पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली 31jan 2108 -एक तरफ जहां केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बेरोजगार युवाओं को नौकरी उपलब्ध नहीं करा पाने पर आलोचनाएं झेल रही है, वहीं सरकार अब ऐसे पदों को भी समाप्त करने पर विचार कर रही है जो पांच साल से ज्यादा लंबे वक्त से खाली पड़े हैं। मोदी सरकार ने इसके लिए सभी मंत्रालयों तथा विभागों को व्यापक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। वित्त मंत्रालय ने एक कार्यालय ज्ञापन में कहा कि उसने सभी मंत्रालयों तथा विभागों से पांच साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने के लिये कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है। कुछ विभागों तथा मंत्रालयों ने जवाब दिया लेकिन कुछ ने व्यापक रिपोर्ट देने के बजाए महज जरूरी सूचना उपलब्ध करा दी है।
16 जनवरी 2018 को भेजे कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, ‘‘इसीलिए सभी मंत्रालयों, विभागों के वित्तीय सलाहकारों तथा संयुक्त सचिवों से अनुरोध है कि वे मंत्रालयों या संबंधित विभागों उन पदों को चिन्हित करें जो पांच साल से अधिक समय से खाली हैं तथा इन पदों को समाप्त करने के लिये एक व्यापक रिपोर्ट दें।’’ शुरुआती अनुमान के अनुसार केंद्र सरकार में कई हजार पद पांच साल या अधिक समय से खाली पड़े हैं।
बता दें कि कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि नौकरशाही के ढुलमुल रवैये की वजह से केंद्र में करीब चार लाख पद वर्षों से खाली पड़े हैं। खास बात यह है कि ग्रुप ए के अधिकारी वर्ग में ही 15 हजार से अधिक पद रिक्त हैं। संसद में भी केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया था कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में चार लाख से ज्यादा पद खाली हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि एक मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार केंद्र सरकार में असैन्य कर्मचारियों के कुल 36.34 लाख पद स्वीकृत हैं जिसमें से 32.21 लाख पद ही भरे हुए हैं। इस तरह केंद्र सरकार में 11.36 प्रतिशत पद यानी करीब चार लाख पद खाली हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 29.52 फीसदी ग्रुप बी के नॉन गजेटेड पद खाली हैं जबकि 19.33 फीसदी ग्रुप बी के गजटेड पद खाली पड़े हैं। ग्रुप ए के भी तेरह फीसदी पद खाली पड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तृतीय श्रेणी के भी करीब 3.21 लाख पद खाली हैं।

योगी अादित्यनाथ बोले, यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल नहीं ... तो नहींपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ लखनऊ 31jan 2018 - यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा को लेकर प्रदेश सरकार का पहले दिन से जो स्टैंड रहा है, उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को और स्पष्ट कर दिया। उन्होंने अफसरों से दो टूक शब्दों में कहा कि 'परीक्षा में नकल नहीं ... तो नहीं। बोले, सरकार इस इम्तिहान में नकल रोकने को कृत संकल्प है। इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी तय कर दिया कि यदि किसी जिले में नकल हुई तो वहां के जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक व संयुक्त मंडलीय शिक्षा निदेशक तीनों जिम्मेदार होंगे।
मुख्यमंत्री लखनऊ के लोक भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए यूपी बोर्ड परीक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परीक्षा में नकल रुकने से परीक्षार्थियों का ही भला होगा। वह अच्छे से पढ़ाई करेंगे और समाज व देश के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। परीक्षा के समय नकल रोकने के लिए परीक्षार्थियों से अभद्रता नहीं होनी चाहिए और न ही किसी तरह का दहशत का माहौल बनाएं, बल्कि उन्हें विश्वास में लेकर नकल को कड़ाई से रोकें। परीक्षा केंद्रों के अंदर नकल सामग्री जाने ही न पाएं इसलिए गेट पर ही सघन तलाशी हो, यांत्रिक उपकरण अंदर न ले जाने के पुख्ता बंदोबस्त करें। यह भी ध्यान रखें कि छात्राओं की तलाशी सिर्फ महिलाएं ही लें। इसमें पुलिस बल, एलआइयू व एसटीएफ आदि की पूरी मदद ली जाए। हर जिले को पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मुहैया कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, मेरठ, जौनपुर, अलीगढ़, बागपत, देवरिया, गाजीपुर समेत करीब ऐसे बीस जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से संवाद किया। ज्ञात हो कि यह जिले नकल के मामले में कुख्यात रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पूछा कि उनके यहां कितने परीक्षा केंद्र बने हैं, इम्तिहान के क्या इंतजाम किए गए हैं और कक्षों व परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील हैं या नहीं? उन्होंने यह भी पूछा कि डीआइओएस बताएं कि उन्होंने कितने केंद्रों की व्यवस्था खुद जांची हैं। सभी अफसरों ने विश्वास दिलाया कि सारे इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं और लगातार नकल रोकने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके पहले अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने परीक्षा तैयारियों की मुख्यमंत्री को विस्तार से जानकारी दी।
ज्ञात हो कि यूपी बोर्ड परीक्षा में साढ़े 66 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे और परीक्षाएं छह फरवरी से 10 मार्च तक चलेंगी। इसके लिए 8549 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, इनमें से 2087 केंद्र संवेदनशील, अति संवेदनशील हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, मुख्य सचिव राजीव कुमार, डीजीपी ओपी सिंह, माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. अवध नरेश शर्मा, यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।  

