नियम तोड़े तो अब मोबाइल पर पहुंचेगा चालान

10 मई से शुरू होगा इंटीगे्रटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम...


भोपाल। ट्रैफिक नियम तोडऩा आदत बना ली है तो अगले एक-दो दिन में इसे सुधार लें। कारण है, स्मार्टसिटी का कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के साथ ही इंटीगे्रटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम 10 मई से पूरी तरह से काम शुरू कर देगा।

इसके शुरू होते ही बिना हेलमेट-सीट बेल्ट गाड़ी चलाना, चौराहों पर जेब्रा कॉसिंग से आगे गाड़ी ले जाना जैसे तमाम ट्रैफिक उल्लंघन ऑन रिकॉर्ड होकर स्मार्टसिटी, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के डाटाबेस की मदद से संबंधित तक मोबाइल मैसेज से चालान भेज देंगे।

स्मार्टसिटी की इस तरह की तीन बड़ी सुविधाएं मंगलवार और बुधवार को लोकार्पित हो जाएगी। इन दो दिन में देशभर के स्मार्टसिटी के सीईओ के साथ केंद्रीय मंत्री, अफसर, मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम एमपी नगर स्थित होटल में होगा।

कंट्रोल कमांड सेंटर, इंक्यूबेशन सेंटर और इंटीग्रेटेड टै्रफिक मैनेजमेंट सिस्टम का लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव डीएस मिश्रा भी उपस्थित रहेंगे। आज 11 बजे सीईओ अपेक्स का आयोजन होगा। इसमें सिटीज अपने अपने प्रोजेक्ट्स का प्रजेंटेशन करेंगी और प्रोजेक्ट्स को लेकर पैनल डिस्कशन भी होगा।

अब 22 चौराहों और दस प्रमुख सड़कों पर रखना होगा ध्यान क्योंकि ......
- क्लाउडबेस सिस्टम से इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को ट्रैफिक, नगर निगम और आरटीओ के डाटाबेस को जोड़ा गया है।

- २4 घंटे मॉनिटरिंग चलेगी, हर गाड़ी का नंबर चेक करेगा सॉफ्टवेयर।
- हेड और फेस चैक करेगा। जिसके सिर पर हेलमेट नहीं होगा, उसकी गाड़ी का नंबर डिटेक्ट कर गाड़ी नंबर से एड्रेस व मोबाइल वेरिफाई कर चालान बनाकर भेज देगा। ये प्रक्रिया सतत चलती रहेगी।

- इसी तरह कार के अंदर सीट बेल्ट भी मॉनिटर होगा और इसमें भी चालान बनाने की वही पक्रिया होगी।
- गाड़ी का नंबर गलत होने या फिर नंबर प्लेट न होने की सूचना भी हेड और फेस डिटेक्ट कर आगे बढ़ाई जाएगी।

अभी इन सवालों का अभी जवाब

- नंबर प्लेट नहीं होने या फिर गलत नंबर होने पर कैसे चालान बनेगा और भेजा जाएगा।
- यदि ट्रैफिक कर्मचारी की तैनाती और उसके नंबर की डिटेल कंट्रोल रूम पर है तो लगातार मैसेज आने से क्या वह उसे गंभीरता से लेगा?

- गाडि़यों में काली फिल्म के बीच कैसे चालक और उसके सीट बेल्ट पहनने को डिटेक्ट किया जाएगा?
- सिर्फ 22 चौराहे पर ही कैमरें लगे हैं, एेसे अपराधी इनपर आएगा ही नहीं तो उन्हें पकडऩे की क्या व्यवस्था रहेगी?

 

ये है तर्क

स्मार्टसिटी सीईओ चंद्रमौली शुक्ला के अनुसार अभी ये सिस्टम काम करना शुरू करेगा। इसके बाद जिस तरह की जमीनी स्थितियां आएंगी उसके अनुसार अपडेशन किया जाएगा।

इस तरह की सुविधाएं
- 300 करोड़ रुपए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर विकसित किया गया है। इसमें नगरीय निकाय, स्वास्थ्य, फ ायर आदि की सेवाओं को भी इंटीग्रेटेड किया गया है। क्लाउड बेस होने के साथ ही प्रदेश की सातों स्मार्ट सिटीज को कंट्रोल करेगा।

- 10 करोड़ की लागत से इंक्यूबेशन सेंटर बनाया गया है। इसमें एक समय में 50 आइडियाज को स्टार्टअप का रूप देने के लिए मदद की जाएगी। इसके साथ स्टार्टअप को फ ायनेंस, पेटेंट, मार्केटिंग संबंधी गुर भी सिखाएंगे।
- 17 करोड़ रुपए से इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है। इसके लिए 22 चौराहों पर हाई रेज्यूरेशन वाले कैमरे लगाए गए हैं। चालान वॉट्स एेप, इमेल और डाक से भेजे जाएंगे।