कर्नाटक का संदेश सटीक रहा, तो देश की राजनीति में सुधार सम्भव



व्ही.एस.भुल्ले
जिस तरह से विगत 35 वर्ष से हमारा महान राष्ट्र इस राष्ट्र के भोले भाले नागरिक स्वार्थ पूर्ण, धूर्त राजनीति का शिकार हो स्वयं को संघर्ष, पीढ़ा के अथाये सागर में उलझ असहाय, मजबूर मेहसूस कर रहे है। लगता है कि इस पीढ़ा, दर्द बैवसी से मुक्ती का मार्ग अब नजदीक है। क्योंकि लोकतंत्र का कुम्भ कर्नाटक में चल रहा है और अन्तिम शाही स्नान के साथ समापन की तारीख 11 मई भी मुर्करर है। अब विचार समृद्ध, शिक्षित, सुस्कृत प्रदेश कर्नाटक के शहर बैंगलोर में होना है। जहां प्रदेश के नये निजाम को चुने जाने वाले दल की सरकार, सत्ता स्थापित तय है।
        कहते है न तो कोई दल, संस्था, संगठन, विचार गलत होता है न ही उनकी सोच। क्योंकि सभी गांव, गली, गरीब, किसान सहित नगर, शहर, प्रदेश व राष्ट्र कल्याण के भाव के साथ ही अस्तित्व में होते है और उनका नारा भी यही।
     अगर इन संस्था, संगठन, दल, विचारों को परिभाषित, संचालित करने स्वार्थी, चोर, पापीओं का बोल वाला हो तो वह अपनी पवित्रता खोने लगते है। सत्ता के लिये जब लोग भ्रम फैला, सरेयाम झूठ बोल, विद्वेश फैला जन समर्थन अपने पक्ष में करने की कोशिश करते तो ऐेसे में वह स्वयं ही नहीं अपनी संस्था, संगठन विचार दल के भी साथ धोखा करते है। और नागरिक सहित राष्ट्र प्रदेश, गांव, नगर के साथ अन्याय जिसे किसी भी सभ्य समाज में धूर्तता ही कहा जायेगा।
        ऐसे में कर्नाटक के महान भू-भाग और कर्नाटक के सुसंस्कृत शिक्षित नागरिकों के बीच से सटीक संदेश आये जो उनका कत्र्तव्य भी है और जबावदेही भी। तो इसके स्वर समुचे भारत ही नहीं विश्व भर में गूजेंगे। मगर यह तभी सम्भव है जब इच्छा शक्ति मजबूत हो।
        अगर कर्नाटक की महान जनता देश में स्वार्थ पूर्ण राजनीति की जड़े जमाने जमीन तलाशते स्वार्थी, चोर, पापियों को सबक सिखाने में अपने वोट के माध्यम से सफल रही तो निश्चित ही भारत के महान भू-भाग पर अन्य बन्दनाओं के साथ जन व राष्ट्र कल्याण की बन्दनाओंं के स्वर भी अवश्य गूजेगें जो खुशहाल, समृद्ध, राष्ट्र का मार्ग अवश्य प्रस्त करेगें।
जय स्वराज