इसी को देखते हुए सीमा पर आतंकियों, घुसपैठियों और तस्करों को रोकने के लिए सेना के आर्डिनेंस विंग ने बीएसएफ के जवानों को ट्रिप फ्लेयर से लैस करना शुरू कर दिया है।
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि रेगिस्तान के इलाके में घुसपैठ रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर है क्योंकि इससे निकलने वाली आग रात के अंधेरे में वाच टावरों से आसानी से देखी जा सकती है।
दरअसल, इसमें मिट्टी के रंग का पतला सा धागा रहता है जो रेगिस्तान के धूल में दबा रहता है जैसे ही कोई प्रेशर या लोड होगा यह विस्फोट के साथ जलना शुरू कर देगा।
ट्रीप फ्लेयर पहले वहीं लगाया जाता था जो इलाका घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील हो। लेकिन अब डीआरडीओ से इसे ज्यादा संख्या में उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है, ताकि पूरी सीमा पर तारबंदी के नीचे इसे लगाया जा सके।
बीएसएफ ने बॉर्डर के कुछ इलाकों में जिंगल बेल (एक प्रकार की घंटी) लगाने शुरू कर दिया है। बीएसएफ ने करीब एक लाख जिंगल बेल तारबंदी पर लगाने के लिए ऑर्डर दिए हैं।

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