राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सुषमा ने कहा कि सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के लिए भारत के पास सभी पात्रताएं हैं और चार स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने भारत का समर्थन किया है। जबकि पांचवे सदस्य चीन ने भी "सार्वजनिक रूप से" भारत का विरोध नहीं किया है।
सुषमा ने कहा, "मुझे विश्वास है कि इस बार नहीं, तो अगली बार भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बन जाएगा।" वीटो अधिकार से संबंधित सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा, "हम पुराने और नए सदस्यों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं चाहते।
हम दो वर्ग नहीं चाहते, कि स्थायी सदस्यों में एक प्रथम श्रेणी के और दूसरे द्वितीय श्रेणी के हों। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भारत वर्तमान स्थायी सदस्यों की तरह ही समान जिम्मेदारियां, विशेषाधिकार और दायित्व चाहता है।" उन्होंने बताया कि भारत न सिर्फ सुरक्षा परिषद में विस्तार सुनिश्चित करने, बल्कि उसमें सुधार के कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है।

Post a Comment