संक्षेपिका का गहन अध्ययन: राज्य शिक्षा सेवा से क्या लाभ या हानि

) अध्यापक संवर्ग को नियम 2008 के अनुसार वरिष्ठता प्रस्तावित है।

इसका सीधा अर्थ है कि वर्तमान में हम सभी उसी नियम से क्रमोन्नत/पदोन्नत हो रहे है, अर्थात वरिष्ठता कायम रहेगी।

(2) राज्य शिक्षा सेवा 1/7/18 से लागू इसलिए नियुक्ति शब्द ही आएगा, संविलियन उस विभाग में हो सकता है जो पहले से हो।

(3) ग्रामीण क्षेत्र मे 3 वर्ष कि सेवा 5.1 के क्रमांक 2 के अनुसार, इसका उल्लेख स्पष्ट किया गया है कि 2018 में स्वीकृत 31000 पदों में नई भर्ती हेतु।

(4) उ.मा.शिक्षक के हाई स्कूल प्राचार्य हेतु 1000 पद या कुल रिक्त के 25% पद पर सीमित परीक्षा द्वारा नियुक्ति 

(5) माध्यमिक प्रधान पाठक, प्रा.प्र.पा. के पद भी पदोन्नति हेतु।

(6) शासकीय कर्मचारी म.प्र.शासन के।

(7) 2005 के बाद के समस्त शासकीय सेवक को ग्रेच्युटी की पात्रता होगी।

(8) 1/7/18 से शासकीय सेवक के समान 7 वां वेतन का स्पष्ट उल्लेख है। मतलब जिस नियम से सभी को मिला वही हमें भी मिलेगा।

7वे वेतन का निर्धारण 1/1/16 से करें या 1/7/18 से, जुलाई पेड अगस्त वही बनेगा।

(9) HRA मूल वेतन का 3% देय होगा।

(10) बीमा -शासन द्वारा किसी भी बीमा कंपनी या बैंक के माध्यम से आगे कराया जा सकता है।

(11) शासकीय सेवक होने पर अवकाश नगदीकरण का लाभ जिसकी वर्तमान सीमा 340--350 दिन।

(12) शासकीय सेवकों के समान मेडिक्लेम देय है।

(13) यात्रा भत्ता की पात्रता।

(14) पूर्व के वेतनमान, भत्ता, योजना का लाभ नहीं मिलेगा। अर्थात 1998 या बाद का कोई भी अध्यापक 5वें या 6वें वेतनमान का लाभ हेतु पात्र नहीं। इसी प्रकार भत्ता भी नही मिलेगा और न ही अन्य योजना जो शासन ने 1998 से जून 2018 तक शासकीय सेवकों को प्रदान की हो।

आशय

वेतन की शेष राशि अर्थात 6वें वेतनमान के एरियर की राशि नियमानुसार मिलती रहेगी।

(15) area education officer के पदों पर पुनः भर्ती होगी, अर्थात 3700 अध्यापक साथियों को अधिकारी बनने का मौका।

आदेश उपरांत हमारी तीन मुख्य मांग रहेगी,

(1) अनुकंपा हेतु right to education में ढील प्रदान करें। 

(2) 1/1/16 से सातवां वेतनमान दिया जाए। 

(3) ग्रेच्युटी की पात्रता नियुक्ति दिनांक से हो।

1/7/18 से शिक्षा विभाग मिलने से अतिरिक्त लाभ :-

(1) वरिष्ठ अध्यापक को हरा पेन मिलेगा।

(2) सहा.शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता पद नाम,

हानि :-(1) वरिष्ठ अध्यापक व्याख्याता के पद से ही रिटायर्ड हो जाएगा क्योंकि वह वर्तमान सहायक शिक्षक से जूनियर रहेगा। 

अध्यापक, सहा.अध्यापक का भी 15-20 वर्ष बाद प्रमोशन होंगे क्योकि 1.50 नियमित कर्मचारी है तो 1लाख शिक्षक होंगे अभी शिक्षा विभाग में।

अभी सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ का गठन होना है फिर सुनवाई होगी इसका मतलब 5-10 वर्ष में निर्णय।

1994 के शिक्षा विभाग मिलने पर क्या लाभ।

(1) केवल 1998 वाले शिक्षा कर्मी भाईयों को पेंशन, एवं, नियमित शिक्षकों के नियम लागू होंगे, शेष संविदा 2001 या बाद बाद वाले 2.10 लाख साथियों कोई लाभ नहीं मिलना है। लेकिन ऐसा सरकार करने के लिए तैयार नहीं है।

यदि ऐसा हुआ भी तो अंतर की राशि शून्य घोषित कर दी जाएगी, जैसे अभी सरकार ने 6पे ग्रेड वेतन बदल दिया 1/1/16 से लेकिन आर्थिक लाभ शून्य घोषित कर दिया।

इन सबके बावजूद सरकार 22 वर्ष पूर्व से पद जीवित नहीं करेगी, क्योंकि कोर्ट में डाईंग केडर हेतु हलफनामा सरकार दे चुकी है। यदि कोई कोर्ट गया तो नियमितीकरण रद्द हो जाएगा उ.प्र. जैसा।

पुरानी पेंशन हम सभी को चाहिए इसके लिए हम सब नियमित शासन के कर्मचारी बनकर आंदोलन करेंगे, निश्चित ही पूरे देश में इस आंदोलन चल रहा है, हम सब कामयाब होंगे।

बिना आदेश हम सभी विरोधी हो गये , इससे बेहतर होता कि आदेश देखकर ,समझकर ,पढ़कर सभी सुधार हेतू ज्ञापन देते । फिर आंदोलन करते तो शायद हम सभी के लिए हितकारी होता।

कहने का आशय है कि जो मिल रहा है उसे तो लीजिए, उसमें सुधार आसान है लेकिन, रद्ध कराकर नये का समय नहीं है।

कुछ लोग किस बात के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

या सातवां वेतनमान एवं शासकीय कर्मचारी बनने से रोका जाना एवं सरकार के 1500 करोड़ बचाकर .....कोई स्वहित साधने के लिए । 

यदि स्वहित नहीं है तो फिर क्या है ।।

यह रद्द होने के बाद क्या आदेश होगा ?

किस बात का आदेश होगा ?

नहीं हुआ तो हमारे बीच औसतन 25-50 साथी जो हमें छोड़ कर जा रहे है उनके परिवार के लालन ,पालन हेत जो राशिु मिलती उसको दिलाने का उत्तरदायित्व कौन लेगा

आप सभी विचार करें ,,,5000-11000 ₹ महीने की तनख्वाह की हानि यदि 2023 तक पहुंचा दी गई तो .......