केन्द्र के निर्देश, अब इस तरह होंगे प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन

भोपालः मध्य प्रदेश समेत चार राज्यों में इस साल चुनाव होने हैं। वहीं, आगामी साल में लोकसभा चुनाव भी हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के सामने काफी कम समय में एक बड़ी चुनौती है, रूठों को मनाना। जिसके चलते मध्य प्रदेश सरकार समेत केंद्र की भाजपा सरकार अब हर रूठे को मनाने का प्रयास कर रही है, ताकि इसका लाभ आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मिल सके। इसी के चलते अब सरकार नाराज़ कर्मचारियों को जल्द से जल्द साधने में लग गई है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा राजधानी भोपाल भेजे गए हैं, कि प्रदेश के कर्मचारियों की पदोन्नति कब से शुरू होना है यह राज्य सरकार अटॉर्नी जनरल और महाधिवक्ता से परामर्श कर तय करे।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस तरह हो फैसला


इस संबंध में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी राज्यों से कहा है कि, आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन मापदंडों के मुताबिक़, मामले का निपटारा करें। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने केंद्रीय कर्मचारियों के मामले में केंद्र सरकार को संविधान पीठ के अंतिम फैसले के अधीन कर्मचारियों को पदोन्न्ति करने के आदेश दिए है। दरअसल, इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विधि सम्मत पदोन्नति जारी रखने का आदेश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र की याचिका में बदलाव करते हुए यह निर्देश दिए कि, पदोन्‍नति संविधान पीठ के आखरी फैसले के मुताबिक़ होगी। जिसपर अमल करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र जल्द से जल्द यानि आचार संहिता लगने से पहले सभी राज्यों से पदोन्‍नति शुरू करने के निर्देश दिए हैं।


सरकार से उलट कर्मचारियों की मांग


बता दें कि, प्रदेश के कर्मचारियों की नाराज़गी का कारण यह है कि, यहां उनकी पदोन्नति 1 मई 2016 से अब तक नहीं की गई है, जिसके चलते उनका इनक्रीमेंट भी नहीं हुआ। वहीं, इतने समय में लगभग 55 हजार से ज्यादा कर्मचारी रिटायर्ड भी हो चुके हैं, जिनमें से करीब 36 हजार कर्मचारियों की पदोन्नति होनी थी। इनको पदोन्नत करने के लिए डीपीसी हो चुकी थी या होने वाली थी। पदोन्नति रुकने से मंत्रालय और विभागों में कामकाज प्रभावित हो रहा था, जिसे देखते हुए सरकार ने कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 62 साल कर दी। राज्य सरकार ने नए पदोन्नति नियम का प्रस्ताव साल 2017 में बनाया था , जिसमें कुछ बिंदुओं को लेकर आरक्षित वर्ग राज़ी नहीं हुआ। सूत्रों की माने तो, सरकार चाहती है कि, अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को 20 और 16 फीसदी आरक्षण में पदोन्नति कोटा रखे, लेकिन आरक्षित वर्ग इसपर राज़ी नहीं हो रहा, उसकी मांग है कि, उसे कोटा भी मिले और सीनियरटी कम मैरिट भी, ताकि मैरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को सामान्य वर्ग की सीटों पर भी पदोन्नति मिले, इसलिएअब तक मामले पर सरकारी फैसला अटका हुआ है।