केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि बॉयोमेट्रिक और डाक्युमेंट वेरीफिकेशन करवाकर पासपोर्ट ले सकते हैं। जल्द ही हर जिले के प्रधान डाकघर में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खुलेंगे। उन्होंने खुद का जबलपुर से पुराना रिश्ता बताया। कहा पिता जबलपुर में सेना के ब्रांच रिक्रूटिंग ऑफीसर थे। यहां की संस्कृति और लोग अन्य जगह से अलग है।
38 साल बाद भोपाल से बाहर पहुंचा पासपोर्ट दफ्तर
मुख्य पासपोर्ट अधिकारी अरुण चटर्जी ने कहा कि पासपोर्ट जबलपुर में बनने से 8 जिलों के लोगों को फायदा होगा। भोपाल से करीब 38 साल बाद किसी अन्य शहर में पासपोर्ट दफ्तर पहुंचा है। उन्होंने बताया कि हर दिन 40 आवेदकों का वेरीफिकेशन किया जाएगा। आने वाले दिनों में संख्या बढ़ाई जाएगी। डिमांड अभी से इतनी है कि अगले 3-4 दिनों का काम बुक है। उन्होंने आर्थिक रूप से कार्यालय खुलने का महत्व बताया। कहा कि जबलपुर में कार्यालय खुलने से हर माह करीब 30 लाख रुपए की बचत संभाग के लोगों की होगी।
प्री-वेरीफिकेशन का ऑप्शन भी
पासपोर्ट बनाने के पहले पुलिस वेरीफिकेशन अहम होता है। इसी में सबसे ज्यादा वक्त खर्च होता है। प्रक्रिया अधर में लटकती है। विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि अब आवेदन प्री-वेरीफिकेशन के जरिए पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करवा सकता है। इसके लिए उन्हें स्वयं का लिखा शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। बाद में विभाग जांच करवाएगा। यदि कुछ गलत हुआ तो एफआईआर दर्ज होगी।
शहर को बड़ी सौगात
सांसद राकेश सिंह ने पासपोर्ट सेवा केन्द्र खुलने पर कहा कि जबलपुर के लिए ये बड़ी सौगात है। देश में मोदी सरकार आने के बाद जबलपुर में अब तक 12 केन्द्रीय मंत्री आ चुके हैं। उनके आने से शहर को कोई न कोई सौगात मिली है।

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