खास प्रदेश की खूबियों और खासियतों को आगे बढ़ाएं हम
मंथन न्यूज़
यह नववर्ष अनेक नये संदेश लेकर आ रहा है। आगमन-2017 पर हम एक-दूसरे को यांत्रिक बधाई न देकर दिल से बधाई दें, यह आवश्यक है। नये वर्ष के आगमन पर माँ पीताम्बरा से यही प्रार्थना है कि सभी के जीवन में खुशहाली आए और प्रदेश प्रगति के नए आयामों को प्राप्त करे। प्रगति की इस यात्रा में हर नागरिक शामिल हो। मध्यप्रदेश की सरकार प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए सजग और सक्रिय है। आज अंग्रेजी नववर्ष प्रारंभ हो रहा है। हमारा भारतीय नववर्ष प्रारंभ होने में अभी तीन माह शेष हैं। फिर भी संसार के अनेक देशो में चूंकि अभी नया वर्ष प्रारंभ हो रहा है, इसलिए भारत में भी इस कैलेण्डर वर्ष की शुरूआत का अवसर जश्न मनाने का अवसर है। अपने प्रदेश की बात करें तो विकास के हर क्षेत्र में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज से ग्यारह-बारह साल पहले प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नागरिक जिस तरह व्यथित थे, उस स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया गया। आज मध्यप्रदेश ने कृषि, सिंचाई, उद्योग, रोजगार, शिक्षा, परिवहन, ऊर्जा, अनुसूचित जाति-जनजाति विकास, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के कल्याण और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्यों के कारण पहचान बना ली है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में जनता को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने और परिवेश की बेहतरी के लिए सजग होने के उद्देश्य से नर्मदा सेवा यात्रा शुरू की है। इस यात्रा के लिए जनता का मानस भी तैयार किया गया है। यात्रा में आम जनता रूचि ले रही है। मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त करने और प्रकृति के एक उपहार के रूप में सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए राज्य सरकार तैयार हो गई है। प्रदेश के करोड़ों लोगों का नर्मदा नदी से आत्मीय संबंध हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कुछ वर्ष पहले “आओ बनाएं अपना मध्यप्रदेश’’ की बात कही थी। इसके साथ ही अपने प्रदेश की भावना को भी जागृत किया गया। जिस तरह अन्य प्रदेश अपनी भाषा, बोलियों, रहन-सहन, खान-पान, सांस्कृतिक धरोहर को प्रचारित करते हैं उस तरह मध्यप्रदेश की विशेषताओं को न सिर्फ भारत के अन्य प्रदेशों बल्कि दूसरे देशों तक पहुँचाने की कोशिशें पहली बार प्रारंभ हुईं। आज वर्ष-2017 शुरू होने के अवसर पर उम्मीद की जानी चाहिए कि आम नागरिक न सिर्फ सरकार की लोकहितकारी योजनाओं का पूरा लाभ लेंगे और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपना योगदान बढ़ाने की दिशा में बढ़ेंगे, अपितु मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान को भी संसार में स्थापित करने के लिए अपनी कोशिश जरूर करेंगे। पहचान के ऐसे उदाहरणों की बात करें तो साँची, खजुराहो, भोजपुर, माण्डव, भेड़ाघाट, हिंगलाजगढ़, रायसेन, सागर, दतिया, ओरछा और महेश्वर जैसे स्थान पुरातत्व और पर्यटन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। चंदेरी की साड़ियां, बुदनी के लकड़ी के खिलौने, सांचेत की सरौती, रीवा की सुपारी से निर्मित कला कृतियां और कलात्मक मूर्तियां, मुरैना-ग्वालियर की गजक, रतलाम के नमकीन, सागर की चिरौंजी की बर्फीं और कितनी ही स्वादिष्ट चीजें स्थानीय लोगों के साथ ही बाहरी सैलानियों को खींच लाती हैं। मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुन्दरता भी कम नहीं। पर्यटक जहाँ पचमढ़ी में धूपगढ़ में सूर्यास्त का सुन्दर नजारा देखते हैं, उस तरह के नजारे राज्य के सौ-पचास अन्य स्थानों पर भी दिखाई देते हैं। औसत रूप से देखें तो प्रत्येक जिले में दो-तीन स्थानों जैसे किसी जलाश्य, किसी पहाड़ी से उदय होते या अस्त होते सूर्य को देखना उतना ही सुखदायी होता है। ऐसे स्थानों को पहले जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में उभारा जा सकता है। स्वाभाविक ही ऐसे स्थान बाद में अधिक लोकप्रिय होकर महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल के रूप में पहचान बना सकते हैं। खण्डवा जिला हनुवंतिया इस वर्ष जनाकर्षण का केन्द्र बना है। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक महल और इमारतें आज भी पर्यटकों को लुभाती हैं। दुर्लभ वन्य जीवन भी आकर्षित करता है। राजधानी भोपाल की बात करें तो शहर में स्थित वन-विहार एक विशिष्ट नेशनल पार्क है। ऐसी सैकड़ों विशेषताएँ हर जिले में मिलेंगी। यह पूरे भरोसे से कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश का महत्व बढ़ता जाएगा। विकास के साथ प्रदेश की खूबियों को ख्याति मिलेगी और मध्यप्रदेश अपनी और भी शानदार पहचान बनाएगा। नये साल का नया संकल्प यह होना चाहिए कि हम खास प्रदेश की खूबियों और खासियतों को आगे बढ़ाएं। आप ऐसे खास प्रदेश के निवासी हैं। अब नए साल की एक-दूसरे को हृदय से बधाई दीजिए। प्राप्त बधाईयों के लिए धन्यवाद भी दीजिए। क्योंकि आप भी आम नहीं खास हैं, मध्यप्रदेश की तरह।


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