अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की दो दिवसीय कार्यसमिति और प्रांत संगठन मंत्री की बैठक मुंबई में सोमवार को शुरू हुई.
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लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. ऐसे में बीजेपी सरकार को फिर सत्ता में लाने के लिए बीजेपी के साथ-साथ उनके दूसरे संगठनो ने भी कमर कस ली है और सरकार को सत्ता में लाने को लेकर अहम बैठक शुरू की है.बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को पता है कि आने वाले समय में युवा और कॉलेज का वोटर चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसके लिए बीजेपी ने अपने छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की कार्यसमिति की बैठक शुरू कराई. 25 और 26 फरवरी को एबीवीपी की कार्यसमिति और प्रांत संगठन मंत्री की बैठक में बीजेपी के लिए छात्रों के बीच में पॉजिटिव मैसेज देने की ट्रेनिंग शुरू हो गई है.साथ ही इस बैठक में नोटा के विरोध करने को लेकर भी प्रस्ताव पास होने की संभावना है. बीजेपी को पता है कि आने वाले समय में नोटा ही बीजेपी का खेल बिगाड़ सकता है. इसलिए इस बार एबीवीपी ने नोटा का विरोध करने का निर्णय लिया है.एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री निधि त्रिपाठी बताती हैं कि पिछले साल साहसी अभियान शुरू हुआ था. उसका अच्छा रिजल्ट आया है और आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर एबीवीपी काम करेगा. वहीं, एबीवीपी के राष्ट्र महामंत्री आशीष चव्हाण ने बताया कि छात्रों के हर मुद्दों पर एबीवीपी सड़क या कैंपस में दोनों ही जगहो पर काम करेगा और साथ ही दूसरे प्रमुख मुद्दों पर छात्रों के हितों को लेकर संघर्ष करेगी.इस कार्यसमिति में आरएसएस के सह सरकार्यवाह भी मौजूद हैं जो एबीवीपी के छात्रों को आगे की रणनीति पर मार्गदर्शन करेंगे

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