इंदौर, लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के इंदौरी मॉडल का मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में डॉक्टरों ने भले ही विरोध किया, लेकिन महाराष्ट्र को यह रास आ गया है। महाराष्ट्र महिला आयोग ने महाराष्ट्र शासन से सिफारिश की है कि सभी जिलों में सोनोग्राफी सेंटरों पर इंदौर के मॉडल की तरह एक्टिव ट्रैकर डिवाइस लगवाएं। माना जा रहा है कि लिंगानुपात में गिरावट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार इसे जल्द ही मंजूरी दे देगी।
एक्टिव ट्रैकर डिवाइस के जरिये सोनोग्राफी और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) सेंटरों पर निगरानी के लिए इंदौर में पीसी एंड पीएनडीटी जिला समिति तीन साल से काम कर रही है। इंदौर में इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं।
महाराष्ट्र महिला आयोग ने हाल ही में इस मॉडल के प्रेजेंटेशन के लिए इंदौर की पीसी एंड पीएनडीटी समिति के नोडल अधिकारी सतीश जोशी और मप्र वालंटियर हेल्थ एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक व पीसी एंड पीएनडीटी की स्टेट कमेटी के सलाहकार मुकेश सिन्हा को मुंबई बुलाया था। दोनों ने मुंबई जाकर आयोग के समक्ष इसका प्रेजेंटेशन दिया।
एक साथ 19 कन्या भू्रण मिलने पर विचलित हुई थी सरकार
महाराष्ट्र के एक अस्पताल के पास कुछ महीने पहले एक साथ एक ही दिन के 19 कन्या भू्रण पड़े मिले थे। इस घटना से महिला आयोग और सरकार विचलित हुई। आयोग की अध्यक्ष इंदौर भी आई थीं और तत्कालीन कलेक्टर पी नरहरि ने सोनोग्राफी और एमटीपी सेंटरों की निगरानी के मॉडल का प्रेजेंटेशन दिया था, तभी से महाराष्ट्र में भी सोनोग्राफी सेंटरों की निगरानी के लिए इंदौर मॉडल को अपनाए जाने की कवायद चल रही है।
ऐसे काम करता है सिस्टम
- एक्टिव ट्रैकर डिवाइस के अंदर एक चिप होती है। यह अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी मशीन के अंदर सेटटॉप बॉक्स की तरह लगता है।
- यह डिवाइस सोनोग्राफी मशीन के अंदर होने वाले हर काम की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करता है। जैसे ही मशीन ऑन होती है। ये डिवाइस भी एक्टिव हो जाता है।
- सोनोग्राफी सेंटरों पर गर्भवती की सोनोग्राफी करते समय फॉर्म-एफ भरना होता है। इसमें महिला का आईडी प्रूफ लेना और पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत इस फॉर्म को ऑनलाइन करना अनिवार्य है।
- एक्टिव ट्रैकर डिवाइस का सर्वर पीसी एंड पीएनडीटी समिति के पास कलेक्टर कार्यालय में है। जब फॉर्म-एफ ऑनलाइन होता है तो जिस महिला की सोनोग्राफी होती है, उसकी पूरी जानकारी सर्वर पर आ जाती है।
- सिस्टम में ये भी शामिल है कि जिस क्षेत्र की महिला की सोनोग्राफी होगी, उस क्षेत्र की एएनएम, आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ता के मोबाइल पर भी एक मैसेज जाएगा।
- मैसेज मिलने के बाद एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी होती है कि वह महिला के बताए पते पर तस्दीक करे कि महिला वहां रहती या नहीं।
- इसके बाद गर्भधारण से लेकर प्रसव तक समय-समय पर महिला के घर जाकर उस पर निगरानी रखी जाएगी। यदि संदिग्ध मामला लगता है तो इसकी सूचना पीसी एंड पीएनडीटी समिति को दी जाती है।
- पीसी एंड पीएनडीटी समिति भी अपने सर्वर से रैंडमली कुछ संदिग्ध मामलों को लेकर इनकी जांच करती है कि कहीं महिला के गर्भ का लिंग परीक्षण और कन्या भू्रण होने पर एबॉर्शन तो नहीं कराया गया।

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