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली 31jan 2018 -गर्मी के मौसम में देश में पानी की किल्लत हो सकती है। दरअसल, देश के 91 बड़े जलाशयों में अपनी क्षमता का केवल 45 प्रतिशत पानी ही बचा है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस साल 25 जनवरी तक इन जलाशयों में 73.029 अरब घन मीटर पानी था, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दस फीसद कम है।
पिछले साल के मुकाबले पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के जलाशयों में इस वर्ष पानी के स्तर में कमी आई है। जबकि, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के बड़े बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार ज्यादा पानी है।
देश के 91 बड़े जलाशयों में करीब 161.993 अरब घन मीटर पानी जमा किया जा सकता है जो देश की कुल जल संग्रह क्षमता 257.812 अरब घन मीटर का 63 प्रतिशत है। इनमें से 37 जलाशयों पर जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। इनसे देश को 60 मेगावाट बिजली मिल रही है।
इजरायल अब भारत को सिखाएगा पानी बचाना
पानी संकट बारहमासी बनता जा रहा है। हमें इस हालात से उबारने में भारत का मित्र देश इजरायल मदद कर सकता है। दस वर्ष पहले भारत जैसी ही स्थिति इजरायल की भी थी, लेकिन जल प्रबंधन की प्रभावी तकनीकें अपनाकर उसने खुद को इस संकट से उबार लिया। चीन और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से इस्तेमाल होने वाले भूजल से अधिक भूजल भारत में इस्तेमाल होता है। देश के कुल भूजल ब्लॉकों में से 29 फीसद संकटग्रस्त हैं। कृषि प्रधान देश होने के नाते यहां सिंचाई में भूजल का प्रयोग होता है। दस वर्ष पहले इजरायल में पानी का घोर संकट था। ऐसे में इस देश ने दोहरी रणनीति अपनाई। पहले तो पानी की बर्बादी को रोका और फिर पानी सप्लाई के स्रोतों में इजाफा किया। ऐसा करके अब इजरायल भरपूर जल संसाधन वाला देश बन पाया। अब चीन, जापान और कनाडा जैसे देश इजरायल से उसकी तकनीक मांग रहे हैं।
इजरायल से हुआ करार
इंडो-इजरायली एग्रीकल्चरल कोऑपरेशन प्रोजेक्ट के तहत इजरायल की अंतरराष्ट्रीय विकास सहभागिता एजेंसी माशव और भारत के राष्ट्रीय बागवानी मिशन के बीच करार हुआ। इस सहयोग के चलते भारतीय किसान 65 फीसद कम पानी के इस्तेमाल में 10 गुना अधिक पैदावार करने में सक्षम हुए। इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर अपनाकर एक बड़े भूजल को बचाया जा सकता है।

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली 31jan 2018 - देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' को नया चुनावी जुमला बताया है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान किसी भी राज्य को शासन के लिए तय समयावधि नहीं देता। संविधान में परिवर्तन किए बिना यह संभव ही नहीं हो सकता।चिदंबरम ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' को नया चुनावी जुमला बताया
चिदंबरम ने कहा कि केवल राज्यों के चुनावों को पहले कराकर या आगे टालकर ही उन्हें लोकसभा चुनावों के साथ कराया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि 'एक राष्ट्र-एक टैक्स' की तरह यह भी एक जुमला ही है। चिदंबरम ने यह बातें अपनी किताब 'स्पीकिंग ट्रुथ टू पावर' के विमोचन अवसर पर कही। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि 10 में से 9 कांग्रेसी राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते थे।

