इस 36 वर्षीय दिग्गज किकेटर को हालांकि लगता है उनमें अब भी भारतीय टीम की जर्सी पहनने का जज्बा है. उन्होंने कहा, सबसे बड़ी प्रेरणा भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होना है. आपने ऐसे क्रिकेटर भी देखे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया है, लेकिन फिर भी वे बहुत आगे तक पहुंचे हैं. ऐसा उनके जुनून की वजह से हुआ है. कोचों को उन्हें ढूंढने की जरुरत है. हर कोई देश के लिये नहीं खेलता.
धौनी ने कहा, 'मैंने हमेशा ही माना है कि नतीजों से अहम प्रक्रिया होती है. मैंने कभी भी परिणाम के बारे में नहीं सोचा, मैंने हमेशा यही सोचा कि उस समय क्या करना ठीक होगा, भले ही तब 10 रन की जरूरत हो, 14 रन की जरुरत हो या फिर पांच रन की जरूरत हो. धौनी ने कहा, मैं इस प्रक्रिया में ही इतना शामिल रहा कि मैंने कभी भी इस बात का बोझ नहीं लिया कि तब क्या होगा, अगर नतीजे मेरे हिसाब से नहीं रहे. उनके ट्रेडमार्क हेलीकाप्टर शाट के बारे में पूछने पर धोनी ने कहा कि वह नहीं चाहेंगे कि कोई युवा इस तरह के शाट का इस्तेमाल करे, क्योंकि इसमें चोटिल होने की संभावना ज्यादा है.
धौनी ने कहा, यह ऐसी चीज है जो मैंने सड़क पर टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने के दौरान सीखी है. यह मुश्किल है. टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने से बल्ले के निचले हिस्से से भी गेंद हिट हो जाती है और काफी दूर तक जाती है, लेकिन सामान्य क्रिकेट में इसे बल्ले के मध्य में होना चाहिए. इसलिये इसमें मेहनत की जरूरत होती है. मैं नहीं चाहता कि वे हेलीकाप्टर शाट खेलें, क्योंकि इससे वे चोटिल हो सकते हैं. धौनी ने भारत के 2014-15 में आस्ट्रेलिया दौरे के दौरान टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था और इसके बाद उन्होंने 2016 में सीमित ओवर की टीम कप्तानी भी छोड़ दी थी. जिसके बाद विराट कोहली ने खेल के तीनों प्रारुपों में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली

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