुंचने पर सवाल उठाकर दूरदराज के गांवों में बिजली पहुंचाने वाले मेहनतकश मजदूरों का मजाक उड़ा रहे हैं। पीएम मोदी ने वंशवाद पर प्रहार करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सही कहा कि वह उनके सामने 15 मिनट तक नहीं बोल सकते, क्योंकि राहुल गांधी एक ‘नामदार’ और वह (पीएम मोदी) एक ‘कामदार’ हैं। वह तो राहुल गांधी के सामने बैठ भी नहीं सकते।

आज मजदूर दिवस के मौके पर उन मजदूरों की हिम्मत और मेहनत की प्रशंसा करते हुए, पीएम मोदी ने देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने का श्रेय उन मजदूरों को दिया, जिन्होंने दुर्गम इलाकों में भी बिजली पहुंचाने के लिए काम किया। भाजपा की ओर से सीएम पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरेप्पा की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीएस येदियुरेप्पा ही राज्य के लोगों की उम्मीद हैं और वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

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