दो साल में 39 बाघों की मौत
मप्र में पिछले दो सालों में 39 बाघों की मौत हुई है। इनमें से एक दर्जन बाघों का शिकार किया गया, जबकि शेष को प्राकृतिक व अन्य मामलों में मौत बताई गई। देश में इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत सिर्फ मप्र में हुई है। यही स्थिति शिकार की भी है। मप्र में शिकार के 12 मामले भी देश में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2016 में मप्र के अलावा उत्तराखंड में भी छह बाघों का शिकार हुआ, लेकिन प्रदेश में जहां 24 बाघों की मौत हुई उस तुलना में वहां नौ बाघ मारे गए।
नहीं आई शिकार की वारदातों में कमी
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में जहां मप्र में छह बाघों के शिकार हुए थे वहीं अगले साल यानी वर्ष 2016 में भी इतने ही बाघों को शिकारियों ने मौत के घाट उतार दिया। जिसका सीधा मतलब यह है कि प्रदेश का वन विभाग का अमला शिकार रोकने में पूरी तरह से असफल रहा है।
दो सालों में बाघों की मौत
वर्ष ---- शिकार ---- प्राकृतिक व अन्य मामले
2015 ---- 06---- 09
2016---- 06---- 18
(आंकड़े पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार)
- See more at: http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/bhopal-tigers-die-more-in-mp-but-the-officers-are-dull-in-the-investigation-1049675#sthash.lOfCR9tM.dpuf
Post a Comment