पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ -नरेंद्र मोदी आज भले ही देश के प्रधानमंत्री बन गए हों, लेकिन पूरी कोशिश रहती है कि उनके कारण सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ न पड़े। उनकी यह आदत शुरू से है। इस बारे में एक किस्सा खुद मोदी ने सुनाया था।
यह बात तब की है जब मोदी भाजपा के सामान्य नेता थे। सालों से दिल्ली में रह रहे थे और जसवंत सिंह के साथ काम करते थे। गुजरात से दूर थे और वहां की राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी। अचानक से मोदी को गुजरात जाने का आदेश सुनाया गया।
तब गुजरात में चुनाव होने वाले थे और पार्टी ने तय किया था कि मोदी को वहां भेजा जाएगा। अटलजी ने मोदी को फोन किया, तब वे श्मशान में थे। दरअसल, तब ही माधवराव सिंधिया का विमान दुर्घटना में निधन हुआ था और मृतकों में एक प्रेस फोटोग्राफर गोपाल भी थे। मोदी उन्हीं गोपाल की अंतिम यात्रा में श्मशान तक गए थे।
बहरहाल, पार्टी के आदेश पर मोदी गुजरात रवाना हुए, लेकिन उन्हें ख्याल आया कि वे वहां ठहरेंगे कहां। उन्होंने गुजरात में अपने पार्टी के लोगों से बात की और बताया कि गुजरात में उनका कोई ठिकाना नहीं है।
गुजरात के नेताओं ने कहा, हम सर्किट हाउस में कमरा बुक कर देंगे। इस पर मोदी ने साफ शब्दों में कहा, देखो भाई, मैं कुछ भी नहीं हूं। विधायक भी नहीं। यदि सरकार कमरे का किराया मुझसे लेती हो तो ही कमरा बुक कराना।
इसके बाद जब तक मोदी वहां रहे, उन्होंने सरकार को किराया दिया और सीएम बनने के बाद सरकारी आवास आवंटित किया।

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