मंथन न्यूज़ दतिया -किसान हित को सबसे ऊपर रखने वाली सरकार में किसानों के नाम पर योजनाओं में भ्रष्टाचार करना दतिया के उप संचालक कृषि एसके शर्मा को भारी पड़ गया। कृषि विभाग ने जांच में दोषी पाए जाने के बाद शर्मा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फैसला कर लिया।
राज्य लोकसेवा आयोग ने भी विभाग के निर्णय पर मुहर लगा दी। सतना में पदस्थापना के दौरान शर्मा ने तत्कालीन वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी गंगासिंह को साथ मिलाकर आर्थिक अनियमितता की थी। पेंशन रोकने और उससे वसूली करने का फैसला कैबिनेट करेगी।
सतना में पदस्थापना के दौरान 2013-14 में उप संचालक कृषि एसके शर्मा ने तत्कालीन वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी उचेहरा गंगासिंह के साथ मिलकर एक दर्जन योजनाओं में आर्थिक अनियमितता की। किसानों के खेतों में होने वाले फसल प्रदर्शन, जिसमें सरकार बीज, खाद से लेकर किसानों को अन्य तरह की सुविधा देती है, में गड़बड़ी की।
मसूर के प्रदर्शन में 100 हेक्टेयर में अनियमितता, चना, कल्चर, गर्मी की मूंग के प्रदर्शन में आर्थिक अनियमितता की। जिंक सल्फेट, पौध संरक्षण दवा वितरण सहित अन्य सामग्री भी उस मात्रा में नहीं बांटी, जितनी सरकार ने भेजी थी। आरोपों की जांच के लिए विभागीय जांच बैठाकर जवाब-तलब किया गया। सात फरवरी को शर्मा को सुनवाई का पूरा मौका दिया।
जवाब का परीक्षण संचालक कृषि ने किया और शर्मा को वित्तीय अनियमितता का दोषी करार दिया गया। 12 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय लिया गया। 13 मार्च को राज्य लोकसेवा आयोग ने भी फैसले को हरी झंडी दे दी। इसके बाद बुधवार को कृषि विभाग ने शर्मा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश जारी कर दिए।
ग्वालियर में रहते हुए रुक चुकी हैं वेतनवृद्धि
शर्मा का ट्रैक रिकार्ड भी गड़बड़ ही रहा है। ग्वालियर में पदस्थापना के दौरान 2016 में अनियमितता का दोषी पाते हुए दो वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी गई थी। वहीं, सतना में पदस्थापना के दौरान एक विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर दो वेतनवृद्धि रोकने का फैसला दिसंबर 2017 में किया गया था।
गंगा सिंह के खिलाफ कैबिनेट करेगी फैसला
सतना के उचेहरा में पदस्थ रहे वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गंगा सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनकी पेंशन से कटौती करने का फैसला कैबिनेट करेगी। इसके लिए विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
किसान हित से खिलवाड़ नहीं चलेगा: राजौरा

Post a Comment