शाह ने अपने हाथ में ली प्रदेश के चुनाव की कमान, नेताओं से करेंगे वन-टू-वन

भोपाल. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अगला विधानसभा चुनाव अपने हाथ में ले लिया है। शाह के जबलपुर दौरे के बाद दिल्ली से इस बात का संदेश दे दिया गया है कि मध्यप्रदेश के चुनाव से जुड़ा हर बड़ा फैसला अमित शाह की रजामंदी से ही होगा।


प्रदेश संगठन उन्हें रिपोर्ट करेगा। सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रबंधन समिति की उपसमितियों की सूची को लेकर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली तक अपनी शिकायत पहुंचाई है। इसके बाद ही शाह ने पूरे चुनाव पर कंट्रोल करने का निर्णय लिया है।


- पार्टी में यह प्रयोग पहली बार
भाजपा में संभवत: यह पहला मौका है जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही विधानसभा चुनाव को मॉनीटर करने जा रहे हैं। 2008 और 2013 के चुनाव सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के ही नेतृत्व में लड़े गए थे, लेकिन इस बार कांग्रेस की एकजुटता, एंटी इनकंबैंसी और अब तक के सर्वे के निराशाजनक परिणामों को देखते हुए शाह ने चुनाव को लीड करने का मन बनाया है।


- प्रदेश प्रभारी पर अटका मामला
शाह के सीधे मॉनिटरिंग और निर्णय करने के पीछे एक कारण यह भी है कि केंद्रीय संगठन प्रदेश प्रभारी को लेकर अभी कोई फैसला नहीं कर पाया है। वर्तमान प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे को इंडियन कौंसिल फॉर कल्चरल रिसर्च का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से उनका प्रदेश में हस्तक्षेप कम हो गया सहस्त्रबुद्धे अरसे बाद १२ जून को जबलपुर में आयोजित बैठक में पहुंचे थे।


हालांकि, प्रदेश प्रभारी के लिए भूपेंद्र यादव, आेमप्रकाश माथुर और अनिल जैन के नाम चर्चा में है, लेकिन ठीक चुनाव के पहले संगठन कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहता है। पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश के संगठनात्मक कामकाज को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ही देख रहे हैं। अब चुनाव की कमान अमित शाह ने अपने हाथ में ले ली है।


- हर संभाग में होगा शाह का दौरा
अमित शाह चुनाव के मद्देनजर प्रदेश के हर संभाग का दौरा करने वाले हैं। संभावना है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह से यह सिलसिला शुरू हो सकता है। वे दौरों के दौरान संभाग के पदाधिकारियों की बैठक तो लेंगे ही, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से वन-टू-वन चर्चा करके ग्राउंड रिपोर्ट भी लेंगे।


इसी के साथ हर संभाग में सोशल मीडिया संभाल रही टीम से चर्चा करके उन्हें चुनाव की तैयारी ओर प्रचार में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के टिप्स देंगे। इस दौरान कुछ जगहों पर समरसता भोज और युवा मोर्चा की बाइक रैली भी रखने पर विचार किया जा रहा है।


- एससी-एसटी सीटों पर जीत का प्लान मांगा
केंद्रीय संगठन ने प्रदेश संगठन से प्रदेश की 82 आरक्षित सीटों पर जीत का प्लान भी मांगा है। इसमें अनुसूचित जनजाति की 47 और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 35 सीटें हैं। एससी-एसटी वर्ग में सरकार के प्रति बढ़ी नाराजगी और कई संगठनों के सरकार के खिलाफ सक्रिय होने के बाद पार्टी को आशंका है कि इन सीटों पर मुश्किल खड़ी हो सकती है। जल्द ही एससी-एसटी सीटों के लिए कोई नई कवायद जमीन पर नजर आ सकती है।