क्या योजनाएं सही लोगों तक पहुंचाने की भी चिंता न करे सरकार, आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवालपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली 31jan 2108 - आधार मामले पर चल रही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम सवाल उठाया। पूछा कि क्या सरकार का यह चिंता करना वाजिब नहीं है कि सामाजिक कल्याण की योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे या लाभांवित व्यक्ति जिंदा है भी या नहीं।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह सवाल आधार को चुनौती देने वालों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान की दलीलों पर उठाया। दीवान का कहना था कि यह चिंता सभी नागरिकों के निजी और बायोमीट्रिक ब्योरे के एकत्रीकरण को जायज नहीं ठहरा सकती। चूंकि इससे उनकी प्रोफाइलिंग और निगरानी की जा सके।
पीठ ने कहा, 'ऐसा लगता है कि वह (केंद्र और राज्य सरकार) आधार का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण की योजनाओं के लिए कर रहे हैं। लेकिन आप (वकील) बता रहे हैं कि इसका इस्तेमाल प्रोफाइलिंग के लिए किया जा रहा है।'
कोर्ट ने सरकार के उस जवाब का भी हवाला दिया कि वह आधार के इस्तेमाल से मनरेगा, रसोई गैस सब्सिडी आदि योजनाओं में डीबीटी के जरिए बचत कर रही। ऐसे में जानकारी जुटाना समाज कल्याण योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए है।
दिन भर चली सुनवाई में दीवान ने मानवाधिकार यूरोपीय कोर्ट (ईसीएचआर) के भी कई फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश तथा ओडिशा जैसे राज्य निजी तथा बायोमीट्रिक ब्योरे को 'स्टेट रेजिडेंट्स डॉटा हब' (एसआरडीएच) बनाने के लिए मिला रहे हैं। इसमें आधार पंजीकरण के समय जुटाए गए ब्योरे भी होंगे।
उन्होंने कहा कि 2012 से ही यूआइडीएआई 'स्टेट रेजिडेंट डाटा हब्स' बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है और विभिन्न राज्य सरकारों के इसके लिए बजटीय आवंटन भी हैं।
एसआरडीएच सॉफ्टवेयर लगाया गया है और उसमें आधार जोड़ा गया है, जो अन्य स्त्रोतों से स्थानीय डाटा लेकर उसे समृद्ध करता है। एसआरडीएच में इस तरह डाटा के एकत्रीकरण से धर्म और जाति आधारित प्रोफाइलिंग की जा सकती है। इससे नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा।
उन्होंने निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की पीठ के फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि डाटा के इस तरह एकत्रीकरण से निजता का अधिकार ध्वस्त हो जाएगा और राज्य के व्यापक शक्ति हासिल करने का खतरा पैदा होगा।
उल्लेखनीय है कि इसके पहले की सुनवाई में भी कोर्ट ने कहा था कि जब देश आतंकवाद तथा मनी लॉन्डि्रंग का सामना कर रहा हो तो व्यक्ति की निजता के अधिकार और राज्य की जिम्मेदारियों में एक संतुलन बनाने की जरूरत है। कोर्ट का यह रुख आधार पर सरकार की दलीलों को मजबूत करता प्रतीत होता है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च अदालत ने पिछले 15 दिसंबर को आधार को विभिन्न सेवाओं को सभी मंत्रालयों की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है।

दूसरों के जीवन से खेलने वालों का जीवन खराब कर देंगे : योगीपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ लखनऊ 31jan 2018 -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में अराजकता फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। जो लोग दूसरों के जीवन के साथ खिलवाड़ करेंगे, सरकार उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करेगी। भर्तियों में भ्रष्टाचार करने वाले सीधे जेल भेजे जाएंगे।मुख्यमंत्री आज गोरखपुर क्लब में 466.62 करोड़ की लागत वाली 53 परियोजनाएं सौंपी। उन्होंने कासगंज हिंसा का जिक्र न करते हुए कहा कि प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षा देने के लिए सरकार तत्पर है। अराजकता पैदा करने वालों के साथ सरकार सख्ती से निपटेगी। जो माफिया या अपराधी, व्यापारी, महिला, गरीब से दुव्र्यवहार करें प्रशासन उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। 
योगी ने कहा कि कृषि के बाद जो तकनीक सबसे ज्यादा रोजगार दे सकती है वह है फूड प्रोसेसिंग पार्क। सरदारनगर क्षेत्र में इस पार्क की स्थापना के लिए योजना बननी चाहिए। इससे सब्जी, फूल और फल पैदा करने वाले किसानों को नया जीवन मिलेगा। लखनऊ-गाजीपुर एक्सप्रेस वे को पटना तक ले जाने की योजना है। इस एक्सप्रेस वे से कम्हरियाघाट पुल के माध्यम से दक्षिणांचल को भी जोड़ा जाएगा। इससे गोरखपुर से लखनऊ की दूरी तीन घंटे में ही पूरी हो जाएगी। वाराणसी-गोरखपुर फोर लेन बनने से वाराणसी की दूरी ढाई घंटे में पूरी हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन गया है। सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करते हुए विकास की योजनाओं में लापरवाही बरतने वालों के बारे में बताएं। पहले अफसरों को बताएं, वह न सुनें तो जनप्रतिनिधियों को बताएं। यदि लगता है कि जनप्रतिनिधि भी कुछ नहीं कर रहे तो शासन को बताएं।

yogi adityanath news 150118 30 01 2018पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ लखनऊ 31jan 2018 -सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सेना और अर्द्धसैनिक बल के जवानों और उनके आश्रितों के हक में योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश का कोई जवान अगर सीमा पर लड़ते हुए या आतंकियों से मुकाबला करते हुए, गोलाबारी, विस्फोट, आपदा (ड्यूटी के दौरान) में शहीद होता है तो राज्य सरकार शहीद सैनिक के किसी एक आश्रित को उसकी योग्यता के अनुसार नौकरी देगी।
जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2017 से लागू मानी जाएगी। लोकसेवा के अंतर्गत आने वाले पदों पर नौकरी नहीं मिलेगी। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में इसके समेत नौ प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई।
सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इसका लाभ थल, जल और वायु सेना में कार्यरत सैनिकों व अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस (आइटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), असम राइफल्स और स्पेशल फ्रंटियर फोर्स जैसे अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के आश्रितों को भी मिलेगा।
सरकार ने इस फैसले से शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए अपनी आस्था प्रकट की है। इस फैसले में पूरी नियमावली स्पष्ट कर दी गई है।
लापता जवान के आश्रित भी हकदार-
इसका लाभ तीनों सेना समेत अर्द्धसैनिक बल के उस लापता जवान या अफसर के आश्रित को भी मिलेगा जिन्हें सक्षम न्यायालय ने मृत घोषित कर दिया है।
आश्रितों की बनाई श्रेणी-
आवेदन के समय आश्रित की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। सरकार ने आश्रितों की उम्र और श्रेणी तय कर दी है। सैन्यकर्मी के विवाहित होने की स्थिति में पत्नी/पति, पुत्र, विधवा पुत्रवधू, तीन अविवाहित पुत्रियां, दत्तक पुत्रियां, माता-पिता, आश्रित, पौत्र, पौत्रियां आश्रित श्रेणी में मानी जाएंगी।
सैन्यकर्मी के अविवाहित होने की स्थिति में माता-पिता और भाई-बहन सबसे प्रमुख होंगे। पहले आवेदन देने वाले आश्रित को ही वरीयता मिलेगी। फिर उसके द्वारा अपना हक दूसरे आश्रित को हस्तांतरित करने पर ही विचार होगा।
रोस्टर के जरिये विभाग देंगे नौकरी-
नियुक्ति के लिए सैनिक कल्याण विभाग और गृह विभाग को नोडल विभाग के रूप में तय किया गया है। शहीद के परिवार को आवेदन पत्र इन विभागों को देना होगा। इसमें संबंधित आवेदक का नाम, परिवार का विवरण, आयु, शैक्षिक योग्यता का ब्योरा रहेगा। ये दोनों विभाग आश्रितों का आवेदन सेवा के लिये रोस्टर प्रणाली के जरिये विभागों को आवंटित करेंगे। विभागों की रोस्टर प्रणाली भी निर्धारित की जाएगी।
सूबे की जनता का दिल जीतने की पहल-
राष्ट्रवाद की राजनीति करने वाली भाजपा सरकार ने अपने इस फैसले से सूबे की जनता का दिल जीतने की पहल की है। अक्सर किसी शहीद के शव आने पर विलाप करते परिवारीजन और जुटे आसपास के लोग घर-गृहस्थी चलाने को नौकरी की ही मांग पहले उठाते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें शहीदों के परिवारीजन की नियमानुसार मदद करती हैं, पर अभी तक उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी का प्रावधान नहीं है।

MARI themes

Powered by Blogger.